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CTET परीक्षा 2018: प्रयास एवं त्रुटि सिद्धांत को समझना

CTET परीक्षा 2018 के लिए प्रयास एवं त्रुटि सिद्धांत को समझना: केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET 2018) का आयोजन, केंद्र सरकार के स्कूलों जैसे-NVS/KVS/तिब्बती विद्यालय में उम्मीदवारों की शिक्षक के रूप में भर्ती के लिए, केन्द्रीय माध्यमिक माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा किया जाता है। यह प्रत्येक वर्ष आयोजित होने वाली एक अखिल भारतीय स्तर की प्रवेश परीक्षा है।

CTET 2018 की परीक्षा 9 दिसंबर को आयोजित की जानी है। बहुत से CTET उम्मीदवारों ने इसके लिए तैयारी पूर्ण कर ली होगी और अपने तैयारी की जांच कर रहे होंगे। तो, आइये उनको सबसे महत्वपूर्ण टॉपिक्स में से एक अर्थात समावेशी शिक्षा की अवधारणा सिद्धांत के बारे में आपकी बुनियादी समझ को और विकसित करते हैं।

CTET परीक्षा 2018: प्रयास एवं त्रुटि सिद्धांत को समझना

सीखना तबसे प्रारंभ होता है, जब जीव एक नई और कठिन परिस्थिति-एक समस्या का सामना करता है। सीखते हुए अधिकतर जीव त्रुटियां करते हैं और फिर बार-बार प्रयास करने से त्रुटियां कम होने लगती हैं। इस घटना को साधारण शब्दों में प्रयास एवं त्रुटि का सिद्धांत कहते हैं।

प्रयास और त्रुटि सिद्धांत की विशेषताएं

  • सीखने के लिए, सीखने वाले को निश्चित रूप से प्रेरित होना चाहिए।
  • सीखने वाले को यादृच्छिक रूप से प्रतिक्रिया देनी चाहिए।
  • कुछ प्रतिक्रियाएं लक्ष्य तक ले जाती हैं (कष्टप्रद प्रतिक्रिया) ।
  • कुछ प्रतिक्रियाएं लक्ष्य को जन्म देती हैं(संतोषजनक प्रतिक्रिया)।
  • प्रयासों की बढ़ती संख्या के साथ कष्टप्रद प्रतिक्रियाएं समाप्त होती जायेंगी और संतोषजनक प्रतिक्रियाएं मजबूत होंगी और दोहराई जायेंगी।
  • लगातार प्रयासों के साथ कार्य करने में लिया गया समय कम (संतोषजनक प्रतिक्रिया को पुन: करने में लिया गया समय) हो जाता है।

प्रयास और त्रुटि सिद्धांत सीखने का एक तरीका है जिसमें विभिन्न प्रतिक्रियाओं को करने का प्रयास किया जाता है और समस्या के हल होने तक कुछ को छोड़ दिया जाता है। प्रयास और त्रुटि शिक्षण विधि का पहला लघु परीक्षण 1898 में  थार्नडाइक द्वारा पशु बुद्धि पर किया गया है। सीखने की यह विधि S-R शिक्षण सिद्धांत के अंतर्गत आती है और इसे संयोजनवाद भी कहा जाता है।

प्रयास और त्रुटि सिद्धांत अधिगम पर प्रयोग

(i) थार्नडाइक द्वारा बिल्ली पर प्रयोग

थार्नडाइक ने एक बिल्ली को एक पज़ल-बॉक्स में रखा जिसमें किनारों पर लोहे की छड़ें और एक दरवाजा था जो कि बॉक्स के बीच में ऊपर की ओर झुके हुए लूप को पकड़कर खींचने से खोला जा सकता है। 24 घंटो से भूखी बिल्ली को बॉक्स के बाहर रखी हुई मछली खाने के लिए प्रेरित किया गया। लेकिन दरवाजा कैसे खोला जाए? बिल्ली ने लोहे के काटने के लिए उन पर अपने सिर से प्रहार करके  कई असफल प्रयास किए, और अंत में वह लूप को खींचने में सफल हो गयी।

यह प्रयोग कई बार दोहराया गया और यह पाया गया कि हर सफल प्रयास में बिल्ली को लक्ष्य तक पहुंचने में कम समय लगा। इसने पहले सफल प्रयास में 160 सेकंड का समय लिया लेकिन अंतिम प्रयास में केवल कुछ सेकंड का ही समय लिया।

