IAS मुख्य परीक्षा GS पेपर-1 के 10 महत्वपूर्ण टॉपिक्स | सामाजिक बुराई और सरकारी प्रतिबन्ध

IAS मुख्य परीक्षा GS पेपर-1 के 10 महत्वपूर्ण टॉपिक्स | सामाजिक बुराई और सरकारी प्रतिबन्ध- IAS मुख्य परीक्षा 2017  के लिए उत्तर लेखन के अभ्यास से बहुत मदद मिलती है। इससे पता चल जाता है कि कैसे अपने समय को विभिन्न प्रश्नों के लिए वितरित किया जाए और कैसे बिंदुओं पर प्रकाश डाला जाए, जिससे अधिक अंक प्राप्त किये जा सकें।

उत्तर-लेखन प्रक्रिया का सबसे पहला चरण यही है कि उम्मीदवार प्रश्न को कितने सटीक तरीके से समझता है तथा उसमें छिपे विभिन्न उप-प्रश्नों तथा उनके पारस्परिक संबंधों को कैसे परिभाषित करता है? सच तो यह है कि आधे से अधिक अभ्यर्थी इस पहले चरण में ही गंभीर गलतियाँ कर बैठते हैं। अतः इससे बचने की जरुरत है।

IAS मुख्य परीक्षा GS पेपर-1 के 10 महत्वपूर्ण टॉपिक्स | टॉपिक-6 

प्रश्न : क्या आपको लगता है कि सरकार द्वारा प्रतिबंध किसी भी सामाजिक बुराई को हल कर सकता है? चर्चा करें।

उत्तर- भारत में समाज सुधार की दिशा में सबसे पहला और प्रभावी कदम राजा राममोहन राय के नेतृत्व में उठाया गया था उसके उत्तरोत्तर लगातार सामाजिक बुराइयों को ख़त्म करने की दिशा में प्रयत्न किये जाते रहे हैं और एक बेहतर समाज के लिए परिवेश तैयार करने का उद्धम किया जाता है। इस हेतु सामाजिक प्रयास के अतिरिक्त सरकारी प्रयास भी किए जाते रहे हैं।

सामाजिक बुराइयों से जुड़े मुद्दों के कई रुप हैं जैसे जातिवाद, अस्पृश्यता, बंधक मजदूर, लिंग असमानता, दहेज प्रथा, महिलाओं पर घरेलू हिंसा, महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा, बाल यौन शोषण, साम्यवाद, धार्मिक हिंसा, एस.सी/एस.टी से जुड़े मुद्दे, किशोर अपराध, वैवाहिक बलात्कार, कार्यक्षेत्र पर महिलाओं का यौन-शोषण, वैश्यावृत्ति, शराब सेवन, ड्रग लेना अन्धविश्वास आदि। कई मुद्दों में प्रतिबन्ध तत्काल रोक लगाते हैं पर इस पर पूर्ण प्रतिबन्ध के लिए सामाजिक जागरूकता आवश्यक हैं-

प्रतिबन्ध एक सार्थक कदम 

  • प्रतिबंध समर्थकों को तत्काल लाभ प्रदान करते हैं। परन्तु यह सही दृष्टि और दिशा में की जानी चाहिए।
  • अल्पावधि में, कुछ प्रतिबंध सकारात्मक परिणाम में सामने आते हैं-जैसे देश में अधिकांश लोग यदा-कदा शराब पीने वाले हैं अगर किसी तरह का प्रतिबन्ध लगता है तो ऐसे लोग अपने व्यवहार में परिवर्तन ला लेते हैं और शराब सेवन को एकदम कम कर देते हैं। उदहारणस्वरुप मेरिका में शराब निषेध के प्रारंभिक महीनों में, शराब खपत  में 30% की कमी और गिरफ्तारी में भी कमी देखी गई थी।

कुछ राज्यों में शराब की रोकथाम के परिणामस्वरूप ब्रांडेड शराब की खपत में धीमी गिरावट आई है, जो कि 6% प्रतिवर्ष की दर से बढ़ रही थी वह 0.2% प्रतिवर्ष की दर से मंद हो गई। यह बिहार में शराब पर प्रतिबंध और केरल में शराब की आपूर्ति श्रृंखला में कई स्थानों पर रोक के तहत हुई।

