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UPSC सिविल सेवा मुख्य परीक्षा : निबंध लेखन (प्रश्नपत्र -1) की रणनीति

UPSC सिविल सेवा मुख्य परीक्षा : निबंध लेखन (प्रश्नपत्र -1) की रणनीति- निबंध का प्रश्नपत्र मुख्यत: दो भागों (मूर्त एवं अमूर्त रूप) में विभाजित रहता है। प्रत्येक भाग में दिये गए 4 विकल्पों में से एक-एक विकल्प का चयन करते हुए कुल दो निबंध (प्रत्येक 125 अंक) लिखने होते हैं। प्रत्येक निबंध के लिये निर्धारित शब्द सीमा लगभग 1000-1200 होती है।

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यह पैकेज IAS प्रारंभिक परीक्षा 2018 को ध्यान में रखकर संकलित किया गया है। यह पैकेज अभ्यर्थियों को उचित मार्गदर्शन प्रदान करता है तथा उनको प्रारंभिक परीक्षा के लिए रणनीत बनाने में सहायता प्रदान करता है तथा साथ ही साथ उनके आत्मविश्वास में वृद्धि भी करता है। इस पैकेज में 10 टेस्टों का संकलन किया गया है और प्रत्येक टेस्ट में 100 प्रश्न हैंl

IAS परीक्षा के लिए निबन्ध प्रश्न-पत्र का योगदान केवल 250 अंकों का ही है परन्तु प्रश्न-पत्र में प्राप्तांक आपके अंतिम चयन और मेरिट सूची में रैंक में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। अपने प्रभावी संचार कौशल, रचनात्मक विचारों, भाव व्यक्त करने के ढंग से और व्यापक दृष्टिकोण के साथ आप एक सशक्त और प्रभावपूर्ण प्रस्तुति के साथ परीक्षक को प्रभावित कर सकते हैं।

UPSC सिविल सेवा मुख्य परीक्षा : प्रश्नपत्र -1 की रणनीति

एक अच्छे निबंध में क्या विशेषताएं होनी चाहिए इसका विवरण संघ लोक सेवा आयोग ने खुद व्यक्त किया है। निबंध प्रश्न-पत्र के तहत लिखे अनुदेशों को यदि आपने सावधानीपूर्वक पढ़ा हो तो उसमें काफी कुछ व्यक्त किया गया है। यह अनुदेश इस प्रकार है- ‘उम्मीदवार की विषयवस्तु की पकड़ चुने गये विषय के साथ उसकी प्रासंगिकता रचनात्मक तरीके से सोचने की उसकी योग्यता और विचारों को संक्षेप में, युक्तिसंगत और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की तरफ परीक्षक विशेष ध्यान देंगे।’ यदि उक्त कथन का सावधानीपूर्वक विश्लेषण करें तो हम पाते हैं कि इसमें चार बातों पर बल दिया गया है- (क) विषयवस्तु की पकड़ (ख) प्रासंगिकता (ग) रचनात्मक चिंतन और (घ) अभिव्यक्ति। अब हम क्रमशः इन चारों पक्षों पर विचार करेंगे।

पर उससे भी पहले यह जरुरी है कि अभ्यर्थी सिविल सेवा (मुख्य) परीक्षा के लिए निबंध लेखन हेतु अपनी तैयारी के अनुरूप सही विषय का चयन करें जिसके साथ वह न्याय कर सकें। निबंध लेखन से पहले इसके लिये संरचना तैयार करनी आवश्यक है और इसके लिये जैसे ही आप निबंध के विषय का चुनाव करते हैं, इससे संबंधित मस्तिष्क के विचारों, सूचनाओं एवं विशेष जानकारियों को संक्षेप में एक रफ पेज पर लिख लें। इसके बाद आप इनमें से जिन जानकारियों को निबंध में शामिल करना चाहते हैं, उनसे निबंध की रूपरेखा का निर्धारण करें। यह पद्धति अपनाने से आपको निबंध लेखन आपेक्षाकृत आसान लगेगा क्योंकि कम से कम इन बिंदुओं का उपयोग यकीनन सभी महत्वपूर्ण पहलुओं का समावेश कर प्रभावी प्रस्तुति सुनिश्चित कर सकता है।

