IAS GS प्रश्न पत्र 3 हेतु 10 मुख्य विषयों पर उत्तर लेखन अभ्यास : मानसून का भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव !

IAS GS प्रश्न पत्र 3 हेतु 10 मुख्य विषयों पर उत्तर लेखन अभ्यास : मानसून का भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव-IAS मुख्य परीक्षा 2017 के लिए उत्तर लेखन के अभ्यास से बहुत मदद मिलती है। इससे पता चल जाता है कि कैसे अपने समय को विभिन्न प्रश्नों के लिए वितरित किया जाए और कैसे बिंदुओं पर प्रकाश डाला जाए, जिससे अधिक अंक प्राप्त किये जा सकें।

उत्तर-लेखन प्रक्रिया का सबसे पहला चरण यही है कि उम्मीदवार प्रश्न को कितने सटीक तरीके से समझता है तथा उसमें छिपे विभिन्न उप-प्रश्नों तथा उनके पारस्परिक संबंधों को कैसे परिभाषित करता है? सच तो यह है कि आधे से अधिक अभ्यर्थी इस पहले चरण में ही गंभीर गलतियाँ कर बैठते हैं। अतः इससे बचने की जरुरत है।

 IAS GS प्रश्न पत्र 3 हेतु 10 मुख्य विषयों पर उत्तर लेखन अभ्यास 

सिविल सेवा परीक्षा में सफलता मेहनत के साथ-साथ कई अन्य कारकों पर निर्भर करती है जिनमें सबसे महत्त्वपूर्ण है आपकी उत्तर-लेखन शैली। क्योंकि उत्तर-पुस्तिका परीक्षक इस तथ्य से बिल्कुल अवगत नहीं होता कि उत्तर लेखन करने वाले अभ्यर्थी ने कितनी गंभीरता से पढ़ाई की है या उसकी परिस्थितियाँ कैसी हैं इत्यादि। परीक्षक के पास अभ्यर्थी के मूल्यांकन का एक ही आधार होता है और वह यह कि अभ्यर्थी द्वारा उत्तर-पुस्तिका में किस स्तर का उत्तर लेखन किया गया है। अगर उत्तर लेखन प्रभावी होंगे तो परीक्षक अच्छे अंक देने के लिये मजबूर हो जाएगा और यदि उत्तरों में दम नहीं है तो फिर अभ्यर्थी ने चाहे जितनी भी मेहनत की हो, उसका कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकलेगा।

आपकी सफलता या विफलता में तैयारी की भूमिका 50% से अधिक नहीं है। शेष 50% भूमिका इस बात की है कि परीक्षा के तीन घंटों में आपका निष्पादन कैसा रहा? आपने कितने प्रश्नों के उत्तर लिखे? किस क्रम में लिखे, बिंदुओं में लिखे या पैरा बनाकर लिखे, रेखाचित्रों की सहायता से लिखे या उनके बिना लिखे, साफ-सुथरी हैंडराइटिंग में लिखे या अस्पष्ट हैंडराइटिंग में, उत्तरों में तथ्यों और विश्लेषण का समुचित अनुपात रखा या नहीं- ये सभी वे प्रश्न हैं जो आपकी सफलता या विफलता में कम से कम 50% भूमिका निभाते हैं। दुर्भाग्य की बात यह है कि अधिकांश उम्मीदवार इतने महत्त्वपूर्ण पक्ष के प्रति प्रायः लापरवाही बरतते हैं और उनमें से कई तो अपने कॉलेज के बाद के जीवन का पहला उत्तर मुख्य परीक्षा में ही लिखते हैं।

यूपीएससी मुख्य परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों की प्रकृति वर्णनात्मक होती है जिसमें प्रश्नों के उत्तर को  निर्धारित शब्दों (सामान्यत:100 से 300 शब्द) में उत्तर-पुस्तिका में लिखना होता है, अत: ऐसे प्रश्नों के उत्तर लिखते समय लेखन शैली एवं तारतम्यता के साथ-साथ समय प्रबंधन आदि पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है। लेखन शैली एवं तारतम्यता का विकास सही दिशा में निरंतर अभ्यास से संभव है, जिसके लिये अभ्यर्थियों को विषय की व्यापक समझ के साथ-साथ कुछ महत्त्वपूर्ण बातों का भी ध्यान रखना चाहिये। हमारा उद्देश्य दिए गए प्रश्नों के तहत अभ्यर्थियों को यही समझाने की कोशिश करना है कि उत्तर-लेखन शैली के विकास के लिये क्या सावधानियाँ बरतनी चाहिये?

