SSC जूनियर इंजीनियर पाठ्यक्रम परीक्षा पैटर्न 2017

SSC जूनियर इंजीनियर पाठ्यक्रम परीक्षा पैटर्न 2017: कर्मचारी चयन आयोग ने जूनियर इंजीनियर भर्ती का आधिकारिक सूचना जारी कर दिया है। इस सूचना के साथ SSC ने जूनियर इंजीनियर पाठ्यक्रम एवं परीक्षा पैटर्न भी दिया गया है। SSC जूनियर इंजीनियर देश के लोकप्रिय परीक्षाओं में से एक है जिसके लिए हर वर्ष भरी मात्रा में आवेदन किये जाते हैं।

SSC जूनियर इंजीनियर 2017 परीक्षा दिसंबर महीने में आयोजित की जाएगी। हालाँकि आपको इसकी तैयारी प्रारम्भ कर देनी चाहिए। इस लेख में हम SSC जूनियर इंजीनियर पाठ्यक्रम एवं परीक्षा पैटर्न से सम्बंधित सभी प्रासंगिक जानकारियां प्रस्तुत करेंगे।

SSC JE परीक्षा में दो प्रश्न पत्रों अर्थात पेपर 1 एवं पेपर 2 का एक लिखित परीक्षा सम्मिलित है। पेपर 1 कंप्यूटर आधारित परीक्षा होगी जबकि पेपर 2 पेन एवं पेपर आधारित होगा। SSC JE परीक्षा पैटर्न 2016 से साक्षात्कार की प्रक्रिया को समाप्त कर दिया गया है।

SSC JE परीक्षा पैटर्न: पेपर 1

SSC JE पेपर 1 कुल 200 अंकों का वस्तुनिष्ट प्रकार का प्रश्न पत्र होगा। परीक्षा की प्रणाली कंप्यूटर आधारित होगी। पेपर की कुल अवधि 2 घंटे की होगी।

खंड का नाम अंक
सामान्य बुद्धिमत्ता एवं तर्कशक्ति 50
सामान्य सचेतता 50
भाग – A सामान्य इंजीनियरिंग (सिविल एवं स्ट्रक्चरल) या

भाग – B सामान्य इंजीनियरिंग (इलेक्ट्रिकल) या

भाग – C सामान्य इंजीनियरिंग (मैकेनिकल)

100

पेपर 1 में प्रत्येक गलत उत्तर के लिए 0.25 के नकारात्मक अंकन का प्रावधान है। सामान्य इंजीनियरिंग में, उम्मीदवार सिविल/ इलेक्ट्रिकल/ मैकेनिकल इंजीनियरिंग में से किसी एक का चयन कर सकता है। पेपर 1 में सफल उम्मीदवार ही पेपर 2 में सम्मिलित हो सकते हैं।

SSC JE परीक्षा पैटर्न: पेपर 2

SSC JE पेपर 2, कुल 300 अंकों का परंपरागत प्रकार का प्रश्न पत्र होता है. उम्मीदवार को इस पेपर में से अपने पसंदीदा क्षेत्र का विषय चुन सकते हैं।

  • SSC JE परीक्षा के पेपर 2 में तीन विषय होंगे – सिविल/ इलेक्ट्रिकल/ मैकेनिकल इंजीनियरिंग। उम्मीदवार को इनमे से किसी एक को चुनना होगा।
  • पेपर 2 की कुल अवधि 2 घंटे की है।
  • उम्मीदवार को पेपर 2 के लिए स्वयं का स्लाइड-रुल, कैलकुलेटर, लोगरिथम टेबल एवं स्टीम टेबल लाना होगा।

जो उम्मीदवार SSC JE परीक्षा के दोनों पेपर में सफल होंगे उन्हें मेरिट लिस्ट के लिए शार्टलिस्टेड किया जाएगा। हम उम्मीद करते हैं की SSC JE परीक्षा पैटर्न से सम्बंधित उपरोक्त जानकारी आपके लिए काफी उपयोगी होगा। आइए अब हम अपना ध्यान लिखित परीक्षा के पाठ्यक्रम की ओर केन्द्रित करते हैं।

