UPSC सिविल सेवा मुख्य परीक्षा 2017 : वैकल्पिक विषय दर्शनशास्त्र की रणनीति

UPSC सिविल सेवा मुख्य परीक्षा 2017 : वैकल्पिक विषय दर्शनशास्त्र की रणनीति- विदित हो की सिविल सेवा की प्रारंभिक परीक्षा 18 जून को देश भर में आयोजित की गई, इस परीक्षा में सफल रहने वाला छात्र परीक्षा के दूसरे चरण ‘मुख्य परीक्षा’ के लिए अपनी जगह बनाएंगे। प्रारंभिक परीक्षा में सफल होने वाले उम्मीदवारों को सामान्यतः अक्तूबर से नवंबर माह के दौरान IAS मुख्य परीक्षा देने के लिये आमंत्रित किया जाएगा।

How to Prepare for IAS Mains Paper

यह ध्यान रखने वाली बात है की जहाँ प्रारंभिक परीक्षा पूरी तरह वस्तुनिष्ठ (MCQ) होती है, वहीं मुख्य परीक्षा वर्णनात्मक (Descriptive) होती है और उसमें अलग-अलग शब्द सीमा वाले प्रश्न पूछे जाते हैं। यही कारण है कि मुख्य परीक्षा में सफल होने के लिये अच्छी लेखन शैली को भी एक महत्त्वपूर्ण योग्यता माना जाता है। प्रारंभिक परीक्षा की प्रकृति जहाँ क्वालिफाइंग होती है, वहीं मुख्य परीक्षा में प्राप्त अंकों को अंतिम मेधा सूची में जोड़ा जाता है। अत: परीक्षा का यह चरण अत्यंत महत्त्वपूर्ण एवं काफी हद तक निर्णायक होता है।

 

UPSC सिविल सेवा मुख्य परीक्षा हेतु वैकल्पिक विषय का महत्त्व 

कई अभ्यर्थी यह सोच सकते हैं कि सामान्य अध्ययन 1000 अंकों का है और वैकल्पिक विषय सिर्फ 500 अंकों का इसलिये अभ्यर्थियों को सामान्य अध्ययन पर ज़्यादा बल देना चाहिये। ऐसा कहने वाले  शायद वैकल्पिक विषय के रणनीतिक महत्त्व को नहीं समझते। इस परीक्षा में यह बात बिल्कुल मायने नहीं रखती कि किसी अभ्यर्थी को कितने अंक हासिल हुए हैं। महत्त्व सिर्फ इस बात का है कि किसी उम्मीदवार को अन्य प्रतिस्पर्द्धियों की तुलना में कितने कम या अधिक अंक प्राप्त हुए हैं। विगत कुछ वर्षों के परीक्षा परिणामों पर नज़र डालें तो आप पाएंगे कि हिंदी माध्यम के लगभग सभी गंभीर अभ्यर्थियों को सामान्य अध्ययन में 325-350 अंक प्राप्त हुए। इसके विपरीत, अंग्रेज़ी माध्यम के गंभीर अभ्यर्थियों को इसमें औसत रूप से 20-30 अंक अधिक हासिल हुए, जबकि वैकल्पिक विषय में लगभग सभी गंभीर अभ्यर्थियों को 270-325 अंक हासिल हुए। इस औसत से वैकल्पिक विषय का महत्त्व अपने आप स्पष्ट हो जाता है। ध्यान रहे कि ये लाभ आपको तभी मिल सकता है जब आपने वैकल्पिक विषय का चयन बहुत सोच-समझकर  किया हो।

हिंदी माध्यम के उम्मीदवार उन्हीं विषयों या प्रश्नपत्रों में अच्छे अंक (यानी अंग्रेज़ी माध्यम के गंभीर उम्मीदवारों के बराबर या उनसे अधिक अंक) ला सकते हैं जिनमें तकनीकी शब्दावली का प्रयोग कम या नहीं होता हो, अद्यतन (Updated) जानकारियों की अधिक अपेक्षा न रहती हो और जिन विषयों पर पुस्तकें और परीक्षक हिंदी में सहजता से उपलब्ध हों।और इस लिहाज से दर्शनशास्त्र विषय का नाम सर्वप्रथम आता है।

