IAS मुख्य परीक्षा GS पेपर-3 के 10 महत्वपूर्ण टॉपिक्स | स्वतंत्रता के बाद भूमि सुधार के उपाय

IAS मुख्य परीक्षा GS पेपर-3 के 10 महत्वपूर्ण टॉपिक्स : IAS की मुख्य परीक्षा के GS पेपर-3 में प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, कृषि, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के टॉपिक्स शामिल हैं। मुश्किल प्रकृति होने के नाते, यदि आप अच्छा स्कोर करते हैं तो यह पेपर आपके लिए काफ़ी फायदेमंद साबित हो सकता है।

परीक्षा की कोर्स संरचना इस प्रकार है कि उम्मीदवार को कठोर परिश्रम करने की आवश्यकता है। इसके लिए आपको विभिन्न विषयों को कवर करने के लिए उचित अध्ययन सामग्री की भी आवश्यकता होगी। इस पेपर के लिए उम्मीदवार के विश्लेषणात्मक और तथ्यात्मक ज्ञान की आवश्यकता होती है और इस प्रकार इस परीक्षा को पास करना एक चुनौती बन जाती है।

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यहां पर हम IAS मुख्य परीक्षा GS पेपर-3 से संबंधित 10 महत्वपूर्ण टॉपिक्स के बारे में आपको बताएंगे जिन्हें जानना आपके लिए काफ़ी मददगार साबित होगा। चलिए अब हम आगे बढ़ते हैं…

इन लेखों के माध्यम से हम प्रतिदिन IAS मुख्य परीक्षा के GS पेपर के लिए 10 महत्वपूर्ण टॉपिक्स पर चर्चा करते हैं। आइए हम अगले टॉपिक की ओर आगे बढ़ते हैं।

IAS मुख्य परीक्षा GS पेपर-3 के 10 महत्वपूर्ण टॉपिक्स | आज़ादी के बाद भूमि सुधार के उपाय

हमारा अगला टॉपिक ‘स्वतंत्रता के बाद भूमि सुधार के उपाय’ है।

भूमि सुधार

भूमि सुधार (Land reform) के अन्तर्गत भूमि से संबन्धित कानूनों तथा प्रथाओं में परिवर्तन आते हैं। यह सरकार द्वारा आरम्भ की जाती है या सरकार के समर्थन से चलायी जाती है जिसमें मुख्यतः कृषि भूमिं के पुनर्वितरण पर बल दिया जाता है। भारत में आजादी के समय एक ऐसी कृषि व्यवस्था मौजूद थी जिसमें भूमि का स्वामित्व कुछ हाथों में केंद्रित था। इस व्यवस्था में किसानों का शोषण हुआ और ग्रामीण जनसंख्या के सामाजिक आर्थिक विकास में यह बड़ी बाधा थी। आजादी के बाद भारत सरकार का ध्यान भूमि के समान वितरण पर भी रहा और देश को समृद्ध बनाने में भूमि सुधार को एक मजबूत स्तंभ के रूप में देखा गया।

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पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी : माजिद हुसैन, एक्सेस पब्लिशिंग 

यह पुस्तक सिविल सेवा मुख्य परीक्षा के पाठ्यक्रम को ध्यान में रखकर लिखी गई है और इस पुस्तक के माध्यम से छात्र पर्यावरण और पारिस्थितिकी की बुनियादी तथ्यों के साथ गूढ़ तथ्यों से रूबरू करवाता है अथार्त  पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी में पर्यावरण की परिभाषा, प्रकार, घटक, पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी के संरक्षण हेतु राष्ट्रीय एवं अन्तर राष्ट्रीय स्तर पर किये गए प्रयास, तथ्य का उल्लेख्य सम्मिलित किया गया है।

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आतंरिक सुरक्षा, क्रोनिकल प्रकाशन 

इस ई-बुक में आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी एजेंसियों, योजनाओं, प्रणालियों आदि से संबंधित महत्त्वपूर्ण जानकारियाँ के अतिरिक्त विकास और उग्रवाद के प्रसार के मध्य संबंध, आंतरिक सुरक्षा में नॉन स्टेट एक्टर्स की भूमिका, साइबर सुरक्षा-राष्ट्रिय साइबर सुरक्षा नीति (2013), मनी लॉन्डरिंग, सीमावर्ती क्षेत्रों (विशेषकर पूर्वोत्तर) में सुरक्षा चुनौतियाँ तथा प्रबन्धन, आतंकवाद तथा संगठित अपराध के मध्य संबंध जैसे विषयों को सम्मिलित किया गया है। यह पुस्तक सिविल सेवा मुख्य परीक्षा के छात्रों के लिए विशेष उपयोगी है।