 

SSC जूनियर इंजीनियर पाठ्यक्रम 2017

किसी भी भर्ती परीक्षा के लिए, पाठ्यक्रम बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध करता है। यहाँ हम SSC जूनियर इंजीनियर के दोनों पेपर का सम्पूर्ण पाठ्यक्रम प्रस्तुत करेंगे।

SSC जूनियर इंजीनियर पाठ्यक्रम: पेपर 1

SSC जूनियर इंजीनियर पेपर 1 के पाठ्यक्रम में तर्कशक्ति, सामान्य सचेतता और सामान्य इंजीनियरिंग सम्मिलित हैं. इन तीनों का पाठ्यक्रम निम्नलिखित है।

SSC जूनियर इंजीनियर पाठ्यक्रम: सामान्य बुद्धिमत्ता एवं तर्कशक्ति

सामान्य बुद्धिमत्ता के लिए पाठ्यक्रम में दोनों वर्बल और नॉन-वर्बल प्रकार के प्रश्नों को शामिल किया जाएगा। इस परीक्षा में अनालोजिकल टेस्ट, समानता, मतभेद, स्पेस विजुअलैजेशन, समस्या का समाधान, विश्लेषण, निर्णय लेने, विजुअल मेमोरी, भेदभाव, अवलोकन, रिश्ते अवधारणाओं, अंकगणितीय तर्क, वर्बल और चित्रिय वर्गीकरण, अंकगणितीय संख्या श्रृंखला आदि के प्रश्न सम्मिलित होंगे। टेस्ट में ऐसे प्रश्न भी सम्मिलित होंगे भावात्मक विचारों और संकेतों एवं उनके रिश्तों, अंकगणितीय संगणना एवं अन्य विश्लेषणात्मक कार्यों आदि के उम्मीदवारों के हल करने की क्षमताओं का टेस्ट करेगा।

SSC जूनियर इंजीनियर पाठ्यक्रम: सामान्य सचेतता

इसके अंतर्गत उम्मीदवारों के आसपास के वातावरण के प्रति जागरूकता एवं समाज में उसका प्रयोग पर आधारित प्रश्न होंगे. समसामयिक घटनाओं, दैनिक अवलोकन एवं उनके वैज्ञानिक पहलुओं से सम्बंधित प्रश्न भी होंगे जिसके उत्तर की अपेक्षा किसी भी शिक्षित व्यक्ति से की जा सकती है। भारत एवं उसके पडोसी देश, इतिहास, संस्कृति, भूगोल, आर्थिक परिदृश्य, राजव्यवस्था एवं वैज्ञानिक अन्वेषण आदि से सम्बंधित प्रश्न भी पूछे जाएंगे। इन प्रश्नों की अपेक्षा किसी भी सामान्य शिक्षित व्यक्ति से की जा सकती है।

