IAS प्रारंभिक परीक्षा 2017 के लिए महत्वपूर्ण बिल और संशोधन: मर्चेंट नौ-परिवहण बिल और बेनामी लेनदेन (निषेध) संशोधन अधिनियम, 2016

IAS प्रारंभिक परीक्षा 2017 के लिए महत्वपूर्ण बिल और संशोधन : संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) इस वर्ष 18 जून 2017 को सिविल सेवा की प्रारंभिक परीक्षा का आयोजन करेगा। ये देश की सबसे प्रतिष्ठित और कठिन परीक्षा है। इस परीक्षा में कुल आवेदन भरने वालों में मात्र 0.1-0.3 फ़ीसद के दर से पास होने वाले उम्मीदवारों की इस परीक्षा को पास करना बहुत मुश्किल है।

Crucial Bills And Amendments for IAS Prelims 2017 Model Shops and Establishments Bill, Merchant Shipping Bill

ये लेख कुछ बहुत महत्वपूर्ण बिल और संशोधन के बारे में बताएगा जो कि आपको आपकी आगामी परीक्षा में बहुत सहायक होंगे।

 

IAS प्रारंभिक परीक्षा 2017 के लिए महत्वपूर्ण बिल और संशोधन : मर्चेंट नौ-परिवहण बिल और बेनामी लेनदेन (निषेध) संशोधन अधिनियम, 2016

आज हम अगले दो बिलों पर चर्चा करेंगे। उल्लेख किया गया है कि अगले दो विषयों के विवरण हैं- ‘मर्चेंट नौ-परिवहण बिल और बेनामी लेनदेन (निषेध) संशोधन अधिनियम, 2016’।

मर्चेंट नौ-परिवहण बिल

इस विधेयक का नाम मर्चेंट नौ-परिवहण बिल, 2016 है। यह नौ-परिवहण मंत्रालय के अधीन आता है जो अभी विचाराधीन है।

उद्देश्य

  • यह विधेयक नौ-परिवहण सेक्टर में व्यवसाय को आसान बनाने और भारतीय तटीय जहाज़ों का विकास करने के उद्देश्य से लाया गया है।
  • यह विधेयक मर्चेंट नौ-परिवहण अधिनियम, 1958 को निरस्त करता है साथ ही, तटीय पोत अधिनियम, 1838 के निरसन की बात करता है।
  • इसका उद्देश्य मर्चेंट नौ-परिवहण से संबंधित कानून को मज़बूत करना और संशोधित करना है ताकि समुद्री संधियों और अंतर्राष्ट्रीय उपकरणों के अधीन भारत के दायित्वों का अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके और साथ ही, राष्ट्रहित में व्यापारी बेड़े की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

विधेयक की मुख्य विशेषताएं

विधेयक की कुछ मुख्य विशेषताएं जो शामिल की गई हैं, वे इस प्रकार हैं:

  1. तटीय नौ-परिवहण के भारतीय टनभार के विकास की वृद्धि, निम्नलिखित तरीकों द्वारा करना:
  • वास्तव में स्वामित्व पोत और पोत को “बेयर – बोट- कम-डिमाइस” (BBCD), भारतीयों के चार्टर को भारतीय ध्वज पोत के रूप में पंजीकृत करना।
  • भारतीय नियंत्रित टलभार को एक अलग श्रेणी के रूप में मान्यता देना।
  • तटीय ऑपरेशन और कस्टम अधिकारियों द्वारा पोर्ट निकासी के लिए भारतीय ध्वज पोत को लाइसेंस जारी कराने की ज़रूरतों का वितरण करना, और
  • तटीय पोत का विकास करने और तटीय नौ-परिवहण का प्रचार करने के लिए अलग नियम तैयार करना।

IAS All India Prelims Test Series

ओरिएंट आईएएस ऑल इंडिया आईएएस प्रीलिम्स टेस्ट सीरीज 2017

IAS परीक्षाओं की तैयारी हेतु अग्रणी संस्थान ओरिएंट आईएएस द्वारा ‘ऑल इंडिया आईएएस प्रीलिम्स टेस्ट सीरीज 2017’ को तैयार किया गया है। इस पुस्तक में 100 प्रश्नों वाले 16 टेस्ट सीरीज IAS प्रारंभिक परीक्षा के अनुरूप तैयार किए गए हैं। टेस्ट सीरीज में परम्परागत प्रश्न के साथ-साथ नवीन समसामयिकी को भी सम्यक स्थान दिया गया है। अभ्यर्थियों में उत्तर लेखन विकसित करने हेतु प्रत्येक प्रश्न का विश्लेषण सहित व्याख्यात्मक हल भी प्रदान किया गया है।

