UPSC सिविल सेवा परीक्षा के विषय में 12 मिथक

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UPSC सिविल सेवा परीक्षा के विषय में 12 मिथक

UPSC सिविल सेवा परीक्षा के विषय में 12 मिथक: जैसे ही आप UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू करते हैं, आपका तत्काल लक्ष्य प्रारंभिक परीक्षा होता है; लेकिन, गम्भीर उम्मीदवारों को इसके साथ ही सिविल सेवा (मुख्य) परीक्षा भी ध्यान में रहती है। आपको तैयारी के दौरान इसके प्रति सतर्कता के साथ-साथ जिस तरीके से इसे संभालना है, उसके बारे में सचेत रहना आवश्यक होगा। परीक्षा के किसी भी दौर में चूक होना आपको असफल बना सकती है।

हम सभी ने सिविल सेवा परीक्षा (सामान्य रूप में आईएएस परीक्षा के नाम से प्रचलित) की तैयारी को लेकर प्रायः कई मिथकों को सुना है। इनमें से कई कथन इस परीक्षा की तैयारी शुरू करने वाले अभ्यर्थियों को भयभीत करते हैं तो कई अनुभवी अभ्यर्थियों को भी व्याकुल कर देते हैं।

 

UPSC सिविल सेवा परीक्षा के विषय में 12 मिथक

निम्नलिखित प्रश्नों के माध्यम से हमारा प्रयास यह है कि अभ्यर्थियों को इन मिथकों से दूर रखते हुए उनका ध्यान परीक्षा पर केन्द्रित करने को प्रेरित किया जाए।

प्रश्न-1: UPSC सिविल सेवा परीक्षा अत्यंत कठिन परीक्षा है, इसमें सफलता प्राप्त करने के लिए उम्मीदवार में विशेष योग्यता की जरुरत होती है। क्या यह सत्य है?
उत्तर: UPSC CSE परीक्षा के बारे में यह भ्रान्ति है कि यह परीक्षा अत्यंत कठिन होती हैं। पर वास्तव में सिविल सेवा परीक्षा भी अन्य परीक्षाओं की ही तरह एक परीक्षा है, अंतर केवल इनकी प्रकृति एवं प्रक्रिया में है। यदि अभ्यर्थी परीक्षा पैटर्न और पाठ्यक्रम के अनुरूप सटीक रणनीति से अपनी तैयारी धैर्य पूर्वक करें तो उनकी सफलता बढ़ जाती है।

UPSC CSE परीक्षा के लिए किसी विशेष योग्यता की जरुरत नहीं होती बल्कि वह सभी उम्मीदवार जिनकी आयु 21 वर्ष  हो और उन्होंने स्नातक परीक्षा (किसी भी विधा से) उत्तीर्ण कर ली है वह UPSC CSE परीक्षा में सम्मिलित होने के पात्र होते हैं। सभी उम्मीदवारों को एक समान पाठ्यक्रम के तहत प्रारंभिक, मुख्य और सक्षात्कार परीक्षा के दौर से गुजर कर अंतिम चयन प्राप्त करना होता है। जिनका चयन होता है वह भी कठिन परिश्रम और सटीक रणनीति के तहत ही चयनित होते है। उम्मीदवारों के क्षमताओं में अंतर हो होता है, इसीलिए कोई शीघ्र तो कोई विलम्ब से चयनित होता है। परन्तु स्मरण रखें कि निरंतर अभ्यास से कोई लक्ष्य मुश्किल नहीं है।

प्रश्न-2: सिविल सेवा परीक्षा में सफल होने के लिये प्रतिदिन 16-18 घंटे अध्ययन करना आवश्यक है?
उत्तर: सिविल सेवा परीक्षा के प्रत्येक चरण की प्रकृति एवं रणनीति अलग-अलग होती हैं। अतः आपको उसके चरण के तहत ही अपनी तैयारी करनी होती है। यह अभ्यर्थी की क्षमता पर निर्भर करता है कि वह प्रतिदिन के अध्ययन को कितने घंटों में कर सकता है। यह अलग-अलग अभ्यर्थी के लिए अलग-अलग होती है क्योंकि किसी विषय को एक अभ्यर्थी जल्दी समझ लेता है और दूसरा देर में। अतः आपके अध्ययन घंटों में अंतर हो सकता है परन्तु आदर्श रूप से एक निश्चित घंटे (6-8 घंटे) कुशल मार्गदर्शन में नियमित रूप से अध्ययन करता है तो उसके सफल होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। कुल मिलाकर पढ़ाई के घंटे नहीं, पढ़ाई की गुणवत्ता मायने रखती है।

