IAS मुख्य परीक्षा GS पेपर-2 के 10 महत्वपूर्ण टॉपिक्स | रोहिंग्या मुद्दा और भारत का रुख

IAS मुख्य परीक्षा GS पेपर-2 के 10 महत्वपूर्ण टॉपिक्स | रोहिंग्या मुद्दा और भारत का रुख – संघ लोक सेवा आयोग अक्टूबर के महीने में सिविल सेवा मुख्य परीक्षा का आयोजन करेगा। इस परीक्षा का उद्देश्य एक छात्र को परखने से है जो शासन, संविधान, राजनीति, सामाजिक न्याय और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों की समझ के आधार से संबंधित है। समस्या यह है कि चाहे कितनी ही अच्छी तैयारी कर ली जाए और भले ही कितना ज्ञान अर्जित कर लिया जाए फिर भी परीक्षा को लेकर हमेशा अनिश्चितता का भय रहता ही है।

इस डर पर काबू पाने के लिए  IAS मुख्य परीक्षा के GS पेपर-2 के लिए 10 महत्वपूर्ण टॉपिक्स आपसे साझा कर रहे हैं, जिससे आप इन टॉपिक्स पर अपनी पकड़ मजबूत कर पाएं और आप परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।

 

IAS मुख्य परीक्षा GS पेपर-2 के 10 महत्वपूर्ण टॉपिक्स | टॉपिक नंबर-8 (रोहिंग्या मुद्दा और भारत का रुख)

यहां पर हम IAS मुख्य परीक्षा के सामान्य अध्ययन के पेपर से संबंधित 10 महत्वपूर्ण टॉपिक्स आपसे साझा कर रहे हैं जिनके अंतर्गत प्रतिदिन एक विषय पर आपको विस्तृत जानकारी दी जाती है। तो चलिए आगे बढ़ते हैं आज का टॉपिक ‘रोहिंग्या मुद्दा और भारत का रुख’ पर विमर्श से संदर्भित है।

प्रश्न: रोहिंग्या मुद्दा क्या है और इस मुद्दे पर भारत का क्या रुख होना चाहिए। सविस्तार वर्णन कीजिए।

उत्तर : विदित हो कि म्यांमार में बौद्ध बहुसंख्यक हैं और रोहिंग्या को अवैध प्रवासी माना जाता है। म्यांमार की सरकार रोहिंग्या को राज्य-विहीन मानती है और उन्हें नागरिकता प्रदान नहीं करती। इसके अतिरिक्त म्यांमार सरकार ने रोहिंग्या मुसलमानों पर कई तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं। ऐसे प्रतिबंधों में आवागमन, मेडिकल सुविधा, शिक्षा और अन्य सुविधाएं शामिल है। म्यांमार में अनुमानतः 10 लाख रोहिंग्या मुसलमान हैं और वे यहाँ पीढ़ियों से रह रहे हैं परन्तु इन्हें बांग्लादेशी प्रवासी के रूप में देखा जाता है। रखाइन प्रान्त में वर्ष 2012 से सांप्रदायिक हिंसा जारी है। हालिया विवाद के तहत 25 अगस्त को अराकन रोहिंग्या सैल्वेशन आर्मी (एआरएसए) ने म्यांमार के रखाइन प्रांत में 30 पुलिस चौकियों को निशाना बनाया और जिसके तहत 10 पुलिस अधिकारी, एक सैनिक और एक इमिग्रेशन अधिकारी की मौत हो गई। इस हमले के बाद म्यांमार सरकार ने एआरएसए को ‘आतंक निरोधी क़ानून के सब-सेक्शन पांच और सेक्शन 6 के तहत’ आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया और सरकार ने ‘क्लियरेंस ऑपरेशन’ चलाया।  इस ऑपरेशन के कारण क़रीब तीन लाख रोहिंग्या मुसलमानों (जारी विभिन्न रिपोर्ट के तहत) को विस्थापित होना पड़ा है।