इस लेख में हम IAS की मुख्य परीक्षा के लिए वैकल्पिक विषय दर्शनशास्त्र की तैयारी कैसे करें पर पूर्ण जानकारी उपलब्ध कराएंगे। हम कुछ इस परीक्षा से सबंधित कुछ सन्दर्भ पुस्तकों की अनुशंषा भी करेंगे तथा कुछ उपयोगी टिप्स पर चर्चा भी करेंगे।

दर्शनशास्त्र क्यों हैं एक श्रेष्ठ वैकल्पिक विषय !

दर्शनशास्त्र हिंदी माध्यम के विद्यार्थियों के लिए काफी लोकप्रिय वैकल्पिक विषय रहा है। निबंध पत्र के लिए इसकी प्रासंगिकता और उपयोगिता को देखते हुए इसका वैकल्पिक विषय के रूप में महत्त्व और भी बढ़ गया है। वैसे छात्र जिन्हें दर्शन में और साहित्यिक- सामाजिक समस्याओं के गहन अनुशीलन, चिंतन और समाधान खोजने में आनंद आता है और जिनकी भाषा पर अच्छी पकड़ है, वे निस्संकोच इस विषय का चयन कर सकते हैं।

वैकल्पिक विषय का चुनाव एक कठिन प्रक्रिया है और किसी भी नतीजे पर पहुँचने से पहले काफी कुछ विश्लेषण की आवश्यकता होती है। हालांकि, इस चुनाव हेतु कई कारक होते हैं परन्तु किसी वैकल्पिक विषय विशेष के लिये उम्मीदवारों द्वारा दी गई वरीयता और इनकी सफलता दर के बारे में सभी जानने को उत्सुक रहते हैं। निम्न दिए गए तथ्यों से स्पष्ट हो जाएगा की दर्शनशास्त्र हिंदी माध्यम के विद्यार्थियों के लिए क्यों वैकल्पिक विषय के रूप शीर्ष स्थान पर बना हुआ है-

  • यह विषय छोटा, अवधारणात्मक तथा अंकदायी है। यदि आपकी पृष्ठभूमि इस विषय की है तो आपको इसे ज़रूर चुनना चाहिये।
  • अगर आपकी पृष्ठभूमि इस विषय की नहीं है तो यह विषय तभी लिया जाना चाहिये जब आप सूक्ष्म अवधारणाओं को समझने में समस्या महसूस न करते हों।
  • इस विषय से सामान्य अध्ययन में तो मदद नहीं मिलती पर यदि  इस पर आपकी गहरी पकड़ है तो आप इसमें लगभग उतने ही अंक ला सकते हैं जितने हिंदी साहित्य या साहित्य के अन्य विषयों में मिलते हैं।
  • इस विषय में अंकों की स्थिरता कम देखी जाती है अर्थात् अगर आपको इस वर्ष 270 अंक मिले हैं तो संभव है कि वैसी ही तैयारी से अगले वर्ष आपको सिर्फ 220 अंक मिलें। इसलिये यह विषय उन्हें ही लेना चाहिये जिनकी इसमें गहरी पकड़ हो और वे कठिन से कठिन प्रश्नों से भी आसानी से निपट सकें।

 

UPSC सिविल सेवा मुख्य परीक्षा 2017 : वैकल्पिक विषय दर्शनशास्त्र का पाठ्यक्रम  

दर्शनशास्त्र मुख्य रूप से दर्शन का इतिहास एवं समस्याएँ और सामाजिक-राजनैतिक दर्शन एवं धर्म दर्शन में बांटा गया है।पेपर 1 में 20 भाग हैं, जबकि पेपर 2 के 27 भाग हैं। दिए गए दर्शनशास्त्र पाठ्यक्रम 1 और 2 का विस्तृत वर्णन है:

