IAS प्रारंभिक परीक्षा 2017 के महत्वपूर्ण टॉपिक्स: PESA,1996

IAS प्रारंभिक परीक्षा 2017 के महत्वपूर्ण टॉपिक्स: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) इस वर्ष 18 जून  को सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा का आयोजन करेगी। ये देश में सबसे प्रतिष्ठित और कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है। परीक्षा के लिए कुल आवेदन भरने वाले उम्मीदवारों में मात्र 0.1-0.3 फ़ीसद उम्मीदवारों के सफ़ल होने वाले इस परीक्षा को पास करना बहुत मुश्किल होता है।

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सभी UPSC IAS उम्मीदवार अब IAS प्रारंभिक परीक्षा 2017 की तैयारी कर रहे हैं। समस्या ये है कि हम कितना भी सोच लें कि हमें सबसे अच्छा ज्ञान है या परीक्षा को लेकर हम कितने ही आश्वस्त क्यों ना हों लेकिन वहां हमेशा अनिश्चितता का अंश रहता है। इसी डर से पार पाने के लिए हम करेंट अफ़ेयर्स पर IAS प्रारंभिक परीक्षा 2017 के महत्वपूर्ण टॉपिक्स आपसे साझा करेंगे।

 

IAS प्रारंभिक परीक्षा 2017 के महत्वपूर्ण टॉपिक्स: अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायत विस्तार अधिनियम-1996 (पेसा-PESA)

सभी UPSC IAS उम्मीदवार अब IAS प्रारंभिक परीक्षा 2017 की तैयारी कर रहे हैं। समस्या ये है कि हम कितना भी पढ़ हम परीक्षा की तैयारी हेतु पूर्णतः आश्वस्त नहीं हो पाते। कारण पाठ्यक्रम का विहंगम होना है। करेंट अफेयर के तहत सभी महत्वपूर्ण और चर्चा में बने रहने वाले विषयों, सरकारी नीतियों और संशोधनों का  हों लेकिन वहां हमेशा अनिश्चितता का अंश रहता है। इसी डर को पार पाने के लिए हम करेंट अफ़ेयर्स पर IAS प्रारंभिक परीक्षा विशेष महत्त्व होता है। यह विषय आपके साक्षात्कार में भी काफी सहायक होते हैं जो आपको खबर की जानकारी दे कर आपका दृष्टिकोण बनाने और समकालीन जरूरतों के सन्दर्भ में नीतियों का विश्लेषण करने में सहायक है। आज हम आपसे अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायत विस्तार अधिनियम-1996 (पेसा-PESA)’ टॉपिक्स को साझा कर रहे हैं-

 

अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायत विस्तार अधिनियम-1996 (पेसा-PESA)

केन्द्रीय विधान, ‘पंचायतों के प्रावधान (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम, 1996 पेसा’ तथा राज्य पंचायत राज अधिनियमों और संबंधित विधियों में राज्यों द्वारा अब तक किए गए संशोधन पांचवीं अनुसूची के क्षेत्रों के लिए व्यापक ढांचा उपलब्ध कराते हैं। इस संबंध में प्रक्रियाएं और पद्धतियां तैयार करने के लिए, पंचायती राज्य मंत्रालय ने स्व. श्री बी.डी. शर्मा की अध्यक्षता में एक उप-समिति का गठन किया था जिसका उद्देश्य ग्राम सभाओं को पेसा में यथापरिकल्पित शक्तियां प्रदान करने के लिए आदर्श दिशा-निर्देश तैयार करना था। इस उप-समिति द्वारा तैयार किए गए दिशा-निर्देशों के आधार पर, पंचायती राज मंत्रालय ने ‘आदर्श पेसा नियम’ तैयार किए तथा उन्हें पांचवीं अनुसूची क्षेत्र वाले राज्यों को 14 दिसम्बर, 2009 को परिचालित किया ताकि वे अपने नियम तैयार कर सकें। सतत् प्रयासों के परिणामस्वरुप, पांच राज्यों अर्थात् आंध्र प्रदेश हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और तेलंगाना ने उनके राज्यों के विशिष्ट पेसा नियम अधिसूचित किए हैं। शेष राज्य नियमों को तैयार करने की प्रक्रिया की समाप्ति की विभिन्न अवस्थाओं में हैं।

