UPSC सिविल सेवा मुख्य परीक्षा : GS प्रश्न पत्र-1 की रणनीति

UPSC सिविल सेवा मुख्य परीक्षा : GS प्रश्न पत्र-1 की रणनीति- विदित हो की सिविल सेवा की प्रारंभिक परीक्षा 18 जून को देश भर में आयोजित की गई, इस परीक्षा में सफल रहने वाला छात्र परीक्षा के दूसरे चरण ‘मुख्य परीक्षा’ के लिए अपनी जगह बनाएंगे। प्रारंभिक परीक्षा में सफल होने वाले उम्मीदवारों को सामान्यतः अक्तूबर से नवंबर माह के दौरान मुख्य परीक्षा देने के लिये आमंत्रित किया जाएगा।

IAS प्रारंभिक परीक्षा 2018 : फ्री पैकेज
यह पैकेज IAS प्रारंभिक परीक्षा 2018 को ध्यान में रखकर संकलित किया गया है। यह पैकेज अभ्यर्थियों को उचित मार्गदर्शन प्रदान करता है तथा उनको प्रारंभिक परीक्षा के लिए रणनीत बनाने में सहायता प्रदान करता है तथा साथ ही साथ उनके आत्मविश्वास में वृद्धि भी करता है। इस पैकेज में 10 टेस्टों का संकलन किया गया है और प्रत्येक टेस्ट में 100 प्रश्न हैंl

यह ध्यान रखने वाली बात है की जहाँ प्रारंभिक परीक्षा पूरी तरह वस्तुनिष्ठ (MCQ) होती है, वहीं मुख्य परीक्षा वर्णनात्मक (Descriptive) होती है और उसमें अलग-अलग शब्द सीमा वाले प्रश्न पूछे जाते हैं। यही कारण है कि मुख्य परीक्षा में सफल होने के लिये अच्छी लेखन शैली को भी एक महत्त्वपूर्ण योग्यता माना जाता है। प्रारंभिक परीक्षा की प्रकृति जहाँ क्वालिफाइंग होती है, वहीं मुख्य परीक्षा में प्राप्त अंकों को अंतिम मेधा सूची में जोड़ा जाता है। अत: परीक्षा का यह चरण अत्यंत महत्त्वपूर्ण एवं काफी हद तक निर्णायक होता है।

 

UPSC सिविल सेवा मुख्य परीक्षा  पैटर्न   

ध्यातव्य है कि सिविल सेवा मुख्य परीक्षा में विषयों का बँटवारा अनिवार्य एवं वैकल्पिक विषय के रूप में किया गया है।अनिवार्य विषयों में निबंध, सामान्य अध्ययन के चार प्रश्नपत्र, अंग्रेजी भाषा (क्वालिफाइंग) एवं हिंदी या संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल कोई भाषा (क्वालिफाइंग) तथा वैकल्पिक विषय के अंतर्गत अभ्यर्थी द्वारा चयनित कोई एक वैकल्पिक विषय शामिल है।

2012 तक यह परीक्षा कुल 2000 अंकों की होती थी परन्तु 2013 से यह संरचना व्यापक रूप से बदल गई है। अब मुख्य परीक्षा कुल 1750 अंकों की है जिसमें 1000 अंक सामान्य अध्ययन के लिये (250-250 अंकों के 4 प्रश्नपत्र), 500 अंक एक वैकल्पिक विषय के लिये (250-250 अंकों के 2 प्रश्नपत्र) तथा 250 अंक निबंध के लिये निर्धारित हैं।

नवीन संशोधन के पश्चात् सिविल सेवा मुख्य परीक्षा के विभिन्न प्रश्नपत्र तथा उनके भारांक इस प्रकार हैं-

