IAS प्रारंभिक परीक्षा 2017 के लिए महत्वपूर्ण बिल और संशोधन: प्रतिरूप भूमि किराया अधिनियम और प्रतिरूप दुकानें और स्थापना विधेयक, 2016

IAS प्रारंभिक परीक्षा 2017 के लिए महत्वपूर्ण बिल और संशोधन : संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) इस वर्ष 18 जून 2017 को सिविल सेवा की प्रारंभिक परीक्षा का आयोजन करेगा। ये देश की सबसे प्रतिष्ठित और कठिन परीक्षा है। इस परीक्षा में कुल आवेदन भरने वालों में मात्र 0.1-0.3 फ़ीसद के दर से पास होने वाले उम्मीदवारों की इस परीक्षा को पास करना बहुत मुश्किल है।

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ये लेख कुछ बहुत महत्वपूर्ण बिल और संशोधन के बारे में बताएगा जो कि आपको आपकी आगामी परीक्षा में बहुत सहायक होंगे।

IAS प्रारंभिक परीक्षा 2017 के लिए महत्वपूर्ण बिल और संशोधन : प्रतिरूप भूमि किराया अधिनियम और प्रतिरूप दुकानें और स्थापना विधेयक, 2016

आज हम अगले दो बिलों पर चर्चा करेंगे। उल्लेख किया गया है कि अगले दो विषयों के विवरण हैं- ‘प्रतिरूप भूमि किराया अधिनियम और प्रतिरूप दुकानें और स्थापना विधेयक, 2016’।

प्रतिरूप भूमि किराया अधिनियम

इस विधेयक का नाम प्रतिरूप कृषि भूमि किराया अधिनियम, 2016 है। इस भूमि किराया के विशेषज्ञों की कमेटी (अध्यक्ष – डॉ. टी हेक) जो कि NITI आयोग के अधीन गठित की गई थी, ने 31 मार्च 2016 को प्रतिरूप कृषि भूमि किराया अधिनियम, 2016 बनाया था, जो कि पास किया जा चुका है।

उद्देश्य

यह प्रतिरूप अधिनियम, कृषि भूमि को किराए पर देने की अनुमति और सुविधा प्रदान करता है ताकि भूमिहीन और सीमांत किसानों द्वारा भूमि की पहुंच में सुधार किया जा सके। किराए की भूमि पर काम करने वाले किसानों को मान्यता भी प्रदान करता है ताकि संस्थागत ऋण के ज़रिए वे ऋण ले सकें।

विधेयक की मुख्य विशेषताएं

  • किराया / पट्टा

पट्टे को भूमि के मालिक और किसान के बीच एक अनुबंध के रूप में परिभाषित किया गया है जो कि मालिक की भूमि को कृषि के लिए प्रयोग करता है और पारस्परिक रूप से सहमत अवधि के लिए सम्बद्ध गतिविधि करता है। पट्टे पर लेने का अर्थ है कि मालिक से उसकी भूमि प्रयोग के लिए लेना।

  • भूमि पट्टा समझौता
  1. भूमि मालिक और किसाल के बीच पट्टा समझौते में निम्नलिखित जानकारी शामिल होती हैं: (क) पट्टे पर लगाई गई ज़मीन का स्थान और क्षेत्र (ख) पट्टे की अवधि (ग) पट्टे की राशि और निर्धारित तिथि जब इसका भुगतान किया जाना है (घ) पट्टे के नवीनीकरण या विस्तार के लिए नियम व शर्तें।
  2. पट्टे की अवधि और पट्टे की राशि, भूमि मालिक और किसान के बीच आपसी समझौते से तय की जाएगी।
  3. साथ ही, पट्टा समझौता, संरक्षित किराएदारी अधिकार, किसी किसान को प्रदान नहीं करेगा। पट्टा समझौता पंजीकृत हो भी सकता है या नहीं भी (जैसा भी आपसी समझौते में कहा गया हो) और अधिकार के किसी भी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया जाएगा।
  • पट्टा समझौते का प्रवर्तन