SSC जूनियर इंजीनियर पाठ्यक्रम: सामान्य इंजीनियरिंग

  • सिविल इंजीनियरिंग: भवन निर्माण सामग्री, आकलन, लागत और मूल्य निर्धारण, सर्वेक्षण, मृदा यांत्रिकी, हाइड्रोलिक्स, सिंचाई इंजीनियरिंग, परिवहन इंजीनियरिंग, पर्यावरण इंजीनियरिंग। स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग: संरचनाएं, कंक्रीट प्रौद्योगिकी, RCC डिजाइन, इस्पात डिजाइन के सिद्धांत।
  • इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग: मुलभूत अवधारणाओं, सर्किट कानून, चुंबकीय सर्किट, AC आधारभूत सिधांत, मापन और मापने के उपकरण, विद्युत मशीनों, फ्रैक्श्नल किलोवाट मोटर्स और सिंगल फेज मोटर्स, तुल्यकालिक मशीनों (Synchronous Machines), जनरेशन, पारेषण और वितरण, आकलन और लागत, उपयोगिता और विद्युत ऊर्जा, आधारभूत इलेक्ट्रॉनिक्स।
  • मैकेनिकल इंजीनियरिंग: मशीनों के सिधांत एवं डिजाइन, इंजीनियरिंग मैकेनिक्स और सामग्री की शक्ति, शुद्ध पदार्थों के गुण, ऊष्मागतिकी प्रथम नियम, ऊष्मागतिकी द्वितीय नियम, IC इंजन के लिए हवा का मानक चक्र, IC इंजन प्रदर्शन, IC इंजन दहन, IC इंजन कूलिंग एवं लुब्रिकेशन, उपकरण का रैनकिन चक्र, बॉयलर, वर्गीकरण, विशिष्टता, फिटिंग और एक्सेसरीज, एयर कंप्रेशर्स और उनके चक्र, प्रशीतन चक्र, प्रशीतन संयंत्र के सिधांत, नोजल और भाप टर्बाइन। द्रव का वर्गीकरण, द्रव स्टैटिक्स, द्रव दबाव के माप, द्रव कीनेमेटीक्स, आदर्श द्रव की गतिशीलता, प्रवाह की दर, मूलभूत सिद्धांत, हाइड्रोलिक टर्बाइन, केन्द्रापसारक पम्प, स्टील्स का वर्गीकरण।

SSC जूनियर इंजीनियर पाठ्यक्रम: पेपर 2

SSC जूनियर इंजीनियर पेपर 2 के प्रश्नों को हल करने के लिए इंजीनियरिंग के सम्बंधित विषयों का गहन अध्ययन आवश्यक है. इनका पाठ्यक्रम निम्नलिखित है।