सिविल सेवा मुख्य परीक्षा पैटर्न 2018      

क्रम संख्या प्रश्न पत्र प्रश्न पत्र का नाम   अंक   प्रकृति

परीक्षा समयावधि

1 प्रश्न पत्र A अनिवार्य हिंदी या संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल कोई भाषा 300 क्वालीफाइंग प्रकृति  3 घंटे
2 प्रश्न पत्र B अंग्रेजी भाषा 300 3 घंटे
3 प्रश्न पत्र -1 निबंध 250  

 

 

अंतिम मेधा सूचि रैंकिंग प्रकृति 

3 घंटे
­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­4 प्रश्न पत्र -2 सामान्य अध्ययन-1

(भारतीय विरासत और संस्कृति, विश्व का इतिहास एवं भूगोल तथा समाज) 

250 3 घंटे
5 प्रश्न पत्र -3 सामान्य अध्ययन-2

(शासन व्यवस्था, संविधान, राजव्यवस्था सामाजिक न्याय तथा अंतर्राष्ट्रीय संबंध)

250 3 घंटे
6 प्रश्न पत्र -4 सामान्य अध्ययन-3

(प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन)

250 3 घंटे
7 प्रश्न पत्र -5 सामान्य अध्ययन-4

(नीतिशास्त्र, सत्यनिष्ठा और अभिवृत्ति)

250 3 घंटे
8 प्रश्न पत्र -6 वैकल्पिक विषय-1 250 3 घंटे
9 प्रश्न पत्र -7 वैकल्पिक विषय-2 250 3 घंटे
  सम्पूर्ण 1750
नोट: मुख्य परीक्षा के मेरिट का निर्धारण सामान्य अध्ययन के चारों प्रश्न-पत्र (1000 अंक), वैकल्पिक विषय के दोनों प्रश्न-पत्र (500 अंक) एवं निबंध (250 अंक) के पत्र में प्राप्त अंको के आधार किया जाता है। अतः इसमें अनिवार्य विषय के प्रश्न-पत्र के (600 अंक) अंक नहीं जोड़े जाते।

 

UPSC सिविल सेवा मुख्य परीक्षा GS प्रश्न पत्र-1 का पाठ्यक्रम 

UPSC सिविल सेवा (मुख्य) परीक्षा के GS प्रश्न पत्र-1 में भारतीय विरासत और संस्कृति, विश्व का इतिहास एवं भूगोल और समाज को सम्मिलित किया है। परीक्षा के पाठ्यक्रम के अनुसार GS प्रश्न पत्र-1 को 12 अनुभाग और करीब 40 उप-अनुभागों में विभक्त किया गया है। जिनका विवरण निम्न है-

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-1
भारतीय विरासत और संस्कृति, विश्व का इतिहास एवं भूगोल और समाज

क्र.सं.

विषय

1. भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे।
2. 18वीं सदी के लगभग मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, व्यक्तित्व, विषय।
3. स्वतंत्रता संग्राम- इसके विभिन्न चरण और देश के विभिन्न भागों से इसमें अपना योगदान देने वाले महत्त्वपूर्ण व्यक्ति/उनका योगदान।
4. स्वतंत्रता के पश्चात् देश के अंदर एकीकरण और पुनर्गठन।
5. विश्व के इतिहास में 18वीं सदी तथा बाद की घटनाएँ यथा औद्योगिक क्रांति, विश्व युद्ध, राष्ट्रीय सीमाओं का पुनःसीमांकन, उपनिवेशवाद, उपनिवेशवाद की समाप्ति, राजनीतिक दर्शन जैसे साम्यवाद, पूंजीवाद, समाजवाद आदि शामिल होंगे, उनके रूप और समाज पर उनका प्रभाव।
6. भारतीय समाज की मुख्य विशेषताएँ, भारत की विविधता।
7. महिलाओं की भूमिका और महिला संगठन, जनसंख्या एवं संबद्ध मुद्दे, गरीबी और विकासात्मक विषय, शहरीकरण, उनकी समस्याएँ और उनके रक्षोपाय।
8. भारतीय समाज पर भूमंडलीकरण का प्रभाव।
9. सामाजिक सशक्तीकरण, संप्रदायवाद, क्षेत्रवाद और धर्मनिरपेक्षता।
10. विश्व के भौतिक भूगोल की मुख्य विशेषताएँ।
11. विश्व भर के मुख्य प्राकृतिक संसाधनों का वितरण (दक्षिण एशिया और भारतीय उपमहाद्वीप को शामिल करते हुए), विश्व (भारत सहित) के विभिन्न भागों में प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्र के उद्योगों को स्थापित करने के लिये ज़िम्मेदार कारक।
12. भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखीय हलचल, चक्रवात आदि जैसी महत्त्वपूर्ण भू-भौतिकीय घटनाएँ, भौगोलिक विशेषताएँ और उनके स्थान- अति महत्त्वपूर्ण भौगोलिक विशेषताओं (जल-स्रोत और हिमावरण सहित) और वनस्पति एवं प्राणिजगत में परिवर्तन और इस प्रकार के परिवर्तनों के प्रभाव।

