संसद में पेश हुआ आम बजट 2018 -19 : जानिए संपूर्ण जानकारी

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संसद में पेश हुआ आम बजट 2018 – 19 : संसद में वित्तमंत्री अरुण जेटली द्वाराआम बजट 2018 पेश कर दिया गया है। इस बजट के बनने और पेश होने तक का सफ़र बहुत ही बारीकियों से होकर गुज़रता है। देश की अर्थव्यवस्था को सकारात्मक रूप देने और विकास की गति को तेज़ी देने के उद्देश्य से इस बजट का सीधा नाता होता है।

इस लेख के माध्यम से हम आपको बजट संबंधी जानकारी विस्तार से बताएंगे, जिससे अंतर्गत आप बजट संबंधी बारीकियों और उससे जुड़ी हर गतिविधियों से अवगत हो सकेंगे। हमारी आपको यही सलाह है कि इस लेख को ध्यानपूर्वक पढ़ें और अपनी जिज्ञासाओं को दूर करें।

आम बजट क्या होता है ?

आज पेश हुए बजट के बारे में जानने से पहले आइये पहले ये जान लें कि आखिर ये बजट होता क्या है, और इसकी ज़रूरत क्यों होती है। असल में हमारे संविधान में ‘बजट’ शब्द का ज़िक्र नहीं है जिसे हम आम बोलचाल की भाषा में आम बजट कहते हैं, दरअसल इसे संविधान के अनुच्छेद 112 में वार्षिक वित्तीय विवरण (Annual Financial Statements) कहा गया है। इस फाइनेंशियल स्टेटमेंट के अंतर्गत अनुमानित प्राप्तियों और खर्चों का उस साल के लिए विस्तृत ब्यौरा शामिल होता है।

आपको बता दें कि इस आम बजट में मंत्रालयों को उनके खर्चों के लिए राशि का आवंटन होता है। कुल मिलाकर अगर कहें तो इसमें आने वाले साल के लिए कर प्रस्तावों का ब्यौरा पेश किया जाता है। आइये अब आगे बढ़ते हैं और आपको बताते हैं कि आम बजट में क्या-क्या दस्तावेज़ शामिल होते हैं।

 

आम बजट में शामिल दस्तावेज़ क्या होते हैं ?

बजट में कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज़ शामिल होते हैं, जो इस प्रकार हैं :

  1. वार्षिक वित्तीय विवरण
  2. डिमांड ऑन ग्रांट
  3. विनियोग बिधेयक
  4. फाइनेंस बिल
  5. वित्त विधेयक में प्रावधान की व्याख्या का ज्ञापन
  6. मौजूदा वित्त वर्ष के लिए प्रासंगिक एवंव्यापक आर्थिक ढांचा
  7. वित्त वर्ष के लिए राजकोषीय रणनीति का ब्यौरा
  8. मध्यम अवधि की राजकोषीय नीति का वक्तव्य
  9. एक्सपेंडीचर बजट वॉल्यूम-1
  10. एक्सपेंडीचर बजट वॉल्यूम-2
  11. रिसीप्ट्स बजट 

