IAS GS प्रश्न पत्र 4 हेतु 10 मुख्य विषयों पर उत्तर लेखन अभ्यास : नागरिक सेवाओं में उत्कृष्टता के लिए आवश्यक गुण !

IAS GS प्रश्न पत्र 4 हेतु 10 मुख्य विषयों पर उत्तर लेखन अभ्यास : नागरिक सेवाओं में उत्कृष्टता के लिए आवश्यक गुण- IAS मुख्य परीक्षा 2017 के लिए उत्तर लेखन के अभ्यास से बहुत मदद मिलती है। इससे पता चल जाता है कि कैसे अपने समय को विभिन्न प्रश्नों के लिए वितरित किया जाए और कैसे बिंदुओं पर प्रकाश डाला जाए, जिससे अधिक अंक प्राप्त किये जा सकें।

उत्तर-लेखन प्रक्रिया का सबसे पहला चरण यही है कि उम्मीदवार प्रश्न को कितने सटीक तरीके से समझता है तथा उसमें छिपे विभिन्न उप-प्रश्नों तथा उनके पारस्परिक संबंधों को कैसे परिभाषित करता है? सच तो यह है कि आधे से अधिक अभ्यर्थी इस पहले चरण में ही गंभीर गलतियाँ कर बैठते हैं। अतः इससे बचने की जरुरत है।

 

 IAS GS प्रश्न पत्र 4 हेतु 10 मुख्य विषयों पर उत्तर लेखन अभ्यास 

सिविल सेवा परीक्षा में सफलता मेहनत के साथ-साथ कई अन्य कारकों पर निर्भर करती है जिनमें सबसे महत्त्वपूर्ण है आपकी उत्तर-लेखन शैली। क्योंकि उत्तर-पुस्तिका परीक्षक इस तथ्य से बिल्कुल अवगत नहीं होता कि उत्तर लेखन करने वाले अभ्यर्थी ने कितनी गंभीरता से पढ़ाई की है या उसकी परिस्थितियाँ कैसी हैं इत्यादि। परीक्षक के पास अभ्यर्थी के मूल्यांकन का एक ही आधार होता है और वह यह कि अभ्यर्थी द्वारा उत्तर-पुस्तिका में किस स्तर का उत्तर लेखन किया गया है। अगर उत्तर लेखन प्रभावी होंगे तो परीक्षक अच्छे अंक देने के लिये मजबूर हो जाएगा और यदि उत्तरों में दम नहीं है तो फिर अभ्यर्थी ने चाहे जितनी भी मेहनत की हो, उसका कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकलेगा।

आपकी सफलता या विफलता में तैयारी की भूमिका 50% से अधिक नहीं है। शेष 50% भूमिका इस बात की है कि परीक्षा के तीन घंटों में आपका निष्पादन कैसा रहा? आपने कितने प्रश्नों के उत्तर लिखे? किस क्रम में लिखे, बिंदुओं में लिखे या पैरा बनाकर लिखे, रेखाचित्रों की सहायता से लिखे या उनके बिना लिखे, साफ-सुथरी हैंडराइटिंग में लिखे या अस्पष्ट हैंडराइटिंग में, उत्तरों में तथ्यों और विश्लेषण का समुचित अनुपात रखा या नहीं- ये सभी वे प्रश्न हैं जो आपकी सफलता या विफलता में कम से कम 50% भूमिका निभाते हैं। दुर्भाग्य की बात यह है कि अधिकांश उम्मीदवार इतने महत्त्वपूर्ण पक्ष के प्रति प्रायः लापरवाही बरतते हैं और उनमें से कई तो अपने कॉलेज के बाद के जीवन का पहला उत्तर मुख्य परीक्षा में ही लिखते हैं।

UPSC मुख्य परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों की प्रकृति वर्णनात्मक होती है जिसमें प्रश्नों के उत्तर को  निर्धारित शब्दों (सामान्यत:100 से 300 शब्द) में उत्तर-पुस्तिका में लिखना होता है, अत: ऐसे प्रश्नों के उत्तर लिखते समय लेखन शैली एवं तारतम्यता के साथ-साथ समय प्रबंधन आदि पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है। लेखन शैली एवं तारतम्यता का विकास सही दिशा में निरंतर अभ्यास से संभव है, जिसके लिये अभ्यर्थियों को विषय की व्यापक समझ के साथ-साथ कुछ महत्त्वपूर्ण बातों का भी ध्यान रखना चाहिये। हमारा उद्देश्य दिए गए प्रश्नों के तहत अभ्यर्थियों को यही समझाने की कोशिश करना है कि उत्तर-लेखन शैली के विकास के लिये क्या सावधानियाँ बरतनी चाहिये?