भारत का रुख होना चाहिए 

जैसा की विदित है कि भारत सरकार की तरफ से रोहिंग्या को भारत की आंतरिक सुरक्षा की दृष्टि से खतरा माना गया है और इस मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय में याचिका लंबित है। पर भारत का रुख क्या हो, इस बात का निर्णय करने से पहले हमें कुछ मुद्दों पर विचार कर लेना चाहिए-

भारत-म्यांमार सीमा सम्बन्ध 

भारत और म्‍यांमार की सीमाएं अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, मणिपुर और नागालैंड की सीमा म्यांमार से सटी हुई है,जिसकी लंबाई 1600 किमी से भी अधिक है तथा बंगाल की खाड़ी में एक समुद्री सीमा से भी दोनों देश जुड़े हुए हैं। । म्‍यांमार के साथ चहुंमुखी संबंधों को बढ़ावा देना भारत के पूर्वोत्‍तर राज्‍यों के आर्थिक परिवर्तन के लिए महत्त्वपूर्ण है। यह क्षेत्र दुर्गम पहाड़ और जंगल से घिरा हुआ है। इसके एक तरफ भारतीय सीमा में चीन की तत्परता भारत के लिए चिंता का विषय है तो दूसरी तरफ भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में अलगाववादी ताकतों की सक्रियता और घुसपैठ की संभावनाओं को देखते हुए बर्मा से अच्छे संबंध बनाए रखना भारत के लिए अत्यावश्यक है।

आर्थिक और कुटनीतिक रणनीति 

म्यांमार न केवल सार्क, आसियान का सदस्य है, बल्कि तेजी से बढ़ते पूर्व और दक्षिणपूर्व एशिया की अर्थव्यवस्था का एक द्वार भी है। इसके अलावा पूर्वोत्तर भारत में बढ़ती अलगाववादी गतिविधियों के मद्देनजर भी म्यांमार से भारत के रिश्ते का महत्त्व है। 2014 में मोदी सरकार बनने के बाद फौजी सरकार के सूचना मंत्री ने असम के उल्फा, मणिपुर के पीएलए और नागालैंड के एनएससीएन पर कार्यवाही के लिए तत्पर होने का भरोसा जताया था। भारत, म्यांमार के जरिए थाईलैंड और वियतनाम के साथ संबंध मजबूत कर सकता है। व्‍यवसाय, संस्‍कृति एवं राजनय के मिश्रण की दृष्टि से दोनों देशों के बीच मजबूत संबंध है। बौद्ध धर्म, व्‍यवसाय, बॉलीवुड, भरतनाट्यम और बर्मा का टीक (साल) – ये 5 ‘बी’ (B) हैं जो आम जनता की दृष्टि से भारत-म्‍यांमार संबंध का निर्माण करते हैं। इसके अतिरिक्त भारत-म्यांमार-थाइलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग एक निर्माणाधीन राजमार्ग (1400 किमी) है जो भारत के मोरे (moreh) से म्यांमार के तामू नगर होते हुए थाईलैण्ड के मेई सेत जिले के ताक तक जायेगा। इससे तीनों देशों के बीच व्यापार को प्रोत्साहन मिलेगा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान बढ़ाया जा सकेगा।
ऊर्जा एवं संसाधन की दृष्टि से समृद्ध म्‍यांमार ‘अवसर की धरती’ के रूप में उभरा है। जो द्विपक्षीय व्‍यापार 1980 के दशक के पूर्वार्ध में मात्र 12 मिलियन अमरीकी डालर था वह आज 2 बिलियन अमरीकी डालर के आसपास पहुंच गया है। अनेक भारतीय कंपनियां यथा ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (ओवीएल), जुबिलांट आयल गैस, सेंचुरी प्‍लाई, टाटा मोटर्स, एस्‍सार एनर्जी, राइट्स, एस्‍कॉर्ट, रेन्‍बेक्‍सी, कैडिला हेल्‍थकेयर लिमिटेड, डा. रेड्डी लैब, सिपला एवं अपोलो जैसे नाम शामिल हैं पहले ही म्‍यांमार में अपना डेरा जमा चुकी हैं तथा वहां काम कर रही हैं।

