UP PCS प्रारंभिक परीक्षा में कैसे पाएं सफलता 2018 : जानें तैयारी रणनीति !

UP PCS प्रारंभिक परीक्षा में कैसे पाएं सफलता 2018 : जानें तैयारी रणनीति- UP PCS प्रारंभिक परीक्षा 28 अक्टूबर को संपन्न होने जा रही है। इस हेतु सभी उम्मीदवारों ने अपनी तैयारी कर ली होगी या अंतिम दौर में होगी। आज हम समस्त उम्मीदवारों को बचे हुए दिनों के लिए क्या रणनीति अपनाए जिससे उनकी सफलता सुनिश्चित हो जाए, इस विषय पर चर्चा करेंगे। आपको यह बताएँगे की परीक्षा में कितने प्रश्न करना अच्छा प्रयास होगा।

सिविल सेवा परीक्षा में जनरल स्टडीज (GS) का प्रश्नपत्र हमेशा ही अत्यंत कठिन माना जाता हैं। इसमें सफलता प्राप्त करने के लिए कठिन मेहनत और सटीक रणनीति की जरुरत होती है, अंतिम दिन में आपको रिविजन इस तरह से करना चाहिए ताकि सभी टॉपिक कवर हो जाएं।

 

UP PCS प्रारंभिक परीक्षा में कैसे पाएं सफलता 2018 : जानें तैयारी रणनीति !

सर्वप्रथम हम द्वितीय प्रश्नपत्र (C-SAT) की बात करते हैं। यह प्रश्नपत्र अब केवल क्वालीफाईंग नेचर का है अतः अगर इस प्रश्न पत्र में कोई बड़ी गलती ना की जाए तो PCS की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए 33% अंक पाना ज्यादा दुष्कर कार्य नहीं होगा। इस प्रश्नपत्र के लिए आपको C-SAT के सभी टॉपिक को पढ़ लेना ही पर्याप्त होगा और आप न्यूनतम अंक हासिल कर सकते हैं।

