IAS परीक्षा और सरकारी पहल एवं योजनाएं: एक विश्लेषण

IAS परीक्षा और सरकारी पहल एवं  योजनाएं: एक विश्लेषण: IAS प्रारंभिक परीक्षा के लिए अब मात्र तीन महीने ही बचे हैं आपके पास। प्रति वर्ष IAS परीक्षा में सरकारी पहल एवं योजना से प्रश्न इस परीक्षा में पूछे जाते हैं। ऐसे में यह आवश्यक है कि एक नजर सभी महत्पूर्ण योजनाओं पर डाल ली जाय जिससे सरकारी पहल एवं योजनाए के विषय से हम अवगत हो जाएं।

यह समय सभी अभ्यर्थियों के लिए बहुत ही महत्पूर्ण है और एक-एक दिन की कीमत बहुमूल्य है। तो सभी अभ्यर्थी प्रत्येक दिन का सदुपयोग करें और अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ते रहें।

 

IAS परीक्षा और सरकारी पहल एवं  योजनाएं: एक विश्लेषण

डिजिटल इंडिया

  • प्रधानमंत्री की सबसे महत्‍वाकांक्षी योजनाओं में से एक ‘डिजिटल इंडिया’ की शुरुआत 21 अगस्त 2014 को हुई।
  • इस अभियान का मकसद भारत को एक इलेक्‍ट्रॉनिक अर्थव्यवस्था में बदलना है।
  • सरकार की मंशा है कि सभी सरकारी विभाग और भारत की जनता एक दूसरे से डिजिटल रूप से या इलेक्‍ट्रॉनिक तौर पर जुड़ें ताकि प्रभावी प्रशासन चलाया जा सके।
  • इसका एक लक्ष्य कागजी कार्रवाई कम से कम करके सभीसरकारी सेवाओं को जनता तक इलेक्‍ट्रॉनिकली पहुंचाना है।
  • सबसे महत्‍वपूर्ण यह कि इसके तहत देश के सभी गांवों और ग्रामीण इलाकों को इंटरनेट नेटवर्क से जोड़ना है।
  • डिजिटल भारत के तीन प्रमुख घटक बताए गए हैं- डिजिटल बुनियादी सुविधाएं, डिजिटल साक्षरता और सेवाओं का डिजिटल वितरण।
  • ऐसा करने से सरकारी कामकाज में पारदर्शि‍ता बढ़ेगी, जिससे लाल फीताशाही का खात्‍मा होगा।
  • सरकार ई-गवर्नेंस और ई-क्रांति के जरिए तकनकी के माध्‍यम से जनता के कामकाज का जल्‍द से जल्‍द निस्‍तार करना चाहती है।

स्वच्छ भारत अभियान

  • प्रधानमंत्री ने 24 सितंबर 2014 को स्वच्छ भारत अभियान को मंजूरी दी जो, यह योजना ‘निर्मल भारत कार्यक्रम’ का संशोधित रूप है।
  • स्वच्छ भारत अभियान को औपचारिक रुप से महात्मा गांधी की जयंती पर 2 अक्टूबर 2014 को शुरू किया गया।
  • इसके तहत 2019 तक यानी महात्मा गांधी की 150वीं जयंती तक भारत को स्वच्छ बनाने का लक्ष्‍य किया गया है।
  • इसके तहत सरकार ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों तक शौचालय और साफ-सफाई की सुविधाएं पहुंचाने का काम कर रही है।
  • इसमें जनता में सफाई के लिए, साफ सड़कों और गलियों के लिए, अतिक्रमण हटाने के लिए जागरुकता पैदा करना भी शामिल है।
  • शहरी विकास मंत्रालय ने हाल ही सबसे साफ शहरों की सूची जारी की, जिसमें मैसूर नंबर वन शहर बना। इसके बाद तिरुचिपल्‍ली और नवी मुंबई को क्रम से दूसरे और तीसरे नंबर पर रखा गया।

मेक इन इंडिया

  • मूल रूप से यह एक नारा है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिया है। इसके तहत भारत में वैश्विक निवेश और विनिर्माण को आकर्षित करने की योजना बनाई गई, जिसे 25 सितंबर 2014 को लॉन्‍च किया गया।
  • बाद में आगे चलकर यह एक इंटरनेशनल मार्केटिंग अभियान बन गया। मेक इन इंडिया अभियान इसलिए शुरू किया गया, जिससे भारत में बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा हों और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिले।
  • मेक इन इंडिया की कोशिश है कि भारत एक आत्मनिर्भर देश बने। इसका एक उद्देश्य देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को अनुमति देना और घाटे में चल रही सरकारी कंपनियों की हालत दुरुस्त करना भी है।
  • मेक इन इंडिया अभियान पूरी तरह से केंद्र सरकार के अधीन है और सरकार ने ऐसे 25 सेक्टरों की पहचान की है, जिनमें ग्‍लोबल लीडर बनने की क्षमता है।

प्रधानमंत्री उज्‍जवला योजना

  • इसकी शुरुआत प्रधानमंत्री ने 1 मई 2016 को यूपी के बलिया से की।
  • उज्ज्वला योजना के तहत 3 करोड़ BPL परिवार की महिलाओं को मुफ्त रसोई गैस कनेक्‍शन दिया।
  • प्रधानमंत्री ने घोषणा की है कि आने वाले में तीन वर्षों में 5 करोड़ गरीब परिवारों को जहां लकड़ी का चूल्हा जलता है, मुफ्त गैस कनेक्शन दिया जाएगा।

अटल पेंशन योजना

  • प्रधानमंत्री जन धन योजना की सफलता से उत्‍साहित देश की युवा पीढ़ी को ध्‍यान में रखकर तैयार की गई मोदी सरकार की यह एक और अहम योजना है।
  • वित्त मंत्री अरुण जेटली ने फरवरी 2015 के बजट भाषण में कहा था, ‘दुखद है कि जब हमारी युवा पीढ़ी बूढ़ी होगी उसके पास भी कोई पेंशन नहीं होगी।’ यह योजना इसी कमी को दूर करने के लक्ष्‍य के साथ शुरू की गई।
  • इससे ये सुनिश्चित होगा कि किसी भी भारतीय नागरिक को बीमारी, दुर्घटना या वृद्धावस्था में अभाव की चिंता नहीं करनी पड़ेगी।
  • इसे आदर्श बनाते हुए राष्ट्रीय पेंशन योजना के तौर पर अटल पेंशन योजना एक जून 2015 से प्रभावी हो गई।
  • इस योजना का उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के लोगों को पेंशन फायदों के दायरे में लाना है।
  • इससे उन्हें हर महीने न्यूनतम भागीदारी के साथ सामाजिक सुरक्षा का लाभ उठाने की अनुमति मिलेगी।