Paryavaran Evam Parisithiki: Civil Sewa Pariksha Hetu

पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी : माजिद हुसैन, एक्सेस पब्लिशिंग 

यह पुस्तक सिविल सेवा मुख्य परीक्षा के पाठ्यक्रम को ध्यान में रखकर लिखी गई है और इस पुस्तक के माध्यम से छात्र पर्यावरण और पारिस्थितिकी की बुनियादी तथ्यों के साथ गूढ़ तथ्यों से रूबरू करवाता है अथार्त  पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी में पर्यावरण की परिभाषा, प्रकार, घटक, पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी के संरक्षण हेतु राष्ट्रीय एवं अन्तर राष्ट्रीय स्तर पर किये गए प्रयास, तथ्य का उल्लेख्य सम्मिलित किया गया है।

अभी खरीदें

IAS Mains Internal Security-ias best ebook

आतंरिक सुरक्षा, क्रोनिकल प्रकाशन 

इस ई-बुक में आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी एजेंसियों, योजनाओं, प्रणालियों आदि से संबंधित महत्त्वपूर्ण जानकारियाँ के अतिरिक्त विकास और उग्रवाद के प्रसार के मध्य संबंध, आंतरिक सुरक्षा में नॉन स्टेट एक्टर्स की भूमिका, साइबर सुरक्षा-राष्ट्रिय साइबर सुरक्षा नीति (2013), मनी लॉन्डरिंग, सीमावर्ती क्षेत्रों (विशेषकर पूर्वोत्तर) में सुरक्षा चुनौतियाँ तथा प्रबन्धन, आतंकवाद तथा संगठित अपराध के मध्य संबंध जैसे विषयों को सम्मिलित किया गया है। यह पुस्तक सिविल सेवा मुख्य परीक्षा के छात्रों के लिए विशेष उपयोगी है।

अभी खरीदें

आपदा प्रबंधन, क्रोनिकल प्रकाशन  

IAS मुख्य प्रतियोगी परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के लिए इस ई-बुक को पढ़ें। इस ई-बुक के माध्यमसे आप वास्तविक परीक्षा के लिए बेहतर तैयारी कर सकेंगे। इसके अलावा इस मॉक टेस्ट का अभ्यास नियमित तौर पर करना आपके लिए परीक्षा में सफलता के लिए आपका मार्ग प्रशस्त करेगा। पुस्तक में आपदा: अर्थ, परिभाषा एवं प्रकार; भारत में विभिन्न आपदाएं, प्रभाव एवं रोकथाम; मानवीकृत आपदाएं; नाभिकिय आपदाएं, जैविक आपदाएं; रेल दुर्घटनाएँ; भवन में आग सम्बन्धी दुर्घटनाएँ; दावानल;आपदा प्रबंधन अर्थ परिभाषा एवं विभिन्न आयाम; रासायनिक आपदाएं; भारत में आपदा प्रबंधन; आपदा प्रबंधन एवं विभिन्न प्राधिकरणों की भूमिका; आपदाओ एवं विकास में अंर्तसम्बन्ध; आपदा पीड़ितों की अभिवृत्ति एवं उनकी मनोदशा, आईएएस मुख्य परीक्षा में पूछे गए एवं संभावित प्रश्नों का संग्रह किया गया है।

अभी खरीदें

Science and Technology-best book for IAS

विज्ञान व प्रोद्योगिकी : क्रोनिकल प्रकाशन 

इस ई-बुक में भारत के वैज्ञानिक तथा विज्ञान संबंधी उपलब्धि, भारत में विज्ञान व प्रोद्योगिकीय: संस्थागत ढांचा, कंप्यूटर एवं सुचना-प्रोद्योगिकीय, जैव प्रोद्योगिकीय, परमाणु प्रोद्योगिकीय, अन्तरिक्ष प्रोद्योगिकीय, नैनो-प्रोद्योगिकीय (सूक्ष्म-प्रोद्योगिकीय), रक्षा प्रोद्योगिकीय, बोद्धिक सम्पदा, रोबोटिक्स को सम्मिलित किया गया है। यह पुस्तक सरल भाषा में सम्पूर्ण सिविल सर्विस परीक्षा के पाठ्यक्रम को कवर करती है इसलिए यह पुस्तक सभी हिंदी माध्यम से तैयारी करने वाले छात्रों के लिए विशेष उपयोगी बन गई है।

अभी खरीदें

पर्यावरण-पारिस्थितिकी, क्रोनिकल प्रकाशन   

हिंदी माध्यम से सिविल सर्विस की तैयारी कर रहे सभी छात्रों के लिए इस ई-बुक का अध्ययन करना अत्यंत आवश्यक है।पुस्तक में परितंत्र, जैव-विविधता, जलवायु परिवर्तन व समस्याएं, नमभूमि/आद्रभूमि, भारत में वन, नीति, नियम व प्राधिकरण, प्रदूषण, ऊर्जा व् पर्यावरण आदि विषयों को शामिल किया गया है। यह पुस्तक क्रोनिकल पब्लिकेशन द्वारा तैयार की गई है।

अभी खरीदें

IAS GS प्रश्न पत्र 2 हेतु 10 मुख्य विषयों पर उत्तर लेखन अभ्यास : मानसून का भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव !

प्रश्न : क्या मानसून भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है? विस्तृत विवेचन कीजिए।

उत्तर : मानसून शब्द मूलत: अरबी भाषा का शब्द है जिसका अर्थ होता है मौसम। मानसूनी हवाएं छह महीने जल से स्थल की और छह महीने थल से जल की ओर चला करती है। मानसून पूरी तरह से हवाओं के बहाव पर निर्भर करता है। आमतौर पर जब ये हवाएं अपनी दिशा बदल लेती हैं, तब मानसून आता है। जब ये हवाएं ठंडे से गर्म क्षेत्रों की तरफ बहती हैं तो उनमें नमी की मात्रा बढ़ जाती है जिसकी वजह से बारिश होती है। प्राय: एशियाई मानसून के बारे में इसका जिक्र किया जाता है। भारत में मानसून सबसे पहले 1 जून तक केरल के तट पर दस्‍तक देता है। इसके बाद यह अन्‍य राज्‍यों में फैल जाता है जिससे देशभर में बारिश होती है।

सालभर होने वाली बारिश में 70 फीसदी हिस्सेदारी जून-सितंबर के मानसून की होती है। मानसून में देरी का जून-सितंबर की बारिश पर सीधा असर नहीं पड़ता। लेकिन इससे फसलों की बुवाई प्रभावित हो सकती है। यदि इसमें देरी का कृषि के क्षेत्र पर असर पड़ा तो अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की सरकार और आरबीआई की कोशिशों को झटका लगेगा। इसकी वजह यह है कि देश की 130 लाख करोड़ रुपए की अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी 15 फीसदी है। कृषि‍ हमारी अर्थव्‍यवस्‍था का महत्‍वपूर्ण हिस्‍सा है और इसके प्रभावित होने का असर अर्थव्‍यवस्‍था पर पड़ना लाजिमी है।

चूँकि भारतवर्ष ने नब्बे प्रतिशत वर्षा हवाओं से होती है। इसलिए यहां की अर्थव्यवस्था पर इसका प्रभाव यहां पर होने वाली कृषि के माध्यम से ही देखे जा सकता है। भारतीय अर्थव्यवस्था का एक बड़ा भाग खेती पर निर्भर है। देश के 64 प्रतिशत जनसंख्या तो कृषि पर ही आश्रित है। अनेक लोग तो कृषि पदार्थों का व्यापार करके ही अपनी आजीविका चलाते हैं। इसलिए भारतीय कृषि देश के निवासियों के लिए जीवननिर्वाह का महत्वपूर्ण साधन है। यही नहीं देश की राष्ट्रीय आय में सर्वाधिक 26 प्रतिशत योगदान भी यहां की कृषि का ही है। देश के सिंचाई के साधनों की उपलब्धता के बाद भी यहां की कृषि का अधिकांश भाग यहां होने वाली वर्षा की मात्रा व समय पर निर्भर है। जिसके कारण यहां की कृषि की सफलता का बहुत कुछ श्रेय मानसूनी वर्षा को जाता है।

मानसून की प्रभावित होने से ज्यादातर कृषि जिंसों की कीमतों में तेजी दर्ज की जाती है। कई महत्त्वपूर्ण उद्योग जैसे सोयाबीन, टेक्सटाइल, शक्कर मिल, दाल मिल आदि सीधे तौर पर कृषि पर निर्भर होते हैं, जबकि कई उद्योगों को अप्रत्यक्ष तौर पर कृषि उत्पादों की जरूरत होती है। ऐसे कृषि आधारित उद्योगों के उत्पाद महँगे हो जाते हैं। पानी की कमी के चलते बिजली संयंत्र और दूसरे ऐसे अन्य उद्योग प्रभावित होंगे, जिन्हें चलाने के लिए पर्याप्त मात्र में जल की आपूर्ति नहीं हो पायेगी। इतना ही नहीं, खराब मानसून के कारण सरकार का ध्यान कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों पर केन्द्रित हो सकता है, जिसका असर आर्थिक सुधारों तथा विकास सम्बन्धी अन्य पहल पर पड़ सकता है।