IAS सामान्य अध्ययन पेपर 4 - IAS GS Paper 4

IAS सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4, क्रोनिकल पब्लिकेशन

यह पुस्तक सिविल सेवा मुख्य परीक्षा के पाठ्यक्रम को ध्यान में रखकर लिखी गई है और इस पुस्तक के माध्यम से छात्र नीतिशास्त्र, सत्यनिष्ठा और अभिरुचि की बुनियादी तथ्यों के साथ गूढ़ तथ्यों से रूबरू होते हैं। यह पुस्तक प्रश्नोत्तर रूप में हैं, जिससे छात्र अभ्यास करते हुए तथ्यों को समझते हैं।

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IAS GS प्रश्न पत्र 2 हेतु 10 मुख्य विषयों पर उत्तर लेखन अभ्यास : मानसून का भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव !

प्रश्न : उन विशेषताओं का उल्लेख करें, जो नागरिक सेवा के लिए महत्वपूर्ण हैं। आपने जवाब को स्पष्ट करें।

उत्तर-सिविल सेवा (Civil servises) के दो अर्थ लगाये जाते हैं-1. असैनिक सेवा – इसमें वे सभी कर्मचारी आते हैं जो सेना में नहीं हैं। 2. शासकीय सेवा की एक शाखा। इस लेख में ‘सिविल सेवा’ से अभिप्राय शासकीय सेवा की एक शाखा से है। सभी सरकारी विभाग जिनमें सशस्त्र सेनाओं से संबंधित विभाग नहीं आते हैं। तथा सिविल सेवकों से तात्पर्य है – ‘अधिकारियों का वह समूह जो सरकारी कार्यक्रमों एवं योजनाओं का क्रियान्वयन करते हैं’। इनका चयन योग्यता आधार पर होता है। वे सरकारी नीतियों के माध्यम से लोगों की सेवा करते हैं। भारत में सिविल सेवा अधिकारी के तौर पर महत्वपूर्ण पद ये हैं: आईएएस, आईपीएस, आईएफएस इत्यादि।

सिविल सेवा अधिकारी को संघ लोक सेवा आयोग द्वारा निर्धारित परीक्षा के लिए आवश्यक योग्यता से अधिक योग्य होना आवश्यक है तभी उन्हें जो पद एवं ओहदों के अनुसार कार्य सौंपे जायंगे वे बखूबी एवं कुशलता से संपन्न कर पाएंगे। इस पद की चुनौतियाँ पद सँभालने के बाद बढ़ जाती है। इस लिए आने वाली हर चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रशासनिक अधिकारी में कुछ प्रमुख गुण होने चाहिए या ये गुण अपने अन्दर विकसित करने चाहिए ताकि वे कर्तव्यों का कुशलता पूर्वक निर्वहन कर सकें।

किसी भी संस्था में सफलता हेतु एक योग्य प्रशासक उपलब्ध संसाधनों का आकलन कर अल्पकालीन व दीर्घकालीन योजना निर्माण कर स्वयं व संस्था के सभी कार्मिको हेतु प्राथमिकता का चयन कर योजना को अमलीजामा पहनाता हैं तथा प्रशासकीय सफलता हेतु अपने व्यक्तित्व व गुणों का निरन्तर परिमार्जन कर कुछ गुणों का समावेश भी करना होता हैं। प्रशासक को सर्वप्रथम स्वयं में अनुकूलन का गुण रखते हुए खुद को देश के हित में संस्था के लिए नियमों के तहत कार्य करना चाहिए। समयबद्धता, सादगी, कार्य के प्रति समर्पण, एजेंडे की पूर्ण पालन करके ही वह स्वयं को उदाहरण के रूप में प्रस्तुत कर सकता हैं।