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ

  • प्रधानमंत्री ने 22 जनवरी 2015 को हरियाणा के पानीपत से इस योजना की शुरुआत की।
  • 100 करोड़ रुपये की शुरुआती राशि‍ के साथ यह योजना देशभर के 100 जिलों में शुरू की गई।
  • हरियाणा में जहां बाल लिंगानुपात (सीएसआर) बेहद कम है, इस योजना का लक्ष्य लड़कियों को पढ़ाई के जरिए सामाजिक और वित्तीय तौर पर आत्मनिर्भर बनाना है।
  • सरकार के इस नजरिए से महिलाओं की कल्याण सेवाओं के प्रति जागरुकता पैदा करने और निष्पादन क्षमता में सुधार को बढ़ावा मिलेगा।

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना

  • गरीबी के खिलाफ लड़ाई और बेहतर रोजगार अवसर के लिए देश के लोगों खासकर युवाओं को कुशल बनाने के लिए इस योजना की शुरुआत की गई।
  • 15 जुलाई 2015 को इसकी शुरुआत करते हुए पीएम ने कहा, ‘अगर देश के लोगों की क्षमता को समुचित और बदलते समय की आवश्यकता के अनुसार कौशल का प्रशिक्षण दे कर निखारा जाता है तो भारत के पास दुनिया को 4 से 5 करोड़ कार्यबल उपलब्ध करवाने की क्षमता होगी।’
  • सरकार इसके तहत देश के इंडस्‍ट्रियल ट्रेनिंग सेंटर्स को बढ़ावा देती है, ताकि युवाओं को स्‍किलफुल बनाया जा सके।

 स्टैंड अप इंडिया स्कीम

  • इसकी शुरुआत 5 अप्रैल 2016 को नोएडा के सेक्टर-62 में की गई।
  • इस योजना के लिए प्रधानमंत्री ने एक वेब पोर्टल की शुरुआत की।
  • इस स्कीम को लेकर भारत के उद्यमी वर्ग में खासा उत्साह है। इसका उद्देश्‍य नए उद्यमियों को स्थापित करने में मदद करना है।
  • इससे देशभर में रोजगार बढ़ेगा। योजना के अंतर्गत 10 लाख रुपये से 100 लाख रुपये तक की सीमा में ऋणों के लिए अनुसूचित जाति/अनुसूचित जन जाति और महिलाओं के बीच उद्यमशीलता को प्रोत्साहन दिया जाएगा।
  • 10 हजार करोड़ रुपये की शुरुआती धनराशि के साथ भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) के माध्यम से फिर से वित्त सुविधा।
  • एनसीजीटीसी के माध्यम से लोन गारंटी के लिए 5000 करोड़ रुपये के कोष का निर्माण।

सुकन्‍या समृद्धि योजना

  • इस योजना की शुरुआत पीएम मोदी ने 22 जनवरी 2015 को की।
  • यह असल में ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ योजना का ही विस्‍तार है, जिसका मकसद देश में बेटियों के लिए सकारात्‍मक माहौल तैयार करना है।
  • इसमें बेटी के नाम से बैंक खाता खोलने पर सबसे अधिक 9।2 फीसदी का ब्‍याज दर मिलता है।
  • इससे इनकम टैक्‍स में छूट मिलती है।
  • इस खाते की मैच्‍योरिटी खाता खोलने की तारीख से 21 साल या फिर बेटी की शादी की तारीख जो पहले आ जाए होती है।
  • इसमें शुरुआती जमा राशि‍ 1000 रुपये है, जबकि अधि‍कतम 1।5 लाख रुपये तक जमा किया जा सकता है।

मुद्रा बैंक योजना

  • प्रधानमंत्री ने इस योजना की शुरुआत 8 अप्रैल 2015 को की।
  • इसके तहत मुद्रा बैंक छोटे एंटरप्रेन्‍योर्स को 10 लाख रुपये तक का क्रेडिट देतीहै और माइक्रो फाइनेंस इंस्‍ट‍िट्यूसंश के लिए रेगुलेटरी बॉडी की तरह काम करती है।
  • इसका उद्देश्‍य छोटे एंटरप्रेन्‍योर्स को बढ़ावा देना है।
  • इसमें तीन विकल्‍प हैं- शि‍शु में 50 हजार तक का लोन, किशोर में 50 हजार से 5 लाख तक का लोन और तरुण में 5 लाख से 10 लाख तक का लोन दिया जाता है।

प्रधानमंत्री जीवन ज्‍योति बीमा योजना

  • यह सरकार के सहयोग से चलने वाली जीवन बीमा योजना है।
  • इसमें 18 साल से 50 साल तक केभारतीय नागरिक को 2 लाख रुपये का बीमा कवर सिर्फ 330 रुपये के सलाना प्रीमियम पर उपलब्‍ध है।
  • इसकी शुरुआत प्रधानमंत्री मोदी ने 9 मई 2015 को की थी।

प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना

  • इसकी शुरुआत भी 9 मई 2015 को ही की गई थी।
  • इसमें 18 से 70 साल की उम्र के नागरिक की दुर्घटनावश मृत्‍यु या पूर्ण विकलांगता की स्‍थि‍ति में 2 लाख का कवर दिया जाता है।
  • आंशि‍क विकलांगता की स्‍थि‍ति में 1 लाख का बीमा कवर है।

किसान विकास पत्र

  • यह एक सर्टिफिकेट योजना है, जो पहली बार 1988 में लॉन्‍च की गई थी। नई सरकार ने से 2014 में री-लॉन्‍च किया है।
  • इसमें 1 हजार, 5 हजार, 10 हजार और 50 हजार की राशि‍ को 100 महीनों में दोगुना करने का प्रावधान है।
  • इसमें किसी एक व्‍यक्‍ति‍ या ज्‍वॉइंट नाम पर भी सर्टिफिकेट जारी किया जाता है, जिसका कर्ज लेने के क्रम में इस्‍तेमाल किया जा सकता है।
  • इसे वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 18 नवंबर 2014 को लॉन्‍च किया।

कृषि‍ बीमा योजना

  • इसके तहत किसान अपनी फसल का बीमा करवा सकते हैं। यदि मौमस के प्रकोप से या किसी अन्‍य कारण से फसल को नुकसान पहुंचता है तो यह योजना किसानों की मदद करती है।

प्रधानमंत्री ग्राम सिंचाई योजना

  • मोदी सरकार खुद को किसानों की सरकार बताती रही है। इसी क्रम में गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने यह सिंचाई योजना लॉन्‍च की। इसके तहत देश की सभी कृषि‍ योग्‍य भूमि को सिंचित करने का लक्ष्‍य है।

