बैंकिंग वित्तीय जागरूकता-1 : अपने ज्ञान को बढ़ाएं !

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बैंकिंग वित्तीय जागरूकता-1 : अपने ज्ञान को बढ़ाएं !

बैंकिंग वित्तीय जागरूकता-1 : बैंक परीक्षा (IBPS, SBI, RBI, IBPS RRB और अन्य बैंकिंग एवं इन्शुरेन्स परीक्षा) की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के साथ एक समस्या रहती है कि वे परीक्षा के तहत पूछे जाने वाले सामान्य जागरूकता/बैंकिंग और वित्तीय जागरूकता की तैयारी बेहतर तरीके से नहीं कर पाते हैं। सबसे बड़ी समस्या कम समय में अधिक से अधिक महत्त्वपूर्ण सामग्रियों और वित्तीय जागरूकता से परिचित होने की होती है। इस सामग्री को उम्मीदवारों के हितों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न विशेषज्ञों द्वारा सभी बैंक परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्नों को आधार बनाकर तैयार किया गया है। बैंक परीक्षा में प्रयुक्त होने वाले शब्दों की पारिभाषिक अर्थ से सभी उम्मीदवारों को परिचित होना आवश्यक है। इन शब्दों से कई प्रश्न साक्षात्कार परीक्षा में भी पूंछे जाते हैं।

अगर आप शब्दों के अर्थ से परिचित होना चाहते हैं या इससे संबंधित प्रश्नों को हल करना चाहते हैं, तो आपसे इससे संबंधित सभी जानकारी की अपेक्षा की जाती है। आपकी सुविधा के लिए कम शब्दों में अधिक से अधिक जानकारी दी जा रही है, ताकि आप कम समय में इसे रिवाइज कर सकें और अपनी परीक्षा की तैयारी को अंतिम रूप दे सकें।

 

बैंकिंग वित्तीय जागरूकता-1 : अपने ज्ञान को बढ़ाएं !

Table of Contents

इस लेख में ऐसे शब्दों को चुना गया है जिसके विषय में आप लगभग सभी दिन समाचार में सुनते हैं या समाचार पत्रों में पढ़ते हैं। पर आप यहाँ प्रदत्त कई शब्दों की पारिभाषिक शब्दावली से परिचित नहीं होते। बैंकिंग की तैयारी कर रहे सभी उम्मीदवारों से यह आशा की जाती है कि वह प्रदत्त सभी शब्दों से परिचित हो-

बॉण्ड अथवा डिबेंचर (Bond or debenture)

केंद्र सरकार राज्य सरकार अथवा किसी संस्थान द्वारा ऋण लेकर जारी किया जाने वाला ऋण पत्र जिस पर संबंधित संस्थान धारक को निश्चित दर पर ब्याज भी प्रदान करती है। केंद्र सरकार, राज्य सरकार, अथवा किसी संस्थान द्वारा ऋण हेतु जारी जारी किया जाने वाला ऋण पत्र जिस पर संबंधित संस्थान को एक निश्चित अवधि पर निश्चित दर से ब्याज प्रदान करता है।

धारक बॉण्ड(Bearer bond)

वह ऋण पत्र जिसकी परिपक्वता अवधि पर कोई भी भुगतान प्राप्त कर सकता है।

अंश/हिस्से/इक्विटी (Equities)

किसी कंपनी की चुकता पूँजी के समान मूल्यधारी अंश। इनके धारक ही कंपनी के वास्तविक स्वामी माने जाते हैं। इन्हें कंपनी में मताधिकार प्राप्त होता है और ये लाभांश पाने के अधिकारी होते हैं।

म्यूच्यूअल फंड(Mutual fund)

यह शेयर बाजार में निवेश की ऐसी प्रक्रिया है जिसमें एक मध्यस्थ संस्था छोटे निवेशकों की बचतों को अपने अनुभव तथा कुशलता के विभिन्न शेयरों में निवेश करती है, जिससे उनके बाजार जोखिम में कमी होती है तथा निवेश पर उच्च प्रतिफल प्राप्त होता है।

मार्जिन फंडिंग (Margin funding)

शेयर ब्रोकर द्वारा निवेशकों से खरीदे गए शेयर के एवज में स्टॉक एक्सचेंज से वसूली गई राशि।

मोरेटोरियम (Moratorium)

कानून द्वारा ऋणों के भुगतान को टालने की अवधि।

वेंचर कैपिटल (Venture Capital)

नये व्यवसाय की शुरुआत के लिए जुटाई जाने वाली पूंजी को वेंचर कैपिटल या साहस पूंजी या दायित्व पूंजी कहते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो निवेशकों द्वारा शुरु हो रही छोटी कंपनियों, भविष्य में जिनके विकास की प्रबल संभावना होती है, को उपलब्ध कराई जाने वाली पूंजी को वेंचर कैपिटल कहते हैं। कंपनियां ऐसी पूंजी जुटाने के लिए इक्विटी शेयर जारी करती हैं।