(ii) लॉयड मॉर्गन द्वारा कुत्ते पर प्रयोग:

कुत्ते को एक लोहे के पिंजरे में रखा गया, जिसका दरवाजा स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रहा था। कुत्ते ने दरवाजे को खोजने से पहले कई प्रयास किए।

(iii)  मैक डगल द्वारा चूहे पर प्रयोग:

चूहों को भी इसी प्रकार गोपनीय मार्ग वाले एक छोटे से बॉक्स में रखा गया। 165 बार गलती करने के बाद, वे सही मार्ग खोजने में सफल हो गये।

(iv) मछली पर प्रयोग:

थार्नडाइक ने फंडुलस(एक प्रकार की मछली जो छाया में रहती है) को एक कांच के पार्टीशन वाले एक्वेरियम में रखा और जिसके एक भाग पर सूर्य की रोशनी पर रही थी। पार्टीशन में एक छोटा सा छेद था। पहले उन्हें छाया में रखा गया और फिर सूर्य की रोशनी में। सूर्य से बचने के लिए, मछलियों ने छाया वाले रास्ते को खोजने के कई प्रयास किये, तब तक कि उन्होंने रास्ता खोज नहीं लिया। इस प्रयोग को दोहराया गया, और यह पाया गया कि बाद के प्रयोगों में, असफल प्रयासों की संख्या धीरे-धीरे कम हो गई।

शब्द “प्रयास और त्रुटि सिद्धांत अधिगम” का तब प्रयासों की बढ़ती संख्या से त्रुटि में कमी के रूप में प्रयोग किया गया।

शैक्षणिक प्रभाव:

आमतौर पर प्रयास और त्रुटि अधिगम, मोटर अधिगम के साथ जुड़ा हुआ है। लेकिन अमूर्त सोच के लिए इसके कुछ प्रभाव भी हैं। कुछ स्कूल विषय जिनके लिए अमूर्त विचारों की आवश्यकता होती है, जैसे विज्ञान और गणित, इस प्रक्रिया से प्रभावित होते हैं। वांछित परिणाम आने से पहले विद्यार्थियों को कई असफल प्रयास करने होते हैं। इसीलिए, उन्हें बार-बार प्रयास करने के लिए, बिना बोर हुए, प्रशिक्षित किया जाना चाहिए। स्कूल के लड़कों का आदर्श वाक्य होना चाहिए-“प्रयास, प्रयास, फिर से प्रयास”। प्रयास और त्रुटि अधिगम सिद्धांत के महत्वपूर्ण शैक्षणिक प्रभाव इस प्रकार हैं:

  • थार्नडाइक का सिद्धांत सीखने की प्रक्रिया में प्रेरणा के महत्त्व पर बल देता है। इसीलिए सीखना उद्देश्यपूर्ण और लक्ष्य निर्देशित होना जाना चाहिए।
  • यह मानसिक तत्परता, अर्थपूर्ण अभ्यास और सीखने की प्रक्रिया में प्रोत्साहन के महत्व पर बल देता है।
  • तत्परता का नियम यह दर्शाता है कि शिक्षक को विषय को पढ़ाने से पहले छात्रों के मन को ज्ञान, कौशल और योग्यता को स्वीकार करने के लिए तैयार करना चाहिए।
  • प्रभावशीलता को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए, कक्षा में प्राप्त होने वाले ज्ञान का उपयोग और उसे दोहराने के अधिक से अधिक अवसर दिए जाने चाहिए।
  • “लॉ ऑफ़ इफ़ेक्ट” ने शिक्षा में प्रेरणा और सुदृढीकरण के महत्व पर ध्यान दिया है।
  • सीखे गए कार्य को लंबे समय तक ध्यान में रखने के लिए, शिक्षण सामग्री की समीक्षा करना आवश्यक है।
  • सीखने की प्रक्रिया में संपर्क विधि का लाभ उठाने के लिए, किसी भी स्थिति में जो कुछ भी सिखाया जा रहा है, उसे सीखने वाले के पिछले अनुभव से जोड़ना चाहिए।

यहां हम अपने इस लेख को समाप्त करते हैं और उम्मीद करते हैं कि यह लेख आगामी परीक्षा की तैयारी करने में आपकी सहायता करेगा।

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