प्रश्न-3: क्या इस परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के लिये महँगी कोचिंग करना आवश्यक है?
उत्तर: जी नहीं, यह सही नहीं है। अगर आप विगत वर्षों के परीक्षा परिणामों को देखें तो आपको स्पष्ट हो जायेगा कई ऐसे उम्मीदवार इस परीक्षा में सफल हुए है और अच्छी रैंक भी प्राप्त की है, जिन्होंने स्वाध्याय किया है। कोचिंग संस्थान उम्मीदवारों को सिर्फ दिशा-निर्देश देते हैं जिस पर आपको ही चलना होता है। कोचिंग से आप प्रतिदिन अध्ययन का टाइम टेबल फॉलो करते हैं और अपने ज्ञान को अन्य छात्रों के मुकाबले जांचते रहते है और पारिवारिक व्यवधानों से भी अपने आप को अलग रख पाते हैं। अतः आप पहले अपने ज्ञान स्तर को जाँचिये और खुद ही निर्णय लें की आप गैप को बिना कोचिंग के फिल कर सकते हैं या नहीं। अतः आप खुद निर्णय लें।

अगर आप स्व अध्ययन कर रहे हैं तो आज सभी कोचिंग के टिप्स और अध्ययन सामग्री ऑनलाइन प्राप्त कर सकते है। बस आपको सतर्क होकर इनका चयन करना है और भटकाव से बचते हुए अपने अध्ययन में लग जाना है।

प्रश्न-4: यह परीक्षा एक बड़े महासागर के समान है इसकी तैयारी के लिए आपको सबकुछ (ब्रह्माण्ड की सारी विद्या) जानना आवश्यक है, प्रत्येक विषय के टॉपिक/सबटॉपिक का ज्ञान आवश्यक है।
उत्तर: जी नहीं, यह मात्र भ्रान्ति है। UPSC का एक निश्चित पाठ्यक्रम है और UPSC अपने पाठ्यक्रम का दृढ़ता से पालन करती है। सामान्य अध्ययन के कुछ प्रश्नपत्रों के कुछ शीर्षकों के उभयनिष्ठ (Common) होने के कारण सामान्यत: अभ्यर्थियों में यह भ्रम उत्पन्न होता है कि कुछ प्रश्न पाठ्यक्रम से बाहर पूछे गए हैं जबकि वे किसी-न-किसी शीर्षक से संबंधित रहते हैं। हाँ, यह आवश्यक है कि आप सारे चर्चा में रहने वाले विषयों का (जिससे देश और समाज पर प्रभाव पड़ता है) सामान्य लोगों की अपेक्षा थोड़ा गंभीरता से अध्ययन करें। क्योंकि परीक्षा का पाठ्यक्रम बड़ा है अतः उम्मीदवारों का ज्ञान स्तर अधिक होता है परन्तु आपको सिर्फ बुनियादी ज्ञान हासिल करना है न की उसमें विशेषज्ञता हासिल करनी है। अतः भ्रान्ति पर ध्यान न देकर अपने अध्ययन पर ध्यान दें। UPSC का लक्ष्य परीक्षा के माध्यम से योग्य उम्मीदवारों का चयन करना है न कि अभ्यर्थियों से अनावश्यक प्रश्न पूछकर उन्हें परेशान करना है।

प्रश्न-5: लाखों अभ्यर्थी इस परीक्षा में भाग लेते हैं परन्तु सिर्फ मेधावी अभ्यर्थी ही आईएएस बनते हैं। अतः सामान्य उम्मीदवारों को इसकी तैयारी नहीं करनी चाहिए?
उत्तर: किसी भी उम्मीदवार को भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है, यद्यपि इस परीक्षा के लिये लाखों अभ्यर्थी आवेदन करते हैं और इस परीक्षा में सम्मिलित होते हैं, परन्तु वास्तविक प्रतिस्पर्द्धा केवल 8-10 हज़ार गंभीर अभ्यर्थियों के बीच ही होती है। अगर आप बिना व्यवधान/भटकाव के एकाग्र होकर दिशा-निर्देशों के अनुरूप नियमित कठिन परिश्रम करने के लिए तैयार हैं तो यह परीक्षा आपके लिए है। फिर आपको भयभीत होने की जरुरत नहीं है। आपको इस परीक्षा में शामिल होना चाहिये तथा इसे जीतने के लिये कड़ी मेहनत करनी चाहिये।