आम बजट से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण तथ्य

  • वित्त मंत्रालय आम बजट के लिए काफी पहले से तैयारी करना शुरू कर देता है। मंत्रालय सबसे पहले विभिन्न विभागों से उनकी कमाई और खर्चे पर एक ब्यौरा जुटाना शुरू करता है।
  • बजट से पहले इंड्रस्टी, अर्थशास्त्रियों, ट्रेड यूनियनों, कृषि से जुडे लोगों और राज्यों के वित्त मंत्रियों के साथ पिछले साल नवंबर से बातचीत शुरू की। यह बातचीत दिसंबर और इस साल जनवरी में भी जारी रही। इस बजट पर प्रधानमंत्री कार्यालय की नज़र रहती है।
  • बजट दस्तावेज़ों की छपाई गुप्त तरीके से नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में बने सरकारी प्रिटिंग प्रेस में होती है। यहां सीसीटीवी कैमरों और इंटेलीजेंस ब्यूरो की निगरानी में छपाई का काम होता है। इसके चलते ही दिसंबर में वित्त मंत्रालय ने दिसंबर में मीडिया की नार्थ ब्लॉक में एंट्री बंद कर दी थी।
  • बजट तैयार करने वाले अधिकारियों को एक सप्ताह पहले से किसी से भी संपर्क नहीं करने दिया जाता। ये इसलिए किया जाता है ताकि बजट की कोई जानकारी लीक ना हो।
  • बजट से दो दिन पहले प्रेस इंफोरमेशन ब्यूरो के अधिकारी बजट की स्पीच तैयार करते हैं। इस टीम में सरकार की पब्लिक रिलेशन विंग और प्रेस इंफोरमेशन ब्यूरों के 20 अधिकारी शामिल होते है। ये अधिकारी इंग्लिश, हिंदी और उर्दू में प्रेस रिलीज तैयार करते हैं। जब तक वित्त मंत्री बजट स्पीच नहीं पढ़ लेते तब तक इन अधिकारियों को जाने की अनुमति नहीं दी जाती। इतना ही नहीं कैबिनेट को भी संसद में बजट पेश करने से 10 मिनट पहले बजट की कॉपी दी जाती है।

आम बजट 2018 – 19 : महत्वपूर्ण जानकारी

आम बजट से जुड़ी बुनियादी तथ्यों को जानने के बाद आइये अब रुख़ करते हैं इस वर्ष वित्तमंत्री अरुण जेटली द्वारा संसद में पेश किए गए बजट की महत्वपूर्ण जानकारी। बजट का प्रभाव हर क्षेत्र पर पड़ा है, जिसे हम आपकी सुविधानुसार विस्तार से बता रहे हैं।