SSC जूनियर इंजीनियर पाठ्यक्रम: सिविल इंजीनियरिंग

  • निर्माण सामग्री: भौतिक और रासायनिक गुण, वर्गीकरण, मानक परीक्षण, उपयोग और निर्माण / सामग्री का उत्खनन जैसे इमारती पत्थर, सिलिकेट आधारित सामग्री, सीमेंट (पोर्टलैंड), अभ्रक के उत्पाद, लकड़ी और लकड़ी आधारित उत्पादों, लेमिनेट्स, बिटुमिनस सामग्री, पेंट, वार्निश।
  • आकलन, लागत और मूल्य निर्धारण: आकलन, तकनीकी पदों की शब्दावली, दरों का विश्लेषण, तरीके और माप की इकाई का विश्लेषण, काम की वस्तुएं – मिट्टी की खुदाई का काम, ईंट का काम (मॉड्यूलर और पारंपरिक ईंटों), RCC का काम, शटरिंग, इमारती लकड़ी का काम, चित्रकारी, फर्श, और पलस्तर। चारदीवारी, ईंट निर्माण, पानी की टंकी, सेप्टिक टैंक, बार बेन्डिंग शेडयूल, केंद्र लाइन पद्धति, मिड-सेक्शन सूत्र, त्रापेज़ोडिअल सूत्र, सिम्पसन के नियम। सेप्टिक टैंक के लागत का अनुमान, फ्लेक्सिबल फुटपाथ, नलकूप, आइसोलेट्स और कंबाइंड फूटिंग्स, इस्पात का पुलिंदा, पिल्स और पिल-कैप। मूल्यांकन – मूल्य और लागत, स्क्रैप मूल्य, सालवेज मूल्य, निर्धारित मूल्य, सिंकिंग फण्ड, मूल्यह्रास और आब्सलेसन्स, मूल्यांकन के तरीके।
  • सर्वेक्षण: सर्वेक्षण के सिधांत, दूरी की माप, चेन सर्वेक्षण, प्रिज्मीय कम्पास के कार्य, कम्पास त्रावरसिंग, बेयरिंग, स्थानीय आकर्षण, प्लेन टेबल सर्वेक्षण, थियोडोलाइट त्रावरसिंग, थियोडोलाइट के समायोजन, समतलीकरण, समतलीकरण में प्रयुक्त शब्दों की परिभाषा।
  • मृदा यांत्रिकी: मिट्टी की उत्पत्ति, फेज डायग्राम, परिभाषाएँ – शून्य अनुपात(void ratio), पोरोसिटी, डिग्री ऑफ़ सैचुरेशन, वाटर कंटेंट, स्पेसिफिक ग्रेविटी ऑफ़ सॉइल ग्रेन्स, इकाई वजन, घनत्व सूचकांक और विभिन्न मापदंडों के आपसी संबंध, ग्रेन साइज़ डिस्ट्रीब्यूशन एवं उनके प्रयोग। मिट्टी, एत्तरबर्ग की सीमा, मिट्टी का ISI वर्गीकरण और प्लास्टिसिटी चार्ट। मिट्टी की पारगम्यता (permeability), पारगम्यता के गुणांक, पारगम्यता के गुणांक का निर्धारण।
  • हाइड्रोलिक्स: द्रव के गुण, हाइड्रोस्टैटिक्स, प्रवाह की माप, बर्नौली सिधांत और उसके प्रयोग, पाइप के माध्यम से प्रवाह, खुले चैनल में प्रवाह, वेइर्स (weirs), फ्लुमस (flumes), स्पीलवेज़ (spillways), पंप और टर्बाइन।
  • सिंचाई इंजीनियरिंग: परिभाषा, आवश्यकता, लाभ, सिंचाई, सिचाई के 2II प्रभाव, सिंचाई के तरीके और प्रकार, जल विज्ञान – वर्षा की माप, गुणांक निकालना, रेन गेज, वर्षण से घाटा – वाष्पीकरण, अंतःस्पंदन (infiltration), फसलों के लिए जल की आवश्यकता, कर्तव्य, डेल्टा और आधार अवधि, खरीफ और रबी फसल, कमान क्षेत्र, टाइम फैक्टर।
  • ट्रांसपोर्टेशन इंजीनियरिंग: राजमार्ग इंजीनियरिंग – क्रॉस अनुभागीय तत्व, ज्यामितीय डिजाइन, फुटपाथ के प्रकार, फुटपाथ सामग्री – ऐग्रगैट्स और बिटुमिन, विभिन्न परीक्षण, फ्लेक्सबल और रिजिड फुटपाथ के डिजाइन – वाटर बाउंड मकैडम (WBM) और वेट मिक्स मकैडम (WMM), ग्रैवल सड़क , बिटुमिनस निर्माण, रिजिड फुटपाथ जोड़, फुटपाथ रखरखाव, राजमार्ग जल निकासी, रेलवे इंजीनियरिंग – परमानेंट वे-स्लीपर्स के अवयव, बैलस्ट, फिक्स्चर और फैसनिंग, ट्रैक ज्यामिति, पॉइंट्स और क्रॉसिंग, ट्रैक जंक्शन।
  • पर्यावरण इंजीनियरिंग: पानी की गुणवत्ता, पानी की आपूर्ति का स्रोत, जल की शुद्धि, पानी के वितरण, स्वच्छता की आवश्यकता, सीवरेज सिस्टम, सर्कुलर सीवर, ओवल सीवर, सीवर अनुलग्न (appurtenances), सीवेज उपचार। भूतल पानी की निकासी। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन – प्रकार, प्रभाव, अभियांत्रिक प्रबंधन प्रणाली। वायु प्रदूषण – प्रदूषक, कारक, प्रभाव, नियंत्रण। शोर प्रदूषण – कारण, स्वास्थ्य पर प्रभाव, नियंत्रण।

SSC जूनियर इंजीनियर पाठ्यक्रम: स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग

  • संरचना के सिधांत: प्रत्यास्था स्थिरांक, बीम के प्रकार – नियत और अनिश्चित, बेन्डिंग मोमेंट और शीर फ़ोर्स डायग्राम ऑफ़ सिम्पली सपोर्टेड, केंटिलीवर और ओवर हैंगिंग बीम। आयताकार और सर्कुलर खण्डों के लिए मोमेंट ऑफ़ एरिया और मोमेंट ऑफ़ इनर्शिया, बेन्डिंग मोमेंट और शीर स्ट्रेस शीर फॉर टी, चैनल और कंपाउंड खंड, चिमनी, बांध और रिटेनिंग वाल।
  • कंक्रीट प्रौद्योगिकी: गुण, फायदे और कंक्रीट का उपयोग, सीमेंट ऐग्रगैट्स, पानी की गुणवत्ता का महत्व, पानी सीमेंट अनुपात, कार्य करने की क्षमता, मिश्रित डिजाइन, भंडारण, बैचिंग, मिश्रण, नियोजन(placement), संघनन(compaction), फिनिशिंग एंड क्युरिंग ऑफ़ कंक्रीट, कंक्रीट की गुणवत्ता का नियंत्रण, गर्म मौसम और ठंडे मौसम में कंक्रीटिंग, कंक्रीट संरचनाओं का रखरखाव और मरम्मत।
  • RCC डिजाइन: RCC बीम- आनमनी सामर्थ्य (flexural strength), शीर सामर्थ्य, बांड सामर्थ्य, सिंगल रीइन्फोर्सड एवं डबल रीइन्फोर्सड बीम का डिजाइन, कैन्टलेवर बीम। टी-बीम, लिन्टल । वन वे एवं टू वे 12 स्लैब, आइसोलेटेड फूटिंग्स। रीइन्फोर्सड ब्रिक वर्क, कॉलम, सीढ़ियां, रिटेनिंग वाल, पानी के टैंक (RCC डिजाइन के प्रश्न लिमिट स्टेट और वर्किंग स्ट्रेस माध्यम दोनों पर आधारित हो सकता है)।
  • इस्पात डिजाइन: इस्पात डिजाइन और इस्पात कॉलम के निर्माण, बीम रूफ ट्रस प्लेट गर्डर।

SSC जूनियर इंजीनियर पाठ्यक्रम: इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग

  • मूलभूत अवधारणा: प्रतिरोध की अवधारणा, इन्डक्टन्स, कपैसिटन्स और उन्हें प्रभावित करने वाले विभिन्न कारक। धारा (current), वोल्टेज, शक्ति, ऊर्जा और उनकी इकाइयों की अवधारणा।
  • सर्किट नियम: किर्चोफ्फ़ के नियम, नेटवर्क सिधांत का उपयोग कर सरल सर्किट समाधान।
  • चुंबकीय सर्किट: फ्लक्स की संकल्पना, MMF, रिलक्टन्स, चुंबकीय सामग्री के विभिन्न प्रकार, विभिन्न विन्यास के कंडक्टर्स के लिए चुंबकीय गणना जैसे की स्ट्रैट, सर्कुलर, सोलनॉइड, आदि। विद्युत चुम्बकीय प्रेरण, स्वयं और म्यूच्यूअल प्रेरण।
  • AC मुलभूत तथ्य: इन्स्टन्टैनीअस, पीक, R.M.S. और प्रत्यावर्ती धारा के औसत मान, सिनुसोइडल (sinusoidal) तरंग का  रेप्रीज़ेन्टेशन, सरल श्रेणी और R.L. और C से बना हुआ समानांतर AC सर्किट, प्रतिध्वनि, टैंक सर्किट। पॉली फेज प्रणाली – स्टार और डेल्टा कनेक्शन, 3 फेज शक्ति, डीसी और आर-भूमि आर-सी सर्किट के सिनुसोइडल प्रतिक्रिया।
  • माप और माप उपकरण: शक्ति के माप (1 फेज और 3 फेज, दोनों सक्रिय और पुनः सक्रिय) एवं उर्जा, 2 वाटमीटर विधि द्वारा 3 फेज शक्ति मापन। आवृत्ति और फेज कोण की माप। आमीटर और वोल्टमीटर (मूविंग आयल एंड मूविंग आयरन दोनों प्रकार), रेंज वाटमीटर का एक्सटेंशन, मल्टीमीटर्स, मेगर, ऊर्जा मीटर एसी ब्रिजेज। CRO का प्रयोग, सिग्नल जेनरेटर, CT, PT और उनके उपयोग। अर्थ फाल्ट डिटेक्शन।
  • विद्युत मशीनें: D.C.मशीन – निर्माण, D.C. मोटर्स और जनरेटर के आधारभूत सिधांत, उनकी विशेषताएं, गति नियंत्रण और D.C. मोटर्स के शुरू करना। ब्रेकिंग मोटर के सिधांत, D.C. मशीनों की दक्षता एवं नुकशान; 1फेज और 3 फेज ट्रांसफॉर्मर – निर्माण, संचालन के सिद्धांत, समकक्ष सर्किट, वोल्टेज विनियमन, O.C. और S.C. टेस्ट, नुकसान और दक्षता। वोल्टेज, आवृत्ति और वेव फॉर्म का नुकसान पर प्रभाव। 1 फेज/ 3 फेज ट्रांसफार्मर का समानांतर कार्यप्रणाली। ऑटो ट्रांसफार्मर; 3 फेज इंडक्शन मोटर, रोटेटिंग चुंबकीय क्षेत्र, आपरेशन के सिद्धांत, समकक्ष सर्किट, टॉर्क-गति की विशेषताएं, 3 फेज इंडक्शन मोटर्स की शुरूआत और गति नियंत्रण। ब्रेकिंग के पद्धति, टॉर्क-गति विशेषताओं पर वोल्टेज और आवृत्ति वेरिएशन का प्रभाव।
  • तुल्यकालिक मशीनें (Synchronous Machines): जेनरेशन ऑफ़ 3 फेज ई.एम.एफ़ आर्मेचर रिएक्शन, वोल्टेज विनियमन, टू अल्टरनेटर का समानांतर ऑपरेशन, सिंगक्रनाइजिंग, सक्रिय और प्रतिक्रियाशील शक्ति का नियंत्रण। तुल्यकालिक मोटर्स को शुरू करना और अनुप्रयोग।
  • उत्पादन, पारेषण और वितरण: शक्ति स्टेशन के विभिन्न प्रकार, लोड फैक्टर विविधता कारक, मांग कारक, उत्पादन की लागत, बिजली स्टेशनों के अंतर-संबंध। शक्ति के कारकों में सुधार, शुल्कों के विभिन्न प्रकार, दोष के प्रकार, सममित दोष के लिए शॉर्ट सर्किट करंट। स्विचगियर्स – सर्किट ब्रेकर्स की रेटिंग, तेल एवं हवा द्वारा आर्कइक्स्टिंगशन , H.R.C. फ़्यूज़, अर्थ लीकेज/ ओवर करंट के विरुद्ध संरक्षण, आदि।
  • आकलन और लागत: प्रकाश योजना का आकलन, मशीनों और प्रासंगिक IE नियमों के इलेक्ट्रिक इंस्टालेशन। अर्थिंग प्रैक्टिसेज और IE नियम।
  • विद्युत ऊर्जा के उपयोग: इलूमनेशन, विद्युत ताप, इलेक्ट्रिक वेल्डिंग, इलेक्ट्रोप्लेटिंग, इलेक्ट्रिक ड्राइव और मोटर्स।
  • बेसिक इलेक्ट्रॉनिक्स: विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के कार्य जैसे P N जंक्शन डायोड, ट्रांजिस्टर (NPN और PNP प्रकार), BJT और JFET। इन उपकरणों का उपयोग कर सरल सर्किट।