प्रश्न-6: इस परीक्षा में सफलता के लिए उम्मीदवार का प्रथम श्रेणी में शैक्षणिक योग्यता का होना अनिवार्य है। अन्यथा चयन नहीं होता।
उत्तर: अगर आपका सारा शैक्षणिक प्रथम श्रेणी में है तो यह आपके तैयारी में लाभदायक होगा परन्तु इससे सफलता की कोई गारंटी नहीं मिलती। इस परीक्षा में सामान्य जागरूकता, तार्किक तर्क और अच्छे लेखन कौशल की आवश्यकता है।
यदि आप उन्हें अपने में विकसित कर सकते हैं, तो आप इस परीक्षा में सफलता प्राप्त कर सकते हैं भले ही आपके पास कक्षा X या XII में दूसरी श्रेणी प्राप्त की हो। हां, आपको साक्षात्कार में इस प्रश्न का सामना करना पड़ सकता है कि आपने कम अंक क्यों प्राप्त किए। लेकिन यदि आपके पास वैध कारण (रीज़न) हैं तो यह आपके खिलाफ नहीं होगा।

प्रश्न-7: कुछ लोग कहते हैं कि इस परीक्षा को पास करने के लिये भाग्य की ज़रूरत है, क्या यह सत्य है ?
उत्तर: यदि आप भाग्य को मानते हैं तो स्पष्ट रूप से इस बात को समझ लें कि इस परीक्षा को पास करने में भाग्य का योगदान मात्र 1% और आपके परिश्रम का 99% है। आप अपने हाथों से सफलता के 99% अंश को न गवाएँ। यदि आप ईमानदारी से परिश्रम करेंगे तो भाग्य आपका साथ अवश्य देगा। ध्यान रहे, ‘ईश्वर उन्हीं की सहायता करता है जो अपनी सहायता स्वयं करते हैं’।

प्रश्न-8: इस विषय पर पूर्ण “निपुणता” प्राप्त करने के लिए आपको एक ही विषय पर कई पुस्तकों को पढ़ने की जरूरत है।
उत्तर: UPSC परीक्षा के मामले में सभी विषय पर “निपुणता” एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य है। दूसरा, विषय को समझने के लिए कई पुस्तकों को पढ़ने के बजाय गहराई में एक पुस्तक को पढ़ना बेहतर होता है। इसके अलावा, भले ही आपने कुछ पढ़ और समझ लिया हो, फिर भी अधिकार प्राप्त करने में समय लगता है क्योंकि आप कई नए विषयों का अध्ययन करने जा रहे हैं। यदि आप नोट्स और संशोधन नहीं करते हैं, तो हो सकता है कि आप उन्हें प्रभावी ढंग से ग्रहण करने में सक्षम न हों। यदि आप वास्तव में किसी विषय को समझते हैं और अपने ज्ञान का विस्तार करना चाहते हैं तो अधिक पुस्तकें पढ़ने से निश्चित रूप से सहायता मिल सकती है। NCERT और कुछ स्टैण्डर्ड पुस्तकों के अलावा अन्य पुस्तकों को टॉपिक-दर-टॉपिक कवर करनेकी आवश्यकता नहीं है।

प्रश्न-9: प्रारंभिक परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के लिए आपको 90+ प्रश्नों का प्रयास करना होगा।
उत्तर: यह सच नहीं है। बाजार में शोर्टकट सीखाने वालों के द्वारा यह बात फैलाई जाती है, जो एक मिथक के अतिरिक्त और कुछ नहीं है। यदि आप अधिक प्रश्नों को हल करेंगे तो अधिक अंक प्राप्त करना आसान होगा। परीक्षा के लिए एक निश्चित प्रश्नों को हल करने का फार्मूला कार्य नहीं करता। उम्मीदवारों का ध्यान अधिक संख्या में प्रश्नों का सही उत्तर अंकन पर होना चाहिए। एक व्यवस्थित ढंग से अध्ययन किया हुआ उम्मीदवार विषयों के बीच संबंध आसानी से बना लेता है और वह अधिक प्रश्नों को हल कर सकता है। उम्मीदवारों का ध्यान प्रश्नों की संख्या हल करने पर न होकर उन्हें सही हल करने पर होना चाहिए। आपको अपनी खुद की एक ऐसी रणनीति का अभ्यास करने और समझने की ज़रूरत है जो आपके लिए अच्छी तरह से काम करे।