भारतीय खाद्यान्नों की पूर्ति यहां होने वाली कृषि से ही होती है, जो पूर्णतया खेती की सफलता पर निर्भर है। इसके अतिरिक्त चीनी, वस्त्र, पटसन, जूट, कपास, वनस्पति तथा चाय आदि उद्योग भी भारतीय कृषि पर ही निर्भर है तथा देश के 22 करोड़ पशुओं को चारा भी कृषि सम्पदा द्वारा ही प्राप्त होता है। कृषि के न होने या अत्याल्पावस्था में होने की स्थिति में पशुओं से प्राप्त होने वाली आय तथा सुविधाओं में कमी आ जाती है। इस तरह यहां की कृषि का उद्योगों तथा पशुओं की जीविका से गहरा सम्बंध होने तथा देश की आय का एक बड़ा भाग कृषि द्वारा होने से भारतीय अर्थव्यवस्था मानसून से प्रभावित होती है। फलत: मानसून के प्रतिकूल होने पर देश में खाद्यान्नों तथा कृषि से सम्बंध विभिन्न उद्योगों के लिए कच्चा माल विदेशों से मंगाना पड़ता है। जिसके लिए काफी मात्रा में विदेशी का व्यय होता है। यदि मौसम अनुकूल रहता है तो इन्हीं उत्पादों का विदेशों को निर्यात कर बड़ी मात्रा में विदेशी पूंजी प्राप्त हो जाती है और जिससे औद्योगिक विकास को बल मिलता है।

इसके अतिरिक्त मानसून की कमी होने से ग्रामीण क्षेत्र की क्रय शक्ति भी प्रभावित होगी और FMCG उद्योग पर भी इसका असर दिखाई देगा। ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी मांग कम हो जाएगी। इसके अतिरिक्त खाद, बीज, किटनाशक आदि की खरीद भी तेजी से घट जाएगी। मानसून के कमजोर पड़ने से देश के कई राज्‍यों में सूखे की स्थिति उत्‍पन्‍न हो सकती है। इसका असर फसलों के उत्‍पादन पर पड़ता है और भूखमरी की स्थिति उत्‍पन्‍न हो सकती है, क्‍योंकि देश की आधे से अधिक आबादी खेती पर निर्भर है। इससे इस पर निर्भर लोगों का गुजर बसर होता है। मानसून के कमजोर पड़ने से किसानों के अलावा कृषि कार्य से जुड़े लोग भी प्रभावित होते हैं, क्‍योंकि उन्‍हें इससे रोजगार मिलते हैं। सूखे की वजह से बेरोजगारी बढ़ सकती है और खाद्य पदार्थों का उत्‍पादन कम हो सकता है, ‍जिससे महंगाई बढ़ सकती है और सीजनल सब्जियों के दामों भी भारी उछाल आ सकता है।

किसी भी देश में पायी जाने वाली जलवायु का वहां की अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ता है। वहां की कृषि उपज जलवायु की दशाओं पर निर्भर करती है। यदि जलवायु अनुकूल होती है तो वहां फसलें बहुतायत में उगायी जाती हैं खाद्यान्न, वाणिज्यक फसलें अधिकारिक उत्पन्न होती हैं। प्रतिकूलता की स्थिति में इन्हीं सबका संकट उपस्थित हो जाता है।

वर्तमान स्थिति में मानसून की कमी से निपटने के लिए बहुआयामी रणनीति बनाने की जरूरत है जिसमें सूखा का सामना करने और जलवायु अनुकूल फसलों की किस्मों की खोज, सिंचाई पारिस्थितिकी को विकसित कर वर्षा पर निर्भरता को कम करना, गैर-कृषक गरीबों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना, खेती के कौशल में सुधार, फार्म-टू-फोर्क ट्रांजैक्शन चेन में बड़ा परिवर्तन करने आदि शामिल किया जाना चाहिए।

IAS

हमारे द्वारा दिए जा रहे उत्तर UPSC की सिविल सेवा परीक्षा (IAS परीक्षा) के मानक उत्तर न होकर सिर्फ एक प्रारूप हैं। जिससे अभ्यर्थी उत्तर लेखन की रणनीति से अवगत हो सकेगा। वह उत्तर में निर्धारित समयसीमा में कलेवर को समेटने और समय प्रबंधन की रणनीति से परिचय पा सकेगा। जिससे वह सम्पूर्ण परीक्षा को समयसीमा में हल करने में समर्थ होगा।

IAS परीक्षा 2017 के बारे में और अधिक जानकारी के लिए हमसे जुड़े रहें। IAS परीक्षा में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए सर्वश्रेष्ठ IAS परीक्षा तैयारी ऐप नि:शुल्क डाउनलोड करें।

Best Government Exam Preparation App OnlineTyari

अगर अभी भी आपके मन में किसी प्रकार की कोई शंका या कोई प्रश्न है तो कृपया नीचे दिए गए कॉमेंट सेक्शन में उसका ज़िक्र करें और बेहतर प्रतिक्रिया के लिए OnlineTyari Community पर अपने प्रश्नों को हमसे साझा करें।

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.