हालाँकि यह आलेख मुख्यतः मुख्य परीक्षा पर केन्द्रित है। हाँ, यह सूची बस सांकेतिक है, एक-एक विषय पर अभी ढेरों स्तरीय किताबें उपलब्ध हैं, आपको उस किताब को चुनना है जो आपको पढ़ने और समझने में अच्छी लग रही हो। आपको यह ध्यान में रखना है की आपको सिलेबस तैयार करना है न की किताबें। किताबो से वे ही चैप्टर पढ़े जो सिलेबस में पढ़नी हो।

एक बार सिलेबस को समाप्त करने के बाद आप किसी भी नई किताब को देखकर यह पता कर सकते हैं की उसमें आपके काम का और कुछ है या नही। वैसे NCERT की 6 से 12 वीं  तक की इतिहास और भूगोल की  किताबों को आप आंख मूंदकर सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र-1 का आधार बनाने के लिए प्रयोग कर सकते हैं। यहाँ वह पुस्तकें उल्लेखित की जा रही है, जिसका अध्ययन अनिवार्य है-
1) भूगोल: कक्षा 6 से 12 तक एन.सी.ई.आर.टी. की नई पुस्तक ( विश्व के भूगोल के लिये कक्षा 6 से 8 तक की एन.सी.ई.आर.टी. की पुरानी पुस्तक भी पढ़ें)। इनको पढ़ने के बाद भारत एवं विश्व का भूगोल (माजिद हुसैन), भारत का भूगोल (खुल्लर) की पुस्तकें भी पढ़नी चाहियें।
2) इतिहास: कक्षा 6 से 12 तक एन.सी.ई.आर.टी. की नई पुस्तक। इनको पढ़ने के बाद प्राचीन भारत (रामशरण शर्मा), मध्यकालीन भारत (सतीश चंद्रा) एवं आधुनिक भारत (विपिन चंद्रा) एवं कक्षा 11 एवं 12 की पुरानी एन.सी.ई.आर.टी. की पुस्तकें भी पढ़नी चाहियें।

अन्य उपयोगी पुस्तकें-

इतिहास हेतु 

  • आधुनिक भारत- यशपाल एवं ग्रोवर
  • विश्व इतिहास – जैन एवं माथुर – (सिर्फ चुनिन्दा मुद्दे जो सिलेबस में हैं )
  • कला-संस्कृति अतिरिक्तांक-प्रतियोगिता दर्पण
  • कला एवं संस्कृति अतिरिक्तांक-उपकार प्रकाशन
  • आधुनिक विश्व का इतिहास – लालबहादुर वर्मा
  • प्राचीन भारत का इतिहास – झा एवं श्रीमाली
  • मध्यकालीन भारत भाग एक एवं दो- संपादक हरिश्चंद्र वर्मा
  • आधुनिक भारत का इतिहास- संपादक रामलखन शुक्ल