अब इस कार्य के आधार पर, जब निबंध लेखन के लिए तैयार हैं तो मस्तिष्क में निबंध की संरचना को क्रमवार व्यवस्थित कर सिर्फ लेखन पर ध्यान केन्द्रीत करें। लेखन को विषय के मुख्य विचार के इर्द-गिर्द रख, विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ अपने निबंध को मूल्यवान बनायें। निबंध की रूपरेखा ऐसी होनी चाहिए जिसमें शुरुआत प्रभावशाली हो, जहां इसका मध्यभाग सुव्यवस्थित और प्रासंगिक हो और समापन निर्णायक। ध्यान रहे विषय परिचय और निष्कर्ष में संबंध स्पष्ट रहे और आपने जो कुछ भी बीच में डाला है वह अंतिम भाग तक लयबद्ध लगे। लेखन में सावधानी बरतें कि कुछ छूट तो नहीं रहा और आप सभी मुख्य बिंदुओं को कवर करने में सक्षम हैं तथा विचारों को स्पष्ट एवं प्रभावी रूप से व्यक्त कर रहे हैं। साथ ही यह भी सुनिश्चित करें कि प्रस्तुति गुथी और अनुक्रमण सहज है। एक सटीक और सुनियोजित निबंध परीक्षक का ध्यान आकर्षित करेगा और आपको अच्छे अंक प्राप्त करने में मदद करेगा।आइए अब हम अच्छे निबंध की विशेषता से परिचित हो लेते हैं-

विषयवस्तु की पकड़

विषयवस्तु की पकड़ पहली और सबसे अनिवार्य विषय है। विषय से तात्पर्य है कि आप उस विषय को चुने जिसका लेखन करते समय आप विषय के साथ न्याय कर सकें। अथार्त आप संबद्ध अवधारणाओं, विचारों, दृष्टिकोणों, समस्याओं, संभावनाओं आदि का स्पष्ट, निश्चित एवं सुसंबद्ध ज्ञान से परिचित हों। कुल मिलाकर निबंध में एक वैचारिक गहराई एवं सूक्ष्म चिंतन परिलक्षित होना चाहिए। किसी भी किस्म की स्थूलता आपके सारे प्रयास को बिगाड़ सकती है।

विषय ज्ञान की प्रासंगिकता

अच्छे निबंध की दूसरी विशेषता ‘चुने गये विषय के साथ अभ्यर्थी के ज्ञान की प्रासंगिकता’ है। कई बार ऐसा होता है कि छात्र किसी विषय को बहुत अच्छी तरह से समझता है पर निबंध किसी ख़ास पक्ष से पूछ लिया जाता है, ऐसे में छात्र अपने ज्ञान/विषय समझ के लोभ का संवरण नहीं कर पाता और वह पूछे गए विषय से अतिरिक्त ज्ञान उड़ेल देता है। इससे वह अपनी उर्जा व्यर्थ करता है और विषय से भटक कर निबंध के साथ भी न्याय नहीं कर पाता। उदाहरण के लिए छात्र ने ‘समाज में महिला की वर्तमान स्थिति’ पर संपूर्ण तैयारी की हो और निबंध केवल ‘महिला घरेलु हिंसा’ के संबंध में पूछ लिया जाये तो अपने निबंध लेखन को ‘महिला घरेलु हिंसा’ की प्रासंगिकता में ही लिखें। प्रासंगिकता बनाये रखने के लिए प्राथमिक आवश्यकता इस बात की है कि आप विषय को पहले समझे और फिर निर्णय करें की क्या लिखना है।