यदि हमें अपनी ‘एक्‍ट ईस्‍ट’ नीति के लक्ष्‍यों को प्राप्‍त करना है तो म्‍यांमार के साथ मजबूत राजनीतिक, आर्थिक एवं सुरक्षा संबंध बहुत आवश्‍यक हैं।

आंतरिक सुरक्षा का विषय 

सरकार को खुफिया एजेंसियों द्वारा प्रदत्त रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया है कि कुछ रोहिंग्या सदस्यों का संबंध पाकिस्तान और अन्य देशों में सक्रिय आतंकवादी संगठनों से है और वे हमारे देश में आतंकी गतिविधियों को संचालित किए जाने में प्रायोजित किए जा सकते हैं। वे जम्मू, दिल्ली, हैदराबाद और मेवात क्षेत्र में अधिक सक्रिय हैं। इन क्षेत्रों में इनकी पहचान भी की गई है। एक अनुमान के अनुसार 7 हजार रोहिंग्या जम्मू क्षेत्र में बसे हुए हैं। विस्थापन के दौर के तहत भारत में समुद्र, बांग्लादेश और म्यायांर की सीमा से घुसपैठ कर घुसे करीब 40,000 रोहिंग्या मुसलमानों को भारत सरकार देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरे के रूप में देखती है और इस बात से सशंकित है कि रोहिंग्या का कट्टरपंथी वर्ग भारत में बौद्धों के खिलाफ हिंसा भी फैला सकता है। भारत सरकार ने उच्चतम न्यायालय में रोहिंग्या मुसलमानों को अवैध आप्रवासी बताते हुए उन्हें देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताया है और माना है कि म्यांमार के रोहिंग्या लोगों को देश में रहने की अनुमति देने से भारतीय नागरिकों के हित प्रभावित होंगे और तनाव पैदा होगा।

रोहिंग्या मुद्दा और भारत के पास विकल्प 

16,000 रोहिंग्या मुसलमान ऐसे हैं जो संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थियों के तौर पर पंजीकृत हैं। पर भारत शरणार्थियों पर अंतरराष्ट्रीय कानून अथवा संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी सम्मेलन 1951 पर और ना ही 1967 के यूनाइटेड नेशंस प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर करने वाला राष्ट्र है, अतः इन कानूनों के उल्लंघन का कोई सवाल ही नहीं उठता। यदि रोहिंग्या को भारत में आश्रय दिया जाता है, तभी उन पर जबरन अपने देश वापसी न करने का सिद्धांत लागू होगा। अतः इस मुद्दे पर सरकार भारत के कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्यवाही करने को स्वतंत्र है।

जहां तक मदद की बात है तो ऑपरेशन ‘इंसानियत’ के तहत मदद पहुंचाई गई है। मानवीय मदद हो रही है और सुरक्षा खतरे से भी निपटा जा रहा है। रोहिंग्‍या के मामले को धार्मिक चश्मे से देखने से भी बचने का प्रयास किया जा रहा है। उल्लेखनीय हैं कि लोगों की मदद और मानवता की बात अपनी जगह है, लेकिन देश की सुरक्षा, अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति और सम्बन्ध की चिंता का महत्त्व भी सर्वोपरि है।