प्रशासक को माहौल समझने एवम तदनुसार निर्णयन हेतु तत्पर रहना चाहिए। खुलापन आवश्यक है परन्तु प्रशासक अपनी कार्ययोजना को लेकर इतना उदार कदापि नहीं रहना चाहिए कि अधीनस्थ कार्मिक प्रशासन को लेकर सटीक पूर्वानुमान लगा सके अथवा भविष्यवाणी कर सके। प्रशासक में संस्था उद्देश्यों के प्रति दृढ़ता बनी रहे एवम संस्था हितार्थ वह कठोरतम निर्णय ले सके तथा संकट के समय उसे निर्लिप्त रहकर शांत भाव से संस्था हित में निर्णयन से सहकार्मिको के समक्ष उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। एक योग्य प्रशासक राय या व्यक्तत्व देने से पूर्व पूर्ण अध्ययन करता है एवम नवाचारों के प्रति उत्साहित रहकर साथियों को प्रेरित करता है। वह वृहद योजना के साथ प्रति कार्मिक सूक्ष्म नियोजन कर कार्मिक पर पैनी नज़र बनाये रखता हैं। प्रशासक आंतरिक रूप से एक माता के सामान ममत्व रखते हुए भी पिता के समान कठोरता पूर्वक अनुशासन की स्थापना करता हैं। अपने साथियों से एक कदम आगे रहने हेतु समय व धन का नियमित विनियोजन सुनिश्चित करता हैं। एक सफल प्रशासक अभिव्यक्ति हेतु शब्दों की अपेक्षा कार्यो को बेहतर माध्यम मानता है। अपने धैर्य से विषम परिस्थितियों को सम बनाते हुए छोटे छोटे अवसरों को भुनाकर उनपर सफलता की इमारत खड़ी करता हैं।

एक प्रशासनिक ऑफिसर में नीचे दिए गए ये गुण अनिवार्य रूप से होने चाहिए-

लीडरशिप

आईएएस अधिकारी जहां भी, जिस भी पद पर हो, सरकार के प्रतिनिधि‍ के तौर पर काम करता है। शासकीय पद पर रहते हुए उसे उत्कृष्ट नेतृत्व क्षमता का प्रदर्शन करना होता है। उसके पास अपनी टीम को विकास और भारतवासियों की बेहतरी के लक्ष्य की ओर ले जोन की क्षमता होनी चाहिए। ऐसा अच्छी लीडरशिप स्किल्स से ही संभव है।

प्रशासकीय क्षमता

किसी आईएएस अधिकारी को सरकार द्वारा सौंपी गई एक प्रमुख जिम्मेदारी होती है अपने अधिकार क्षेत्र में दैनंदिन के प्रशासनिक कार्यों को देखना। इस जिम्मेदारी को पूरा करने और सबको साथ लेकर सारे प्रशासनिक कार्य संपन्न करने के लिए एक आईएएस अधिकारी का कुशल प्रशासक होना जरूरी होता है।

निर्णय क्षमता

कई मौकों पर आईएएस अधिकारी खुद को ऐसी नाजुक परिस्थिति में पाता है, जहां त्वरित निर्णय लेना जरूरी होता है। इसके लिए जरूरी है कि वह विपरीत परिस्थितियों में भी ठंडे दिमाग से स्पष्ट सोच सके और सभी उपलब्‍ध विकल्पों का आलकन कर इनमें से प्रत्येक के परिणामों पर गौर करे। इसके आध्ाार पर एक सुविचारित निर्णय लेकर उस पर अमल करना होता है। आपात स्थितियों में यह सब कम से कम समय में कर दिखाना होता है। इसलिए आईएएस अधिकारी की निर्णय क्षमता अच्छी होनी चाहिए।

ज्ञानवान

ज्ञान धरती पर मौजूद सबसे महत्वपूर्ण संसाधन है। किसी आईएएस अधिकारी के लिए यह निहायत जरूरी है कि उसके पास उसके कार्यक्षेत्र से संबंधित सभी विषयों का अच्छा-खासा ज्ञान हो। ज्ञानवान होने से न सिर्फ उसे सरकारी नीतियों के प्रभावी अमल में मदद मिलेगी, बल्कि किसी प्रशासनिक समस्या को समझने और उसे हल करने के लिए सरकारी मशीनरी में मौजूद खामियों को दूर करने में भी मदद मिलेगी।

परिश्रम और समर्पण

अगर आपको आईएएस परीक्षा की तैयारी मुश्किल और थका देने वाली लगती है, तो ध्यान रखिए, आईएएस में चयनित हो जाने पर तो इससे भी कहीं अधिक मुश्किल और थका देने वाला काम करना होगा। आईएएस अधिकारी पर विभिन्न क्षेत्रों की कई जिम्मेदारियां होती हैं। इनमें कानून अनुपालन, विकास कार्य, प्रशासनिक कार्य, प्रबंधन आदि शामिल है। इन सब कार्यों को बेहतर तरीके से करने के लिए आईएएस अधिकारी का परिश्रमी और काम के प्रति पूरी तरह समर्पित होना आवश्यक है।