वैकल्पिक विषय दर्शनशास्त्र  प्रश्नपत्र-1 का पाठ्यक्रम

दर्शन का इतिहास एवं समस्याएँ

  1. प्लेटो एवं अरस्तूः प्रत्यय; द्रव्य; आकार एवं पुदगल; कार्यकारण भाव; वास्तविकता एवं शक्यता।
  2. तर्कबुद्धिवाद (देकार्त, स्पिनोजा, लीबनिज): देकार्त की पद्धति एवं असंदिग्ध ज्ञान; द्रव्य; परमात्मा; मन-शरीर द्वैतवाद; नियतत्ववाद एवं स्वातत्र्य।
  3. इंद्रियानुभव (लॉक, बर्कले, ह्यूम); ज्ञान का सिद्धांत; द्रव्य एवं गुण; आत्मा एवं परमात्मा; संशयवाद।
  4. कांटः संश्लेषात्मक प्रागनुभविक निर्णय की संभवता; दिक एवं काल; पदार्थ; तर्कबुद्धि प्रत्यय; विप्रतिषेध; परमात्मा के अस्तित्व के प्रमाणों की मीमांसा।
  5. हीगेलः द्वंद्वात्मक प्रणाली; परमप्रत्यवाद।
  6. मूर, रसेल एवं पूर्ववर्ती विटगेन्स्टीन; सामान्य बुद्धि का मंडन; प्रत्ययवाद का खंडन; तार्किक परमाणवाद; तार्किक रचना; अपूर्ण प्रतीक; अर्थ का चित्र सिद्धांत; उक्ति एवं प्रदर्शन।
  7. तार्किक प्रत्यक्षवाद; अर्थ का सत्यापन सिद्धांत; तत्वमीमांसा का अस्वीकार; अनिवार्य प्रतिज्ञप्ति का भाषिक सिद्धांत।
  8. उत्तरवर्ती विट्गेंस्टीनः अर्थ एवं प्रयोग; भाषा-खेल; व्यक्ति भाषा की मीमांसा।
  9. संवृतिशास्त्र (हर्सल); प्रणाली; सार सिद्धांत; मनोविज्ञानपरता का परिहार।
  10. अस्तित्वपरकतावाद (कीर्कगार्द, सार्त्र, हीडेगर); अस्तित्व एवं सार; वरण, उत्तरदायित्व एवं प्रामाणिक अस्तित्व; विश्वनिसत एवं कालसत्ता।
  11. क्वाइन एवं स्ट्रासनः इंद्रियानुभववाद की मीमांसा; मूल विशिष्ट एवं व्यक्ति का सिद्धांत।
  12. चार्वाकः ज्ञान का सिद्धांत; अतींद्रिय सत्वों का अस्वीकार।
  13. जैनदर्शन संप्रदाय; सत्ता का सिद्धांत; सप्तभंगी न्याय; बंधन एवं मुक्ति।
  14. बौद्धदर्शन संप्रदाय; प्रतीत्यसमुत्पाद; क्षणिकवाद, नैरात्म्यवाद।
  15. न्याय-वैशेषिकः पदार्थ सिद्धांत; आभास सिद्धांत; प्रणाम सिद्धांत; आत्मा, मुक्ति; परमात्मा; परमात्मा के अस्तित्व के प्रणाम; कार्यकारण-भाव का सिद्धांत, सृष्टि का परमाणुवादी सिद्धांत।
  16. सांख्यः प्रकृति; पुरुष; कार्यकारण-भाव; मुक्ति।
  17. योगः चित्त; चित्तवृति; क्लेश; समाधि; कैवल्य।
  18. मीमांसा; ज्ञान का सिद्धांत।
  19. वेदांत संप्रदायः ब्रह्मन; ईश्वर; आत्मन; जीव; जगत; माया; अविद्या; अध्यास; मोक्ष; अपृथक सिद्धि; पंचविधभेद।
  20. अरविन्दः विकास, प्रतिविकास; पूर्ण योग।