 भूगोल हेतु

  • Atlas- Oxford Student’s Atlas या हिमालय एटलस
  • भौगोलिक मानचित्रावली – हुसैन
  • भारत का बृहत् भूगोल -डॉ चतुर्भुज मामोरिया

भारतीय समाज एवं सामाजिक मुद्दों हेतु 
किसी विशेष पुस्तक की आवश्यकता नहीं है। योजना, कुरुक्षेत्र तथा अन्य पत्र- पत्रिकाओं से तथा भारतीय अर्थव्यवस्था (दत्ता एवं सुन्दरम) एवं भारतीय प्रशासन एवं राजनीति (फाडिया) से तैयार करें। ये किताबें आपको सामान्य अध्ययन के प्रश्न पत्र 2 एवं 3 के लिए भी पढ़नी है।

 

UPSC सिविल सेवा मुख्य परीक्षा : GS प्रश्न पत्र-1 की रणनीति

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र–1 के तहत अभ्यर्थियों को ‘भारतीय विरासत और संस्कृति, विश्व का इतिहास एवं भूगोल तथा समाज’ का अध्ययन करना है, जिसका विवरण निम्न है-

इतिहास

इतिहास सामान्य अध्ययन-प्रथम प्रश्नपत्र का महत्त्वपूर्ण भाग है। इसका विस्तृत पाठ्यक्रम परीक्षार्थियों के लिये एक प्रमुख समस्या के रूप में उनके समक्ष खड़ा हो जाता है। परन्तु अगर छात्र पाठ्यक्रम को समझ कर अध्ययन करेंगे तो उन्हें यह समस्या भ्रम मात्र ही प्रतीत होगी। पाठ्यक्रम अध्ययन के पश्चात इस समस्या से बड़ी सहूलियत के साथ पार पाया जा सकता है। गौरतलब है कि UPSC इतिहास के अंतर्गत आधुनिक भारतीय इतिहास के साथ-साथ भारतीय विरासत एवं संस्कृति तथा विश्व इतिहास को भी शामिल किया है। तालिका में देखा जा सकता है की प्रश्नपत्र में कुल 12 टॉपिक्स हैं जिनमें से शुरुआती पाँच टॉपिक्स इतिहास से संबंधित हैं। इतिहास के अंतर्गत प्रमुख रूप से तीन खण्ड शामिल हैं- भारतीय विरासत और संस्कृति, आधुनिक भारतीय इतिहास और विश्व इतिहास। इन तीनों खण्डों का विश्लेषण इस प्रकार है-

भारतीय विरासत और संस्कृति

प्रथम टॉपिक में भारतीय संस्कृति के संदर्भ में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलुओं का अध्ययन शामिल है। यहाँ यह स्पष्ट कर देना ज़रूरी है कि संस्कृति एवं विरासत खंड में यूपीएससी की परीक्षार्थियों से अपेक्षा सिर्फ तीन पहलुओं; कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला से है, जबकि परीक्षार्थी पूरी भारतीय संस्कृति एवं विरासत की तैयारी में संलग्न रहते हैं।

फलस्वरूप वे उन चीज़ों पर ध्यान नहीं दे पाते जिनकी अपेक्षा उनसे की जाती है। इस टॉपिक के अध्ययन के लिये परीक्षार्थियों को कालक्रम के अनुसार कलाओं के विकास, साहित्य एवं वास्तुकला की जानकारी प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिये। उदाहरण के तौर पर, भारतीय इतिहास की शुरुआत प्रागैतिहासिक काल से ही हो जाती है। इस काल में मानव सामान्यतः खानाबदोशी जीवन व्यतीत करता था, फिर भी कला के प्रति उसमें प्रेम निहित था। भीमबेटका की गुफाओं में निर्मित भित्ति चित्र प्रागैतिहासिक मानव की ही देन हैं। इस काल में कला का एक रूप सिर्फ चित्रकला ही दिखाई देता है अतः इस पक्ष का अध्ययन ज़रूरी है।