विदित हो कि निबंध का विषय विस्तार सिर्फ भारत तक ही नही सिमित है, अतः समस्या के फैलाव को दिखाने के लिए इसमें विश्व को समाहित कर निबंध की व्यापकता क्षरित होने से आप बचा लेते हैं। जबकि अधिकांश छात्र इस निबंध को भारतीय प्रसंग में ही उल्लेख्य करेंगे।अतः आप पहले बतायें कि राजनीतिक अधिकारों का भी अत्यधिक महत्व महिला-विकास में है। फिर यह बतायें कि यह समस्या एक जटिल तथा बहुआयामी समस्या है तथा इसका समाधान एकपक्षीय नहीं हो सकता। उसके बाद यह बताएं कि वे कौन-कौन से पक्ष हैं, जिनमें सुधार करने से महिलाओं की स्थिति विकसित हो सकेगी। फिर यह समझाएं कि सभी पक्षों में सुधार का अनुपात संस्कृति या समाज विशेष स्थितियों के संदर्भ में करें और अंत में आशा का हाथ न छोड़ते हुए एक संतुलित निष्कर्ष दें। अतः प्रासंगिकता का यहां यह अर्थ हुआ कि विषय से जितने पक्ष संबद्ध नहीं हैं, उनका जिक्र एकदम न करना और जितने पक्ष संबद्ध हैं, उनका विश्लेषण अवश्य करना। इससे आपकी सोच और चिंतन की व्यापकता भी परिलक्षित होगी और आप अधिक अंक प्राप्त करने के हकदार भी बन जाएंगे।

रचनात्मक चिंतन

संघ लोक सेवा आयोग ने अच्छे निबंध की तीसरी विशेषता  ‘रचनात्मक चिंतन की योग्यता’ को माना है। सबसे पहले यह जानना आवश्यक है कि ‘रचनात्मक चिंतन’ से क्या तात्पर्य है? परीक्षा की दृष्टि से रचनात्मक चिंतन के दो परिलक्षित होते हैं 1. नवीन चिंतन, 2. सकारात्मक चिंतन। नवीन चिंतन से यह आशा की जाती है की छात्र समस्या का कुछ सार्थक, मौलिक, तार्किक और व्यवहारिक निष्कर्ष/समाधान प्रस्तुत करेगा। रचनात्मक चिंतन को सकारात्मक भी होना चाहिए। अगर आपका चिंतन नवीन तो हो, पर समाज के लिए नकारात्मक हो तो इसका लाभ नहीं है। जनसंख्या की समस्या को रोकने के लिए जन्म दर को कम करने के प्रयास करना सकारात्मक चिंतन है, जबकि मृत्यु दर को बढ़ाने का प्रयास करना, महामारिया फैलाना, दंगे करना, दुर्घटनाएं कराना, प्राकृतिक आपदाओं का इंतजार करना आदि सुझाव नकारात्मक होंगे। अतः किसी भी विषय पर सोचते हुए ध्यान रखें कि आपके चिंतन में नवीनता होनी चाहिए, पर यह नवीनता ‘सकारात्मकता’ की कीमत पर न हो, अन्यथा आपका चिंतन’ ध्वंसात्मक’ हो जायेगा।

विषय अभिव्यक्ति

अच्छे निबंध की चौथी और अंतिम विशेषता है-‘विचारों को संक्षेप में युक्तिसंगत और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की क्षमता’। इसे हम श्रेष्ठ अभिव्यक्ति कह सकते हैं। ध्यानपूर्वक विश्लेषण करें तो हम पाते हैं कि इसमें भी संघ लोक सेवा आयोग ने तीन अर्हताएं बतायी हैं-

(क) विचारों को संक्षेप में प्रस्तुत करने की क्षमता
(ख) विचारों को युक्तिसंगत तरीके से प्रस्तुत करने की क्षमता
(ग) विचारों को प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की क्षमता।