वैकल्पिक विषय दर्शनशास्त्र  प्रश्नपत्र-2 का पाठ्यक्रम

सामाजिक-राजनैतिक दर्शन

  1. सामाजिक एवं राजनैतिक आदर्श; समानता, न्याय, स्वतंत्रता।
  2. प्रभुसत्ताः आस्टिन बोदॉ, जास्की, कौटिल्य।
  3. व्यक्ति एवं राज्यः अधिकार; कर्तव्य एवं उत्तरदायित्व।
  4. शासन के प्रकारः राजतंत्र; धर्मतंत्र एवं लोकतंत्र।
  5. राजनैतिक विचारधाराएँ; अराजकतावाद; मार्क्सवाद एवं समाजवाद।
  6. मानववाद; धर्मनिरपेक्षतावाद; बहुसंस्कृतिवाद।
  7. अपराध एवं दंडः भ्रष्टाचार, व्यापक हिंसा, जातिसंहार, प्राणदंड।
  8. विकास एवं सामाजिक उन्नति।
  9. लिंग भेदः स्त्रीभ्रूण हत्या, भूमि एवं संपत्ति अधिकार; सशक्तिकरण।
  10. जाति भेदः गांधी एवं अम्बेडकर।

धर्म दर्शन

  1. ईश्वर की धारणाः गुण; मनुष्य एवं विश्व से संबंध (भारतीय एवं पाश्चात्य)।
  2. ईश्वर के अस्तित्व के प्रमाण और उसकी मीमांसा (भारतीय एवं पाश्चात्य)।
  3. अशुभ की समस्या।
  4. आत्माः अमरता; पुनर्जन्म एवं मुक्ति।
  5. तर्कबुद्धि, श्रुति एवं आस्था।
  6. धार्मिक अनुभवः प्रकृति एवं वस्तु (भारतीय एवं पाश्चात्य)।
  7. ईश्वर रहित धर्म।
  8. धर्म एवं नैतिकता।
  9. धार्मिक शुचिता एवं परम सत्यता की समस्या।
  10. धार्मिक भाषा की प्रकृतिः सादृश्यमूलक एवं प्रतीकात्मक; संज्ञानवादी एवं निस्संज्ञानवादी।

वैकल्पिक विषय दर्शनशास्त्र के लिए अध्ययन सामग्री

दर्शनशास्त्र के साथ सिविल सेवा की तैयारी के लिए इग्नू की बी.ए. एवं एम.ए. दर्शनशास्त्र की पुस्तकें पढ़ें इसके अतिरिक्त आप निम्न पुस्तकों का भी अध्ययन कर सकते हैं-

  • भारतीय दर्शन : सी. डी. शर्मा एवं एच.पी. सिन्हा
  • पश्चात दर्शन :सी. डी. शर्मा एवं वाय मसीह
  • समकालीन पश्चात दर्शन : बी. के. लाल
  • धर्म और दर्शन : वी. पी. वर्मा
  • प्राचीन भारतीय धर्म एवं दर्शन- डॉ शिवस्वरूप सहाय-  मोतीलाल बनारसीदास प्रकाशन
  • भारतीय दर्शन- संपादक- डॉ नन्द किशोर देवराज – उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, लखनऊ
  • भारतीय दर्शन ( दो भागों में )- डॉ राधाकृष्णन -(अनुवादक- नंदकिशोर गोभिल)- राजपाल एंड संस प्रकाशन
  • नीतिशास्त्र के प्रमुख सिद्धांत-डॉ डी आर जाटव- मालिक एंड कंपनी- दिल्ली
  • भारतीय संस्कृति- नरेन्द्र मोहन -प्रभात प्रकाशन- नयी दिल्ली

विस्तृत अध्ययन हेतु- (पुस्तकालय की मदद से)
दर्शन दिग्दर्शन – राहुल सांकृत्यायन- किताबघर प्रकाशन
भारतीय दर्शनशास्त्र का इतिहास –  जयदेव वेदालंकार – न्यू भारतीय बुक कारपोरेशन- नयी दिल्ली
(मध्यकालीन आचार्यों का दर्शन – आचार्य शंकर, रामानुज, आचार्य मध्व, बल्लभ और चैतन्य दर्शन )
भारतीय दर्शन का इतिहास (५ खंडो में )- डॉ सुरेन्द्रनाथ गुप्ता- राजस्थान हिंदी ग्रन्थ अकादमी द्वारा अनुदित एवं प्रकाशित
भारतीय दर्शन की मूलगामी समस्याएँ- नारायण शास्त्री द्रविड़- विश्वविद्यालय प्रकाशन, सागर