समान पद के तहसिलदार और राजस्व अधिकारी, पट्टे की शर्तों और पट्टे के लिए दी गई भूमि को पट्टे की अवधि की समाप्ति तिथि पर लौटाने के लिए ज़िम्मेदार होंगे।

  • भूमि मालिक के अधिकार और ज़िम्मेदारियां
  1. पट्टे के पहले दिन ही भूमि मालिक किराए की भूमि का अधिकार किसान को देंगे। पट्टे की अवधि समाप्त होने के बाद भूमि का अधिकार स्वत: मालिक के पास आएगा। वह पट्टे पर लगाई गई भूमि को बिक्री, उपहार, बंधक आदि जैसे उपयोगों के लिए दे सकता है।
  2. हालांकि, इससे खेती करने वाले के अधिकारों का हनन नहीं होना चाहिए यानि पट्टे की अवधि तक भूमि पर किसानी करने का अधिकार किसान का ही होगा। वो सभी प्रकार के कर और उपकर देने के लिए भी ज़िम्मेदार होगा।
  • किसान के अधिकार और ज़िम्मेदारियां
  1. किसान, जिसे भूमि पट्टे पर दी गई है, वह भूमि के प्रयोग के सभी अधिकारों में अनिर्बंध होगा। वो भूमि को सिर्फ़ कृषि और संबंधित गतिविधियों के लिए ही उपयोग में ला सकता है।
  2. वो आगे इसे पट्टे पर नहीं दे सकता। वो पट्टे पर ली गई भूमि को गिरवी रखे बिना ही बैंक और वित्तीय संस्थाओं से लोन ले सकता है। यदि किसान किसी प्रकार का सुधार या जुड़नार करता है तो वो ज़मींदार से मुआवज़ा ले सकता है। पट्टे समझौते में दर्ज समयावधि के अंदर-अंदर उसे भूमि मालिक को ज़मीन सौंपने का भी अधिकार होगा।
  • पट्टे का समापन

पट्टा समझौता निम्नलिखित आधार पर समाप्त किया जा सकता है: (क) यदि किसान तीन महीने की रियायत अवधि तक पट्टे की रकम का भुगतान करने में असमर्थ है (ख) समझौते में भूमि के उपयोग के लिए दर्ज शर्तों के अतिरिक्त अन्य उद्देश्य के लिए भूमि का प्रयोग करना (ग) पट्टे पर ली गई ज़मीन को पट्टे पर देने पर या किसान द्वारा भूमि को क्षति पहुंचाए जाने पर।

  • विवाद समाधान

किसान और भूमि मालिक अपने बीच उठे विवाद को तीसरी पार्टी की मध्यस्थता के ज़रिए हल कर सकते हैं या ग्राम पंचायत और ग्राम सभा में भी इसका फ़ैसला कर सकते हैं। यदि तीसरी पार्टी की मध्यस्थता से विवाद नहीं सुलझता है तो भूमि मालिक या किसान, समान पद वाले तहसिलदार और राजस्व अधिकारी के समक्ष याचिका दायर कर सकते हैं। उसे चार हफ़्तों में विवाद को सुलझाना होगा। ऐसे मामलों में, कलेक्टर या जिला मजिस्ट्रेट को भी अपील की जा सकती है।

  • विशेष भूमि न्यायाधिकरण

राज्य सरकारें एक विशेष भूमि न्यायाधिकरण का गठन करेंगी जो कि प्रतिरूप अधिनियम के अधीन आने वाले मामलों को हल करने वाला अंतिम प्राधिकरण होगा। इसकी अध्यक्षता सेवानिवृत्त हाई कोर्ड या जिला कोर्ट के न्यायाधीश करेंगे। प्रतिरूप अधिनियम के अधीन के मामलों पर किसी भी नागरिक कोर्ट का अधिकारक्षेत्र नहीं होगा।