स्‍वायल हेल्‍थ कार्ड स्‍कीम

  • सरकार इसके तहत किसानों को उनकी कृषि‍ भूमि की उर्वरकता के आधार पर स्‍वायल हेल्‍थ कार्ड जारी करती है।
  • इस कार्ड में मिट्टी की जांच के बाद इस बात की जानकारी रहती है कि मिट्टी को किन उर्वरकों की जरूरत है। साथ ही इसमें कौन से फसल बेहतर हो सकते हैं।
  • मोदी सरकार ने इसके लिए 100 करोड़ का बजट भी दिया है।

 HRIDAY (नेशनल हेरिटेज सिटी डेवलपमेंट एंड ऑग्‍मेंटेशन योजना)

  • शहरी विकासमंत्रालय ने 21 जनवरी 2015 को इस योजना की शुरुआत की।
  • इसका मुख्‍य उद्देश्‍य हेरिटेड सिटीज के विकास पर है।
  • मार्च 2017 तक इस योजना के मद में 500 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
  • अजमेर, अमरावती, अमृतसर, बदामी, द्वारका, गया, कांचीपुरम, मथुरा, पुरी, वाराणसी, वेलंकणी और वारंगल में इसके तहत काम हो रहा है।

इंद्रधनुष

  • इस योजना का उद्देश्‍य बच्‍चों में रोग-प्रतिरक्षण की प्रक्रिया को तेज गति देना है।
  • इसमें 2020 तक बच्‍चों को सात बीमारियों- डिप्थीरिया, काली खांसी, टिटनेस, पोलियो, टीबी, खसरा और हेपेटाइटिस बी से लड़ने के लिए वैक्‍सनेशन की व्‍यवस्‍था की गई है।
  • इसे 25 दिसंबर 2014 को केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री जेपी नड्डा ने लॉन्‍च किया।

दीन दयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्‍योति योजना

  • भारत के गांवों को अबाध बिजली आपूर्ति लक्ष्‍य करते हुए इस योजना की शुरुआत की गई है।
  • सरकार गांवों तक 24×7 बिजली पहुंचाने के लिए इस योजना के तहत 75 हजार 600 करोड़ रुपये खर्च करने वाली है।
  • यह योजना राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के रिप्‍लेसमेंट के तौर पर लाई गई।

 दीन दयाल उपाध्‍याय ग्रामीण कौशल्‍या योजना

  • यह योजना ग्रामीण जगत के युवाओं को रोजगार के अवसर मुहैया करवाने के लिए लक्षि‍त है।
  • 25 सितंबर 2014 को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और वेंकैया नायडू ने इसकी शुरुआत की।
  • इसके तहत 18 साल से 35 साल के ग्रामीण युवाओं को रोजगार के अवसर दिए जाएंगे।

महात्‍मा गांधी प्रवासी सुरक्षा योजना

  • यह योजना विदेश मंत्रालय के अधीन है। इसके तहत विदेशों में रह रहे भारतीय मजदूरों के लिए पेंशन और जीवन बीमा की व्‍यवस्‍था है।
  • यह एक वॉलेंटियरी स्‍कीम है।

उड़ान प्रोजेक्‍ट

  • जम्मू एवं कश्मीर में ‘उड़ान’ योजना की शुरुआत विशेष उद्योग पहल के तहत 40,000 युवाओं को पांच साल में प्रमुख उच्च विकास क्षेत्रों में कौशल प्रदान करने और उनमें रोजगार क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से की गई है।
  • राष्ट्रीय कौशल विकास परिषद (एनएसडीसी) और निगमित क्षेत्र द्वारा इस योजना का क्रियान्वयन पीपीपी मोड में किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री जन धन योजना

  • प्रधानमंत्री जन धन योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 अगस्त 2014 को प्रधानमंत्री जन धन योजना की शुरुआत की।
  • इस योजना की घोषणा उन्होंने 15 अगस्त 2014 को अपने पहले स्वतंत्रता दिवस भाषण में की थी। यह एक वित्तीय समावेशन कार्यक्रम है।
  • इस कार्यक्रम के शुरु होने के पहले दिन ही डेढ़ करोड़ बैंक खाते खोले गए थे और हर खाता धारक को 1,00,000 रुपये का बीमा कवर दिया गया।
  • इस योजना के तहत अब तक 02 करोड़ खाते खोले गए और उनमें करीब 1,500 करोड़ रुपये जमा किये गए।
  • इस योजना के अनुसार कोई भी व्यक्ति शून्य बैलेंस राशि के साथ खाता खोल सकता है।

सांसद आदर्श ग्राम योजना

  • सांसद आदर्श ग्राम योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 अक्टूबर 2014 को सांसद आदर्श ग्राम योजना की शुरुआत की।
  • इस योजना के अनुसार हर सांसद को साल 2019 तक तीन गांवों को विकसित करना होगा।
  • इसका विचार यह है कि भारत के गांवों को भौतिक और संस्थागत बुनियादी ढांचे के साथ पूरी तरह विकसित किया जा सके।
  • इस योजना के लिए कुछ दिशा निर्देश हैं जिन्हें ग्रामीण विकास विभाग ने तैयार किया है।
  • प्रधानमंत्री ने 11 अक्टूबर 2014 को इन दिशा निर्देर्शों को जारी किया और सभी सांसदों से अपील की कि वे 2016 तक अपने संसदीय क्षेत्र में एक मॉडल गांव और 2019 तक दो और गांव तैयार करें।

इलेक्टोरल बॉन्ड

  • बजट के जरिए सरकार ने राजनीतिक दलों को 2000 रुपये से अधिक कैश चंदा लेने से प्रतिबंधित कर दिया है।
  • 2000 रुपये से अधिक चंदा चेक अथवा डिजिटल ट्रांजैक्शन के जरिए लेना अनिवार्य करने के साथ-साथ सभी दलों को इनकम टैक्स रिटर्न भरने की अनिवार्यता कर दी है।
  • इस हेतु केन्द्र सरकार इलेक्टोरल बॉन्ड जारी करने जा रही है और इसके लिए वह रिजर्व बैंक के नियमों में संशोधन करने की तैयारी में है।
  • इस बॉन्ड को कोई नोटीफाइड बैंक जारी करेगा।
  • डोनर द्वारा खरीदे गए बॉन्ड को स्कीम के तहत तय समय के लिएराजनीतिक दलों को दिया जाएगा।
  • राजनीतिक दल अपने नोटिफाइड बैंक अकाउंट के जरिए इन बॉन्ड को कैश करा सकते हैं।
  • इस बॉन्ड के लिए देश के सभी राजनीतिक दल को एक बैंक अकाउंट चुनाव आयोग के पास नोटिफाई कराना होगा जिसमें वह इस बॉन्ड के पैसे को प्राप्त कर सकते हैं।