 

IAS मुख्य परीक्षा के वैकल्पिक विषय दर्शनशास्त्र के अध्ययन की रणनीति 

वैकल्पिक विषय की तैयारी करते हुए यह बात ध्यान में रखे की आपके सिलेबस तैयार करना है और पूरी समझ के साथ, रट्टा मरकर नहीं। साथ-ही-साथ इस बात का भी ध्यान रखे की ज्ञान अनंत और अथाह है। ज्ञान प्राप्ति के लिए हम जीवन भर पढ़ सकते हैं और पढ़ते रहेंगे। अपना सारा ध्यान अभी चिड़िया की आंख अर्थात सिविल सेवा में अच्छे रैंक के साथ सफलता पाने पर लगाये। किताबों पर नहीं टॉपिक पर अपना ध्यान केन्द्रित करें। जब आप सारे टॉपिक कुछ चुनिन्दा स्तरीय पुस्तकों से तैयार कर लेते हैं तो फिर अन्य स्तरीय पुस्तकों से दुहराते हुए कोई नयी बात मिलने पर उसे नोट कर ले।

जब आप वैकल्पिक विषय की तैयारी करें, तो सर्वप्रथम किताबों एवं अन्य अध्ययन सामग्रियों की उपलब्धता देख लें। अगर आपके पास इतिहास की शैक्षिक पृष्ठभूमि है तो निश्चय ही यह आपके लिए प्लस प्वाइंट है। दर्शनशास्त्र में भी आपको अन्य विषयों के जैसे कठिन मेहनत की आवश्यकता होती है। वैकल्पिक विषय दर्शनशास्त्र की तैयारी कैसे करें पर नीचे दिए गए टिप्स पर नजर डालते हैं :

  • सर्वप्रथम इग्नू की बी.ए. एवं एम.ए. दर्शनशास्त्र की पुस्तकें पढ़ें जिससे विषय की बुनियादी समझ विकसित होगी फिर सन्दर्भ पुस्तकों का चयन करें और फिर उनका सावधानीपूर्वक अध्ययन करें। अन्य अध्ययन सामग्रियां आपके ज्ञान को पुष्ट करेंगी एवं पाठ्यक्रम को समाहित करेगी।
  • जितना भी अध्ययन करे उसका नोट बनाते चले। बीच-बीच में उसे दुहराते रहे और उससे सम्बंधित प्रश्नों को हल करते रहे, यह एक महत्वपूर्ण टिप्स है। यह वैकल्पिक इतिहास की तैयारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है क्योंकि इससे आपके पुनरीक्षण (Revision) में मदद मिलती है।
  • हम यह सलाह नहीं देंते हैं की उम्मीदवार तथ्यों को रटें बल्कि वह खुद में  विषय की समझ को विकसित करें साथ ही उम्मीदवारों को महत्वपूर्ण तिथियों, मीमांसा, दार्शनिकवाद, विचारधाराएँ आदि को अवश्य याद कर लेना चाहिए।
  • विगत 6 वर्ष के प्रश्नों का अभ्यास करें। हालांकि UPSC प्रश्नों को रिपीट नहीं करता पर इससे आपकी लेखन क्षमता विकसित होगी और आप प्रश्न का सटीक और संदर्भित उत्तर देना सीख जाएंगे। इसके अतिरिक्त कोचिंग के टेस्ट पेपर भी अवश्य हल करें। इससे आप विषय संदर्भित प्रश्न पूछने में होने वाले बदलाव से भी अवगत होते रहेंगे।
  • विश्व इतिहास से सम्बंधित पत्र-पत्रिकाओं का अध्ययन करें तथा विभिन्न स्रोतों से जानकारियां प्राप्त करें। यह आपके प्रभावकारी उत्तर लेखन में मदद करेगा एवं आपके अंकों को बढ़ाएगा।

 