कला के अन्य पक्षों के अतिरिक्त साहित्य एवं वास्तुकला के संदर्भ में इस काल के मानव की कोई प्रमुख देन नहीं है। इसी प्रकार, आगे हमें ताम्र पाषाणकाल, नवपाषाणकाल, सिंधु सभ्यता एवं वैदिककाल, मध्यकाल तथा आधुनिक काल के संदर्भ में कला के रूप, साहित्य एवं वास्तुकला से संबंधित पक्षों का अध्ययन कर उनके प्रश्नोत्तर तैयार करने की कोशिश करनी चाहिये।

आधुनिक भारतीय इतिहास

इसमें परीक्षार्थियों से 1750 ई. से वर्तमान समय तक के भारतीय इतिहास, महत्त्वपूर्ण घटनाओं तथा व्यक्तित्त्व के बारे में जानकारी की अपेक्षा की गई है। इस टॉपिक के लिये काफी अच्छी अध्ययन-सामग्री मौजूद है जिसके अध्ययन के पश्चात् परीक्षा में प्रश्नों को आसानी से हल किया जा सकता है। विगत वर्षों में आधुनिक भारतीय इतिहास खंड से पूछे गए प्रश्नों का गहन विश्लेषण करने पर यह तथ्य सामने आता है कि इस खंड में यूपीएससी हमेशा किसी महत्त्वपूर्ण घटना या फिर किसी प्रभावशाली व्यक्तित्व तथा किसी महत्त्वपूर्ण विषय से संबंधित प्रश्न ही पूछता है।

अतः परीक्षार्थियों को सलाह दी जाती है कि वे पूरी पुस्तक पढ़ने की बजाय ऊपर बताए गए विषयों पर जानकारी एकत्र करने का प्रयास करें तथा विगत वर्षों में पूछे गए प्रश्नों के अनुरूप उत्तर लेखन का अभ्यास करें। देश में स्वतंत्रता के पश्चात् हुए एकीकरण और पुनर्गठन से संबंधित प्रश्नों के लिये स्वतंत्रता के पश्चात् जिस प्रकार से आर्थिक, सामाजिक एवं राजनीतिक एकीकरण के परिप्रेक्ष्य में कार्य किये गए, उनका अध्ययन अपेक्षित है। उदाहरण के तौर पर, राज्यों का पुनर्गठन, चुनावों का आयोजन, पंचवर्षीय योजनाएँ, चीन एवं पाकिस्तान से भारत के युद्ध, हरित क्रांति, गरीबी हटाने के लिये किये गए प्रयास, बैंकों का राष्ट्रीयकरण तथा 1991 का आर्थिक संकट एवं उसके बाद किये गए आर्थिक सुधारों आदि का अध्ययन अपेक्षित है।

अगर देखा जाए तो स्वतंत्रता के पश्चात् के भारत का अध्ययन हम मूल रूप से इतिहास के अंतर्गत नहीं करते, बल्कि इसका अध्ययन हम सामान्य अध्ययन के अन्य खंडों, जैसे- भारतीय राजव्यवस्था, भारतीय अर्थव्यवस्था आदि के अंतर्गत करते हैं।

विश्व इतिहास

इसके अंतर्गत परीक्षार्थियों से केवल 18वीं सदी तथा उसके बाद के विश्व इतिहास की जानकारी की अपेक्षा की गई है, न कि संपूर्ण विश्व इतिहास की। इसके तहत औद्योगिक क्रांति से लेकर वर्तमान तक की प्रमुख वैश्विक घटनाओं की जानकारी होना ज़रूरी है। इस टॉपिक के लिये 9वीं, 10वीं, 11वीं तथा 12वीं कक्षा की एनसीईआरटी की पुस्तकों का अध्ययन अपने आप में पर्याप्त होगा। साथ ही, समसामयिक घटनाओं पर भी नज़र रखना महत्त्वपूर्ण होगा क्योंकि यूपीएससी अधिकांश प्रश्न परंपरागत मुद्दों को समसामयिक घटनाओं से जोड़कर ही पूछता है। चूँकि, इतिहास खंड से मूलतः परंपरागत प्रश्न ही पूछे जाते हैं। अतः इसकी तैयारी के लिये मानक पुस्तकों का अध्ययन (संबधित पुस्तकों की सूची नीचे दी गई है) और उत्तर-लेखन अभ्यास पर्याप्त होगा।