विचारों को संक्षेप में प्रस्तुत करने का अर्थ है कि लेखक की भाषा पर ऐसी पकड़ हो कि वह कम से कम शब्दों में ही बात कह सके। अथार्त ‘गागर में सागर’ भर सके। आप संक्षेप में तभी लिख सकेंगे, जब चिंतन में स्पष्टता हो और अभिव्यक्ति में तारतम्य हो।

दूसरी बात है- युक्तियुक्त अभिव्यक्ति। युक्ति का अर्थ है ‘तर्क’। जब हम किसी बात को व्यक्त करते हैं तो उसकी एक ऐसी पद्धति होनी चाहिए कि पूरी बात समझ में आयें। इसके लिए आवश्यक है कि साी बात सूत्रबद्ध और क्रामिक रूप से कही जाये। उदाहरण के लिए यदि आप किसी समस्या पर निबंध लिख रहे हों तो पहले बतायें कि यह समस्या क्या है, फिर उसके स्वरूप की विविधता तथा आयाम बतायें, तब बतायें कि समस्या क्यों है अर्थात् इस समस्या के होने के पीछे कौन से कारण उत्तरदायी हैं, और फिर अंत में स्पष्ट करें कि इस समस्या का समाधान कैसे किया जा सकता है?  युक्तियुक्त लेखन से लिखने वाले की मानसिक स्पष्टता, तार्किक चिंतन तथा निर्णय क्षमता की श्रेष्ठता का पता लगता है।

अभिव्याक्ति की तीसरी विशेषता है- ‘विचारों को प्रभावी तरीके से व्यक्त करने की क्षमता।’  लिखित भाषा में आपकी अभिव्यक्ति की सारी शक्ति आपके शब्दों में होती है। इसलिए जरूरी है कि आपके शब्द सटीक हों। भाषा सरल लेकिन गरिमा से युक्त हो, प्रवाह से भरी हो और सार्थकता से संपन्न हो। ऐसी भाषा ही प्रभाव पैदा कर सकती हैैै। इसके लिए आपको चाहिए कि आप मुहावरों और लोकोक्तियों का प्रयोग करें, उदाहरणों से बात को स्पष्ट बनायें, सही विराम चिन्हों का प्रयोग करें और अशुद्धियों से यथासंभव बचें।

संघ लोक सेवा आयोग द्वारा उल्लिखित उक्त चार विशेषताओं के अतिरिक्त एक बात आपको ध्यान रखनी चाहिए कि आपका दृष्टिकोण का अर्थ है-देखने का नजरिया। विषयों एवं सामान्य अध्ययन के विपरीत साक्षात्कार और निबंध में आपका दृष्टिकोण सीधे उभरकर सामने आता है, इसलिए इस ओर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। आपके दृष्टिकोण में निम्नांकित विशेषताएं होनी चाहिएः

