नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया : परीक्षा अंकों को नॉर्मलाइजेशन कैसे किया जाता है ?

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नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया : परीक्षा अंकों को नॉर्मलाइजेशन कैसे किया जाता है ?

नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया : परीक्षा अंकों को नॉर्मलाइजेशन कैसे किया जाता है – SSC विगत वर्ष 5 अगस्त से 23 अगस्त 2017 तक 43 शिफ्टों में SSC CGL 2017 के टीयर-1 की परीक्षा आयोजित की थी। विद्यार्थियों ने लगातार आयोग से शिकायत की की कई शिफ्टों में परीक्षा का स्तर बहुत सरल था, इसलिए उस शिफ्ट के विद्यार्थी दी गई समय सीमा में अधिक प्रश्नों को हल करने में सक्षम थे। लेकिन कुछ शिफ्टों में, प्रश्नों का स्तर लंबा और कठिन था और उस शिफ्ट के विद्यार्थी मेहनत कर भी अधिक प्रश्न नहीं हल कर सकें। आयोग ने इस बात को गंभीरता से लिया और इस वर्ष (SSC CGL परीक्षा 2018) जारी की गई रिक्तियों के लिए नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया (अंकों के सामान्यीकरण की प्रक्रिया) को लागू कर दिया है। जिससे सभी विद्यार्थियों के साथ न्याय हो सके।

SSC CGL टियर I परीक्षा 2018: फ्री पैक (हिंदी माध्यम)

OnlineTyari ने  SSC CGL Tier I परीक्षा 2018 की तैयारी कर रहे छात्रों  की परीक्षा  तैयारी में सहायता पहुचाने और उनकी तैयारी स्तर को जांचने के लिए SSC CGL Tier I परीक्षा 2018 free  पैकेज का संकलन किया है। यह SSC CGL Tier I परीक्षा 2018 free पैकेज टेस्ट सीरीज अनुभवी विषय विशेषज्ञों द्वारा परीक्षा पाठ्यक्रम और परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के कठिनाई स्तर के अनुरूप निर्मित किया गया है। इस सम्पूर्ण  पैकेज टेस्ट सीरीज में 1 परीक्षा अनुरूप मॉक टेस्ट और 4 सेक्शनल टेस्ट संकलित हैं

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देश भर में आयोजित होने वाली गेट, कैट, मैट, आईबीपीएस और रेलवे भर्ती बोर्ड की परीक्षाओं में पहले से ही अंकों के सामान्यीकरण की प्रक्रिया को लागू कर चुके हैं ताकि सभी उम्मीदवारों को प्रतियोगिता में उचित मौका प्राप्त हो सके।

 

नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया : परीक्षा अंकों को नॉर्मलाइजेशन कैसे किया जाता है ?

आइए अब हम सबसे पहले यह जान लेते हैं की नॉर्मलाइजेशन की जरुरत क्यों पड़ी और नॉर्मलाइजेशन को किस विधि से आसानी से समझा जा सकता है?

नॉर्मलाइजेशन की जरुरत क्यों पड़ी 

यदि कोई ऑनलाइन परीक्षा कई दिनों में होती है तो उसमें हर दिन अलग-अलग पेपर आता है। ऐसे में उम्मीदवारों ने इसका विरोध किया। उनका कहना था कि हमारी पाली में जो पेपर आया वो कठिन था। दूसरी पाली में सरल था। बस इसी शिकायत को आधार बनाकर ‘नॉर्मलाइजेशन’ की शुरुवात कर दी गई।

क्या होता है ‘नॉर्मलाइजेशन’ पद्धति में

नॉर्मलाइजेशन सिस्टम के तहत पेपर कितना कठिन था इसका स्तर तय किया जाता है। इसके आधार पर अंक निर्धारित कर दिए जाते हैं। मान लीजिए, परीक्षा के पहले दिन पेपर कठिन था तो अनुमान लगा लिया गया कि इस ​पेपर में यदि कोई 70 नंबर भी ले आया तो उसे 100 नंबर मान लिया जाएगा। जबकि दूसरे दिन पेपर बहुत सरल था तो इसका उल्टा कर दिया जाएगा। 100 नंबर लाने वाले को 70 नंबर मान लिया जाएगा।

नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया को समझे सरल रूप में 

आइए अब हम माध्य विधि से यह समझने का प्रयास करते हैं, कि नॉर्मलाइजेशन को कैसे सबसे आसानी से समझा जा सकता है-

क्रम संख्या उम्मीदवार -1 उम्मीदवार-2 उम्मीदवार-3 उम्मीदवार-4 उम्मीदवार-5
शिफ्ट-1 60 50 45 65 55
शिफ्ट-2 100 80 70 90 85
शिफ्ट-3 90 95 60 75 80

अब मान लीजिए कि शिफ्ट -1 के उम्मीदवार 60, 50, 45, 65 और 55 अंक प्राप्त करते हैं।
शिफ्ट -2 के उम्मीदवार 100, 80, 70, 90 और 85 अंक प्राप्त करते हैं।
शिफ्ट -3 के उम्मीदवार 90, 95, 60, 75 और 80 अंक प्राप्त करते हैं।

यहाँ पर उम्मीदवार प्रश्नपत्रों के स्तर के कारण अलग-अलग शिफ्टों में उम्मीदवारों के अंकों में भिन्नता देख सकते हैं। इसलिए, हम पहली शिफ्ट का माध्य ज्ञात करेंगे और वह 55 अंक होगा। फिर हम दूसरी शिफ्ट का माध्य ज्ञात करेंगे जो कि 85 अंक होगा। इस प्रकार, शिफ्ट-1 और शिफ्ट-2 के माध्य के मध्य का अंतर 30 है। यदि हम पहली शिफ्ट के उम्मीदवार के अंकों में 30 अंक जोड़ देते हैं, तो नॉर्मलाइजेशन अंक (60+30=90), (50+30=80), (45+30=75), (65+30=95) और (55+30=85) होंगे, जो अब शिफ्ट-2 के अंकों के बराबर होंगे। अब शिफ्ट-1और शिफ्ट-2 के अंक बराबर होंगे।

उसी प्रकार, हम दूसरी शिफ्ट और तीसरी शिफ्ट के अंकों का नॉर्मलाइजेशन कर सकते हैं। दूसरी शिफ्ट में, अंकों का माध्य 85 है, तीसरी शिफ्ट में, अंकों का माध्य 80 होगा, इसलिए माध्य अंक का अंतर 5 है, यदि हम शिफ्ट-3 के उम्मीदवारों के अंकों में 5 अंक जोड़ देते हैं, तो (90+5=95), (95+5=100), (60+5=65), (75+20=95) और (80+20=100) अंक प्राप्त करेंगें।

अब जैसा कि आप देख सकते हैं, शिफ्ट-2 और शिफ्ट-3 के अंक समान (सामान्यीकृत) हैं। तो हमारे अनुसार, यह नॉर्मलाइजेशन (सामान्यीकरण) को समझने का सबसे आसान तरीका है। इस विधि को माध्य विधि कहा जाता है। हम किसी विशेष शिफ्ट के सभी उम्मीदवारों के अंकों का माध्य ले सकते हैं, और अन्य शिफ्टों के उम्मीदवारों के अंकों के साथ इसकी तुलना कर सकते हैं, और फिर हम माध्य के अंतर को सबसे कम शिफ्ट के अंकों जोड़ते हैं। हमें उम्मीद है कि इससे प्रतिस्पर्धी परीक्षा में नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया को समझने में मदद मिलेगी।

आशा है आपको SSC CGL परीक्षा 2018 से सम्बंधित महत्त्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई होगी। और यह लेख आपके लिए उपयोगी होगा। अगर आपको यह लेख पसंद आया हो इसे अपने दोस्तों में शेयर करना न भूलें।

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