रेलवे ALP एवं तकनीशियन परीक्षा कक्ष में कैसे अपना 100% देकर सफल हों ?

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रेलवे ALP एवं तकनीशियन परीक्षा कक्ष में कैसे अपना 100% देकर सफल हों – किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में सफल होने के लिये सिर्फ पढ़ाई ही जरुरी नहीं है, बल्कि यह समझना भी जरुरी है कि परीक्षा के दौरान निर्धारित घंटों में आप क्या करते हैं, और कैसे करते हैं?
रेलवे ALP का मॉक टेस्ट्स सीरिज OnlineTyari पर कैसे लें !कई दफा ऐसा देखने को मिलता है कि वर्षों-महीनों की जी-तोड़ मेहनत कर पढ़ाई करने के बावजूद अनेक छात्र परीक्षा कक्ष में आत्मविश्वास से नहीं जा पाते हैं। बेहतर समय-प्रबंधन के अभाव में आख़िरकार उनकी सारी मेहनत धराशायी हो जाती है और वे परीक्षा में बेहतरीन प्रदर्शन करने से चूक जाते हैं। आप चाहे कितनी भी अच्छी तैयारी क्यों न कर लें, आप सफलता तभी पाएंगे जब परीक्षा घंटों में आप औरों से बेहतर प्रदर्शन करेंगे। अतः इस मुद्दे पर विशेष ध्यान देने की जरुरत है। तभी आप रेलवे ALP और तकनीशियन परीक्षा 2018 में सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

 

रेलवे ALP एवं तकनीशियन परीक्षा कक्ष में कैसे अपना 100% देकर सफल हों ?

परीक्षा के घंटों में आप अपनी एकाग्रता और आत्मविश्वास तभी कायम रख पाएंगे जब आप पहले से ही परीक्षा की रणनीति पर कार्य करेंगे और परीक्षा के दौरान अपनाई जाने वाली सावधानियों से परिचित होंगे-

परीक्षा कक्ष में अपनाई जाने वाली रणनीति

  • निस्संदेह परीक्षा कक्ष में परीक्षा घंटों के लिये हर परीक्षार्थी की अपनी रणनीति होती है लेकिन अनुभव की कमी (नए परीक्षार्थी) एवं बार-बार गलती दोहराने की प्रवृत्ति (पुराने परीक्षार्थी) के चलते अधिकांश परीक्षार्थी अच्छी तैयारी के बावजूद परीक्षा में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाते हैं।
  • हालाँकि इस विषय में कुछ सर्वमान्य बातें हैं जिनको अमल में लाने पर आपके अधिक अंक पाने  की पूरी संभावना है। जैसा कि आपको पता हो कि परीक्षा में कितने प्रश्न पूछे जाने हैं। कौनसा टॉपिक ज्यादा महत्त्वपूर्ण है? विगत वर्ष के कटऑफ क्या थे। आपको कम-से-कम कितने प्रश्न हल करने हैं? परीक्षा घंटे में क्या और कैसे करना है, इस पर ज़्यादा ध्यान देने की आवश्यकता है। परीक्षा समय में कैसे पेपर को हल करना है? ऑनलाइन परीक्षा में क्या सावधानी रखनी है, आदि तथ्यों पर ध्यान रखकर परीक्षा दी जानी चाहिए।

समय-प्रबंधन

      • पहली और सबसे ज़रूरी बात है परीक्षा अवधि में समय-प्रबंधन की। चूँकि ‘परीक्षा’ निश्चित समय-सीमा में अपने ज्ञान-कौशल के प्रदर्शन का ही दूसरा नाम है, इसलिये समय-प्रबंधन परीक्षा का अनिवार्य पहलू है।
      • उम्मीदवार को परीक्षा कक्ष में जाने से पहले ही यह देख लेना चाहिए की पेपर में कितने प्रश्न (75 प्रश्न) पूछें जाएंगे और उनके लिए कितना समय (60 मिनट) निर्धारित है। अथार्त आपको यह जान लेना चाहिए कि प्रति प्रश्नों को हल करने के लिए आपके पास कितने सेकेंड का समय है एवं प्रश्न पत्र में पूछे जाने वाले प्रश्नों की जटिलता और गहराई कितनी है।
      • इसके पहले आयोजित हुए पेपर में कटऑफ क्या थी और उससे अधिक पाने के लिए कितने प्रश्नों को हल किया जाना आवश्यक है।
      • परीक्षार्थी को प्रति प्रश्न को हल करने के लिए समय का पता होना चाहिए और उसे उतने ही समय में हल किया जाना चाहिए और सही उत्तर को चुनकर, सही विकल्प का चयन किया जाना चाहिए।
      • परीक्षा में प्रश्न के गलत होने का खतरा तो होता ही है, साथ ही कठिन विकल्पों के कारण प्रश्नों को हल करने में ज़्यादा समय भी लगता है। इस कारण कई दफा छात्र पूरे पेपर के प्रश्नों को देख भी नहीं पाते हैं। अतः इस चुनौती से निपटने का एक तरीका यह है कि सर्वप्रथम वही प्रश्न हल किये जाएँ जो परीक्षार्थी की ज्ञान की सीमा के दायरे में हों। जिन प्रश्नों के उत्तर पता न हों या जिन पर उधेड़बुन हो, उन्हें छोड़ देना चाहिये और अगर अंत में समय बचे तो उनका उत्तर देने की कोशिश करनी चाहिये, वरना उन्हें छोड़ देने में ही भलाई है।