 ग्राम सभा/पंचायतों को निम्नलिखित शक्ति प्रदान करता है-

  1. भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और विस्थापित व्यक्तियों के पुनर्वास में अनिवार्य परामर्श का अधिकार
  2. एक उचित स्तर पर पंचायत को लघु जल निकायों की योजना और प्रबंधन का कार्य सौंपा गया है
  3.  एक उचित स्तर की ग्राम सभा या पंचायत द्वारा खान और खनिजों के लिए संभावित लाइसेंस पट्टा, रियायतें देने के लिए अनिवार्य सिफारिशें करने का अधिकार
  4. मादक द्रव्यों की बिक्री / खपत को विनियमित करना
  5. लघु वनोपजों का स्वामित्व
  6.  भूमि हस्तान्तरण को रोकना और हस्तांतरित भूमि की बहाली
  7. गांव बाजारों का प्रबंधन
  8. अनुसूचित जनजाति को दिए जाने वाले ऋण पर नियंत्रण
  9. सामाजिक क्षेत्र में कार्यकर्ताओ और संस्थानों, जनजातीय उप योजना और संसाधनों सहित स्थानीय योजनाओं पर नियंत्रण

आदर्श पेसा नियमों की मुख्य विशेषताएं

  • ग्राम पंचायत को ग्राम सभा की कार्यकारी समिति माना जाएगा। ग्राम पंचायत का सचिव ग्राम सभा का सचिव माना जाएगा तथा ग्राम सभा दो माह में कम-से-कम एक बार बैठक आयोजित करेगी।
  • ऐसे व्यक्ति को, जो अनुसूचित जनजाति का सदस्य होगा, सर्वसम्मति से एक वर्ष के लिए ग्राम सभा की बैठकों के लिए अध्यक्ष चुना जाएगा। सर्वसम्मति न होने की दशा में, उपस्थित सदस्यों में से सबसे अधिक आयु की अनुसूचित जनजाति की महिला अध्यक्ष होगी।
  • ग्राम सभा की बैठकों के लिए गणपूर्ति कुल सदस्यों की संख्या का बीस प्रतिशत होगी । महिलाओं के लिए अलग गणपूर्ति होगी, जो सामान्य गणपूर्ति का एक-तिहाई होगी।
  • ग्राम सभा गांव के कार्यकरण के विभिन्न पहलुओं के संबंध में उत्तरदायित्व के निर्वहन के उद्देश्य से स्थायी समितियों का गठन कर सकेगी जैसे शांति समिति, न्याय समिति, संसाधन आयोजना और प्रबंधन समिति, मद्यपान नियंत्रण समिति, ऋण नियंत्रण समिति, बाजार समिति, सभाकोष  समिति तथा ग्राम सभा द्वारा उपयुक्त समझी जाने वाली कोई अन्य समिति, जिनके सदस्यों का चयन ग्राम सभा के सदस्यों में से ग्राम सभा की खुली बैठक में किया जाएगा। इसके अलावा, आवश्यकता के अनुसार अस्थायी और तदर्थ समितियों का गठन भी किया जा सकेगा। सभी स्थायी समितियों का कार्यकाल एक या दो वर्ष होगा, जैसा ग्राम सभा द्वारा निर्णय लिया जाए।
  • यदि किसी अधिनियम के अंतर्गत किसी विषय जैसे वन, सिंचाई प्रबंधन आदि पर किसी सरकारी विभाग द्वारा कोई निकाय अथवा समिति गठित की गई है, तो उसे उस विषय पर ग्राम सभा की स्थायी समिति माना जाएगा। संबधित अधिनियम में किसी उपबंध के होते हुए, वह निकाय अथवा समिति ग्राम सभा के प्रति उत्तरदायी होगी।
  • ग्राम सभा एक ग्राम सभा कोष का अनुरक्षण करेगी जिसमें किसी भी रुप में प्राप्त हुए अंशदान को रखा जाएगा जिसमें नकद अथवा वस्तुओं के रुप में स्वैच्छिक अंशदान तथा ग्रामवासियों की मजदूरी; सूक्ष्म वन उत्पादों, सूक्ष्म खनिजों आदि के लिए सरकार के माध्यम से प्राप्त राशि; और ग्राम सभा द्वारा संसाधनों के उपभोग पर अधिरोपित प्रशुल्क अथवा उदग्रहित जुर्माने शामिल होंगे । ग्राम सभा के पास अपने निर्णयों के अनुसार इसके उपयोग का पूर्ण अधिकार होगा।
  • ग्राम सभा द्वारा विवाद निपटान की प्रक्रिया को भी आदर्श नियमों में सूचीबद्ध किया गया है।
  • ग्राम सभा यह सुनिश्चित करेगी कि संसाधनों का उपयोग इस प्रकार से हो कि:
  1. आजीविका के साधनों को बनाए रखा जा सके।
  2. लोगों के मध्य असमानता में वृद्धि न हो।
  3. संसाधन कुछ ही लोगों तक सीमित न रहने पाएं।
  • ग्राम सभा यह सुनिश्चित करेगी कि अनुसूचित जनजातियों से संबंधित कोई भी भूमि गैर-अनुसूचित जनजातियों के व्यक्तियों को अंतरित न होने पाए । यह भूमि संबंधी लेन-देनों की जांच करने के लिए सक्षम होगी अथवा किसी शिकायत के आधार पर अथवा स्वयं अपनी ओर से ऐसा करने के लिए शांति समिति को प्राधिकृत कर सकेगी। यदि ग्राम सभा की यह राय है कि अनुसूचित जनजातियों से संबंधित भूमि पर कब्जा किए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं, तो यह लेन-देन को प्रतिषिद्ध करने के लिए अनुदेश जारी करेगी तथा ऐसे मामलों में इसका निर्णय अंतिम होगा।
  • ग्राम सभा को भूमि-अधिग्रहण; शांति और सुरक्षा तथा विवाद निपटान;  प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन; कृषि और भूमि; खान और खनिज; मद्यपान नियंत्रण; सूक्ष्म वन उत्पाद; बाजारों का प्रबंधन; साहूकारी; लाभार्थियों की पहचान; योजनाओं के अनुमोदन; सामाजिक क्षेत्र की स्कीमों की समीक्षा तथा स्थानीय संस्थाओं जैसे विद्यालयों और अस्पतालों आदि की समीक्षा से संबंधित समस्त निर्णयों में अनिवार्य रुप से शामिल किया जाएगा।
  • ग्राम सभा (i) जन्म (ii) मृत्यु (iii) विवाहों (iv) त्योहारों (v) आजीविका की तलाश में गांव से बाहर जाने वाले व्यक्तियों के विवरणों के लिए एक पृथक रजिस्टर का अनुरक्षण करने के लिए सक्षम है।
  • ग्राम पंचायत के लिए अपने क्षेत्रों में किए गए कार्यों के लिए ग्राम सभा द्वारा लिए गए समस्त धन के उपयोग का प्रमाण-पत्र उससे प्राप्त करना अनिवार्य है।
  • यदि ग्राम सभा की यह राय है कि कोई राज्य विधान प्रथागत विधि, सामाजिक और धार्मिक रिवाजों और समुदाय संसाधनों की पारंपरिक प्रबंधन प्रक्रियाओं के अनुरुप नहीं है, तो वह उस संबंध में एक संकल्प पारित करेगी और जिला कलक्टर के माध्यम से उसे राज्य सरकार को भिजवाएगी। राज्य सरकार उस पर आवश्यक कार्रवाई करेगी।