कृषि क्षेत्र

  • वित्‍त मंत्री ने 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने की सरकार की वचनबद्धता का उल्‍लेख करते हुए अनेक नई योजनाओं और उपायों की घोषणा की। उन्‍होंने कहा कि सरकार ने आगामी खरीफ से सभी अघोषित फसलों का न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य उत्‍पादन लागत के कम से कम डेढ़ गुणा करने का फैसला किया है। उन्‍होंने कहा कि रबी की अधिकांश घोषित फसलों का न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य लागत से डेढ़ गुणा तय किया जा चुका है। उन्‍होंने कहा कि सरकार ने कृषि क्षेत्र के लिए संस्‍थागत ऋण की राशि में वर्ष दर वर्ष निरंतर वृद्धि की है और यह राशि वर्ष 2014-15 के 8.5 लाख करोड़ रुपए से बढ़ाकर वर्ष 2017-18 में 10 लाख करोड़ रुपए कर दी गई। वित्‍त मंत्री ने वर्ष 2018-19 में इस राशि को 11 लाख करोड़ रुपए करने का प्रस्‍ताव दिया।
  • श्री जेटली ने डेयरी उद्योग की आधारभूत सुविधाओं में वित्‍त निवेश में सहायता के लिए सूक्ष्‍म सिंचाई कोष स्‍थापित करने की घोषणा की। वित्‍त मंत्री ने मत्‍स्‍य क्रांति अवसंरचना विकास कोष तथा पशुपालन के लिए आधारभूत सुविधा विकास कोष स्‍थापित करने की घो‍षणा की। इन दोनों कोषों की कुल स्‍थाई निधि 10 हजार करोड़़ रुपए होगी।
  • श्री जेटली ने कहा कि ऑपरेशन फ्लड की तर्ज पर ऑपरेशन ग्रीन्‍स प्रारंभ करने का सरकार का प्रस्‍ताव है। इसके प्रयोजनार्थ 500 करोड़ रुपए की राशि आबंटित की गई। उन्‍होंने कहा कि 86 प्रतिशत से ज्‍यादा लघु और सीमांत किसानों को सीधे बाजार से जोड़ने के लिए मौजूदा 22 हजार ग्रामीण हाटों को ग्रामीण कृषि बाजारों के रूप में विकसित तथा उन्‍नत किया जाएगा। श्री जेटली ने कहा कि 22 हजार ग्रामीण कृषि बाजारों तथा 585 एपीएमसी में कृषि विपणन अवसंरचना के विकास के लिए दो हजार करोड़ रुपए की स्‍थाई निधि से एक कृषि बाजार अवसंरचना कोष की स्‍थापना की जाएगी।
  • वित्‍त मंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष ई-नैम को सुदृढ करने और इसे 585 एपीएमसी तक पहुंचाने के संबंध में घोषणा की गई थी। इनमें से 470 को ई-नैम नेटवर्क से जोर दिया गया है शेष को 2018 तक जोड़ दिया जाएगा। वित्‍त मंत्री ने संगठित कृषि एवं संबद्ध उद्योग को सहायता के प्रयोजनार्थ 200 करोड़ रुपए की राशि आबंटित करने का प्रस्‍ताव दिया।
  • वित्‍त मंत्री ने कहा कि बांस हरित सोना है। उन्‍होंने इस क्षेत्र को संपूर्ण रूप से बढ़ावा देने के लिए 1290 करोड़  रुपए के परिव्‍यय के साथ एक पुनर्गठित राष्‍ट्रीय बांस मिशन को शुरू करने का प्रस्‍ताव दिया।
  • वित्‍त मंत्री ने कृषि उत्‍पादों के निर्यात की संभावना को देखते हुए 42 मेगाफूड पार्कों में अत्‍याधुनिक परीक्षण सुविधाएं स्‍थापित करने का प्रस्‍ताव दिया। उन्‍होंने हरियाणा, पंजाब, उत्‍तर प्रदेश और राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्‍ली में प्रदूषण की समस्‍या से निपटने के लिए सरकारों के प्रयासों को सहायता देने की एक विशेष योजना की भी घोषणा की।
  • कृषि में फसल काटने के पश्‍चात मूल्‍य संवर्धन में व्‍यवसायिकता को बढ़ावा देने के उद्देश्‍य से केंद्रीय वित्‍त एवं कॉरपोरेट मामलों के मंत्री श्री अरुण जेटली ने वित्‍त वर्ष 2018-19 में पांच वर्ष की अवधि के लिए सौ करोड़ रुपए तक के वार्षिक उत्‍पादन वाली कृषक उत्‍पादक कंपनियों के रूप में पंजीकृत कंपनियों के अपने कार्यकलापों से होने वाले लाभ के संबंध में सौ प्रतिशत तक कटौती का प्रस्‍ताव दिया है। श्री अरुण जेटली ने आज संसद में 2018-19 का सामान्‍य बजट प्रस्‍तुत करते हुए यह घोषणा की।
  • वित्‍त मंत्री ने बताया कि इस समय उन सहकारी समितियों के लाभ के संबंध में सौ प्रतिशत की कटौती अनुमेय है जो प्राथमिक कृषि कार्यों में लगे अपने सदस्‍यों को सहायता प्रदान करती हैं। पिछले कुछ वर्षों में सहकारी समितियों की ही तर्ज पर बहुत सी कृषक उत्‍पादक कंपनियां स्‍थापित हुई हैं जो अपने सदस्‍यों को भी इसी प्रकार की सहायता प्रदान करती हैं। अत: श्री जेटली ने कहा कि ऐसे कर प्रोत्‍साहन से पूर्व में घोषित ‘ऑपरेशन ग्रीन’ अभियान को प्रोत्‍साहन मिलेगा तथा संपदा योजना को बढ़ावा मिलेगा।