वैकल्पिक विषय दर्शनशास्त्र के लिए उत्तर लेखन टिप्स

वैकल्पिक विषय में पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लेखन हेतु ज्ञान के साथ तथ्यों को प्रस्तुत करने के कला कौशल से भी आपको परिचित होना चाहिए। सर्वप्रथम प्रश्नों को पढ़ने के पश्चात आपको प्रश्न में पूछे जा रहे तथ्य से अवगत होना चाहिए, प्रश्न तथ्य से अवगत होने के पश्चात आप सटीक उत्तर लेखन में सक्षम होंगे, आप भटकाव से बच जाएंगे। इससे आपकी अधिक अंक अर्जित कर सकेंगे। IAS मुख्य परीक्षा में सटीक उत्तर लेखन के लिए कुछ सुझाव एवं रणनीति की चर्चा हम यहां कर रहे हैं:

  • अपने उत्तर की शुरुआत परिचय से करें तथा मुख्य भाग में प्रश्न के सभी भागों को समाहित करें।
  • वर्तमान में इतिहास विषय में पूछे जाने वाले प्रश्नों में संकल्पनाओं की अच्छी समझ तथा विश्लेष्णात्मक उत्तर की आवश्यकता होती है। अतः प्रश्नों को ध्यान से पढ़ें तथा उनके भागों को समझें और निश्चित करें की आपको क्या लिखना है।
  • कुछ उत्तर ऐसे होंगे जो ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में सामाजिक, आर्थिक, जातीय मुद्दों से जुड़े होते हैं। अतः दर्शनशास्त्र के इन गत्यात्मक विषयों पर उत्तर लेखन के लिए तैयार रहना चाहिए।
  • छात्रों को प्रत्येक पत्र के प्रत्येक भाग पर मजबूत पकड़ होनी चाहिए।

हम उम्मीद करते हैं कि यह लेख IAS मुख्य परीक्षा 2017  के लिए वैकल्पिक विषय दर्शनशास्त्र की तैयारी के लिए आपका उचित मार्गदर्शन करेगा।

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सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र-1   

IAS परीक्षा को पास करने के लिए प्रतियोगियों को कड़ी मेहनत करने का जज्बा सही रणनीति एवं धैर्य होनी चाहिए। इसके साथ ही साथ स्तरीय अध्ययन सामग्री एवं सही मार्गदर्शन भी अनिवार्य है। इस पुस्तक में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्व की सामयिक घटनाएं, भारत का इतिहास और भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन, भारत और विश्व का भूगोल-भारत और विश्व का भौतिक सामाजिक और आर्थिक भूगोल, भारतीय राजनीति और अभिशासन-संविधान, राजनीतिक प्रणाली, पंचायती राज, लोकनीति, अधिकार संबंधी मामले आदि के साथ -साथ टिकाऊ विकास, गरीबी, समावेश, जनसांख्यिकी, सामाजिक क्षेत्र की पहल आदि मामलों को स्थान दिया गया है। पुस्तक में पर्यावरणीय परिस्थितिकी, जैव-विविधता और जलवायु परिवर्तन संबंधी सामान्य मामले को भी स्थान दिया गया है।
सामान्य अध्ययन प्रारंभिक परीक्षा (पेपर -1) के लिए एक उच्चस्तरीय अध्ययन सामग्री (अपने विषय के सर्वश्रेष्ठ विद्वानों द्वारा) तैयार करवायी गई है। इस पुस्तक द्वारा हमें आशा है कि हम हिन्दी माध्यम के सफलता प्रतिशत को ऊपर उठाने के अपने संकल्प को पूरा कर सकेंगे। जो अभ्यर्थी 2018 की सिविल सेवा परीक्षा में शामिल होना चाहते है उन्हें बिना समय गँवाए इसकी तैयारी शुरू कर देनी चाहिए।

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8 REPLIES

    1. OnlineTyari Team Post author

      वह भी अच्छा विषय है….हम शीघ्र ही उसपर भी प्रकाश डालेंगे.

      Reply
  1. अनुभव मिश्र

    सर भूगोल के लिए एक बार बता दीजिए ।

    Reply

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