  • दूसरा तरीका यह है कि उम्मीदवार सभी प्रश्नों को हल करने का लालच छोड़कर अपने अधिकार क्षेत्र वाले प्रश्नों पर ही फोकस करें। हाँ, समय बचने पर अन्य टॉपिक के प्रश्नों पर ध्यान दिया जा सकता है।
  • आमतौर पर परीक्षा भवन में प्रवेश करने से पहले परीक्षार्थी यह निश्चय ज़रूर कर लेता है कि उसे न्यूनतम या अधिकतम कितने प्रश्न हल करने हैं। इस सोच के पीछे प्रारंभिक परीक्षा के विगत वर्षों के कट-ऑफ आँकड़े तथा आगामी परीक्षा के संभावित कट-ऑफ का अनुमान शामिल होता है।

परीक्षा के दौरान किन बातों का ध्यान रखें?

  • पहले आसान प्रश्नों या अपने पसंदीदा खंड से संबंधित प्रश्नों को हल करें, इससे आत्मविश्वास बढ़ता है।
  • जल्दी में प्रश्नों को न पढ़ें बल्कि शांति और धैर्य के साथ प्रश्न को दो-तीन बार पढ़ें और सुनिश्चित करें कि वास्तव में क्या पूछा जा रहा है। इससे आप गलती करने से बचेंगे।
  • जिन प्रश्नों को आप पहली बार में हल नहीं कर पाते हैं उन्हें टिक-मार्क करके छोड़ दें। फिर बचे हुए समय में उन्हें हल करने का प्रयास करें।
  • दिमाग में जो जवाब पहले आता है उसे तब तक न बदलें जब तक कि आप को यकीन न हो जाए कि वह गलत है। माना जाता है कि पहले उत्तर में हमारे अवचेतन मन की प्रबल भूमिका होती है। अवचेतन मन में कई ऐसी जानकारियाँ होती हैं जिनके बारे में हमें पता नहीं होता। अवचेतन मन पर आधारित उत्तर आमतौर पर ठीक होते हैं।
  • अगर किसी प्रश्न में आपको शंका है तो आप उसे मार्क रिव्यु कर लें और अंत में उसे देखें और हल करने का प्रयास करें और अगर आपको लगता है कि आपने किसी प्रश्न का गलत उत्तर दे दिया है तो उसे फाइनल सबमिट करने से पहले आप बदल लें। फाइनल सबमिट करने के पश्चात आप उत्तर नहीं बदल सकते हैं और ध्यान रहे कि परीक्षा समय ख़त्म होते ही अपने आप फाइनल सबमिट हो जाता है अतः उससे पहले ही आप परिवर्तन कर लें।
  • निरीक्षक द्वारा दी जाने वाली अटेंडेंस शीट पर अपने हस्ताक्षर अवश्य करें।

इस प्रकार, एक सुनियोजित रणनीति के ज़रिये परीक्षार्थी परीक्षा भवन में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर अपनी सफलता सुनिश्चित कर सकते हैं, बशर्ते वे अपने मस्तिष्क में अनावश्यक भ्रम, चिंता या तनाव को स्थान न दें।

