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जलवायु परिवर्तन से संबंधित प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन : मुख्य तथ्य !

जलवायु परिवर्तन से संबंधित प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन- भारत में 12वीं पंचवर्षीय की शुरूआत अनवरत वृद्धि को केन्द्र में रखकर की गयी। इसके साथ-साथ अनवरत विकास की नीतियों एवं कार्यक्रमों जिनका हम अनुसरण कर रहे हैं द्वारा हमारे देश के नागरिकों एवं समूचे विश्व में यह संदेश जाता है कि भारत अनवरत विकास एवं इसके तीन आयामों-सामाजिक, आर्थिक एवं पर्यावरणीय के प्रति भी उतना ही प्रतिबद्ध है। एक वैश्विक तुलनात्मक मत सर्वेक्षण यह दर्शाता है कि भारत तथा वास्तव में सभी देश अनवरत विकास एवं जलवायु परिवर्तन के प्रति सजग एवं चिंतित हुए हैं। फिर भी, आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए संसाधन की अपेक्षित मात्रा प्राप्त करने के संदर्भ में चुनौतियां भी विकट हैं।

जनता के बीच वाद-विवाद में जलवायु विज्ञान को महत्वपूर्ण स्थान देना सही है। जहां जलवायु विज्ञान अनिश्चितताओं का सामना कर रहा है वहां विश्व और अधिक संख्या में परमसंकट से जूझ रहा है। अब कुछ करने की भावना को इस तरह से महसूस किया जा रहा है जैसा आज तक नहीं किया गया। इसके विपरीत, यद्यपि विभिन्न जलवायु परिवर्तन पर हुए अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में यह सुनिश्चित किया गया कि उत्सर्जन घटाने हेतु बहुपाक्षिक एवं नियम आधरित कवायद जारी रखी जाएगी तथापि विकसित देशों की पार्टियों द्वारा ली गई उत्सर्जन शपथ में निष्ठा का अभाव था। परमसंकट की बढ़ती घटनाओं तथा नागरिकों की बढ़ती मांग को देखते हुए विश्व के पास विकसित हो रहे विज्ञान की आवाज को सुनने तथा बोझ को समान एवं उचित रूप से बांटे जाने के बहुपक्षीयवाद के सिद्धांत की रणनीति एवं नीति से उचित तरीके से उसका उत्तर देने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है।

पृथ्वी सम्मेलन: (1992)

क्योटो प्रोटोकॉल: 1997 (COP-3)

बाली सम्मेलनः 2007 (COP-13)

कोपेनहेगन सम्मेलनः 2009 (COP-15)

कानकुन सम्मेलनः 2010 (COP-16)

डरबन सम्मेलनः 2011 (COP-17)

दोहा सम्मेलनः 2012 (COP-18)

वारसा सम्मलेन:2013 (COP-19)

लीमा सम्मेलनः 2014 (COP-20)

पेरिस सम्मेलनः 2015 (COP-21)

मराकेश सम्मलेन: 2016 (COP-22)

बॉन सम्मलेन: 2017 (COP-23)

उल्लेखनीय है कि कोप (COP) 24 का आयोजन वर्ष 2018 में पोलैंड में किया जाएगा।

वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन एवं उससे उत्पन्न संकट विश्व के समक्ष प्रमुख चुनौती है। इससे निपटने के लिए सामूहिक प्रयास की रूपरेखा तैयार करने एवं कार्ययोजनाओं के कार्यान्वयन को प्रोत्साहित तथा समीक्षा करने के लिए प्रतिवर्ष जलवायु परिवर्तन सम्मेलन आयोजित किया जाता है। इन सम्मेलनों में लिए गए निर्णयों एवं प्रारंभ कार्यक्रम तथा नीतियों से जलवायु परिवर्तन के संकट को कम करने में मदद मिलेगी।
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