फॉरवर्ड सौदा (Forward Contract)

नकदी बाजार (शेयरों के मामले में) या हाजिर बाजार (कमोडिटी के मामले में) में किया जाने वाला सौदा जिसका निपटारा भविष्य की एक निश्चित तारीख को सुपुर्दगी के साथ निपटाया जाता है।

डेरिवेटिव (Derivative)

वैसी प्रतिभूति जिसका मूल्य उसके अंतर्गत एक या एक से अधिक परिसंपत्तियों के ऊपर निर्भर करता है या उनसे प्राप्त किया जाता है। डेरिवेटिव दो या दो से अधिक पक्षों के बीच किया जाने वाला करार है। इसका मूल्य निर्धारण उन परिसंपत्तियों के मूल्यों में होने वाले उतार-चढ़ाव के आधार पर किया जाता है।

ओपेन एन्डेड फण्ड (Open Ended Fund)

सतत खुली योजना एवं म्यूच्यूअल फंडों की वैसी योजनाएं जिनकी कोई लॉक इन अवधि (वह पूर्व-निर्धारित अवधि जिससे पहले निवेश किए गए पैसों की निकासी की अनुमति नहीं होती है) नहीं होती है। इनके यूनिटों की खरीद-बिक्री तत्कालीन शुध्द परिसंपत्ति मूल्य (एनएवी) पर कभी भी की जा सकती है।

प्रतिभूतियां (Securities)

प्रतिभूतियां लिखित प्रमाणपत्र होती हैं जो ऋण लेने के बदले दी जाती है। इनमें जारी करने के शर्तों एवं मूल्यों का उल्लेख होता है तथा इनका क्रय-विक्रय भी किया जाता है। सरकार द्वारा जारी किया जाने वाला बॉन्ड, तरजीही शेयर, ऋण पत्र आदि प्रतिभूतियों की श्रेणी में आते हैं। बैंकिग में भी ऋणों कि जमानत के सन्दर्भ में प्रतिभूति शब्द का प्रयोग होता है।

शेयर विभाजन (Stock Split)

कोई कंपनी अपने महंगे शेयर को छोटे निवेशकों के लिए वहनीय बनाने और उसे आकर्षक बनाने के लिए शेयरों का विभाजन करती है। अगर कोई कंपनी अपने शेयरों का विभाजन 2:1 में करती है तो उसका मतलब होता है कि शेयरों की संख्या दोगुनी कर दी गई है और उसका मूल्य आधा कर दिया गया है।

ऑफशोर फंड (Offshore Fund)

जिस फंड के अंतर्गत म्युचुअल फंड कंपनियां विदेश से धन जुटा कर देश के भीतर विनियोजित करती हैं उसे ऑफशोर फंड कहते हैं।

मुद्रा का विनिमय मूल्य (Exchange Value of Money)

जब देश की प्रचलित मुद्रा का मूल्य किसी विदेशी मुद्रा के साथ निर्धारित किया जाता है ताकि मुद्रा की अदला-बदली की जा सके तो इस मूल्य को मुद्रा का विनिमय मूल्य कहा जाता है। वह मूल्य दोनों देशों की मुद्राओं की आंतरिक क्रय शक्ति पर निर्भर करता है।

मुद्रास्फीति (Money Inflation)

मुद्रास्फीति वह स्थिति है जिसमें मुद्रा का आंतरिक मूल्य गिरता है और वस्तुओं के मूल्य बढ़ते हैं। यानी मुद्रा तथा साख की पूर्ति और उसका प्रसार अधिक हो जाता है। इसे मुद्रा प्रसार या मुद्रा का फैलाव भी कहा जाता है।

मुद्रा अवमूल्यन (Money Devaluation)

यह कार्य सरकार द्वारा किया जाता है। इस क्रिया से मुद्रा का केवल बाह्य मूल्य कम होता है। जब देशी मुद्रा की विनिमय दर विदेशी मुद्रा के अनुपात में अपेक्षाकृत कम कर दी जाती है, तो इस स्थिति को मुद्रा का अवमूल्यन कहा जाता है।

रेंगती हुई मुद्रास्फीति (Creeping Inflation)

मुद्रास्फीति का यह नर्म रूप है। यदि अर्थव्यवस्था में मूल्यों में अत्यंत धीमी गति से वृद्धि होती है तो इसे रेंगती हुई स्फीति कहते हैं। अर्थशास्त्री इस श्रेणी में एक फीसदी से तीन फीसदी तक सालाना की वृद्धि को रखते हैं। यह स्फीति अर्थव्यवस्था को जड़ता से बचाती है।