SSC जूनियर इंजीनियर पाठ्यक्रम: मेकेनिकल इंजीनियरिंग

  • मशीनें और मशीन डिजाइन के सिद्धांत: सरल मशीन की संकल्पना, फोर बार लिंकेज और लिंक मोशन, फ्लाइवील और ऊर्जा की अस्थिरता, बेल्ट द्वारा विद्युत पारेषण – वि-बेल्ट और फ्लैट बेल्ट, क्लचिज़ – प्लेट और कोनिकल क्लच, गियर – गियर के प्रकार, गियर प्रोफ़ाइल और गियर अनुपात की गणना, गवर्नर्स – सिद्धांत और वर्गीकरण, रिविटेड जॉइंट, केम्स, बियरिंग्स, कॉलर और पिवट में घर्षण।
  • इंजीनियरिंग मैकेनिक्स और सामग्री की ताकत: बलों का संतुलन, गति के नियम, घर्षण, स्ट्रेस एवं स्ट्रेन की संकल्पना, एलास्टिक लिमिट और एलास्टिक कांस्टेंट, बेन्डिंग मोमेंट्स और शीर फ़ोर्स डायग्राम, स्ट्रेस इन कंपोजिट बार, सर्कुलर शाफ्ट के टॉर्शन, बकिंग ऑफ़ कॉलम – यूलर और रैनकिन के सिद्धांत, थिन वाल प्रेशर वेसल्स।
  • थर्मल इंजीनियरिंग: शुद्ध पदार्थ के गुण, H2O की तरह शुद्ध पदार्थ के P-V एंड P-T डायग्राम, स्टीम जनरेशन प्रक्रिया के सन्दर्भ में स्टीम टेबल का परिचय; संतृप्ति की परिभाषा, नम और अतितापित स्थिति। भाप का सूखापन अंश की परिभाषा, भाप की अत्यधिक गर्मी की डिग्री। भाप का H-S चार्ट (मोल्लिएर चार्ट)।
  • द्रव का वर्गीकरण और गुण: आदर्श और वास्तविक द्रव पदार्थ, न्यूटन के श्यानता (viscosity) के नियम, न्यूटोनियन और गैर-न्यूटोनियन द्रव पदार्थ, संपीड्य और असंपीड्य द्रव पदार्थ।
  • द्रव स्टैटिक्स: एक बिंदु पर दबाव। द्रव का मापन।
  • दवाब: मोनोमीटर्स, U-ट्यूब, इन्क्लाइन्ड ट्यूब।
  • द्रव किनमैटिक्स: स्ट्रीम लाइन, लामिनार और टर्बूलेन्ट प्रवाह, बाहरी और आंतरिक प्रवाह, निरंतरता समीकरण।
  • आदर्श द्रव की गतिशीलता: बर्नौली का समीकरण, कुल हेड; वेग हेड; दबाव हेड; बर्नौली के समीकरण के अनुप्रयोग।
  • अपकेंद्री (Centrifugal)पंप: वर्गीकरण, सिद्धांत, प्रदर्शन।
  • स्टील्स के प्रोडक्शन इंजीनियरिंग वर्गीकरण: नरम स्टील और मिश्र धातु स्टील, इस्पात का हीटट्रीटमेंट, वेल्डिंग – आर्क वेल्डिंग, गैस वेल्डिंग, प्रतिरोध वेल्डिंग, विशेष वेल्डिंग तकनीक अर्थात TIG, MIG आदि (ब्राज़िंग और सोल्डरिंग), वेल्डिंग दोष एवं परीक्षण; NDT, फाउंड्री एंड कास्टिंग – तरीकों, दोष, अलग कास्टिंग प्रक्रिया।

हम आशा करते हैं की यह लेख SSC जूनियर इंजीनियर सभी विषयों के पाठ्यक्रम एवं SSC JE से सम्बंधित सभी जानकारी प्रदान करेगा।

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