CTET परीक्षा 2018 : ब्लूम के वर्गीकरण – संज्ञानात्मक डोमेन

CTET परीक्षा 2018 : ब्लूम के वर्गीकरण – संज्ञानात्मक डोमेन : केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET) का आयोजन, केंद्र सरकार के स्कूलों जैसे-NVS/KVS/तिब्बती विद्यालय में उम्मीदवारों की शिक्षक के रूप में भर्ती के लिए, केन्द्रीय माध्यमिक माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा किया जाता है। यह प्रत्येक वर्ष आयोजित होने वाली एक अखिल भारतीय स्तर की प्रवेश परीक्षा है।

CTET परीक्षा 2018 की अधिसूचना के कुछ दिनों में आने की उम्मीद है। बहुत से CTET उम्मीदवारों ने इसके लिए तैयारी करना प्रारंभ कर दिया है। तो, आइये उनको सबसे महत्वपूर्ण टॉपिक्स में से एक अर्थात ब्लूम के वर्गीकरण : संज्ञानात्मक डोमेन के बारे में समझाकर सहायता करते हैं।

 

CTET परीक्षा 2018 : ब्लूम के वर्गीकरण – संज्ञानात्मक डोमेन

शैक्षिक प्रणाली का लक्ष्य विद्यार्थी का सर्वांगीण विकास करना हैं। कक्षा अध्यापक के लिये व्यावहारिक रुप में इन लक्ष्यों की पूर्ण प्राप्ति लगभग असम्भव सी हैं यदि वह इन लक्ष्यों का विश्लेषण नहीं कर लेता।

बी0एस0 ब्लूम की निम्नलिखित परिभाषा से शैक्षिक उद्देश्यों का अर्थ अधिक स्पष्ट रुप में समझा जा सकता हैं-

“शैक्षिक उद्देश्यों की सहायता से केवल पाठ्यक्रम की रचना और अनुदेशन के लिये निर्देशन ही नहीं दिया जाता अपितु ये मूल्यांकन की प्रविधियों के विशिष्टीकरण में भी सहायक होते हैं।”

सीखने के तीन प्रकार

सीखने के एक से अधिक प्रकार हैं। बेंज़ामिन ब्लूम (1956) के नेतृत्व में, कॉलेजों की एक समिति ने शैक्षिक गतिविधियों के तीन डोमेनों की पहचान की:

  • संज्ञानात्मक: मानसिक कौशल (ज्ञान)
  • भावनात्मक: भावनाओं या भावनात्मक क्षेत्रों में विकास (मनोवृत्ति)
  • साइकोमोटर: मैनुअल या शारीरिक कौशल (कौशल)

डोमेंनों को श्रेणियों के रूप में देखा जा सकता है। प्रशिक्षक अक्सर इन तीन डोमेंनों को केएएसए (नॉलेज, स्किल्स, ऐटिट्यूड) के रूप में संदर्भित करते हैं। सीखने वाले व्यवहारों के वर्गीकरण को “प्रशिक्षण प्रक्रिया के लक्ष्यों” के रूप में देखा जा सकता है। यानि, प्रशिक्षण सत्र के बाद, प्रशिक्षार्थी को नए कौशल, ज्ञान तथा/या मनोवृत्तियां प्राप्त कर लेना चाहिए।

यह संकलन इन तीन डोमेनों को उपविभाजनों में बांटता है, जो सरलतम व्यवहार से आरम्भ होकर अत्यंत जटिल तक हैं। रेखांकित विभाजन निरपेक्ष नहीं हैं तथा शैक्षिक एवं प्रशिक्षण जगत में अन्य प्रणालियां व अनुक्रम (हाइरार्की) विकसित किए गए हैं। लेकिन, ब्लूम का वर्गीकरण आसानी से समझा जा सकता है तथा वर्तमान में व्यवहार में लाए जाने वाले वर्गीकरणों में सम्भवतः सर्वाधिक व्यापक है।

संज्ञानात्मक डोमेन 

संज्ञानात्मक डोमेन (ब्लूम,1956) में ज्ञान तथा बौद्धिक कौशलों का विकास शामिल है। इसमें विशेष तथ्यों का पुनर्स्मरण या पहचान, प्रक्रियागत स्वरूप एवं परिकल्पनाएं शामिल हैं जो बौद्धिक क्षमताओं तथा कौशलों के विकास में मदद करती हैं। कुल छः मुख्य श्रेणियां हैं, जो सरलतम से आरम्भ होकर सबसे जटिल तक के क्रम में नीचे सूचीबद्ध हैं। इन श्रेणियों को कठिनाइयों की कोटियों के रूप में सोचा जा सकता है। यानि, इसके पहले कि दूसरा सीखा जाए, पहले पर महारथ हासिल करनी होगी।

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ब्लूम ने संज्ञात्मक पक्ष को छः वर्गों में विभाजित किया है। यह प्रणाली सरल से जटिल तथा मूर्त से अमूर्त है। यह निम्न हैं-

  1. ज्ञान (Knowledge): ज्ञान में हम विशिष्टताओं का ज्ञान, शब्दावली का ज्ञान, विशिष्ट तथ्यों का ज्ञान, प्रचलन तथा तारतम्य का ज्ञान, पद्धति, सार्वभौमिकता, तथ्यों तथा सामान्यीकरण, सिद्धांतों तथा संरचनाओं का ज्ञान लेते हैं।
  2. बोध(Understanding): बोध में हम अनुवाद, अर्थापन एवं बर्हिवेशन को लेते हैं।
  3. प्रयोग (Application) : वास्तविक परिस्थितियों में प्रत्ययों, तथ्यों एवं सामान्यीकरण का प्रयोग करना।
  4. विश्लेषण (Analysis): इसमें तत्वों का विश्लेषण, संबंधों का विश्लेषण तथा व्यवस्थित सिद्धांतों का विश्लेषण आता है।
  5. संश्लेषण (Synthesis): इसमें तत्वों को नै संरचना में संगठित किया जाता है। विशेष सम्प्रेषण की उत्पत्ति, योजना का निर्माण, अमूर्त संबंधों के विन्यास द्वारा व्युत्पत्ति आदि लेते हैं।
  6. मूल्यांकन (Evaluation): इसमें विशिष्ट उद्देश के लिए सन्दर्भ सामग्री का मूल्य निर्धारण करते हैं। इसमें आतंरिक प्रमाण के सन्दर्भ में निर्णय तथा वाह्य प्रमाण के सन्दर्भ में निर्णय लिया जाता है।

ब्लूम डोमेन का संशोधित वर्गीकरण

लॉरिन एंडरसन, ब्लूम के एक पूर्व छात्र, ने नब्बे के दशक के मध्य में सीखने के वर्गीकरण में संज्ञानात्मक डोमेन पर दोबारा गौर किया और कुछ परिवर्तन किए जिनमें से सम्भवतः दो सबसे बड़े परिवर्तन थे- 1) छ: श्रेणियों में नामों को संज्ञा से क्रिया रूपों में बदलना, एवं 2) उनमें कुछ फेरबदल करना।

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शिक्षक लक्ष्य और लक्ष्य तक पहुँचने के लिए आवश्यक कौशल को परिभाषित करने के बाद, शिक्षक कार्य या असाइनमेंट का एक सेट तैयार करेगा, पूरा पाठ एक विशिष्ट लक्ष्य के साथ या कार्य को पूरा करने के लिए आवश्यक एक नया कौशल सीखने पर केंद्रित होगा।

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