रिकॉर्ड तारीख (Record List)

बोनस शेयर, राइट शेयर या लाभांश आदि घोषित करने के लिए कंपनी एक ऐसी तारीख की घोषणा करती है जिस तारीख से रजिस्टर बंद हो जाएंगे। इस घोषित तारीख तक कंपनी के रजिस्टर में अंकित प्रतिभूति धारक ही वास्तव में धारक माने जाते हैं। इस तारीख को ही रेकॉर्ड तारीख माना जाता है।OnlineTyari के YouTube चैनल की सदस्यता लेने के 5 कारण

रिफंड ऑर्डर (Refun Order)

यदि किसी शेयर आवेदन पत्र पर शेयर आवंटन की कार्यवाही नहीं होती तो कंपनी को आवेदन पत्र के साथ संपूर्ण रकम वापस करनी होती है। रकम वापसी के लिए कंपनी जो प्रपत्र भेजती है उसे रिफंड ऑर्डर कहा जाता है। रिफंड ऑर्डर चेक, ड्राफ्ट या बैंकर चेक के रूप में होता है तथा जारीकर्ता बैंक की स्थानीय शाखा में सामान्यत: सममूल्य पर भुनाए जाते हैं।

लाभांश (Dividend)

विभाजन योग्य लाभों का वह हिस्सा जो शेयरधारकों के बीच वितरित किया जाता है, लाभांश कहा जाता है। यह करयुक्त और करमुक्त दोनों हो सकता है। यह शेयरधारकों की आय है।

लाभांश दर (Dividend Rate)

कंपनी के एक शेयर पर दी जाने वाली लाभांश की राशि को यदि शेयर के अंकित मूल्य के साथ व्यक्त किया जाए तो इसे लाभांश दर कहा जाता है। इसे अमूमन फीसदी में व्यक्त किया जाता है।

लाभांश प्रतिभूतियां (Dividend Securities)

जिन प्रतिभूतियों पर प्रतिफल के रूप में निवेशक को लाभांश मिलता है, उन्हें लाभांश वाली प्रतिभूतियां कहा जाता है। जैसे समता शेयर, पूर्वाधिकारी शेयर।

शून्य ब्याज ऋणपत्र (Zero Rated Deventure)

इस श्रेणी के डिबेंचरों या बॉन्डों पर सीधे ब्याज नहीं दिया जाता, बल्कि इन्हें जारी करते वक्त कटौती मूल्य पर बेचा जाता है और परिपक्व होने पर पूर्ण मूल्य पर शोधित किया जाता है। जारी करने के लिए निर्धारित कटौती मूल्य के अंतर को ही ब्याज मान लिया जाता है।

कौण्ट्रेरियन शेयर (Contrarian share)

बाजार के रूख के विपरीत दिशा में कार्य करने वाला शेयर।

कागजी सोना (Paper gold)

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा वर्ष 1969 में अंतरराष्ट्रीय तरलता में वृद्धि के लिए अपने सदस्य देशों की जमा परिसंपत्तियों की माप के आधार पर आनुपातिक रूप से भारांश का वितरण जो मात्र खातों में लिखी गई मात्र होती है ।

क्लोजिंग स्टॉक (Closing stock)

वर्ष के अंत में विक्रय से बच जाने वाला माल।

काला बाजार (Black market)

जमाखोरी द्वारा बाजार में कृत्रिम कमी पैदा करना, जिससे मूल्य बढ़ा कर अधिक लाभ कमाया जा सके।

क्रेता बाजार (Buyer’s market)

वह स्थिति जब बाजार में मांग की तुलना में पूर्ति अधिक होती है इससे क्रेता लाभ की स्थिति में होते हैं।

बैंक दर (Bank Rate)

व्यवहारत: यह वह दर होती है जिस दर पर भारतीय रिजर्व बैंक वाणिज्यिक बैंकों को उधार/ऋण देता है बैंक दर कहलाती है। तकनीकी भाषा में वह दर जिस पर भारतीय रिजर्व बैंक विनिमय के बिलों पर दोबारा कमीशन लेता है अथवा जिस दर पर भारतीय रिजर्व बैंक प्रथम श्रेणी के बिलों की पुनर्कटौती करता है।

आरक्षित नकदी निधि अनुपात (सीआरआर- कैश रिजर्व रेशियो)

प्रत्येक वाणिज्यिक बैंक को भारतीय रिजर्व बैंक के पास अपनी मांग और आवधिक देयताओं का कुछ प्रतिशत रखना होता है, इसे ही आरक्षित नकदी निधि अनुपात कहते हैं। अथार्त वह धन है जो बैंकों को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पास गारंटी के रूप में रखना होता है सीआरआर कहलाता है।