  • आपके दृष्टिकोण में संतुलन हमेशा बना रहना चाहिए। तार्किक विश्लेषण करेंगे तो आप पायेंगे कि हर विषय के पक्ष और विपक्ष-दोनों महत्वपूर्ण होते हैं। दोनों का तुलनात्मक विशेषण करते हुए सम्यक निर्णय लेना चाहिए।
  • आपका दृष्टिकोण यथार्थवाद से प्रारंभ होकर आशावाद पर समाप्त होने वाला होना चाहिए। जब तक हम यथार्थ की पहचान नहीं करेंगे, तब तक उसे बेहतर बनाने का प्रयास असंभव हैै। यदि हम यथार्थ देखकर घबरा जायेंगे, तो भी वह बेहतर नहीं होगा। इसलिए समस्या की पहचान एकदम यथार्थवादी तरीके से करते हुए अंत में आशावादी नजरिया अपनाते हुए समाधान की संभावनाओं पर प्रकाश डालना चाहिए।
  • आपका नजरिया समग्रतावादी होना चाहिए। वर्तमान समय में यह माना जाने लगा है कि सारी समस्याएं अंतःसंबंधित हैं। इसलिए समाधान को भी बहुस्तरीय, बहुसंदर्भी तथा बहुआयामी होना चाहिए। अतः जब भी किसी विषय पर आप सोचें, यह विचार अवश्य कर लें कि यह विषय कितने अन्य विषयों से जुड़ा हुआ है। अतः उसके बाद एकीकृत दृष्टिकोण से विषय को पूरी व्यापकता में देखते हुए विश्लेषित करें।
  • आपके दृष्टिकोण में गहराई अवश्य होनी चाहिए। कई बार हम कई सिद्धातों या अवधारणाओं को गहराई से नहीं पहचानते, लेकिन उनका प्रयोग करने का लोभ नहीं छोड़ पाते। इसी प्रकार कई बार हम किसी विषय के एक ही आयाम से वाकिफ होते है। और उसी आधार पर कई क्रांतिकारी सुझाव दे बैठते हैं। ऐसी प्रवृतियों से बचना ही श्रेयस्कर होगा।
  • निबंध की भूमिका और निष्कर्ष पर आपके दृष्टिकोण को व्यक्त करने का काफी बड़ा दायित्व होता है। भूमिका में सारी बात का आधार प्रस्तुत कीजिए और निष्कर्ष में सारे निबंध का निचोड़ बहुत कम शब्दों में प्रस्तुत कीजिए। भूमिका में यथार्थ प्रमुख हो और निष्कर्ष में आशा।

उपरोक्त विश्लेषण के बाद एक महत्वपूर्ण मुद्दा बचता है कि हमें निबंध के लिए कौन-से विषय का चयन करना चाहिए-

कैसे करें विषयों का चुनाव?

पिछले वर्ष पूछे गए निबंध के प्रश्नपत्र में प्रथम व द्वितीय खण्ड से 4-4 निबंध पूछे गए जिनमें दोनों खण्डों से 1-1 विषय का चुनाव करना था। यानी अब आपको एक नहीं दो विषयों पर निबंध लिखना होगा और इस संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि भविष्य में यह संख्या और भी बढ़ जाए। ऐसे में विषय चयन के प्रति सावधानी अति आवश्यक है। आप दिये गए विकल्पों में जिसमें अधिक सहज हों, जो आपकी रुचि से जुड़ा हो, उसका चयन करें। लेकिन यह चयन सोच समझकर करें क्योंकि एक बार लिखना शुरू करने के बाद फिर आपको लगे कि आप किसी और विषय पर ज़्यादा अच्छा लिख सकते थे, तो इससे आपके समय और ऊर्जा दोनों की बर्बादी  होती है, साथ ही आपका आत्मविश्वास भी गिरता है और लिखकर काटना, फिर लिखना परीक्षक पर भी सकारात्मक असर नहीं डालता है।

एक बार यदि किसी विषय पर लिखना शुरू कर दें तो पूरे आत्मविश्वास के साथ लिखें। ध्यान रखें कि निबंध के किसी भी प्रश्न का कोई एक निश्चित उत्तर नहीं होता। यह आप पर निर्भर करता है कि आपका विषय के प्रति क्या नज़रिया है, आप विषय को कैसे परिभाषित करते हैं? जैसे कि यूपीएससी ने 2005 में एक निबंध पूछा था- ‘शिशु को खिलाने वाले हाथ’। इस पर किसी परीक्षार्थी ने शिशु को खिलाने वाले हाथों को माँ के नज़रिये से देखा तो किसी ने पूरे परिवार व समाज के नज़रिये से। निबंध के रूप में जवाब कभी पूर्णतया सही या गलत नहीं होते। हाँ, यह प्रयास अवश्य करें कि दिये गए विषय के मूलभाव तक पहुँच सकें।

कैसे करें लिखने की शुरुआत? क्या हो उचित समापन?