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अब हम पहले विषय के विस्तार को विराम देंगे और अगले विषय यानि, प्रतिरूप दुकानें और स्थापना विधेयक, 2016 टॉपिक के बारे में चर्चा करेंगे।

प्रतिरूप दुकानें और स्थापना विधेयक, 2016

इस विधेयक का नाम प्रतिरूप दुकानें और स्थापना (रोज़गार और सेवा की शर्तों का नियंत्रण) विधेयक, 2016 है। यह मज़दूर और रोज़गार मंत्रालय के अधीन आता है। कैबिनेट ने इस बिल पर विचार कर कहा कि यह विधेयक उन राज्यों में भेजा जाएगा जो इस विधेयक के ज़रिए या उस विशिष्ट राज्य की ज़रूरतों के अनुसार उसके प्रावधानों को संशोधित कर अपने व्यक्तिगत अधिनियमों को संशोधित करेंगे।

उद्देश्य

प्रतिरूप विधेयक के निम्नलिखित उद्देश्य हैं:

  • श्रमिकों की कामकाजी परिस्थितियों में सुधार करना
  • महिलाओं के लिए अधिक रोज़गार के अवसर प्रदान करना
  • व्यवसाय करने के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करना

यह प्रतिरूप विधेयक, विधायी प्रावधानों में एकरूपता लाएगा जिससे सभी राज्यों के लिए इसे अपनाना आसान हो जाएगा और देशभर में कामकाजी परिस्थितियां अनुकूल हो सकेंगी और व्यवसाय कर रोज़गार के अवसरों को पैदा करना आसान होगा।

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विधेयक की मुख्य विशेषताएं

श्रमिक अधिकार और कल्याण के उपाय

  • श्रमिकों के छुट्टियों में भी भुगतान – 18 दिन की छुट्टियों का भुगतान, 8 दिनों की सामान्य छुट्टियां, साप्ताहिक अवकाश, 5 त्योहारों का अवकाश औऱ राष्ट्रीय अवकाश।
  • अत्यधिक कुशल श्रमिकों (IT, बायोटेक और R&D) को 9 घंटे के दैनिक काम के घंटे और साप्ताहिक कार्य के 48 घंटों से छूट दी जाएगी। हालांकि, ये प्रावधान एक क्वॉर्टर में 125 घंटे से अधिक काम करने वाले कुशल श्रमिकों के लिए है।
  • IT सेक्टर में अंतर्राष्ट्रीय ग्राहकों को सेवा देने वाले प्रतिष्ठानों को सक्षम करेगा।
  • प्रतिष्ठानों में साफ़ और स्वच्छ पीने का पानी का प्रावधान होगा।
  • कर्मचारियों के समूह द्वारा आम शौचालय, कैंटीन और प्राथमिक चिकित्सा आदि का प्रावधान। यह तब लागू होगा जब व्यक्तिगत प्रतिष्ठान इन सुविधाओं को उपलब्ध नहीं करा सकते या अन्यथा।
  • कर्मचारियों द्वारा श्रमिकों के लिए सुरक्षा और स्वास्थ्य के पर्याप्त तरीकों के अनुसार नियम बनाने के लिए सरकार की मदद करना।

महिलाओं के लिए प्रावधान

  • भर्ती, प्रशिक्षण, पदोन्नति या स्थानांतरण के मामले में महिलाओं के खिलाफ भेदभाव मान्य नहीं होगा। यदि प्रतिष्ठानों में निवास, रेस्टरूम, महिला शौचालय, परिवहन और उनके सम्मान की पर्याप्त सुरक्षा जैसी सुविधाएं हैं तो महिलाओं को रात की पाली में कार्य करने की अनुमति होगी।
  • इससे कार्य क्षेत्रों में लिंग समता बढ़ेगी और महिलाओं द्वारा झेला जाने वाला सुरक्षात्मक भेदभाव भी खत्म होगा। प्रतिष्ठानों द्वारा सुरक्षा और बेहतर कार्य परिस्थितियां प्रदान की जानी चाहिए। रात में घर के लिए वाहन उपलब्ध कराने जैसी सुविधाएं भी प्रदान की जानी चाहिए।