साविधिक चलनिधि अनुपात (एसएलआर – स्टेट्युरी लिक्किडिटी रेशियो)

वाणिज्यिक बैंकों द्वारा अपनी कुल मांग और आवधिक देयताओं का कुछ प्रतिशत नकद, सोना और अनुमोदित प्रतिभूतियों की अवस्था में नकद (लिक्विड) परिसम्पत्तियों के रूप में रखना अपेक्षित होता है, इस अपेक्षित प्रतिशत (अनुपात) को ही साविधिक चलनिधि अनुपात कहते हैं। अथार्त बैंकों के लिए अपने हर दिन के कारोबार के अंत में नकद, सोना और सरकारी सिक्यॉरिटीज में निवेश के रूप में एक खास रकम रिजर्व बैंक के पास रखना जरूरी होता है, जो वह किसी भी आपात देनदारी को पूरा करने में इस्तेमाल कर सकें। जिस रेट पर बैंक अपना पैसा सरकार के पास रखते है, उसे एसएलआर कहते हैं।टेस्ट डैशबोर्ड : एक क्लिक पर अपने सभी मॉक टेस्ट तक पहुचें !

लीड बैंक योजना

जिलों कि अर्थव्यवस्था को सुधारने के उद्देश्य से इस योजना का प्रारंभ 1969 में किया गया। जिसके तहत प्रत्येक जिले में एक लीड बैंक होगा जो कि अन्य बैंकों कि सहायता के साथ साथ कार्यक्रमों के माध्यम से वित्तीय संस्थाओ के बीच समन्वय स्थापित करेगा।

मूर्त संपत्तियां (Tangible assets)

भूमि-भवन मशीन इत्यादि ऐसी संपत्ति जिसे देखा और छुआ जा सके।

माइक्रो क्रेडिट (Micro credit)

वह छोटी सी कर्ज राशि जो गरीब लोगों को अपनी आजीविका चलाने हेतु छोटे-मोटे कारोबार शुरू करने के लिए दिया जाता है।

विमुद्रीकरण(Demonetization)

सरकार द्वारा एकाएक पुरानी मुद्रा को समाप्त कर नई मुद्रा जारी करना विमुद्रीकरण कहलाता है, इससे सफेद धन वाले तो अपनी मुद्रा बदल सकते हैं, परंतु काले धन वाले इसके लिए साहस नहीं कर पाते। परिणामतः कालाधन अपने आप ही नष्ट हो जाता है।

अवसर लागत (Opportunity Cost)

यह किसी कार्य या मूल्यमान के संदर्भ में परिभाषित की जाती है और अस्वीकार किए गए विकल्प के मूल्य के समान होती है।

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (Foreign Direct Investment)

किसी देश की आंतरिक संरचनाओं, संयंत्रों और संस्थाओं में विदेशी परिसंपत्तियों का निवेश। इसमें शेयर बाशार में लगी विदेशी पूँजी शामिल नहीं की जाती। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को शेयर बाजार के माध्यम से स्वदेशी कंपनियों में निवेश से बेहतर माना जाता है। प्रायः यह धारणा रहती है कि शेयर बाशार में लगा धन तो अस्थिर है – जो अल्पकालिक सौदेबाजी के लिए आया है -और कभी भी समाप्त हो सकता है। इसके विपरीत प्रत्यक्ष निवेश चाहे अच्छा हो या बुरा, दोनों ही परिस्थितियों में देश में काम आता ही रहेगा।

भुगतान संतुलन (Balance of Payments)

किसी देश के वर्ष भर की अवधि में शेष विश्व से चालू और पूँजीगत खातों पर हुए समस्त लेन-देन का सांख्यिकीय सार। इस खाते में अवधि भर के सभी दाायित्वों और परिसंपत्तियों का ब्यौरा होता है। इसलिए यह सदैव संतुलन में रहता है।

स्टॉक एक्सचेंज (Stock Exchange)

ऐसा शेयर बाजार जहाँ सरकारों और सार्वजनिक कंपनियों की प्रतिभूतियों का क्रय-विक्रय होता है। यहाँ दलालों को कंपनियों के अंशपत्रों तथा अन्य प्रतिभूतियों के व्यापार की सुविधाएँ उपलब्ध रहती है।

भारतीय अर्थव्यवस्था की कुछ महत्त्वपूर्ण आर्थिक शब्दावली जो आपको याद करनी चाहिए यहाँ दी गई हैं। यह श्रृंखला आगे भी जारी रहेगी। प्रदत्त जानकारी आपको कैसी लगी जरूर बताएं, कहीं पर कोई दिक्कत आ रही है तो कमेंट करे, शेयर करना न भूले।
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