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माइक्रो टीचिंग और इसकी अवधारणाएं: पूरी जानकारी पढ़ें !

माइक्रो टीचिंग और इसकी अवधारणाएं : शिक्षक जब विद्यार्थियों को निर्देशित करते हैं तो वे विभिन्न तरीकों का प्रयोग करते हैं। कभी-कभी शिक्षक, विद्यार्थियों को भाषण देते हैं और कभी-कभी वे अपने विद्यार्थियों को किसी लक्ष्य को पाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।

इस लेख में हम सूक्ष्म शिक्षण के उद्देश्यों और इसके सिद्धांतों पर चर्चा करेंगे। अधिक जानने के लिए नीचे और पढ़ें।

माइक्रो टीचिंग और इसकी अवधारणाएं : पूरी जानकारी पढ़ें

सूक्ष्म शिक्षण को नियंत्रित अभ्यास की व्यवस्था के रूप में परिभाषित किया जाता है जिससे किसी निश्चित शिक्षण व्यवहार पर ध्यान केंद्रित करने के साथ-साथ नियंत्रित परिस्थितियों में शिक्षण का अभ्यास करना संभव हो पाता है।

परिभाषा

टीचर शिक्षा के क्षेत्र में सूक्ष्म शिक्षण एक नया आविष्कार है। यह एक अवसर प्रदान करता है जिससे एक समय पर एक ही कौशल को चुना जा सकता है और एक नियोजित तरीके से इसका अभ्यास करना है। सूक्ष्म शिक्षण एक सुनियोजित शिक्षण है:

  1. कक्षा के आकार को 5-10 लोगों में सीमित करना।
  2. समय सीमा को 36 मिनट तक कम करना।
  3. पाठ के आकार को कम करना।
  4. शिक्षण कौशल को कम करना।

सूक्ष्म शिक्षण टीचर शिक्षा और प्रशिक्षण कार्यक्रम में एक नवीनतम् आविष्कार है जो कि टीचर के व्यवहार को निश्चित उद्देश्यों के अनुसार ढालने में सहायक होता है।

उद्देश्य

सूक्ष्म शिक्षण सामान्य ज्ञान के परिणामों और फ़ीडबैक के मानकों को विस्तारित करता है। एक संक्षिप्त सूक्ष्म पाठ को पढ़ाने के तुरंत बाद प्रशिक्षु अपने प्रदर्शन की आलोचना में जुट जाता है।

समय सीमा

शिक्षण कौशल के अभ्यास के लिए उपयुक्त परिस्थितियां और पर्याप्त सुविधाएं बनाने के लिए कई बातें ध्यान में रखी जाती हैं।

सूक्ष्म शिक्षण के भारतीय नमूने के अनुसार जो कि NCERT द्वारा विकसित किया गया है वो इस प्रकार है:

माइक्रो टीचिंग (सूक्ष्म शिक्षण) का चक्र

सूक्ष्म शिक्षण चक्र में शामिल छह चरण हैं – योजना, पाठन, फ़ीडबैक, पुनर्योजना, पुनर्शिक्षण और पुनर्फ़ीडबैक। अभ्यास सत्र के उद्देश्य की ज़रूरतों के अनुसार भिन्नताएं हो सकती हैं। ये चरण निम्नलिखित चित्र के अनुसार प्रदर्शित किया जाएगा:

यहां विद्यार्थी-शिक्षक एकसाथ विभिन्न कौशलों को एकीकृत करते हैं। एक कृत्रिम परिस्थिति में वह एक वास्तविक कक्षा में पढ़ाता है और सभी कौशलों को एकीकृत करने का प्रयास करता है। यह चक्र एक सीमा तक काम करता है यदि प्रशिक्षु एक निश्चित कौशल में उस्तादी हासिल करता है तो।

सूक्ष्म शिक्षण के लाभ

यह एक आविष्कार है जिसमें सीखने और तकनीक के प्रयोग के सिद्धांतों का मूल आधार है। सूक्ष्म शिक्षण के लाभ इस प्रकार हैं:

शिक्षा के क्षेत्र में सूक्ष्म शिक्षण एक नया विचार है। वे लोग जो पारम्परिक दृष्टिकोण रखते हैं और अपनी विचारधारा नहीं बदलना चाहते वे सूक्ष्म शिक्षण की नयी तकनीकों को धारण करने में कठिनाई का सामना करते हैं। ऐसी परिस्थितियां हमेशा बनेंगी जब-जब नयी चीज़ें आएंगी। पुराने राष्ट्रों को नए राष्ट्रों में बदलने की ज़रूरत है क्योंकि नए राष्ट्र निश्चित ही अलग हैं।

यहां हम सूक्ष्म शिक्षण और इसके सिद्धांतों पर इस लेख को विराम देते हैं। उम्मीद करते हैं कि आपने कुछ नया सीखा होगा। टीचिंग भर्ती से संबंधित अधिक जानकारी के लिए हमारे साथ बने रहिए।

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