ईमानदारी

सरकारी मशीनरी में भ्रष्टाचार सबसे बड़ी समस्या है। तमाम सरकारें आईं और गईं लेकिन इस समस्या का कोई हल अब तक नहीं निकल पाया है। अपने कार्यक्षेत्र में प्रशासन, वित्त और कानून व्यवस्था के लिए जिम्मेदार होने के चलते आईएएस अधिकारी के पास इस समस्या से निपटने की जबरदस्त शक्ति होती है। व्यक्तिगत ईमानदारी से लैस अफसर भ्रष्टाचार विरोधी जंग में अग्रणी भूमिका निभा सकते हैं।

संचार कौशल (कम्युनिकेशन स्किल्स)

कुशल प्रशासक होने के लिए यह जरूरी है कि आईएएस अधिकारी में अच्छी कम्युनिकेशन स्किल्स हों। वह बोलकर तथा लिखकर स्वयं को बेहतरीन तरीके से अभिव्यक्त कर सके। इससे वह अपने अध्ाीनस्थों को स्पष्ट रूप से निर्देश दे पाएगा और किसी गफलत या गलतफहमी की गुंजाइश नहीं रहेगी। यही नहीं, आईएएस अधिकारियों को समय-समय पर उच्च पदों पर आसीन विशिष्ट व्यक्तियों से भी मिलना होता है। इन मौकों पर भी कम्युनिकेशन स्किल्स काम आती हैं।

आउट ऑफ द बॉक्स थिंकिंग

भारत जैसे विधिताओं भरे देश में सरकारी मशीनरी का हिस्सा होने की सबसे बड़ी चुनौती यही है कि अलग-अलग इलाकों में समस्याओं में भी विविधता होती है और कोई एक ही समाधान हर जगह लागू नहीं होता। इसके अलावा, सीमित बजट में विभिन्न टारगेट पूरे करने होते हैं। ऐसी स्थितियों में बंधी-बंस्‍ई लीक से हटकर सोचने और काम करने से बात बनती है।

वर्क एथिक्स

एक आईएएस अधिकारी में कार्य के प्रति अनुकरणीय नैतिकता होनी चाहिए। फिर वह समय पर ऑफिस पहुंचना हो या फिर सरकारी मशीनरी का निजी काम के लिए उपयोग न करना हो। वर्क एथिक्स आपको अपना काम बेहतर तरीके से अंजाम देने में तो मदद करते ही हैं, इनके माध्यम से आप अपने कनिष्ठों के सामने मिसाल भी पेश कर सकते हैं।

देशभक्ति

यह गुण तो एक आईएएस अधिकारी में होना ही चाहिए। आखिर उसे देश की सेवा ही तो करनी है। उसे भविष्य के भारत का निर्माण करना है। इसमें देशभक्ति का जज्बा उसका मार्ग प्रशस्त करेगा।

सार्वजनिक जीवन में उम्मीदवारों को सत्यनिष्ठ, ईमानदारी से संबंधित विषयों के प्रति कार्यतत्परता तथा सकारात्मक दृष्टिकोण के तहत समाज में विभिन्न मुद्दों तथा सामने आने वाली समस्याओं का समाधान को प्रस्तुत करने और उसपर प्रभावी ढंग से कार्य करवाने की योग्यता होनी चाहिए। सरकारी तंत्र का अंग बनने पर हर कदम पर शैक्षिक योग्यता से अधिक बौद्धिकता के साथ अधिक क्षमता की जरुरत पड़ती है।

How-to-Prepare-for-IAS-Mains-General-Studies-Paper-4

 

हमारे द्वारा दिए जा रहे उत्तर UPSC की सिविल सेवा परीक्षा (IAS परीक्षा) के मानक उत्तर न होकर सिर्फ एक प्रारूप हैं। जिससे अभ्यर्थी उत्तर लेखन की रणनीति से अवगत हो सकेगा। वह उत्तर में निर्धारित समयसीमा में कलेवर को समेटने और समय प्रबंधन की रणनीति से परिचय पा सकेगा। जिससे वह सम्पूर्ण परीक्षा को समयसीमा में हल करने में समर्थ होगा।

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