 हाइड्रोकार्बन अन्वेषण और लाइसेंसिंग नीति (HELP)

  • हाइड्रोकार्बन के सभी स्‍वरूपों के उत्‍खनन एवं उत्‍पादन के लिए एकसमान लाइसेंस
  • खुली रकबा नीति
  • राजस्‍व भागीदारी वाले मॉडल के संचालन में आसानी
  • उत्‍पादित कच्‍चे तेल और प्राकृतिक गैस के लिए विपणन व मूल्‍य निर्धारण संबंधी आजादी
  • एकसमान लाइसेंस से ठेकेदार के लिए एकल लाइसेंस के तहत परंपरागत के साथ-साथ गैर परंपरागत तेल एवं गैस संसाधनों का भी उत्‍खनन करना संभव हो जाएगा, जिनमें सीबीएम, शेल गैस/तेल, टाइट गैस और गैस हाइड्रेट्स भी शामिल हैं। खुली रकबा नीति की अवधारणा से ईएंडपी कंपनियों के लिए नामित क्षेत्र से ब्‍लॉकों का चयन करना संभव हो जाएगा।
  • निवेश गुणज और लागत वसूली/उत्‍पादन संबंधी भुगतान पर आधारित उत्‍पादन हिस्‍सेदारी वाली मौजूदा राजकोषीय प्रणाली का स्‍थान राजस्‍व हिस्‍सेदारी वाला ऐसा मॉडल लेगा, जिसका संचालन करना आसान होगा।
  • अपतटीय क्षेत्रों में उत्‍खनन एवं उत्‍पादन में निहित बेहद जोखिम और लागत को ध्‍यान में रखते हुए एनईएलपी से जुड़ी रॉयल्‍टी दरों की तुलना में इन क्षेत्रों के लिए अपेक्षाकृत कम रॉयल्‍टी दरें तय की गई हैं, ताकि उत्‍खनन एवं उत्‍पादन को बढ़ावा दिया जा सके।

सीमा हाट (सीमा बाजार)

  • सीमा हाट की स्‍थापना का उद्देश्‍य दोनों देशों की सीमा और दूर दराज में रहने वाले लोगों का बाजार की पारंपरिक व्‍यवस्‍था,स्‍थानीय मुद्रा में स्‍थानीय उत्‍पादों की खरीद-बिक्री और वस्‍तु विनिमय के जरिये कल्‍याण करना है।
  • यद्पि इसका द्विपक्षीय व्‍यापार में प्रतिशत के हिसाब से महत्‍व नहीं है लेकिन इस तरह के उपाय समाज के वंचित लोगों को आर्थिक हालत में सुधार लाने में मदद करते हैं। निम्मलिखित बॉर्डर हाट पहले से ही संचालित हैं-
  1. कलाइचर (मेघालय- बांग्लादेश सीमा)
  2. बलात (मेघालय- बांग्लादेश सीमा)
  3. कमलासागर (त्रिपुरा- बांग्लादेश सीमा)
  4. श्रीनगर (त्रिपुरा- बांग्लादेश सीमा)

इसके अतिरिक्त दोनों सरकारों में त्रिपुरा में दो बॉर्डर हाट और बांग्लादेश सीमा पर मेघालय में चार बॉर्डर हाट स्थापित करने पर सहमति हुई है।

राष्ट्रीय निवेश और इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड

  • राष्ट्रीय निवेश एवं इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड (एनआईआईएफ) की स्‍स्थापना थापना भारत सरकार द्वारा 40,000 करोड़ रुपये के अपेक्षि‍त प्रारंभि‍क कोष (कॉर्पस) के साथ की गई है।
  • यह फंड दरअसल फंडों की एक प्रस्तावित श्रृंखला के साथ ‘फंडों के फंड’ (द्वितीय श्रेणी के वैकल्पिक निवेश कोष) के रूप में बनाया गया है।

तेजस्विनी परियोजना

  • झारखंड में किशोरियों एवं युवा महिलाओं को शिक्षा, प्रशिक्षण एवं रोजगार के क्षेत्र में विविध अवरोधों से बचाने और कौशल विकास के माध्यम से इन किशोरियों एवं महिलाओं का सशक्तिकरण कर उन्हें शिक्षा, प्रशिक्षण एवं रोजगार प्राप्त करने में मदद करने हेतु झारखंड सरकार द्वारा तेजस्विनी परियोजना आरंभ की गई है।
  • 23 फरवरी, 2017 को नई दिल्ली में भारत सरकार, झारखंड सरकार तथा विश्व बैंक के मध्य तेजस्विनी परियोजना हेतु 63 मिलियन डॉलर के ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। यह परियोजना झारखंड के 17 जिलों में कार्यान्वित की जाएगी।
  • यह परियोजना 14-24 वर्ष आयु समूह की किशोरियों एवं युवा महिलाओं को उनकी माध्यमिक स्तरीय शिक्षा पूर्ण करने तथा रोजगार हेतु प्रासंगिक कौशल प्राप्त करने में मदद करेगी।
  • इस परियोजना की कुल लागत 90 मिलियन डॉलर है।
  • तेजस्विनी परियोजना के तीन मुख्य घटक हैंः-
    (i) सामाजिक, शैक्षिक एवं आर्थिक अवसरों का विस्तार
    (ii) तीव्र सेवा आपूर्ति
    (iii) राज्य क्षमता-निर्माण एवं कार्यान्वयन सहयोग।

