ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी : जाने सभी महत्त्वपूर्ण पक्ष !

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ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी : जाने सभी महत्त्वपूर्ण पक्ष !

ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी : जाने सभी महत्त्वपूर्ण पक्ष : ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी को भविष्य की तकनीक के रूप में देखा जा रहा है। कई अन्य कंपनियों की तरह मास्टरकार्ड भी इसके निहितार्थ और अवसरों के मद्देनज़र इसे अपने कार्यों में शामिल करने पर विचार कर रहा है। परंतु वह ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल को नियमित करने के लिये भारत में एक स्पष्ट विनियामक ढाँचा भी चाहता है।

OnlineTyari Plus : Get Unlimited Mock Testब्लॉकचेन एक ऐसी प्रौद्योगिकी है जो एक सुरक्षित एवं आसानी से सुलभ नेटवर्क पर लेन -देनों का एक विकेंद्रीकृत डाटाबेस तैयार करती है। लेन-देन के इस साझा रिकॉर्ड को नेटवर्क पर स्थित कोई भी व्यक्ति देख सकता है। वास्तव में ब्लॉकचेन डाटा ब्लॉकों की एक श्रृंखला होती है तथा प्रत्येक ब्लॉक में लेन-देन का एक समूह समाविष्ट होता है। ये ब्लॉक एक-दूसरे से इलेक्ट्रॉनिक रूप से जुड़े होते हैं तथा इन्हें कूट-लेखन के माध्यम से सुरक्षा प्रदान की जाती है। इस तकनीक की एक प्रमुख विशेषता इसका विकेंद्रीकृत होना है जिसका अर्थ यह है कि लेन-देनों को पूरा करने के लिये इसमें किसी विश्वसनीय मध्यस्थ (जैसे- बैंक) की आवश्यकता नहीं होती।

 

ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी : जाने सभी महत्त्वपूर्ण पक्ष !

ब्लॉकचेन एक ऐसी प्रौद्योगिकी है जिससे बिटकॉइन (bitcoins) नामक मुद्रा का संचालन होता है। यदि सरल शब्दों में कहा जाए तो यह एक डिजिटल ‘सार्वजानिक बही खाता’ (public ledger) है, जिसमें प्रत्येक लेन-देन अथवा ट्रांजेक्शन का रिकॉर्ड दर्ज़ किया जाता है।

  • ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी में एक बार किसी भी लेन-देन को दर्ज करने पर इसे न तो वहाँ से हटाया जा सकता है और न ही इसमें संशोधन किया जा सकता है।
  • विदित हो कि ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी के कारण लेन-देन के लिये एक विश्वसनीय तीसरी पार्टी जैसे-बैंक की आवश्यकता नहीं पड़ती है। वर्तमान में बैंकों में ग्राहकों और आपूर्त्तिकर्त्ताओं से सीधे जुड़कर ही लेन-देन किया जाता है।
  • इसके अंतर्गत नेटवर्क से जुड़े उपकरणों (मुख्यतः कंप्यूटर की श्रृंखलाओं, जिन्हें नोड्स कहा जाता है) के द्वारा सत्यापित होने के बाद प्रत्येक लेन-देन के विवरण को खाता बही खाते में रिकॉर्ड किया जाता है। दरअसल, ब्लॉकचेन की तुलना वर्ष 1990 में इंटरनेट की स्थिति से भी की जा सकती है।
  • ध्यातव्य है कि पिछले दो दशकों में ‘इंटरनेट सूचनाओं’ (Internet of Information) ने हमारे समाज में परिवर्तन कर दिया है। साथ ही अब हम ऐसे युग में प्रवेश कर रहे हैं, जहाँ ब्लॉकचेन भी ‘इंटरनेट ऑफ ट्रस्ट’ (Internet of Trust) और ‘इंटरनेट ऑफ वैल्यू’ (Internet of Value’) के माध्यम से वही कार्य करने में सक्षम होगा।
    इसकी उत्पत्ति कैसे हुई?

OnlineTyari Plus : Get Unlimited Mock Testइस प्रौद्योगिकी की उत्पत्ति के संबंध में कुछ भी स्पष्ट रूप से नहीं कहा गया है, परन्तु ऐसा माना जाता है कि बिटकॉइन का आविष्कार करने वाले स्यूडोनिम सातोशी नाकामोटो (pseudonym Satoshi Nakamoto) नामक व्यक्ति द्वारा बनाए गए लोगों के एक समूह ने क्रिप्टोकरेंसी (cryptocurrency) को समर्थन देने के लिये इस प्रौद्योगिकी की खोज की।

  • ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी का सर्वोत्तम एवं सबसे बड़ा उदाहरण बिटकॉइन नेटवर्क है।
  • यह तकनीक सुरक्षित है। इसे हैक करना मुश्किल है। साइबर अपराध और हैकिंग को रोकने के लिये यह तकनीक सुरक्षित मानी जा रही है।
  • भारत में तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में पायलट परियोजना के तौर पर इसकी शुरुआत की गई है। इसका इस्तेमाल आँकड़ों के सुरक्षित भंडार के रूप में किया जा सकता है।
  • मास्टरकार्ड इसी तरह के एक नेटवर्क पर काम कर रहा है, जो वैश्विक स्तर पर वितरित वित्तीय नेटवर्क की आवश्यकताओं को पूरा करते हुए ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी के लाभों को शामिल कर सकता है।

इसे कौन विनियमित करेगा ?