ग्रामीण क्षेत्र

  • ग्रामीण विकास विभाग ग्रामीण निर्धनों के जीवन स्तर में सुधार के लिए सतत प्रयासरत रहा है। 2012-13 के 50,162 करोड़ रूपये के बजटीय प्रावधान से 2017-18 में ग्रामीण विकास विभाग का आबंटन 109042.45 करोड़ रूपये पर पहुंच गया। इसके अलावा 2017-18 के दौरान ग्रामीण विकास विभाग के कार्यक्रमों के लिए पीएमजीएसवाई तथा पीएमएवाई में उच्चतर वित्त आयोग अनुदान तथा राज्य के अधिक भागीदारी भी उपलब्ध थी। कुल मिलाकर यह सब 2012-13 में उपलब्ध कुल निधि से लगभग 3 गुणा है। बढ़े हुए वित्तीय प्रावधान के अतिरिक्त, ग्रामीण विकास ने सामाजिक-आर्थिक जातीय जनगणना-2011 (एसईसीसी-2011), आईटी/डीबीटी भुगतान प्रणाली, लेन-देन आधारित कार्यक्रम एमआईएस तथा सम्पदाओं के जियो-टेगिंग के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का उपयोग करके पारदर्शिता बढ़ाने के लिए दूरगामी प्रशासनिक व्यवस्था शुरू की है।
  • प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना का लक्ष्य मैदानी क्षेत्र में 500 की जनसंख्या तथा पहाड़ी क्षेत्र में रह रही 250 जनसंख्या वाले 1,78,184 निवासियों के लिए सभी मौसमों के दौरान सड़क सम्पर्क मुहैया कराना है। मार्च, 2014 तक 97,838 निवासियों (55 प्रतिशत) को इससे जोड़ा गया। आज प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अंतर्गत 1,30,947 निवासियों तथा राज्य सरकारों के कार्यक्रमों के माध्यम से अन्य 14,620 निवासियों को इससे जोड़ा गया जिससे कुल 82 प्रतिशत निवासी इससे जुड़ चुके हैं। 2016-17 में 130 किलोमीटर प्रतिदिन की गति से कुल 47,447 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया गया था। 2017-18 में 140 किलोमीटर प्रतिदिन की गति से इसे 51,000 किलोमीटर तक ले जाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इससे मार्च, 2019 तक सभी पात्र निवासियों को सभी मौसमीय सड़क सम्पर्क पूर्ण उपलब्धि प्राप्त करने में समर्थ हो जाएंगे।
  • हम कृषि बाजार (मंडी) के लिए अच्छी-चौड़ी सड़कों को ध्यान में रखते हुए मौजूदा चुनिंदा ग्रामीण सड़कों के उन्नयन के लिए उनके आर्थिक महत्व और ग्रामीण बाजार केंद्रों तथा ग्रामीण हबों में वृद्धि की सुविधा प्रदानगी में उनकी भूमिका के आधार पर प्रावधान करके ग्रामीण सड़क तंत्र समेकित करना चाहते हैं। इससे चरण-।।। और सुदृढ़ होगा जिसका पहले ही कार्यान्वयन जारी है। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना-।।। के रूप में 1,10,000 किलोमीटर का उन्नयन प्रस्तावित है। ऐसा करने के लिए 2022 तक केंद्रीय सरकार से 19,000 करोड़ रूपये के वार्षिक वित्तपोषण की व्यवस्था जारी रखी जाएगी। प्रधानमंत्री के ‘नया भारत-2022’ के स्वप्न को पूरा करने के लिए बाजारों को सड़कों से जोड़ने और उन्हें निकट लाने की जरूरत है ताकि किसान बाजारों का लाभ उठा सकें।
  • सड़कों के रखरखाव और सभी सड़कों की जीआईएस मैंपिंग के महत्व को समझते हुए निश्चित तौर पर एक दमदार रखरखाव नीति तैयार करने और उन्हें निकट लाने की जरूरत है ताकि किसान बाजारों का लाभ उठा सकें।
  • सड़कों के रखरखाव और सभी सड़कों की जीआईएस मैपिंग के महत्व को समझते हुए निश्चित तौर पर एक दमदार रखरखाव नीति तैयार करने और सभी सड़कों की जीआईएस मैपिंग को पूरा करने के साथ वित्त पोषण की व्यवस्था भी जरूरी है। इससे उच्च मानकों के साथ पीएमजीएसवाई सड़कों का रखरखाव सुनिश्चित होगा। 15 फीसदी पीएमजीएसवाई सड़कों को अब प्लास्टिक, जिओ-टेक्सटाइल,फ्लाई एस, लोहा  और तांबे के कचरे के इस्तेमाल जैसी नवोन्मेषी हरित प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से तैयार किया जा रहा है। इससे न केवल निर्माण लागत में कमी आएगी बल्कि स्थानीय कचरे के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा।
  • दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन में विविधता लाने के लिए 4.5 करोड़ से अधिक महिलाओं को एसएचजी के तहत लाया गया। क्षमता विकास एवं कौशल प्रशिक्षण के जरिए आर्थिक गतिविधियों के लिए बैंक लिंकेज में भी पिछले कुछ वर्षों के दौरान उल्लेखनीय विस्तार किया गया है। वर्ष 2014-15 में 23,953 करोड़ रूपये के बैंक लिंकेज से वर्तमान ऋण बकाये का आकार बढ़कर करीब 60 हजार करोड़ रूपये हो गया है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान उत्तरी, पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों में महिला एसएचजी के तहत आजीविका में भी दक्षिणी राज्यों के एसएचसी की तरह विविधता आई है। इससे गरीब परिवारों को अपनी आय और उत्पादकता बढ़ाकर गरीबी से बाहर आने में मदद मिलेगी। एक हजार ऑर्गेनिक क्लस्टर के विकास की ओर रूख करते हुए सतत कृषि के लिए 32 लाख से अधिक महिला किसानों के साथ काम किया जा रहा है।
  • मनरेगा ने समय की जरूरत के मुताबिक सामाजिक बीमा की भूमिका प्रदान की है। पिछले तीन साल के दौरान दिहाड़ी रोजगार के लिए संसाधनों का प्रभावी तौर पर इस्तेमाल किया गया ताकि गरीब परिवारों के लिए आजीविका सुरक्षा में सुधार हो सके।
  • इस दौरान 10 लाख से अधिक तालाब और 6.7 लाख कम्पोस्ट पिट तैयार किए गए। इसके अलावा विभिन्न राज्यों में 1.6 लाख लिक्विड रिसोर्स मैनेजमेंट सोक पिट और सॉलिड रिसोर्स मैनेजमेंट तैयार किए गए। मनरेगा संसाधनों का इस्तेमाल गरीब परिवारों को 90 से 95 दिनों के लिए काम उपलब्ध कराने और स्वच्छ भारत मिशन अथवा मनरेगा के तहत गरीब परिवारों को शौचालय सहित नया मकान उपलब्ध कराने में किया गया। पिछले तीन साल के दौरान 71.50 लाख मकान पहले ही तैयार किए जा चुके हैं जिसमें 17.83 लाख पीएमएवाई(जी) मकान भी शामिल हैं। 33 लाख अतिरिक्त पीएमवाई(जी) मकान 31 मार्च, 2018 तक पूरे होने के उम्मीद है क्योंकि वे पहले से ही उन्नत चरण में पहुंच चुके हैं। मनरेगा का इस्तेमाल आजीविका संसाधन के तौर पर किया जा रहा है और यह तालाब, सिंचाई के कुएं, बकरी पालन, दुग्ध उत्पादन मुर्गी पालन आदि जैसी व्यक्तिगत लाभकारी योजनाओं में शामिल हैं।
  • डीओआरडी ने उम्मीद जताई है कि 2022 तक नए भारत के निर्माण के साथ ग्रामीण क्षेत्र की गरीबी दूर हो जाएगी। इसे ग्रामीण आजीविका में विविधीकरण और बुनियादी ढांचे में सुधार जैसे ठोस कदमों से बल मिलेगा। विभाग गरीबी के सभी आयामों को प्रभावी तौर पर दूर करने के लिए राज्य सरकारों के साथ मिलकर 50 हजार ग्राम पंचायतों में 5000 क्लस्टर स्थापित करने के लिए काम पहले ही शुरू कर चुका है। विभाग हर साल 7 लाख गरीब परिवारों के लिए ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरएसईटीआई) के जरिए स्वरोजगार और डीडीयूजीकेवाई के तहत दिहाड़ी रोजगार के लिए कौशल का विकास कर रहा है। कौशल भारत कार्यक्रम को प्रभावी तौर पर लागू करने के साथ-साथ डीडीयूजीकेवाई और आरएसईटीआई कार्यक्रमों के बेहतर कार्यान्वयन के जरिए गरीब परिवारों के कौशल सुधार लाने और क्षमता बेहतर करने की कोशिश की जा रही है। पिछले बजट में मिशन अंत्योदय के तहत 50000 ग्राम पंचायतों के एक करोड़ परिवारों को गरीबी से बाहर लाने की घोषणा की गई थी। ग्रामीण विकास विभाग ने इन ग्राम पंचायतों की रैंकिंग की है। बुनियादी ढांचा मानव विकास एवं आर्थिक मानदंडों में खाई की पहचान की जा रही है। और सरकार उन खाइयों को पाटने और सबसे गरीब परिवारों के जीवन में बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध है।