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भूमि अभिलेख प्रबंधन की व्यवस्था अलग-अलग राज्यों में भिन्न-भिन्न है। यह राज्य में अपने ऐतिहासिक विकास और स्थानीय परंपराओं पर निर्भर करती है। अधिकांश राज्यों में भूमि रिकॉर्ड प्रबंध में कई विभाग शामिल हैं। लोगों को पूरे भूमि रिकॉर्ड के लिए 3 से 4 या इससे भी अधिक एजेंसियों से संपर्क करना पड़ता है। इसमें मूलपाठ का रिकॉर्ड और परिवर्तन के लिए राजस्व विभाग, नक्शों के लिए सर्वेक्षण और निपटान (या एकीकरण) विभाग, बाधाओं के सत्यापन और स्थानांतरण, बंधन के पंजीयन के लिए पंजीयन विभाग पंचायतों (कुछ राज्यों में, परिवर्तन के लिए) और नगर निगम के अधिकारियों (शहरी भूमि रिकॉर्ड के लिए) के पास जाना पड़ता है और यह समय की बर्बादी, जोखिम और उत्पीड़न भरा होता है।

दो मौजूदा केंद्र प्रायोजित योजनाओं भूमि अभिलेखों का कम्प्यूटरीकरण (सीएलआर) और राजस्व प्रशासन के सुदृढ़ीकरण एवं भूमि रिकार्ड का अद्यतन (एसआरए और यूएलआर) को 2008 में एक साथ मिलाने का निर्णय लिया गया और इसकी जगह देश में गारंटी के साथ एक प्रणाली विकसित करने के लिए केंद्र प्रायोजित योजना आधुनिकीकरण कार्यक्रम (एनएलआरएमपी) (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) को आकार दिया गया।

स्वतंत्रता के बाद भूमि सुधार के उपाय

देश की स्वतंत्रता के समय भूमि का स्वामित्व केवल कुछ ही लोगों के हाथों में केंद्रित था। इससे किसानों का शोषण बढ़ता गया और साथ ही साथ ग्रामीण आबादी के सामाजिक-आर्थिक विकास की दिशा में भी यह कारण एक प्रमुख बाधा बना रहा। स्वतंत्र भारत की सरकार का मुख्य ध्यान देश में समान भू वितरण करना था। 1950 से 60 के दशक में भू स्वामित्व के कानून विभिन्न राज्यों में अधिनियमित किए गए जिन्हें 1972 में केंद्र सरकार के निर्देश पर संशोधित किया गया।

भूमि सुधारों के अन्तर्गत सरकार ने निम्न कदम उठाए हैं –

(1) भूस्वामित्व सुधार –

इसके अन्तर्गत सरकार ने पूर्व से चली आ रही जमींदारी, रैयतवाड़ी, महलवाड़ी इत्यादि व्यवस्थाओं को समाप्त कर दिया है इसके अन्तर्गत सरकार ने तीन कार्य किए हैं –

(क) बिचैलिया की समाप्ति करना,

(ख) काश्तकारों को प्रत्यक्ष भू-स्वामित्व प्रदान करना, तथा

(ग) लगान का नियमन

(2) जोतों की चकबंदी –

यत्र-तत्र बिखरे खेतों को एक साथ व्यवस्थित कर सिंचाई के साधनों सहित अन्य प्रकार की सुविधाओं के विकास द्वारा भूमि की उत्पादकता बढ़ाई गई ।

(3) सहकारी कृषि का प्रारम्भ,

(4) जोतों की निम्नतम सीमा का निर्धारण,

(5) कृषि-जलवायु प्रादेशिक नियोजन

(6) बरानी कृषि/शुष्क कृषि का विकास

(7) सीढ़ीनुमा खेतों का विकास

(8) मेड़बन्दी

(9) बीहड़ों का समतलीकरण

(10) ऊसर भूमि (पायराइट अथवा जिप्सम खादों का प्रयोग करके) का विकास

(11) मृदा सर्वेक्षण एवं संरक्षण कार्यक्रम, तथा

(12) सिंचाई का विकास (विशेषकर शुष्क क्षेत्रों में)

पर्यावरण-पारिस्थितिकी, क्रोनिकल प्रकाशन   

हिंदी माध्यम से सिविल सर्विस की तैयारी कर रहे सभी छात्रों के लिए इस ई-बुक का अध्ययन करना अत्यंत आवश्यक है।पुस्तक में परितंत्र, जैव-विविधता, जलवायु परिवर्तन व समस्याएं, नमभूमि/आद्रभूमि, भारत में वन, नीति, नियम व प्राधिकरण, प्रदूषण, ऊर्जा व् पर्यावरण आदि विषयों को शामिल किया गया है। यह पुस्तक क्रोनिकल पब्लिकेशन द्वारा तैयार की गई है।

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भूमि सुधारों का आकलन:

जो भू-स्वामी राजनीतिक रूप से प्रभावशाली थे, वे इन सुधारों के प्रयोजन को नष्ट करने में कामयाब रहे। तथापि, जैसा कि पी.एस. अप्पू ने 1996 की अपनी चर्चित पुस्तक लैंड रिफॉर्म्स इन इंडिया में लिखा है,1992 तक महज 4 प्रतिशत ज़मीन के जोतदारों को स्वामित्व का अधिकार मिल पाया था। इन जोतदारों में से भी 97 प्रतिशत सिर्फ सात राज्यों-असम, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के थे।

स्वामित्व का अधिकार जोतदार को हस्तांतरित करने की कोशिश करने पर, कई राज्यों ने काश्तकारी को ही समाप्त कर दिया। लेकिन भूमि हस्तांतरण भले न्यूनतम हो पाया हो, किंतु इस नीति का एक परोक्ष परिणाम यह अवश्य हुआ कि जहां कहीं भी काश्तकारी किसी रूप में बची थी,उसको संरक्षण दिया जाना समाप्त हो गया और भविष्य में काश्तकारी की गुंजाइश ख़त्म हो गई। कई राज्यों ने काश्तकारी की अनुमति तो दी, लेकिन यह शर्त लगाई कि भूमि किराया उत्पाद के एक-चौथाई से पांचवे हिस्से तक के बराबर होगा। किंतु चूंकि यह दर बाज़ार-दर से काफी कम थी, इसलिए इन राज्यों में भी ठेका ज़बानी तौर पर चलता रहा जिसके लिए काश्तकार उत्पाद का लगभग 50 प्रतिशत बतौर किराया देता था।

भूमि सुधार के लिए नई एजेंसी

सरकार भूमि सुधार व बंजर भूमि के उन्नयन के लिए एक अलग एजेंसी स्थापित करने की योजना बना रही है। “भूमि सुधार एवं बंजर भूमि प्रबंधन के लिए जय प्रकाश नारायण मिशन” नाम की नई एजेंसी ग्रामीण विकास मंत्रालय के अधीन काम करेगी। इस संस्था के पास भूमि सुधार एवं बंजर भूमि उन्नयन के लिए नीतियां बनाने तथा उन्हें लागू करने का अधिकार होगा।

आपदा प्रबंधन, क्रोनिकल प्रकाशन  

IAS मुख्य प्रतियोगी परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के लिए इस ई-बुक को पढ़ें। इस ई-बुक के माध्यमसे आप वास्तविक परीक्षा के लिए बेहतर तैयारी कर सकेंगे। इसके अलावा इस मॉक टेस्ट का अभ्यास नियमित तौर पर करना आपके लिए परीक्षा में सफलता के लिए आपका मार्ग प्रशस्त करेगा। पुस्तक में आपदा: अर्थ, परिभाषा एवं प्रकार; भारत में विभिन्न आपदाएं, प्रभाव एवं रोकथाम; मानवीकृत आपदाएं; नाभिकिय आपदाएं, जैविक आपदाएं; रेल दुर्घटनाएँ; भवन में आग सम्बन्धी दुर्घटनाएँ; दावानल;आपदा प्रबंधन अर्थ परिभाषा एवं विभिन्न आयाम; रासायनिक आपदाएं; भारत में आपदा प्रबंधन; आपदा प्रबंधन एवं विभिन्न प्राधिकरणों की भूमिका; आपदाओ एवं विकास में अंर्तसम्बन्ध; आपदा पीड़ितों की अभिवृत्ति एवं उनकी मनोदशा, आईएएस मुख्य परीक्षा में पूछे गए एवं संभावित प्रश्नों का संग्रह किया गया है।

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विज्ञान व प्रोद्योगिकी : क्रोनिकल प्रकाशन 

इस ई-बुक में भारत के वैज्ञानिक तथा विज्ञान संबंधी उपलब्धि, भारत में विज्ञान व प्रोद्योगिकीय: संस्थागत ढांचा, कंप्यूटर एवं सुचना-प्रोद्योगिकीय, जैव प्रोद्योगिकीय, परमाणु प्रोद्योगिकीय, अन्तरिक्ष प्रोद्योगिकीय, नैनो-प्रोद्योगिकीय (सूक्ष्म-प्रोद्योगिकीय), रक्षा प्रोद्योगिकीय, बोद्धिक सम्पदा, रोबोटिक्स को सम्मिलित किया गया है। यह पुस्तक सरल भाषा में सम्पूर्ण सिविल सर्विस परीक्षा के पाठ्यक्रम को कवर करती है इसलिए यह पुस्तक सभी हिंदी माध्यम से तैयारी करने वाले छात्रों के लिए विशेष उपयोगी बन गई है।

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अब हम IAS मुख्य परीक्षा के GS पेपर-3 से संबंधित 10 महत्वपूर्ण टॉपिक्स पर आधारित इस लेख को यहीं समाप्त करते हैं। बाकी टॉपिक्स के लिए हमसे जुड़े रहें हम दिन-प्रतिदिन उन टॉपिक्स पर आपसे चर्चा करेंगे।

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