सार्वभौमिक स्‍वर्ण बांड योजना

  • एसजीडी नकदी भुगतान पर जारी किया जाएगा और ग्राम आधारित सोने के वजन के अनुरूप होगा।
  • भारत सरकार की तरफ से भारतीय रिजर्व बैंक बांड जारी करेगा। बांड की सार्वभौमिक गारंटी होगी।
  • बांड की बिक्री केवल भारत में रहने वाले नागरिकों को की जाएगी। बांड की अधिकतम सीमा एक समुचित स्‍तर पर रखी जाएगी जो प्रति व्‍यक्ति, प्रतिवर्ष 500 ग्राम से अधिक नहीं होगी।
  • बांड डीमेट या कागज के रूप में होंगे। बांड सोने के 5,10,50,100 ग्राम के आधार पर या अन्‍य आधारों पर होंगे।
  • बैंक, गैर बैंकिंग वित्‍तीय कम्‍पनियों, डाकघरों, राष्‍ट्रीय बचत प्रमाणपत्र के एजेंट एवं अन्‍य सरकार की तरफ से बांड खरीदने के लिए धन एकत्र करेंगे और उन्‍हें वापस देने की प्रक्रिया भी पूरी करेंगे।
  • बांड की अवधि न्‍यूनतम 5 से 7 वर्षों की होगी ताकि सोने की कीमतों के मध्‍यकालीन उतार-चढ़ाव से निवेशकों की सुरक्षा हो सके।
  • इन बांडों को ऋण के लिए भी इस्‍तेमाल किया जा सकता है। इस ऋण का अनुपात समय-समय पर भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा निर्धारित साधारण स्‍वर्ण ऋण के बराबर होगा।
  • बांडों को एक्‍सचेजों में बेचा जा सकेगा और उसका कारोबार किया जा सकेगा ता‍कि निवेशक अपनी इच्‍छा से बाजार से निकल सकें।
  • बांड से प्राप्‍त होने वाली रकम सरकार अपनी उधारी के लिए प्रयोग करेगी और रकम पर बचाया जाने वाला ब्‍याज स्‍वर्ण भंडार निधि के खाते में जमा किया जाएगा। सरकार की उधारी की मौजूदा दर की तुलना के आधार पर उधारी लागत में होने वाली बचतों को स्‍वर्ण भंडार निधि में जमा किया जाएगा ताकि सोने की कीमतों की वृद्धि का जोखिम सरकार उठा सके। इसके अलावा स्‍वर्ण भंडार निधि की लगातार निगरानी की जाएगी ताकि उसका रख-रखाव होता रहे।
  • बांड के परिपक्‍व हो जाने पर उसकी वापसी केवल रुपये में होगी। बांडों की ब्‍याज दर निवेश के समय सोने के मूल्‍य के आधार पर तय की जाएगी।
  • जमा संबंधी सोने की कीमत और मुद्रा की स्थिति से जो भी जोखिम उत्‍पन्‍न होगा, उसे सरकार स्‍वर्ण भंडार निधि से वहन करेगी। यदि स्‍वर्ण भंडार निधि को कायम रखने में कठिनाई आ रही है तो उसकी स्थिति की समीक्षा की जाएगी।

सागरमाला परियोजना

  • सागरमाला परियोजना का मुख्य उद्देश्य बंदरगाहों के आसपास प्रत्यक्ष एवं प्रत्यक्ष विकास को प्रोत्साहन देना तथा बंदरगाहों तक माल के तेजी, दक्षता और किफायती ढंग से आवागमन के लिए आधारभूत संरचना उपलब्ध कराना है।
  • सागरमाला परियोजना का उद्देश्य इंटर-मॉडल समाधानों के साथ विकास के नए क्षेत्रों तक पहुंच विकसित करना तथा श्रेष्ठतम मॉडल को प्रोत्साहन देना और मुख्य मंडियों तक संपर्क सुधारना तथा रेल, अंतर्देशीय जलमार्गों, तटीय एवं सड़क सेवाओं में सुधार करना है।
  • सागरमाला परियोजना में विकास के तीन स्तंभों पर ध्यान दिया जाएगा:
  1. समेकित विकास के लिए समुचित नीति एवं संस्थागत हस्तक्षेप तथा एजेंसियों और मंत्रालयों एवं विभागों के बीच परस्पर सहयोग मजबूत करने के लिए संस्थागत ढांचा उपलब्ध कराने के जरिए बंदरगाह आधारित विकास को समर्थन देना और उसे सक्षम बनाना।
  2. आधुनिकीकरण सहित बंदरगाहों के बुनियादी ढांचे का विस्तार और नए बंदरगाहों की स्थापना।
  3. बंदरगाहों से भीतरी प्रदेश के लिए और वहां से बंदरगाहों तक माल लाने के काम में दक्षता लाना।
  • परियोजनाओं के लिए धन जुटाने के लिए समुदाय विकास निधि बनाई जाएगी।
  • नीतिगत मार्गदर्शन और उच्चस्तरीय समन्वय तथा नियोजन के विविध पहलुओं की समीक्षा तथा योजना एवं परियोजनाओं के कार्यान्वयन के लिए राष्ट्रीय सागरमाला उच्चस्तरीय कमिटी बनाई गई है।
  • सागरमाला पहल से तटीय आर्थिक क्षेत्र में रह रही आबादी का सतत विकास हो सकेगा। राज्य सरकारों और केंद्र सरकार के संबद्ध मंत्रालयों के बीच तालमेल और सहयोग एवं समन्वय से यह किया जाएगा। वर्तमान योजनाओं और कार्यक्रमों पर सहयोग किया जाएगा।

एकीकृत भुगतान इंटरफ़ेस

  • एकीकृत भुगतान इंटरफ़ेस (UPI) भुगतान की एक प्रणाली है जिसे बैंकों के माध्यम से तत्काल ऑनलाइन भुगतान करने के लिए बनाया गया है।
  • एकीकृत भुगतान इंटरफेस के माध्यम से भुगतान करने के लिए आप को लाभार्थी के नाम, बैंकखाता संख्या, बैंक का नाम और शाखा का नाम, बैंक शाखा के आईएफएससी कोड आदि की जानकारी पता करने की जरूरत नहीं है।
  • प्रेषक और प्राप्तकर्ता दोनों को अपनी एकीकृत भुगतान इंटरफ़ेस आईडी बैंक में पंजीकृत कराने की आवश्यकता होगी तथा बैंक एकीकृत भुगतान इंटरफ़ेस समूह का सदस्य होना चाहिए। भारत में बड़ी संख्या में बैंक इस समूह के सदस्य हैं।
  • एकीकृत भुगतान इंटरफ़ेस आईडी को ऑनलाइन शॉपिंग के लिए भी डेबिट कार्ड की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। आपको सिर्फ अपने UPI आईडी दर्ज करनी होगी फिर आपके फोन पर एक अलर्ट(OTP) आएगा जिसके जरिये आपको लेनदेन (Transaction) को सत्यापित करने की आवश्यकता होगी।
  • क्योंकि एकीकृत भुगतान इंटरफेस के लेन-देन को सत्यापित करने के लिए पंजीकृत फोन का उपयोग किया जाता है इस लिए इसे अधिक सुरक्षित माना जाता है।