पेसा का महत्व

पेसा का प्रभावी क्रियान्वयन न केवल विकास लाएगा बल्कि यह पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में लोकतंत्र भी और गहरा होगा। पेसा के कई फायदे हैं।
इससे निर्णय लेने में लोगों की भागीदारी में वृद्धि होगी। पेसा आदिवासी क्षेत्रों में अलगाव की भावना को कम करेगा और सार्वजनिक संसाधनों के उपयोग पर बेहतर नियंत्रण होगा। पेसा से जनजातीय आबादी में गरीबी और बाहर पलायन कम हो जाएगा क्योंकि प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण और प्रबंधन से उनकी आजीविका और आय में सुधार होगा।. पेसा जनजातीय आबादी के शोषण को कम करेगा, क्योंकि वे ऋण देने, शराब की बिक्री खपत एवं गांव बाजारों का प्रबंधन करने में सक्षम होंगे। पेसा के प्रभावी कार्यान्वयन से भूमि के अवैध हस्तान्तरण पर रोक लगेगी और आदिवासियों की अवैध रूप से हस्तान्तरित जमीन को बहाल किया जा सकेगा और सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि पेसा परंपराओं, रीति-रिवाजों और जनजातीय आबादी की सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण के माध्यम से सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देगा।

IAS All India Prelims Test Series

ओरिएंट आईएएस ऑल इंडिया आईएएस प्रीलिम्स टेस्ट सीरीज 2017

IAS परीक्षाओं की तैयारी हेतु अग्रणी संस्थान ओरिएंट आईएएस द्वारा ‘ऑल इंडिया आईएएस प्रीलिम्स टेस्ट सीरीज 2017’ को तैयार किया गया है। इस पुस्तक में 100 प्रश्नों वाले 16 टेस्ट सीरीज IAS प्रारंभिक परीक्षा के अनुरूप तैयार किए गए हैं। टेस्ट सीरीज में परम्परागत प्रश्न के साथ-साथ नवीन समसामयिकी को भी सम्यक स्थान दिया गया है। अभ्यर्थियों में उत्तर लेखन विकसित करने हेतु प्रत्येक प्रश्न का विश्लेषण सहित व्याख्यात्मक हल भी प्रदान किया गया है।

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IAS Prelims Mock Test Series 2017