प्रश्न-10: वैकल्पिक विषयों का चयन कैसे करें? कुछ लोगों का मानना है कि ऐसे विषय का चयन करना चाहिये जिसका पाठ्यक्रम अन्य विषयों की तुलना में छोटा हो और जो सामान्य अध्ययन में भी मदद करता हो, क्या यह सत्य है ?
उत्तर: उपयुक्त वैकल्पिक विषय का चयन ही वह निर्णय है जिस पर किसी उम्मीदवार की सफलता का सबसे ज़्यादा दारोमदार होता है। विषय चयन का असली आधार सिर्फ यही है कि वह विषय आपके माध्यम में कितना ‘ स्कोरिंग’ है? विषय छोटा है या बड़ा, वह सामान्य अध्ययन में मदद करता है या नहीं, ये सभी आधार भ्रामक हैं। अगर विषय छोटा भी हो और सामान्य अध्ययन में मदद भी करता हो किंतु दूसरे विषय की तुलना में 50 अंक कम दिलवाता हो तो उसे चुनना निश्चित तौर पर घातक है। भूलें नहीं, आपका चयन अंततः आपके अंकों से ही होता है, इधर-उधर के तर्कों से नहीं।

प्रश्न-11: वैकल्पिक विषयों के चयन में माध्यम का क्या प्रभाव पड़ता है? कुछ लोगों का मानना है कि हिंदी माध्यम की तुलना में अंग्रेज़ी माध्यम के अभ्यर्थी ज़्यादा अंक प्राप्त करते हैं, क्या यह सत्य है?
उत्तर: जी नहीं, यह पूर्णत: सही नहीं है। किसी विषय में अच्छे अंक प्राप्त करना उम्मीदवार की उस विषय में रुचि, उसकी व्यापक समझ, स्तरीय पाठ्य सामग्री की उपलब्धता, अच्छी लेखन शैली एवं समय प्रबंधन इत्यादि पर निर्भर करता है। अभ्यर्थी को उसी विषय का चयन वैकल्पिक विषय के रूप में करना चाहिये जिसमें वह सहज हो। हिंदी माध्यम के अभ्यर्थी उन्हीं विषयों या प्रश्नपत्रों में अच्छे अंक (यानी अंग्रेज़ी माध्यम के गंभीर उम्मीदवारों के बराबर या उनसे अधिक अंक) प्राप्त कर सकते हैं जिनमें तकनीकी शब्दावली का प्रयोग कम या नहीं के बराबर होता हो, अद्यतन जानकारियों की अधिक अपेक्षा न रहती हो और जिन विषयों पर पुस्तकें और परीक्षक हिंदी में सहजता से उपलब्ध हों।

प्रश्न-12: कुछ लोग कहते हैं किIAS की नियुक्ति में भ्रष्टाचार होता है, क्या यह सत्य है ?
उत्तर: यह आरोप पूर्णतः गलत है। यह पूरी परीक्षा इतनी निष्पक्ष है कि आप इस पर आँख बंद करके विश्वास कर सकते हैं। परीक्षा के संचालन के तरीके में खामी हो सकती है लेकिन सिविल सेवा अधिकारियों की नियुक्ति में भ्रष्टाचार नहीं होता है। इनकी नियुक्तियाँ निष्पक्ष होती हैं। आप इस पर विश्वास कर सकते हैं।

संक्षेप में, हम जानते हैं कि आपको देश को चलाने के लिए खुद को तैयार करना है तो आपको अपने ज्ञान और व्यावहारिक बुद्धि का पूर्णतः इस्तेमाल करना होगा। न की इधर-उधर की बातों में खुद के अन्दर भटकाव पैदा चाहिए। UPSC परीक्षा का पाठ्यक्रम व्यापक है और परीक्षा में तर्कात्मक ढंग से प्रश्न पूछे जाते हैं तो इससें आप के रटने की नहीं बल्कि अध्ययन के पश्चात विकसित हुए आपके ज्ञान की परीक्षा ली जाती है। जिसके लिए आपको खुद को तैयार करना होगा। हम आशा करते हैं कि आप चिंतित होने और थकने के बजाय सीखने के अनुभव का आनंद लेंगे। “पढ़ें, सुधार करें, अपनी समझ विकसित करें” पर ध्यान केंद्रित करें। यह भी महत्वपूर्ण है कि किसी भी अन्य की सलाह का पालन न करें जो बल्कि अपने चयन की रणनीति आप खुद बनाएं।

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