भीम

  • देश में नव विकसित भुगतान एप भीम (धन के लिए भारत इंटरफेस) का नाम भारतीय संविधान के मुख्‍य वस्‍तुकार श्री भीम राव अम्‍बेडकर के नाम पर रखा गया।
  • भीम आधार प्‍लेटफॉर्म का उपयोग करते हुए एक बायोमीट्रिक भुगतान प्रणाली वाला एप है, जो सीधे ही बैंक के माध्‍यम से ई-भुगतान की सुविधा के लिए एकीकृत भुगतान इंटरफेस पर आधारित है।
  • इसे प्रौद्योगिकी और डिजिटल लेन-देन के महत्‍व पर जोर देना शुरू किया गया है। इसे सभी मोबाइल उपकरणों स्‍मार्ट फोन, फीचर फोन, द्वारा इंटरनेट कनेक्‍शन के साथ या उसके बिना उपयोग किया जा सकता है।
  • भीम एप द्वारा आधार गेटवे से जुड़े बैंक खाते में अंगूठे के निशान से ही भुगतान किया जा सकता है।वास्‍तव में भीम के माध्यम से प्रौद्योगिकी गरीब से गरीब छोटे व्‍यापारियों और हाशिए पर पड़े वर्गों को सशक्‍त बनाएगी।
  • इस एप को स्‍मार्ट फोन के माध्‍यम से पैसा मंगाने और भेजने में भी प्रयोग किया जा सकता है।

मिशन इन्‍द्रधनुष

  • देश के सभी आंशिक टीकाकरण और बिना टीकाकरण वाले बच्‍चों को इसमें शामिल किया जा सके।
  • इसके पहले चरण में देश के 201 उच्‍च प्राथमिकता वाले जिले चुने गए हैं जिनमें लगभग 50 प्रतिशत ऐसे बच्‍चे हैं। 07 अप्रैल, 2015 को इसके पहले दौर की शुरूआत की गई।
  • मिशन इन्‍द्रधनुष के अधीन जीवन के लिए खतरा उत्‍पन्‍न करने वाली सात बीमारियों (डिप्थीरिया, कुकुर खांसी, टिटनस, पोलियो, क्षयरोग, चेचक और हेपेटाइटिस बी) के लिए रोग प्रतिरक्षण प्रदान किया जाता है।
  • इसके अलावा, देश के चुनिन्‍दा जिले/राज्‍यों ने जापानी इंसेफेलाइटिस और हिमोफाइलस इंफ्लुएंजा टाइप बी के लिए भी टीकाकरण किया जाएगा। गर्भवती महिलाओं को टिटनस का टीका भी लगाया जाता है।

विशेष आर्थिक क्षेत्र अथवा सेज़ (एसईजेड)

  • विशेष आर्थिक क्षेत्र अथवा सेज़ (एसईजेड) उस विशेष रूप से पारिभाषित भौगोलिक क्षेत्र को कहते हैं, जहां से व्यापार, आर्थिक क्रिया कलाप, उत्पादन तथा अन्य व्यावसायिक गतिविधियों को किया जाता है।
  • यह क्षेत्र देश की सीमा के भीतर विशेष आर्थिक नियम कायदों को ध्यान में रखकर व्यावसायिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए विकसित किए जाते हैं।
  • विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) अधिनियम, 2005 के अनुसार, जो भी ईकाइयां एसईजेड में स्थापित की जाएंगी उन्हें पांच वर्षों तक कर में 100% की छूट दी जाएगी। इसके बाद अगले पांच वर्ष कर में 50% छूट दी जाएगी। इसके बाद के अगले पांच वर्ष तक निर्यात से होने वाले मुनाफे पर 50% की छूट दिए जाने का प्रावधान है। एसईजेड विकसित करने वालों को भी 10 से 15 वर्ष की समय सीमा के लिए आयकर में 100% छूट का प्रावधान किया गया है।
  • इन प्रावधानों के अलावा, यह अधिनियम, आयात-निर्यात एवं वैश्विक स्तर पर मुक्त व्यापार को स्थापित करने में सहायक है। साथ ही आयात एवं निर्यात के लिए विश्व स्तर की सुविधाएं भी उपलब्ध करा रहा हे। इस अधिनियम का उद्देश्य एसईजेड को आधिकारिक रूप से सशक्त बनाने तथा उसे स्वायत्तता प्रदान करना है जिससे एसईजेड से जुड़ी जांच एवं प्रकरणों का निपटारा जल्द से जल्द किया जाए।
  • वर्तमान में एसईजेड को निजी या सार्वजनिक क्षेत्र स्थापित कर सकता है या फिर इसे किसी के साथ मिलकर संयुक्त उद्यम के तहत भी स्थापित किया जा सकता है। एसईजेड में वस्तुओं के निर्माण, सेवाओं की उपलब्धता, निर्माण से संबंधित प्रक्रिया, व्यापार, मरम्मत एवं पुननिर्माण इत्यादि का कार्य किया जा रहा है।

हीरक चतुर्भुज योजना 

  • इस परियोजना के तहत प्रथम खंड के रूप में मुंबई-अहमदाबाद रेल लाइन को चुना गया है। इस रेल नेटवर्क पर बुलेट ट्रेन दौड़ेगी। यह योजना 9 जून 2014 को घोषित की गई।
  • इस परियोजना के अंतर्गत भारत में हाई स्पीड रेल नेटवर्क (High Speed Rail Network) के जरिए चार मेट्रो शहरों- दिल्ली, चेन्नई, मुंबई और कोलकाता को जोड़ा जाएगा। इन चार मेट्रो शहरों के चतुर्भुज के साथ दिल्ली-चेन्नई तथा मुंबई-कोलकाता के बीच सीधे रुट भी विकसित किए जाएंगे।
  • हीरक चतुर्भुज की इस महत्त्वाकांक्षी परियोजना के तहत 10 हजार किलोमीटर लंबे हाईस्पीड एवं सेमी. हाई स्पीड नेटवर्क विकसित किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

डिजिटल लॉकर

  • डिजिटल लॉकर या डिजिलॉकर, भारत केमहत्वाकांक्षी डिजिटल इंडिया कार्यक्रम का अहम हिस्सा है।
  • भारत सरकार केसंचार और आईटी मंत्रालय के द्वारा प्रबंधित इस वेबसाईट आधारित सेवा के जरिये उपयोगकर्ता जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, शैक्षणिक प्रमाण पत्र जैसे अहम दस्तावेजों को ऑनलाइन सुरक्षित रख सकते हैं।
  • यह सुविधा पाने के लिए बस उपयोगकर्ता के पासआधार कार्ड होना चाहिए। अपना आधार अंक डाल कर उपयोगकर्ता अपना डिजिलॉकर खाता खोल सकते हैं और अपने जरूरी दस्तावेज़ सुरक्षित रख सकते हैं।
  • आधार आधारित होने के कारण इस प्रणाली के दुरुपयोग की संभावना बेहद कम हो जाती है। इस सुविधा की खास बात ये है कि एक बार लॉकर में अपने दस्तावेज अपलोड करने के बाद आप कहीं भी अपने प्रमाणपत्र की मूलप्रति के स्थान पर अपने डिज़िलॉकर की वेब कड़ी (यूआरएल) दे सकेंगे।
  • भारत के संचार एवं आईटी मंत्रालय की शाखा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्मोगिकी विभाग (डीईआईटीवाई) ने जुलाई 2015 में डिजिटल लॉकर का बीटा संस्करण जारी किया है।