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  1. नाविकों के लिए कल्याणकारी उपायों तैयार करना जैसे :
  • समुद्री डाकुओं की कैद में बंधक कैद में रहे नाविकों को उनकी मजदूरी प्राप्त होगी जबतक वे छूट नहीं जाते और सुरक्षित घर नहीं पहुंच जाते।
  • पोत के मालिक अनिवार्य रूप से मछली पकड़ने, नौकायन के यांत्रिक साधनों के बिना प्रणोदन करने और जिसका शुद्ध टरभार 15 से कम है, में लगे चालक दल का इंश्योरेंस लेंगे।
  • शिपिंग मास्टर से पहले चालक दल द्वारा समझौते के लेखों पर हस्ताक्षर अब ज़रूरी नहीं होंगे।
  1. पोत की कुछ अवशिष्ट श्रेणियां जो किसी विधि के अधीन नहीं हैं और सुरक्षा-संबंधी पहलुओं पर प्रावधान बनाना।
  2. भारतीय कानून में सात विभिन्न सम्मेलनों से संबंधित प्रावधानों को लगाते हुए अप-टु-डेट कर, सभी अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संस्थानों सम्मेलनों / प्रोटोकॉल का निगमन करना। वे सात विभिन्न सम्मेलन इस प्रकार हैं:
  • हस्तक्षेप सम्मेलन, 1969
  • खोज और बचाव सम्मेलन, 1979
  • जहाज़ों द्वारा प्रदूषण की रोकथाम के लिए प्रोटोकॉल अनुबंध VI से समुद्री प्रदूषण सम्मेलन तक
  • जहाज़ों को स्थिर रखने वाले पानी और तलछट के नियंत्रण और प्रबंधऩ के लिए सम्मेलन, 2004
  • नैरोबी मलबा हटाने से संबंधित सम्मेलन, 2007
  • रक्षिक सम्पत्ति सम्मेलन, 1989
  • बंकर तेल प्रदूषण क्षति के लिए अंतर्राष्ट्रीय सम्मलेन, 2001

5. इसके अलावा, मौजूदा अधिनियम के विभिन्न भागों में बिखरे, पोत के सर्वेक्षण, जांच और प्रमाणन के लिए प्रावधान एक जगह एकत्रित किए गए हैं ताकि भारतीय नौ-परिवहण उद्दोग की सुविधा के लिए सहज शासन प्रदान किया जा सके।

बेनामी लेनदेन (निषेध) संशोधन अधिनियम, 2016

इस विधेयक का नाम बेनामी लेनदेन (निषेध) संशोधन विधेयक, 2015 है। यह कानून और न्याय मंत्रालय के अधीन आता है जो कि पास किया जा चुका है।

उद्देश्य

इस विधेयक के निम्नलिखित उद्देश्य हैं:

  • बेनामी लेनदेन अधिनियम, 1988 को संशोधित करना।
  • बेनामी लेनदेन की परिभाषा संशोधित करना।
  • निर्णायक प्राधिकरण औऱ अपीलीय न्यायाधिकरण की स्थापना करना ताकि बेनामी लेनदेन का निवारण किया जा सके।
  • बेनामी लेनदेन में संलिप्त पाए जाने पर दंड निर्धारित करना।

IAS Prelims Mock Test Series 2017

क्रॉनिकल ऑल इंडिया आईएएस प्रीलिम्स टेस्ट सीरीज 2017

क्रॉनिकल प्रकाशन सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी के लिए एक जाना हुआ नाम है। प्रत्येक वर्ष काफी प्रश्न इसकी पुस्तकों से पूंछे जाते हैं।ऑल इंडिया आईएएस प्रीलिम्स टेस्ट सीरीज 2017’ इसी श्रेणी में एक अन्य पुस्तक हैं जो IAS परीक्षा 2017 को ध्यान में रखकर तैयार तैयार किया गया है। इस पुस्तक में NCERT आधारित, विषय विशेष और समसामयिकी आधारित टेस्ट पेपर रखा गया है और प्रत्येक टेस्ट सीरीज में 100 प्रश्न सम्मिलित किये गए है।

सामान्य अध्ययन पेपर-I के 9 टेस्ट और सीसेट पेपर-II के 5 टेस्ट भी सम्मिलित किये गए है। अभ्यर्थी में उत्तर लेखन विकसित करने हेतु प्रत्येक प्रश्न का विश्लेषण सहित व्याख्यात्मक हल भी प्रदान किया गया है।

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IAS Prelims All India Test Series 2017

क्रॉनिकल सिविल सर्विसेज करंट अफेयर मॉक टेस्ट सीरीज 2017

यह मॉक टेस्ट सीरीज IAS प्रीलिम्स 2017 के नवीनतम परीक्षा पैटर्न पर आधारित है और आईएस 2017 में प्रतिभाग करने वाले अभ्यर्थीयों के लिए विशेष उपयोगी है। इस ऑनलाइन मॉक टेस्ट सीरीज में आप अपने मोबाइल से भी प्रतिभाग कर सकते हैं और अपनी तैयारी की जांच कर सकते हैं।

सिविल सर्विसेज करंट अफेयर: मॉक टेस्ट सीरीज 2017 की शुरुवात क्रॉनिकल IAS के सहयोग से Online Tyari द्वारा आपको प्रदान किया जा रहा है।

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हाल ही के वर्षों में केंद्र सरकार ने काले घन के नियंत्रण के लिए कई कदम उठाए औऱ प्रस्तावित विधान उसमें से एक है। यह काले धऩ के खतरे का सामना करने के उद्देश्य से बनाया गया है जिससे कानून का भय हो सके। हालांकि, यह कानून किसी बेनामी संपत्ति के लिए नहीं है जो कि इसके अधीन देश से बाहर है क्योंकि इसे काला धन ही समझा जाएगा।