निष्कर्ष 

ऐसे समय में जब ज्यादातर रोहिंग्या मुसलमान बांग्लादेश, भारत, इंडोनेशिया, मलेशिया और थाईलैंड में शरणार्थी के तौर पर रह रहे हैं। केवल मानवीय पहलुओं को सोचा जाए तो यह यथार्थ से मुंह मोड़ना होगा। अपनी सीमा में भारत को परराष्ट्रहितों के बारे में निर्णय करने के लिए केवल राष्ट्र हित ही कसौटी हो सकता है। मानवीय मूल्यों को भी राष्ट्रहित के संदर्भ में सोचना होगा। सुशासन के तहत यह आवश्यक है कि पहले भारत के नागरिकों के अधिकारों की चिंता की जाय। देश के नागरिकों का अपने संसाधनों पर पहला अधिकार है, न कि अवैध प्रवासियों का। रोहिंग्या अवैध प्रवासी हैं, वे शरणार्थी नहीं हैं। हालांकि पूर्व में उच्चतम न्यायालय केंद्र सरकार से अवैध प्रवासियों की पहचान करने और उन्हें हटाने के लिए कह चुकी है। और इस सम्बन्ध में भारत के रुख को स्पष्ट करने वाली नीति उच्चतम न्यायालय में दो रोहिंग्या शरणार्थियों मोहम्म्द सलीमुल्ला और मोहम्म्द शाकिर (संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायोग के अंतर्गत पंजीकृत) द्वारा दायर याचिका का निर्णय जो अभी लंबित है, पर भी निर्भर करती है। फिलहाल भारत सरकार की तरफ से म्यांमार की स्टेट काउंसिलर सुश्री आंग सान सू की ने रोहिंग्या को वापस अपने देश में लेने और उनके अधिकारों की रक्षा करने की बात कहकर उम्मीद की एक किरण पैदा की है। उम्मीद है कि म्यांमार जल्द ही इस दिशा में कुछ ठोस कदम उठाएगा।

 

OnlineTyari टीम द्वारा दिए जा रहे उत्तर UPSC की सिविल सेवा परीक्षा (IAS परीक्षा) के मानक उत्तर न होकर सिर्फ एक प्रारूप हैं। जिससे अभ्यर्थी उत्तर लेखन की रणनीति से अवगत हो सकेगा। वह उत्तर में निर्धारित समयसीमा में कलेवर को समेटने और समय प्रबंधन की रणनीति से परिचय पा सकेगा। जिससे वह सम्पूर्ण परीक्षा को समयसीमा में हल करने में समर्थ होगा।

क्या आप UPSC IAS प्रारंभिक परीक्षा 2018 की तैयारी कर रहे हैं ? इस मुफ्त पैकेज से टेस्ट शुरू करें !!

फ्री पैकेज : IAS प्रारंभिक परीक्षा 2018

IAS प्रारंभिक परीक्षा 2018 : फ्री पैकेज  

IAS प्रारंभिक परीक्षा 2018 : फ्री पैकेज को परीक्षा की तैयारी में जुटे अभ्यर्थियों के तैयारी स्तर को जांचने के लिए निर्मित किया गया है। यह फ्री पैकेज टेस्ट नवीनतम पाठ्यक्रम पर आधारित है और इस टेस्ट के प्रत्येक टेस्ट में 100 प्रश्न सम्मिलित किए गए हैं। यह मॉक टेस्ट सीरीज Online Tyari के मोबाइल एप्लीकेशन और वेबसाइट दोनों पर उपलब्ध हैं। इस टेस्ट सीरीज में सम्मिलित होकर आप अभी फ्री में अपने तैयारी स्तर को जान सकते हैं और आगामी परीक्षा के लिए खुद में आवश्यक परिवर्तन भी कर सकते हैं।

अभी अभ्यास शुरू करें !

IAS परीक्षा 2017 के बारे में और अधिक जानकारी के लिए हमसे जुड़े रहें। IAS परीक्षा में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए सर्वश्रेष्ठ IAS परीक्षा तैयारी ऐप नि:शुल्क डाउनलोड करें।

Best Government Exam Preparation App OnlineTyari

अगर अभी भी आपके मन में किसी प्रकार की कोई शंका या कोई प्रश्न है तो कृपया नीचे दिए गए कमेंट सेक्शन में उसका ज़िक्र करें और बेहतर प्रतिक्रिया के लिए OnlineTyari Community पर अपने प्रश्नों को हमसे साझा करें।

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.