खान मंत्रालय राष्‍ट्रीय खनिज अन्‍वेषण नीति

  • संभावित लाइसेंस और खनन पट्टे के वास्‍ते खनिज रियायत आवंटन में पारदर्शिता लाने के लिए एमएमडीआर संशोधन विधेयक 2015 लाया गया। वर्तमान में गैर विशिष्‍ट पैमाइश परमिट (एनईआरपी) के लिए खनिज रियायत प्रदान की जाती है जिसमें संभावित और खनन लाइसेंस के लिए असीमित लेन-देन की अनुमति नहीं है।
  • अन्‍वेषण में निजी कंपनियों की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए राष्‍ट्रीय खनिज अन्‍वेषण नीति (एनएमईपी) तैयार की गई है।
  • एनएमईपी के तहत ई-नीलामी के बाद खनिज ब्‍लॉक की सफल बोली से राजस्‍व (रॉयल्‍टी /राज्‍य सरकार द्वारा एकत्रित लाभांश के तरीके से) में कुछ भागीदारी के अधिकार के साथ निजी एजेंसियां अन्‍वेषण कर सकेगी। राजस्‍व भागीदारी का भुगतान खनन लीज की पूरी अ‍वधि के दौरान हस्‍तांतरण अधिकारों के साथ या तो एक मुश्‍त किया जाएगा या वार्षिक आधार पर होगा।
  • सरकार विभिन्‍न प्रकार के खनिजों के अन्‍वेषण कार्य की मानक लागत भी तैयार करेगी ताकि अगर अन्‍वेषण एजेंसियां अपने खनन क्षेत्र में कोई खनिज नहीं खोज पाती हैं तो उन्‍हें मुआवजा दिया जा सके। अन्‍वेषण के जोखिम को कम करने के लिए अन्‍वेषण एजेंसियों के लिए यह एक अतिरिक्‍त प्रोत्‍साहन होगा।
  • निजी खनिकों का चयन निम्‍नलिखित प्रतिस्‍पर्धी बोली की पारदर्शी प्रक्रिया द्वारा किया जाएगा।
    सफल अन्‍वेषण प्रक्रिया में अधिग्रहण और प्रतिस्‍पर्धा के पहले के भूगर्भीय आधारभूत आंकड़ों की व्‍याख्‍या महत्‍वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इस संबंध में एनएमईपी निम्‍नलिखित प्रस्‍ताव देती है।
    1. प्रतिस्‍पर्धा से पहले आधारभूत भूगर्भीय आंकड़े सार्वजनिक रूप से तैयार किए जाएंगे और नि:शुल्‍क इस्‍तेमाल के लिए उपलब्‍ध होंगे।
    2. पूरे देश का नक्‍शा तैयार करने के लिए राष्‍ट्रीय एयरो जीयोफिजिकल मानचित्रण कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। इससे गहराई में दबे खनिज भंडारण को चित्रित करने में मदद मिलेगी।
    3. राष्‍ट्रीय भूगर्भीय डेटा रिपोजिटरी (एनजीडीआर) का गठन किया जाएगा। जीएसआई विभिन्‍न केंद्रीय और राज्‍य सरकार की एजेंसियों खनिज तथा रियायत पाने वालों द्वारा तैयार की गई आधारभूत और खनिज अन्‍वेषण की जानकारी की तुलना करेगी और इसे भूस्‍थानिक डेटाबेस पर रखेगी।
    4.सरकार देश में खनिज अन्‍वेषण की चुनौती से निपटने में वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकी के लिए वैज्ञानिक तथा अनुसंधान निकायों, विश्‍वविद्यालयों और उद्योग के साथ सहयोग और समर्थन करेगी। इसके लिए सरकार ने एक गैर लाभ की स्‍वायत्‍त निकाय/कंपनी के गठन का प्रस्‍ताव दिया है जिसका नाम राष्‍ट्रीय खनिज निर्धारण केंद्र (एनसीएमटी) होगा।
    5. नीलामी योग्‍य संभावनाओं को व्‍यवस्थित करने में राज्‍य सरकार की महत्‍वपूर्ण भूमिका है। उन्‍हें खनिज अन्‍वेषण का कार्य करना होगा और नीलामी के लिए जी-3 या जी-2 स्‍तर पूर्ण करना होगा। राज्‍यों को अन्‍वेषण क्षमता, प्रद्योगिकी विशेषज्ञता और बुनियादी ढांचा सुविधा का निर्माण करने की आवश्‍यकता है। केंद्र सरकार क्षमता बढ़ाने के लिए राष्‍ट्रीय खनिज अन्‍वेषण न्‍यास (एनएमईटी) से राज्‍य सरकार को सहायता प्रदान करेगी।
    6. एनएमईपी ने ऑस्‍ट्रेलिया के अनकवर परियोजना की तर्ज पर प्रदेश में गहराई में दबे खनिज भंडार की खोज के लिए विशेष पहल शुरू करने का प्रस्‍ताव किया है। पायलट परियोजना राष्‍ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्‍थान (एनजीआरआई) तथा प्रस्‍तावित राष्‍ट्रीय खजिन निर्धारण केंद्र (एनसीएमटी) एवं जीओ साइंस ऑस्‍ट्रेलिया के सहयोग से शुरू की जाएगी।
    7.खनिज अन्‍वेषण के लिए अनुबंध ढांचा के विस्‍तृत शर्तें तैयार करने के लिए खान मंत्रालय ने सलाहकार के रूप में एसबीआई कैपिटल मार्केट लिमिटेड (एसबीआई कैप) का चयन किया है। खान मंत्रालय निजी एजेंसियों को इस प्रक्रिया में शामिल करने के लिए राज्‍य सरकार की सहायता करेगा।

IAS परीक्षा 2017 की तैयारी के लिए हमारे द्वारा अनुशंसित कुछ पुस्तकें यहाँ पर दी जा रही हैं आशा हैं आपको पसंद आएगी और आपकी तैयारी में सहायक बनेंगी।

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IAS Indian Polity Best Books

भारत की राजव्यवस्था: पंचम संस्करण, एम. लक्ष्मीकान्त

हिंदी माध्यम से सिविल सर्विस की तैयारी कर रहे सभी छात्रों के लिए इस पुस्तक का अध्ययन करना अत्यंत आवश्यक है। पंचम संस्करण में सिविल सर्विस के पाठ्यक्रम में हुए अभी तक के सभी बदलाव को शामिल किया गया है। पुस्तक में राजव्यवस्था के बुनियादी संकल्पनाओं, भारतीय संविधान का इतिहास और संशोधन, कार्यपालिका और न्यायपालिका के समस्त कलेवर को अत्यंत सरल भाषा में समझाया गया है। यह पुस्तक MC Graw Hill प्रकाशन से प्रकाशित की गई है।