क्रॉनिकल ऑल इंडिया आईएएस प्रीलिम्स टेस्ट सीरीज 2017

क्रॉनिकल प्रकाशन सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी के लिए एक जाना हुआ नाम है। प्रत्येक वर्ष काफी प्रश्न इसकी पुस्तकों से पूंछे जाते हैं।ऑल इंडिया आईएएस प्रीलिम्स टेस्ट सीरीज 2017’ इसी श्रेणी में एक अन्य पुस्तक हैं जो IAS परीक्षा 2017 को ध्यान में रखकर तैयार तैयार किया गया है। इस पुस्तक में NCERT आधारित, विषय विशेष और समसामयिकी आधारित टेस्ट पेपर रखा गया है और प्रत्येक टेस्ट सीरीज में 100 प्रश्न सम्मिलित किये गए है।

सामान्य अध्ययन पेपर-I के 9 टेस्ट और सीसेट पेपर-II के 5 टेस्ट भी सम्मिलित किये गए है। अभ्यर्थी में उत्तर लेखन विकसित करने हेतु प्रत्येक प्रश्न का विश्लेषण सहित व्याख्यात्मक हल भी प्रदान किया गया है।

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IAS Prelims All India Test Series 2017

क्रॉनिकल सिविल सर्विसेज करंट अफेयर मॉक टेस्ट सीरीज 2017

यह मॉक टेस्ट सीरीज IAS प्रीलिम्स 2017 के नवीनतम परीक्षा पैटर्न पर आधारित है और आईएस 2017 में प्रतिभाग करने वाले अभ्यर्थीयों के लिए विशेष उपयोगी है। इस ऑनलाइन मॉक टेस्ट सीरीज में आप अपने मोबाइल से भी प्रतिभाग कर सकते हैं और अपनी तैयारी की जांच कर सकते हैं।

सिविल सर्विसेज करंट अफेयर: मॉक टेस्ट सीरीज 2017 की शुरुवात क्रॉनिकल IAS के सहयोग से Online Tyari द्वारा आपको प्रदान किया जा रहा है।

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IAS Indian Polity Best Books

भारत की राजव्यवस्था: पंचम संस्करण, एम. लक्ष्मीकान्त

हिंदी माध्यम से सिविल सर्विस की तैयारी कर रहे सभी छात्रों के लिए इस पुस्तक का अध्ययन करना अत्यंत आवश्यक है। पंचम संस्करण में सिविल सर्विस के पाठ्यक्रम में हुए अभी तक के सभी बदलाव को शामिल किया गया है। पुस्तक में राजव्यवस्था के बुनियादी संकल्पनाओं, भारतीय संविधान का इतिहास और संशोधन, कार्यपालिका और न्यायपालिका के समस्त कलेवर को अत्यंत सरल भाषा में समझाया गया है। यह पुस्तक MC Graw Hill प्रकाशन से प्रकाशित की गई है।

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IAS Prelims 2017 Best Books

भारतीय अर्थव्यवस्था: सिविल सेवा परीक्षा के लिए सफल मार्गदर्शिका – रमेश सिंह

अपने ज्ञान में विस्तार के लिए और सिविल सेवा परीक्षाओं में भारतीय अर्थव्यवस्था की तैयारी के लिए रमेश सिंह द्वारा लिखित और MC Graw Hill द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक का अध्ययन अवश्यक है। सामान्य अध्ययन के कौशल को विकसित करने में भी यह पुस्तक सहायक है और इसमें सिविल सेवा परीक्षाओं के पाठ्यक्रम के तहत अध्याय और सामग्री का संकलन किया गया है जिससे अभ्यर्थी को परीक्षा में सफलता पाना सरल हो जाएगा।

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भारत का भूगोल: माजिद हुसैन और रमेश सिंह

भारत का भूगोल पुस्तक में भारतीय भूगोल का विहंगम अध्ययन किया गया है। इस पुस्तक में भौगोलिक संरचना, नदी, मरुस्थल, पहाड़ और पठार, पहाड़ी श्रृंखला, नहर, कृषि, अभ्यारण, खनिज, उर्जा स्त्रोत, जलवायु, मिट्टी, राजनीतिक-भूगोल, भौगोलिक-संकृति आदि विषयों पर कवर किया गया है। यह पुस्तक सरल भाषा में सम्पूर्ण सिविल सर्विस परीक्षा के पाठ्यक्रम को कवर करती है इसलिए यह पुस्तक सभी हिंदी माध्यम से तैयारी करने वाले छात्रों के लिए विशेष उपयोगी बन गई है।

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अब हम करेंट अफ़ेयर्स पर IAS प्रारंभिक परीक्षा 2017 के महत्वपूर्ण विषयों पर आधआरित अपने इस लेख को यहीं विराम देते हैं। हमारे साथ बने रहें क्योंकि हम दिन-प्रतिदिन बचे हुए विषयों पर चर्चा करेंगे। सिविल सेवा परीक्षाओं में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए सर्वश्रेष्ठ IAS परीक्षा तैयारी एप नि:शुल्क डाउनलोड करें।

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