भूगोल, पर्यावरणीय मुद्दे एवं आपदा प्रबंधन

मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम में भूगोल (भारत एवं विश्व का भूगोल) तथा पर्यावरणीय मुद्दों और आपदा प्रबंधन से संबंधित प्रश्न क्रमशः सामान्य अध्ययन प्रथम एवं तृतीय के अंतर्गत पूछे जाते हैं। ध्यातव्य है कि भूगोल का विस्तृत अध्ययन अन्य खंडों से संबंधित प्रश्नों को समझने व उनके उत्तर लिखने में भी मददगार होता है, जैसे अंतर्राष्ट्रीय संबंधों से जुड़े प्रश्न, क्योंकि देशों की भौगोलिक अवस्थिति, संसाधन व अन्य मुद्दों की जानकारी भूगोल की जानकारी के बिना संभव नहीं है। अतः भूगोल का विस्तृत एवं विश्लेषणात्मक अध्ययन आवश्यक है।

भूगोल से संबंधित टॉपिक्स का अध्ययन करते समय अवधारणात्मक (conceptual) रूप से गहन अध्ययन आवश्यक है क्योंकि प्रश्न मूलतः अवधारणा से ही पूछे जाते हैं, जैसे- चक्रवात का अध्ययन करने में वायुदाब पेटियों को अच्छी तरह से समझना आवश्यक है। यह जानकारी आपको चक्रवात की प्रकृति, प्रकार, विशेषताओं व मौसमी दशाओं को समझने में कारगर होगी। अतः भूगोल से संबंधित टॉपिक्स का अध्ययन अवधारणात्मक रूप से गहन जानकारी व विश्लेषण के साथ करना परीक्षा की दृष्टि से उपयोगी रहेगा।

अगर पिछले वर्षों के प्रथम व तृतीय प्रश्नपत्रों का अवलोकन करें तो एक बात साफ तौर पर देखी जा सकती है कि भूगोल, पर्यावरणीय मुद्दे व आपदा प्रबंधन से संबंधित प्रश्नों की प्रकृति विश्लेषणात्मक (Analytical) प्रकार की रही हैं, जहाँ संबंधित अवधारणाओं की गहन जानकारी आवश्यक है।

विगत दो वर्षों की मुख्य परीक्षाओं में सामान्य अध्ययन के प्रथम प्रश्नपत्र में भूगोल खंड से पूछे गए प्रश्नों का अवलोकन करें तो एक बात स्पष्ट हो जाती है कि ये प्रश्न विश्व के भौतिक भूगोल, भारत के अपवाह तंत्र, उद्योगों की अवस्थिति, ऊर्जा संसाधन, महासागरीय संसाधन, कृषि, अफ्रीकी महाद्वीप के संसाधन, प्लेट विवर्तनिकी व भूकंप, ज्वालामुखी, प्लेट विवर्तनिकी एवं द्वीपों के निर्माण, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव तथा एल-नीनो से संबंधित थे, वहीं पर्यावरणीय मुद्दों व आपदा प्रबंधन के प्रश्न पर्यावरणीय प्रभाव आकलन, अवैध खनन, भारत के पश्चिमी क्षेत्र में भूस्खलन व आपदा प्रबंधन से संबंधित थे।

आशा है इस लेख से आपको महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई होगी और यह जानकारी आपके अध्ययन को सुगम बनाएगी साथ ही आपकी सफलता के लिए दिशा प्रदान करेगी।

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