शिक्षा क्षेत्र

  • शिक्षा के क्षेत्र में वर्ष 2022 तक खेल और कौशल विकास में प्रशिक्षण प्रदान करने के अलावा 50 प्रतिशत से ज्‍यादा की अनुसूचित जनजाति आबादी वाले प्रत्‍येक ब्‍लॉक में एकलव्‍य मॉडल आवासीय विद्यालय की स्‍थापना की घोषणा की।
  • वित्‍त मंत्री ने कहा कि सरकार सामाजिक-आर्थिक जातीय जनगणना के अनुसार वृ‍द्धों, विधवाओं, बेसहारा बच्‍चों, दिव्‍यांगजनों और वंचित लोगों के प्रत्‍येक परिवार तक पहुंचने के लिए एक व्‍यापक सामाजिक सुरक्षा तथा संरक्षण कार्यक्रम कार्यांवित कर रही है। राष्‍ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के लिए वर्ष 2018-19 में 9975 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। वर्ष 2022 तक शिक्षा में आधारभूत सुविधाओं और प्रणालियों को पुन: मजबूत बनाने के लिए अगले चार वर्षों में एक लाख करोड़ रुपए के निवेश का प्रावधान किया गया है।
  • प्रधानमंत्री अनुसंधान अध्‍येता पहल के तहत श्रेष्‍ठ संस्‍थानों से हर वर्ष एक हजार उत्‍कृष्‍ट बी.टेक छात्रों की पहचान की जाएगी और उन्‍हें आईआईटी, आईआईएससी में पीएचडी करने के लिए सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।