व्यवसाय

  • सिर्फ़ वही दुकानें और प्रतिष्ठान इसके अधीन आते हैं जिनमें 10 या उससे अधिक कर्मचारी कार्य करते हैं। इसमें निर्माण इकाईयां नहीं आतीं। इसमें बैंक, स्टॉक, मध्यस्थता, पत्रकारिता या प्रेस कार्य, सिनेमा हॉल, मॉल, दुकानें, गोदाम, बार, रेस्त्रां आदि इसके अधीन आते हैं। प्रतिष्ठानों को 365 दिनों तक संचालित करते और खुलने व बंद होने का समय स्वयं निर्धारित करने की छूट प्रदान करता है।
  • 24X7 तक संचालित होने का प्रावधान ग्राहकों को सुविधा देने के लिए और रीटेल मार्केट को देशभर में बढ़ावा देने के लिए किया गया है। कार्य करने के घंटों में बढ़ोतरी से अतिरिक्त रोज़गार अवसर बढ़ेंगे। रीटेल, IT, हॉस्पिटैलिटी और सेवा सेक्टर में नौकरियां बढ़ेंगी।
  • एक समान ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया की स्थापना की जाएगा। सभी राज्यों / UTs में कानूनी प्रावधानों में समानता आएगी। इससे प्रतिष्ठानों में HR और अवकाश नीतियों में समानता को संचालित हो सकेगी।
  • इससे राज्यों में शासन और व्यवसाय करने में आसानी की प्रतियोगिता बढ़ेगी।

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4 REPLIES

  1. V k vishwas

    सर क्या वैकल्पिक विषय के प्रश्न अंग्रेज़ी मे आते है हिन्दी मिडीयम वालों के लिये और क्या हिन्दी मिडियम के विद्यार्थी के लिये अंग्रेज़ी मिडियम से तैयारी करना उचित होगा।?

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    1. OnlineTyari Team Post author

      सिर्फ भाषागत विषय को छोड़कर समस्त विषय के पेपर दृभाषी माध्यम (अंग्रेजी/हिंदी) के तहत पूछे जाते हैं. आप दोनों में से किसी भी भाषा का चयन कर सकते हैं. आपने जिस भाषा का चयन किया है आप समस्त प्रश्न पत्र का उत्तर भी उसी भाषा में देंगे और आप साक्षात्कार भी उसी भाषा में देंगे.
      आप जिस भाषा माध्यम में अपने विचारों को व्यक्त करने में सहज महसूस करते हैं, आप उसी माध्यम से अपने प्रश्न पत्र हल करें. अपना ध्यान तैयारी में दें, भाषा के विवाद में न उलझे.

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  2. SANTOSH KUMAR

    Sir kya mujhe 5mah tayari kiye ho gye he kya mujhe 18 june vaala test dene ke liye Jana chahiye ya nahi

    Reply
    1. OnlineTyari Team Post author

      यह आपके और आपकी तैयारी के ऊपर है. यदि आप सिर्फ पेपर को देखने और परीक्षा हाल में पेपर के दौरान पड़ने वाले दबाव को समझने के लिए जा रहे हैं, तो अवश्य जाएं. पांच माह में आपने कितनी तैयारी कर ली है और आपका ज्ञान स्तर कैसा है यह जांचने के लिए आप ऑनलाइन मॉक टेस्ट पेपर या किसी कोचिंग का टेस्ट पेपर दे कर देख सकते हैं. उससे आप अपनी तैयारी स्तर को जांच पाएंगे.

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