प्रतिबन्ध सार्थक नहीं होते

  • जैसे ही निषेध/प्रतिबन्ध की घोषणा की गई, चाहे वह अमेरिका में हो या गुजरात में या मेघालय में शराब की तस्करी बढ़ गई।
  • अंडरवर्ल्ड, जो अब बहुत संगठित हो गया है ने इस व्यवसाय को भी अधिक कर दिया संगठित किया है, उपभोग का स्तर मूल स्तर पर वापस आ गया और नकली शराब, गिरोह युद्ध और अन्य नशीले पदार्थों की बिक्री जैसी नई समस्याएं
    बढ़ने लगी।
  • जब किसी भी सामाजिक समस्या का सम्बन्ध लोगों के निजी जीवन से सीधे जुड़ा हो तो ऐसे स्थान पर जल्दबाजी में प्रतिबन्ध लगाना कठिन समस्या हो जाती है और उसका वास्तविक परिणाम सामने नहीं आता। जैसे गंगा में मूर्ति विसर्जन का मुद्दा है, यदि इसपर तत्काल प्रभाव से कानून के तहत कड़ी कार्यवाही की जाय तो वर्ग विशेष की भावना आहत होगी और सरकार के लिए भी यह कदम महंगा पड़ सकता है। इस समस्या से निजात के लिए लोगों को पहले जागरूक करना होगा उन्हें इस विषय में शिक्षित करना होगा और सामाजिक पहल के तहत आगे बढ़ने के पश्चात इस पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगाया जा सकता है।
  • जुआ जैसे अपेक्षाकृत हानिरहित उपायों पर प्रतिबंध के कारण कई अन्य गंभीर अपराधों में निवेश बढ़ जाता है, इससे ठगने की प्रवृत्ति, अवैध बंदूकों की मांग, जबरन वसूली और किडनैपिंग जैसी अराजकता बढ़ जाती है।
  • भारत में वेश्यावृत्ति या देहव्यापार अभी भी अनैतिक देहव्यापार कानून के तहत आते हैं, जिसपर सरकार का अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं है, जिससे पैसे के बदले सेक्स, पत्नियों की अदला-बदली, अवैध वेश्यावृत्ति, अवैध वैश्यालय और लड़कियों को शादी का झासा देकर और नौकरी की लालच देकर पेसे में धकेला जाता है और उनपर अत्याचार किया जाता है। यह उत्पीडन के अवसर पैदा करते है और इसमें संगठित अपराध के गठन को भी बल मिलता है।
  • जब भी सोने के आयात पर प्रतिबन्ध लगाया गया तो यह देखा गया की मांग में कमी न होने की वजह से इसकी स्मगलिंग बढ़ गई और यह ग्रे मार्किट के तहत भी बाजार में लाया गया।

क्या किये जाने की आवश्यकता है

रणनीति के प्रमुख पहलुओं में से यह प्रमुख है की यदि किसी भी सामाजिक बुराई पूर्णरूपेण समाप्त करना है तो उसके प्रति सामाजिक जागरूकता लानी चाहिए जिसके लिए विभिन्न प्रकार के सकारात्मक कदम उठाए जाने चाहिए-उसमें शिक्षा, सामाजिक जागरूकता द्वारा सामाजिक बुराई के दुष्परिणाम को सबके सामने लाना होगा और उसपर प्रतिबन्ध के लिए बहुमत तैयार करने की कोशिश की जानी चाहिए। इससे सामाजिक समस्या को जड़ से ख़त्म किया जा सकता है।

  • ऑनर किलिंग के मामले में कमी, लड़कियों के लिंगानुपात में गिरावट दर को रोकना आदि सामाजिक समस्या को जागरूकता से ही कम किया गया है और बेटी बचाओं, बेटी पढाओं और अन्य प्रोत्साहन राशि योजना के तहत भी इसमें कमी लाई जा रही है।
  •  नई रणनीति के तहत व्यक्तिगत नशीली दवाओं के उपयोगकर्ताओं और मदिरा सेवन उपयोगकर्ता को पहले काउंसलिंग कर उसके दुष्परिणाम से अवगत कराना चाहिए और फिर कानूनी प्रावधानों की मुसीबतों से भी अवगत करना चाहिए। ड्रग के मनोरंजक उपयोगकर्ता, सामयिक उपयोगकर्ताओं को कानूनी, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक विशेषज्ञों से मिलते-जुलते पैनल के समक्ष पेश किया जाना चाहिए। ड्रग डीलरों और तस्करी करने वाले पर कड़े प्रतिबन्ध लगाने चाहिए ताकि ऐसे काम को हतोत्साहित किया जा सके।
  • पढ़े-लिखे लोगों ने मानसिकता बदली है, केवल कुछ पुराने रुढ़िवादी हैं जो अंधविश्वास और दकियानूसी परंपराओं को मानते हैं। बाल विवाह जैसी कुरीतियों को रोकने के लिए कानून बने हैं पर परंपरा के नाम पर होने वाली इन कुरीतियाें को जागरुकता से ही रोक पाएंगे।

स्थितियों में सुधार के लिये और भी अधिक प्रयास करने की आवश्यकता है और लोगों के दिमाग की गहराई में बैठे हुये गलत विश्वासों, मान्यताओं व प्रथाओं को बदले बिना इन स्थितियों को सुधारना बहुत कठिन कार्य हैं। इस उद्देश्य के लिये सबसे उपयुक्त तरीका लोगों को विभिन्न सामाजिक बुराइयों के बारे में शिक्षित करना होगा और उन्हें अपनी सोच बदलने के लिये प्रेरित करना होगा। क्योंकि लोगों को खुद को बदलने के लिये प्रेरित किये बिना, कोई भी सरकारी या गैर-सरकारी संस्था के प्रयास आधे-अधूरे साबित होंगे।

 

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OnlineTyari टीम द्वारा दिए जा रहे उत्तर UPSC की सिविल सेवा परीक्षा (IAS परीक्षा) के मानक उत्तर न होकर सिर्फ एक प्रारूप हैं। जिससे अभ्यर्थी उत्तर लेखन की रणनीति से अवगत हो सकेगा। वह उत्तर में निर्धारित समयसीमा में कलेवर को समेटने और समय प्रबंधन की रणनीति से परिचय पा सकेगा। जिससे वह सम्पूर्ण परीक्षा को समयसीमा में हल करने में समर्थ होगा।

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