  • अंतिम वर्ष के कटऑफ से हों परिचित – आपको विगत तीन-चार वर्ष के कटऑफ पर नज़र डालना श्रेयस्कर होता है, 2016 से द्वितीय प्रश्नपत्र केवल Qualifying होने से सारा दारोमदार प्रथम प्रश्नपत्र (सामान्य अध्ययन) पर आ गया है। परंतु एक तथ्य स्पष्ट है कि 2012 से 2016 तक कभी भी प्रारंभिक परीक्षा की कट आफ 70% से अधिक नहीं रही अर्थात् इस वर्ष भी 150 में से 105 से 110 प्रश्नों के बीच मेरिट रहने की प्रबल संभावना है। यदि आप निश्चिंत होकर मुख्य परीक्षा की तैयारी करना चाहते हैं तो आपको 120+ प्रश्नों को सही करने की आवश्यकता पड़ेगी और उम्मीदवार को इस हेतु ठोस रणनीति का अनुगमन करना होगा।
  •  सामान्य अध्ययन प्रथम प्रश्नपत्र के पाठ्यक्रम के तहत जैसा की विदित है कि राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय समसामयिकी,  भारत का इतिहास व भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन, भारत एवं विश्व का भूगोल, भारतीय राजव्यवस्था व संविधान, आर्थिक व सामाजिक विकास, पर्यावरण, पारिस्थितिकी व कृषि, सामान्य विज्ञान, जनसंख्या व नगरीकरण और U.P. विशेष से प्रश्न पूछे जाते हैं। अब अपने मजबूत और कमज़ोर खण्डों को पहचानिए और उस हिसाब से कमज़ोर खण्डों पर विशेष मेहनत करिए।
  • विगत वर्षों के प्रश्न पत्र अवश्य देखें – विगत वर्ष के 5-10 वर्ष के प्रश्न पत्र अवश्य देख लें। UP PCS परीक्षा की प्रकृति में यह देखा गया है कि विगत वर्ष के प्रश्नपत्रों से लगभग प्रत्येक वर्ष किसी न किसी रूप में 30-40 प्रश्न पूछे जाते हैं। यह भी देखें की प्रश्नों को पूछने का ट्रेंड क्या है और ट्रेंड में चल रहे विषय पर अधिक ध्यान दें।
  • प्रारंभिक परीक्षा के पिछले सालों के प्रश्न पत्रों का विश्लेषण करते हैं तो पाते हैं, कि अधिकतर प्रश्न साइंस (Science) और टेक्नोलॉजी, कर्रेंट अफेयर्स , हिस्ट्री और संविधान से आये हुए हैं। साइंस (Science) खंड में अधिकतर प्रश्न जीवविज्ञान से पूंछे जाते हैं और साथ ही सामान्य विज्ञान की अवधारणायें शामिल हैं। निरंतर बदलते राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में समसामयिक मुद्दों के महत्व को देखते हुए कर्रेंट अफेयर्स पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। इसके साथ ही राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों के साथ-साथ बिहार से जुड़ी खबरों पर खास ध्यान देना चाहिए। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही सामाजिक-आर्थिक योजनाओं की भी जानकारी रखें। इतिहास खंड को भी विशेष रूप से पढ़ा जाना आवश्यक है। पर्यावरण से जुड़े प्रश्नों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।
  • विगत वर्ष के प्रश्न पत्र और मॉक टेस्ट से समय प्रबंधन की रणनीति पर कार्य करें और निर्धारित समय में प्रश्न पत्र को हल करने की रणनीति निश्चित कर लें। सबसे पहले अपने मजबूत पक्ष के प्रश्नों को हल करें फिर क्रमशः कमजोर पक्ष को हल करें और इसी रणनीति के तहत आगे बढ़ें।
  • चूँकि प्रारम्भिक परीक्षा में प्रश्नों की प्रकृति वस्तुनिष्ठ (बहुविकल्पीय) प्रकार की होती है अत: इसमें तथ्यों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है। जैसे- अशोक के अभिलेख को सर्वप्रथम किसने पढ़ा था? भारत की कौन-सी नदी ‘दक्षिण की गंगा’ के नाम से जानी जाती है? कौन-सा हार्मोन ‘लड़ो और उड़ो’ के नाम से जाना जाता है, कोशिका का पॉवर हाउस किसे कहा जाता है? इत्यादि।
  • इस परीक्षा के पाठ्यक्रम और विगत वर्षों में पूछे गए प्रश्नों की प्रकृति का सूक्ष्म अवलोकन करने पर ज्ञात होता है कि इसके कुछ खण्डों की गहरी अवधारणात्मक एवं तथ्यात्मक जानकारी अनिवार्य है।