  • भारत में एक अंतर-मंत्रिस्तरीय समिति इसे विनियमित करने के लिये विभिन्न पहलुओं पर विचार कर रही है।
  • इसे बाज़ार नियामक सिक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) के भुगतान विनियामक बोर्ड के तहत लाने पर विचार किया जा रहा है। इस बोर्ड में केंद्रीय बैंक और केंद्र से प्रत्येक के तीन सदस्य होंगे।बिटकॉइन जैसे ब्लॉकचेन
  • प्रौद्योगिकी को रैनसमवेयर हमलों का सामना करना पड़ सकता है। अत: इसका विनियमन बड़ी सावधानी से करने की आवश्यकता है।

ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी का महत्त्व

बिटकॉइन इस प्रौद्योगिकी का मात्र एक अनुप्रयोग है, जिसके उपयोग की जाँच अनेक उद्योगों में की जा रही है। भारत के बैंकिंग और बीमा क्षेत्र में इसके प्रति बहुत आकर्षण देखने को मिल रहा है। वस्तुतः इन क्षेत्रों में कई लोग संघ का निर्माण कर रहे हैं, ताकि वे उद्योगों के स्तर पर ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी के लाभों से विश्व को अवगत करा सकें।
उदाहरण के लिये, भारत में ‘बैंकचैन’ नामक एक संघ है जिसमें भारत के लगभग 27 बैंक (जिनमें भारतीय स्टेट बैंक और आई.सी.आई.सी.आई भी शामिल हैं) शामिल हैं और मध्य पूर्व के राष्ट्र इसके सदस्य हैं। यह संघ व्यवसायों को सुरक्षित और तेज़ बनाने के लिये ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी के लाभों का व्यापक प्रसार कर रहा है।
भारतीय रिज़र्व बैंक की एक शाखा ‘इंस्टिट्यूट फॉर डेवलपमेंट एंड रिसर्च इन बैंकिंग टेक्नोलॉजी’ ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी के लिये एक आधुनिक प्लेटफॉर्म का विकास कर रही है।

इसके क्या लाभ हैं?

ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी के उपयोग के लाभ सभी लेन-देनों के लिये भिन्न-भिन्न होंगे। डेलॉइट और एसोचैम के अनुसार, ब्लॉकचेन उस समय अधिक लाभकारी सिद्ध होगा जब आँकड़े अधिक हों और उन्हें अनेक लोगों के बीच साझा करना हो तथा उन लोगों के मध्य विश्वास की भावना न हो।

  • दरअसल, इस प्रौद्योगिकी से सबसे अधिक लाभ वित्तीय निवेशकों को होगा।
  • विश्व आर्थिक फोरम द्वारा किये गए एक अध्ययन के अनुसार, विश्व भर में 90 से अधिक केंद्रीय बैंक ब्लॉकचेन चर्चा में शामिल हैं। इसके अतिरिक्त पिछले तीन वर्षों में इसके लिये 2,500 पेटेंट दर्ज़ किये गए हैं।
  • 80% बैंकों ने वर्ष 2017के अंत तक ब्लॉकचेन की शुरुआत करने की भविष्यवाणी भी कर दी है। वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में यह नई प्रौद्योगिकी एक आशा की किरण बनकर उभरेगी।
  • यहाँ तक कि गैर-बैंकिंग क्षेत्रों (जैसे-रिटेल, यात्रा, स्वास्थ्य देखभाल, टेलीकम्युनिकेशन और सार्वजानिक क्षेत्र के उद्योग) के लोग भी ब्लॉकचेन द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले अवसरों पर ध्यान दे रहे हैं। ध्यान देने योग्य है कि यह प्रौद्योगिकी केवल ऐसे उद्योगों पर लागू होगी, जो विकेन्द्रित डाटा संग्रहण, डाटा अपरिवर्तनीयता और ब्लॉकचेन की वितरित स्वामित्व सुविधाओं पर ध्यान केन्द्रित करते हैं।

भारत की स्थिति

एक उच्च स्तरीय समिति जिसमें वित्त, गृह और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालयों के साथ ही सेबी, भारतीय रिज़र्व बैंक, स्टेट बैंक और नीति आयोग के अधिकारीगण मौजूद हैं, इस विषय पर विचार-विमर्श कर रही है कि भारत में क्रिप्टोकरेंसी को बंद किया जाना चाहिये अथवा नहीं।
हालाँकि अब तक हुए विचार-विमर्शों से इस बात की पुष्टि हुई है कि इस समिति ने ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा देने की मंशा व्यक्त की है।

निष्कर्ष

यह अपेक्षा की जा रही है कि बिचौलियों को हटाकर ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी किसी भी प्रकार के लेन-देन की दक्षता में सुधार लाएगी तथा इससे सभी लेन-देनों की लागत में भी कमी आएगी। इससे पारदर्शिता में भी वृद्धि होगी तथा फर्जी लेन-देनों से मुक्ति मिलेगी, क्योंकि इसके अंतर्गत प्रत्येक लेन-देन को एक सार्वजानिक बही खाते में रिकॉर्ड तथा आवंटित किया जाएगा।

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