विधेयक की मुख्य विशेषताएं

  • यह विधेयक बेनामी लेनदेन को उस लेनदेन के रूप में परिभाषित करता है जिसमें संपत्ति किसी व्यक्ति द्वारा आयोजित या किसी व्यक्ति को स्थांनांतरित की गई लेकिन वह किसी अन्य व्यक्ति द्वारा प्रदान की गई या चुकाई गई हो।
  • यह विधेयक इस परिभाषा को संशोधित करता है उन लेनदेन के लिए भी जो बेनामी कहलाने के योग्य हैं जैसे संपत्ति लेनदेन जहां (क) लेनदेन काल्पनिक नाम से किया गया हो (ख) मालिक को संपत्ति के स्वामित्व के अस्वीकार करने के ज्ञान के बारे में नहीं पता है, या (ग) संपत्ति के स्वामित्व का दावा करने वाला व्यक्ति अनुरेखणीय नहीं है।
  • यह विधेयक कुछ मामलों को भी परिभाषित करता है जो कि बेनामी लेनदेन की परिभाषा से बाहर होंगे। इनमें वे मामले शामिल हैं जब संपत्ति (क) एक हिंदू अविभाजित परिवार के सदस्य की हो और वह उसके या अन्य परिवार के सदस्य के लाभ के लिए रखी गई हो और या तो वह प्रदान की गई हो या उस परिवार के आय के स्रोतों से उसका भुगतान किया जा रहा हो, (ख) एक ज़िम्मेदार व्यक्ति की हो (ग) एक व्यक्ति के पति/पत्नी या बच्चे के नाम पर हो और संपत्ति का भुगतान उस व्यक्ति की आय से हो।
  • यह विधेयक बेनामीदार को ऐसे व्यक्ति के रूप में परिभाषित करता है जिसके नाम पर बेनामी संपत्ति स्थानांतरित की गई है औऱ लाभार्थी मालिक को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में परिभाषित करता है जिसके लिए बेनामी संपत्ति बेनामीदार द्वारा रखी गई थी।
  • यह विधेयक ऐसे अपीलीय न्यायाधिकरण के स्थापना की बात करता है जिसमें निर्णायक प्राधिकरण द्वारा पास किए गए किसी भी आदेश के खिलाफ़ अपील की जा सके। अपीलीय न्यायाधिकरण के खिलाफ़ की गई अपील उच्च न्यायलय के अधिकारक्षेत्र में आएगी।
  • अधिनियम के तहत्, बेनामी लेनदेन में संलिप्त पाए जाने पर 3 साल की जेल का प्रावधान या जुर्माना या दोनों ही है। यह विधेयक इस दंड में एक साल से सात साल तक की कड़ी जेल और बेनामी संपत्ति के मार्केट मूल्य पर 25 फीसद का जुर्माना लगाकर इसमें परिवर्तन करना चाहता है।
  • ग़लत जानकारी देने के लिए भी यह विधेयक दंड निर्धारित करता है – 6 महीनों से लेकर 5 साल तक की जेल और बेनामी संप्तित पर मार्केट मूल्य का 10 फीसद जुर्माना।
  • कुछ सत्र अदालतों को विशेष अदालत के रूप में नामित किया जाएगा किसी भी ऐसे अपराध के लिए जो कि विधेयक के अनुसार दंडनीय होंगे।

 

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भारतीय अर्थव्यवस्था: सिविल सेवा परीक्षा के लिए सफल मार्गदर्शिका – रमेश सिंह

अपने ज्ञान में विस्तार के लिए और सिविल सेवा परीक्षाओं में भारतीय अर्थव्यवस्था की तैयारी के लिए रमेश सिंह द्वारा लिखित और MC Graw Hill द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक का अध्ययन अवश्यक है। सामान्य अध्ययन के कौशल को विकसित करने में भी यह पुस्तक सहायक है और इसमें सिविल सेवा परीक्षाओं के पाठ्यक्रम के तहत अध्याय और सामग्री का संकलन किया गया है जिससे अभ्यर्थी को परीक्षा में सफलता पाना सरल हो जाएगा।

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भारत का भूगोल पुस्तक में भारतीय भूगोल का विहंगम अध्ययन किया गया है। इस पुस्तक में भौगोलिक संरचना, नदी, मरुस्थल, पहाड़ और पठार, पहाड़ी श्रृंखला, नहर, कृषि, अभ्यारण, खनिज, उर्जा स्त्रोत, जलवायु, मिट्टी, राजनीतिक-भूगोल, भौगोलिक-संकृति आदि विषयों पर कवर किया गया है। यह पुस्तक सरल भाषा में सम्पूर्ण सिविल सर्विस परीक्षा के पाठ्यक्रम को कवर करती है इसलिए यह पुस्तक सभी हिंदी माध्यम से तैयारी करने वाले छात्रों के लिए विशेष उपयोगी बन गई है।

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