निबंध का उत्तर लिखते समय कुछ परीक्षार्थियों के मन में बड़ा प्रश्न यह होता है कि पहली पंक्ति में क्या लिखें? शुरुआत कहाँ से करें, तो बिना डरे किसी कविता, कहानी, कोई संस्मरण, किसी फिल्म का प्रासंगिक दृश्य, आपके जीवन से जुड़ी कोई घटना आदि से शुरुआत की जा सकती है। अंत भी ऐसा ही हो जो विषय के मूलभाव को संतुलित तरीके से समेट सके। इसमें अच्छे अंक प्राप्त करने के लिये आप परीक्षा से पूर्व इससे सम्बंधित किसी मॉक टेस्ट श्रृंखला में सम्मिलित हो सकते हैं। अगर संभव हो तो आप ‘दृष्टि द विज़न’ द्वारा दिल्ली में चलाई जाने वाली निबंध की कक्षाओं में भाग ले सकते हैं।

कैसे करें निबंध लेखन की तैयारी

आपके मन में एक बड़ा सवाल यह उठता रहा होगा कि आखिर निबंध की तैयारी कैसे की जाए? इसके लिये कौन सी किताब पढ़ी जाए? तो यहाँ आपको स्पष्ट कर दें कि ऐसी कोई एक किताब नहीं है जिसे पढ़कर आप रातोंरात निबंध में पारंगत हो जाएँ। कोई ऐसी विधि भी नहीं है जिसे रटकर आप निबंध के प्रश्नपत्र में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
अब, आप सोच रहे होंगे कि फिर ऐसा क्या है जो निबंध के प्रश्नपत्र में आपको सहज और सफल बनाएगा? संघ लोक सेवा आयोग के निबंधों की मूल प्रवृत्ति ही रचनात्मक रही है। यहाँ आपसे इस बात की बहुत अधिक उम्मीद नहीं की जाती है कि आप दिये गए विषय में तथ्यों का विशाल पहाड़ खड़ा कर दें, बल्कि अधिक उम्मीद यह की जाती है कि आप अपने रचनात्मक और कल्पनात्मक कौशल का परिचय देते हुए दिये गए विषय की अवधारणा को स्पष्ट करें। निबंध को नीरस व उबाऊ बनाने की बजाय सरस व रोचक बनाएँ।
सिविल सेवा परीक्षा के वर्तमान प्रारूप में निबंध लेखन में एक चुनौती यह आती है कि कम-से-कम शब्दों में पूरे विषय को स्पष्ट कैसे किया जाए? इसके लिये जो सबसे ज़रूरी बात है, वह है नियत समय व नियत शब्द-सीमा में लिखने का अभ्यास।
प्रारंभिक परीक्षा के पश्चात् बचे हुए चार महीनों में जो सबसे पहला कार्य आपको करना है वह है- अधिक से अधिक विषयों पर लेखन अभ्यास, खासकर उन विषयों पर जो सिविल सेवा परीक्षा में अब तक पूछे जा चुके हैं। हालाँकि, सिविल सेवा परीक्षा में इस बात की बहुत कम ही संभावना रहती है कि विषय रिपीट हो। मगर यह ज़रूर है कि अगर आपने विगत वर्षों की परीक्षा में  पूछे गए या उनकी प्रवृत्ति से मिलते-जुलते निबंधों का अभ्यास कर लिया, तो परीक्षा भवन में पूछे गए निबंध आपको नए नहीं लगेंगे। आप उनकी मूल प्रवृत्ति को समझ सकेंगे और बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।
आप प्रयास यह करें कि बचे हुए चार महीनों में प्रतिदिन कम-से-कम एक विषय पर निबंध लिखें, प्रतिदिन नहीं तो कम-से-कम दो दिनों में एक निबंध अवश्य लिखें।

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