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भारतीय अर्थव्यवस्था: सिविल सेवा परीक्षा के लिए सफल मार्गदर्शिका – रमेश सिंह

अपने ज्ञान में विस्तार के लिए और सिविल सेवा परीक्षाओं में भारतीय अर्थव्यवस्था की तैयारी के लिए रमेश सिंह द्वारा लिखित और MC Graw Hill द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक का अध्ययन अवश्यक है। सामान्य अध्ययन के कौशल को विकसित करने में भी यह पुस्तक सहायक है और इसमें सिविल सेवा परीक्षाओं के पाठ्यक्रम के तहत अध्याय और सामग्री का संकलन किया गया है जिससे अभ्यर्थी को परीक्षा में सफलता पाना सरल हो जाएगा।

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भारत का भूगोल: माजिद हुसैन और रमेश सिंह

भारत का भूगोल पुस्तक में भारतीय भूगोल का विहंगम अध्ययन किया गया है। इस पुस्तक में भौगोलिक संरचना, नदी, मरुस्थल, पहाड़ और पठार, पहाड़ी श्रृंखला, नहर, कृषि, अभ्यारण, खनिज, उर्जा स्त्रोत, जलवायु, मिट्टी, राजनीतिक-भूगोल, भौगोलिक-संकृति आदि विषयों पर कवर किया गया है। यह पुस्तक सरल भाषा में सम्पूर्ण सिविल सर्विस परीक्षा के पाठ्यक्रम को कवर करती है इसलिए यह पुस्तक सभी हिंदी माध्यम से तैयारी करने वाले छात्रों के लिए विशेष उपयोगी बन गई है।

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भारतीय कला एवं संस्कृति, नितिन सिंघानिया, MC Graw Hills

भारतीय कला और संस्कृति भारतीय इतिहास का महत्वपूर्ण  भाग है। भारत में गीत-संगीत, नृत्य, नाटक-कला, लोक परंपराओं, कला-प्रदर्शन, धार्मिक-संस्कारों एवं अनुष्ठानों, मेलों, चित्रकारी एवं लेखन के क्षेत्रों के अतिरिक्त भारत की सांस्कृतिक विरासत, प्राचीन स्मारकों, साहित्य, दर्शन, विभिन्न योजनाओं, कार्यक्रमों, कलाप्रदर्शनों, मेले, त्यौहारों एवं हस्तकला के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई है। नितिन सिंघानिया द्वारा लिखित यह पुस्तक MC Graw Hills प्रकाशन से प्रकाशित की गई है।

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Indian History -Ghatna chakra

सामान्य अध्ययन पूर्वालोकन-2 (भारतीय इतिहास: भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन सहित),     सम-सामयिक घटना चक्र

सम-सामयिक घटना चक्र की सामान्य अध्ययन पूर्वालोकन-2 पुस्तक में केन्द्रीय और राज्य सिविल सेवा परीक्षाओं के सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र के तहत विगत वर्षों (1990 से दिसंबर 2016 तक) पूछे गए भारतीय इतिहास सम्बंधित प्रश्नों का अध्यायवार व्याखात्मक हल दिया गया है। पुस्तक में UPPCS मुख्य परीक्षा सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र को भी शामिल किया गया है। इतिहास सम्बन्धी महत्वपूर्ण प्रश्नों का संकलन होने के कारण यह पुस्तक सभी प्रतियोगी छात्रों के लिए उपयोगी हैं।

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ओरिएंट आईएएस ऑल इंडिया आईएएस प्रीलिम्स टेस्ट सीरीज 2017

IAS परीक्षाओं की तैयारी हेतु अग्रणी संस्थान ओरिएंट आईएएस द्वारा ‘ऑल इंडिया आईएएस प्रीलिम्स टेस्ट सीरीज 2017’ को तैयार किया गया है। इस पुस्तक में 100 प्रश्नों वाले 16 टेस्ट सीरीज IAS प्रारंभिक परीक्षा के अनुरूप तैयार किए गए हैं। टेस्ट सीरीज में परम्परागत प्रश्न के साथ-साथ नवीन समसामयिकी को भी सम्यक स्थान दिया गया है। अभ्यर्थियों में उत्तर लेखन विकसित करने हेतु प्रत्येक प्रश्न का विश्लेषण सहित व्याख्यात्मक हल भी प्रदान किया गया है।

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IAS Prelims Mock Test Series 2017

क्रॉनिकल ऑल इंडिया आईएएस प्रीलिम्स टेस्ट सीरीज 2017

क्रॉनिकल प्रकाशन सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी के लिए एक जाना हुआ नाम है। प्रत्येक वर्ष काफी प्रश्न इसकी पुस्तकों से पूंछे जाते हैं।ऑल इंडिया आईएएस प्रीलिम्स टेस्ट सीरीज 2017’ इसी श्रेणी में एक अन्य पुस्तक हैं जो IAS परीक्षा 2017 को ध्यान में रखकर तैयार तैयार किया गया है। इस पुस्तक में NCERT आधारित, विषय विशेष और समसामयिकी आधारित टेस्ट पेपर रखा गया है और प्रत्येक टेस्ट सीरीज में 100 प्रश्न सम्मिलित किये गए है।

सामान्य अध्ययन पेपर-I के 9 टेस्ट और सीसेट पेपर-II के 5 टेस्ट भी सम्मिलित किये गए है। अभ्यर्थी में उत्तर लेखन विकसित करने हेतु प्रत्येक प्रश्न का विश्लेषण सहित व्याख्यात्मक हल भी प्रदान किया गया है।

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IAS Prelims All India Test Series 2017

क्रॉनिकल सिविल सर्विसेज करंट अफेयर मॉक टेस्ट सीरीज 2017

यह मॉक टेस्ट सीरीज IAS प्रीलिम्स 2017 के नवीनतम परीक्षा पैटर्न पर आधारित है और आईएस 2017 में प्रतिभाग करने वाले अभ्यर्थीयों के लिए विशेष उपयोगी है। इस ऑनलाइन मॉक टेस्ट सीरीज में आप अपने मोबाइल से भी प्रतिभाग कर सकते हैं और अपनी तैयारी की जांच कर सकते हैं।

सिविल सर्विसेज करंट अफेयर: मॉक टेस्ट सीरीज 2017 की शुरुवात क्रॉनिकल IAS के सहयोग से Online Tyari द्वारा आपको प्रदान किया जा रहा है।

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