  • इन प्रश्नों को याद रखने और हल करने का सबसे आसान तरीका है कि विषय की तथ्यात्मक जानकारी से सम्बंधित संक्षिप्त नोट्स बना लिया जाए और उसका नियमित अध्ययन किया जाए जैसे  एक प्रश्न पूछा गया कि भारतीय संविधान में ‘समवर्ती सूची’ की अवधारणा किस देश से ली गई है? तो आपको भारतीय संविधान में विभिन्न देशों से ली गई प्रमुख अवधारणाओं की एक लिस्ट तैयार कर लेनी चाहिये।
  • प्रथम प्रश्नपत्र सामान्य अध्ययन’ में पूछे जाने वाले परम्परागत प्रश्न मुख्यतः ‘भारत का इतिहास एवं भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन’, ‘भारत एवं विश्व का भूगोल’, ‘भारतीय राजनीति एवं शासन’, ‘आर्थिक एवं सामाजिक विकास’, ‘पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी’ एवं ‘सामान्य विज्ञान’ से सम्बंधित होते हैं।
  • सामान्य अध्ययन के इन परम्परागत प्रश्नों को हल करने के लिये सम्बंधित शीर्षक की कक्षा-6 से कक्षा-12 तक की NCERT की पुस्तकों का अध्ययन करने के साथ-साथ OnlineTyari द्वारा प्रकाशित मासिक करेंट अफेयर्स डाइजेस्ट PDF  का अध्ययन करना लाभदायक रहेगा।
  • इस परीक्षा में समसामयिक घटनाओं एवं राज्य विशेष से पूछे जाने वाले प्रश्नों की संख्या ज्यादा होती है।अत: इनका नियमित रूप से गंभीर अध्ययन करना चाहिये।
  • समसामयिक घटनाओं के प्रश्नों की प्रकृति और संख्या को ध्यान में रखते हुए आप नियमित रूप से किसी दैनिक अख़बार जैसे – द हिन्दू, दैनिक जागरण (राष्ट्रीय संस्करण) इत्यादि के साथ-साथ OnlineTyari पर उपलब्ध करेंट अफेयर्स के बिन्दुओं का अध्ययन कर सकते हैं। इसके अलावा इस खंड की तैयारी के लिये मासिक पत्रिका OnlineTyari करेंट अफेयर्स डाइजेस्ट ’ का अध्ययन करना लाभदायक सिद्ध होगा।
  • राज्य विशेष से सम्बंधित प्रश्नों को हल करने में उत्तर प्रदेश सरकार के प्रकाशन विभाग द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘उत्तर प्रदेश’ या बाजार में उपलब्ध किसी मानक राज्य स्तरीय पुस्तक का अध्ययन करना लाभदायक रहेगा।
  • इन परीक्षाओं में संस्थाओं इत्यादि से पूछे जाने वाले प्रश्नों के लिये प्रकाशन विभाग द्वारा प्रकाशित ‘भारत’ (इण्डिया इयर बुक)’ का बाज़ार में उपलब्ध संक्षिप्त विवरण पढ़ना लाभदायक रहता है।
  • द्वितीय प्रश्नपत्र सीसैट’ में मुख्यतः कॉम्प्रिहेंशन, अंतर्वैयक्तिक क्षमता एवं सम्प्रेषण कौशल, तार्किक एवं विश्लेषणात्मक योग्यता, निर्णयन क्षमता एवं समस्या समाधान, सामान्य बौद्धिक योग्यता एवं हाईस्कूल स्तर की प्रारंभिक गणित, सामान्य हिंदी एवं सामान्य अंग्रेजी से सम्बंधित प्रश्न पूछे जाते हैं।
  • इसकी तैयारी के लिये बाजार में उपलब्ध किसी स्तरीय पुस्तक का अध्ययन करने के साथ-साथ प्रैक्टिस सेटों को हल करना उचित रहेगा।
  • यदि कोई अभ्यर्थी सीसैट के प्रश्नपत्र में क्वालिफाइंग अंक से कम अंक प्राप्त करता है तो उसके प्रथम प्रश्नपत्र का मूल्यांकन ही नहीं किया जाता है।
  • इस परीक्षा में अभ्यर्थियों के योग्यता क्रम का निर्धारण उनके द्वारा प्रथम प्रश्नपत्र में प्राप्त किये गये अंकों के आधार पर किया जाता है।
  • प्रारम्भिक परीक्षा तिथि से सामान्यत:15 -20 दिन पूर्व प्रैक्टिस पेपर्स एवं विगत वर्षों में प्रारम्भिक परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों  को निर्धारित समय सीमा (सामान्यत: दो घंटे) के अंदर हल करने का प्रयास करना लाभदायक होता है। इन प्रश्नों को हल करने से जहाँ विषय की समझ विकसित होती है, वहीं इन परीक्षाओं में दोहराव (रिपीट) वाले प्रश्नों को हल करना आसान  हो जाता है।
  • UPSC की प्रारंभिक परीक्षा में ऋणात्मक अंक (1/3) के प्रावधान होने के कारण किसी भी ऐसे प्रश्न जिसके चारों विकल्पों के बारे में आप अनभिज्ञ हो या उनके संबंध में आप कुछ नही जानते हो, तो ऐसे प्रश्नों को अनुत्तरित छोड़ देना बेहतर होगा।
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