कुछ अन्य सुझाव

  • परीक्षार्थियों को यह समझना ज़रूरी है कि यदि परीक्षा में प्रश्न पत्र कठिन आया है तो यह सभी के लिये समान रूप से कठिन है। इसलिये किसी छात्र विशेष को इस मामले में अतिरिक्त तनाव लेने की बजाय परीक्षा भवन की अपनी रणनीति पर ज़्यादा ध्यान देना चाहिये।
  • कोई भी परीक्षा सरल या कठिन आपकी तैयारी, रणनीति व मनोदशा के अनुरूप ही होती है। यदि आपकी तैयारी बेहतर और परीक्षा भवन की रणनीति सही है तो यकीन मानिये कि आपकी मनोदशा कभी भी परीक्षा को लेकर तनावग्रस्त नहीं होगी। अतः डरना छोड़कर लड़ने को तैयार रहें।
  • संभव है कि परीक्षा से एक दिन पहले छात्र तनाव महसूस करें। चूँकि यह सबके साथ होता है, अतः इसे लेकर बहुत ज़्यादा परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। ध्यान रखें कि हल्का-फुल्का तनाव सकारात्मक योगदान भी देता है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार एक निश्चित स्तर का तनाव हमारे निष्पादन/प्रदर्शन को बढ़ाता है किंतु उससे ज़्यादा तनाव प्रदर्शन को कम भी कर देता है।
  • कहने का तात्पर्य यह है कि थोड़ा तनाव या डर आपको सतर्क बनाए रखता है तथा लक्ष्य को भूलने नहीं देता है। ‘परीक्षा’ इसी का नाम है। इसलिये इस संदर्भ में फिक्र करने की बजाय इसे सकारात्मक दिशा प्रदान कर जीत सुनिश्चित करनी चाहिये। याद रखें डर के आगे ही जीत है !
  • प्रतियोगी परीक्षा एक बड़ा मंच है। इसके लिये उम्मीदवार वर्षों अध्ययनरत रहते हैं। किंतु कई दफा बेहतर तैयारी के बावजूद परीक्षा भवन में जाने से पूर्व उन्हें लगता है कि जैसे वे सब कुछ भूल गए हों, उन्हें कुछ भी याद नहीं आ रहा हो तथा दिमाग सुन्न-सा हो रहा हो। ऐसी स्थिति में यदि आपका मित्र कोई प्रश्न पूछ लेता है और आप उसका सही जवाब नहीं दे पाते हैं तो आपका आत्मविश्वास न्यूनतम स्तर पर पहुँच जाता है। इस प्रकार की परिस्थिति छात्रों के लिये पीड़ादायक होती है। किंतु यहाँ सबसे मजेदार बात यह है कि इस अवधि में भूलना या याद न आना महज एक तात्कालिक स्थिति होती है।
  • तात्कालिक रूप से परीक्षार्थियों को भले यह लगे कि वे सब कुछ भूल गए हैं, किंतु वास्तव में ऐसा कुछ भी नहीं होता। परीक्षार्थियों द्वारा पढ़ी गई समस्त चीज़ें उनके अवचेतन मन में जमा रहती हैं। अत्यधिक तनाव की वजह से भले वह ‘एक्टिव मोड’ में न रहे लेकिन परीक्षा भवन में प्रश्न देखते ही आप पाएंगे कि वह जानकारी प्रश्नों से कनेक्ट होते ही कैसे सक्रिय हो जाती है। फिर उन्हें सब कुछ स्वतः याद आने लगता है। इसलिये, परीक्षार्थियों को दिमाग से यह भ्रम निकाल देना चाहिये कि वे सब कुछ भूल गए हैं। याद रखें, ज्ञान कभी व्यर्थ नहीं जाता, न ही उसका लोप होता है। बस सही रणनीति के ज़रिये उसे सक्रिय रखना होता है।
  • स्मरण रखें कि परीक्षा सिर्फ छात्रों के ज्ञान और व्यक्तित्व का ही नहीं बल्कि उनके धैर्य, साहस और जुझारूपन का भी परीक्षण करती है। परीक्षा महज एक परीक्षा नहीं होती बल्कि छात्रत्व को गौरवान्वित करने तथा उनकी योग्यता-क्षमता-प्रतिभा को सम्मानित करने का एक मंच भी है। अतः इससे क्या घबराना।
  • परीक्षा के प्रथम पड़ाव यानी प्रारंभिक परीक्षा में लेशमात्र कोताही या किंचित मात्र कमज़ोरी भी आपके सपने को चकनाचूर कर सकती है।
  • प्रतियोगी परीक्षा में जीतने की शर्त सिर्फ पढ़ाकू होना नहीं बल्कि जुझारू होना भी है। याद रखिये रणभेरी बजने पर सच्चा सैनिक कभी पीठ नहीं दिखाता बल्कि अपनी संपूर्ण शक्ति समेटकर मैदान में डटकर खड़ा हो जाता है। और आपकी तो तैयारी मुकम्मल है, रणनीति वैज्ञानिक व व्यावहारिक है, फिर डर किस बात का? अतः अंतिम समय में छात्रोचित गुण का परिचय दीजिये और प्रतियोगी परीक्षा का किला फतह कीजिये। ध्यान रहे, जीतता वही है जो अपनी संपूर्ण शक्ति और सही रणनीति के साथ लड़ता है, वरना आधे-अधूरे मन से कभी भी पूर्ण सफलता प्राप्त नहीं की जा सकती।
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