स्वास्थ्य क्षेत्र

  • सर्वेभनतु: सुखिन, सर्वे संतु: निरामया के मार्गदर्शक के सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए सरकार का मानना है कि स्वास्थ्य मानव विकास का हृदय है। सरकार एक मजबूत स्वास्थ्य प्रणाली और जन केंद्रित प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है जो कि लोगों के घरों के नजदीक हो।
  • आयुष्मान भारत के तहत सरकार ने आज जिन दो दूरगामी पहलों की घोषणा की है वे 2022 तक नए भारत का निर्माण करेंगी। इससे संवर्धित उत्पादकता कल्याण में वृद्धि होगी और इनसे मजदूरी की हानि और दरिद्रता से बचा जा सकेगा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 में भारत की स्वास्थ्य प्रणाली की नींव के रूप में स्वास्थ्य और आरोग्य केंद्रों की परिकल्पना की गई है। ये 1.5 लाख केंद्र, स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली को लोगों के घरों के नजदीक लाएंगे। ये स्वास्थ्य केंद्र असंचारी रोगों और मातृत्व तथा बाल स्वास्थ्य सेवाओं सहित व्यापक स्वास्थ्य देखरेख उपलब्ध कराएंगे। यह केंद्र आवश्यक दवाइयां और नैदानिक सेवाएं भी मुफ्त उपलब्ध रहेंगे।
  • आयुष्मान भारत के तहत दूसरा कार्यक्रम स्वास्थ्य संरक्षण योजना है। हम सब जानते हैं कि देश में लाखों परिवारों को अस्पतालों में अंतरंग इलाज कराने के लिए उधार लेना पड़ता है या संपत्तियां बेचनी पड़ती हैं। सरकार ऐसे परिवारों के प्रति चिंतित है। मौजूदा राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना स्कीम गरीब परिवारों को 30,000 रूपये की वार्षिक कवरेज प्रदान करती है। अनेक राज्य सरकारों ने भी कवरेज में विविधता उपलब्ध कराके स्वास्थ्य संरक्षण योजनाएं कार्यान्वित अनुपूरित की हैं। अब हमारी सरकार ने स्वास्थ्य संरक्षण को और अधिक आकांक्षा वाला स्तर प्रदान करने का निर्णय लिया है।
  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना के तहत 11 करोड़ से अधिक गरीब और कमजोर परिवारों को प्रति वर्ष 5 लाख रूपए तक का इलाज हेतु कवरेज दिया जा रहा है। इस योजना के लिए इस वर्ष 2000 करोड़ रूपए का आवंटन किया गया है। राज्यों के पास इस योजना को लागू करने के लिए ट्रस्ट मॉडल या बीमा कम्पनी आधारित मॉडल अपनाने का विकल्प है हालांकि ट्रस्ट मॉडल को प्राथमिकता दी जाएगी। आयुष्मान भारत के तहत ये दो दूरगामी पहले वर्ष 2022 तक एक नए भारत का निर्माण करेंगी और इनमें संवर्धित उत्पदकता, कल्याण में वृद्धि होगी और इनसे मजदूरी की हानि और दरिद्रता से बचा जा सकेगा। इन योजनाओं से, खासकर महिलाओं के लिए रोजगार के लाखों अवसर सृजित होंगे। सरकार सर्वजन स्वास्थ्य कवरेज के लिए स्थायी रूप से किन्तु निश्चित रूप से उत्तरोत्तर अग्रसर है।
  • किसी दूसरी संक्रामक बीमारी की तुलना में टी.बी. से हर वर्ष अधिक जानें जाती हैं। यह मुख्य रूप से गरीब और कुपोषित लोगों को प्रभावित करती है। इसलिए सरकार टी.बी. से पीड़ित सभी रोगियों को उनके उपचार की अवधि के दौरान 500 रूपये प्रति माह के हिसाब से पोषणाहार सहायता प्रदान करने के लिए 600 करोड़ रूपये की अतिरिक्त राशि आबंटित की है। गुणवत्तायुक्त चिकित्सा, शिक्षा और स्वास्थ्य देख-रेख की पहुंच में और वृद्धि करने के उद्देश्य से, हम देश में मौजूद जिला अस्पतालों को अपग्रेड करके 24 नए सरकारी चिकित्सा कॉलेजों और अस्पतालों की स्थापना करेंगे। इस कदम से यह सुनिश्चित होगा कि प्रत्येक 3 संसदीय क्षेत्रों के लिए कम से कम एक चिकित्सा कॉलेज और देश के प्रत्येक राज्य में कम से कम एक सरकारी चिकित्सा कालेज है। इसके अतिरिक्त सिक्किम में सरकारी चिकित्सा कॉलेज की स्थापना की जाएगी क्योंकि वहां अभी एक भी सरकारी चिकित्सा कॉलेज नहीं है। उपरोक्त पहलों के लिए केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी क्रमश: 60:40 होगी।
  • वित्‍त मंत्री ने 10 करोड़ से अधिक गरीब और कमजोर परिवारों को दायरे में लाने के लिए एक फ्लैगशिप राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य संरक्षण योजना को प्रारंभ करने की घोषणा की जिसके तहत द्वितीयक और तृतीयक देखभाल अस्‍पताल में भर्ती होने के लिए प्रति परिवार पांच लाख रुपए प्रतिवर्ष कवरेज प्रदान की जाएगी।
  • राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य नीति 2017 की परिकल्‍पना के अनुसार 1.5 लाख केंद्र स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल प्रणाली को घर तक पहुचाएंगे। इस कार्यक्रम के लिए 1200 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।

औद्यौगिक क्षेत्र

मध्‍यम लघु तथा सूक्ष्‍म उद्योग एवं रोजगार 

  • मध्‍यम लघु तथा सूक्ष्‍म उद्यम एवं रोजगार को बढ़ावा देने के लिए बजट में 3794 करोड़ रुपए प्रदान किए गए हैं। अप्रैल 2015 में मुद्रा योजना का शुभारंभ किया गया। जिसके तहत 10.38 करोड़ रुपए के मुद्रा लोन दिए गए। इनमें से 76 प्रतिशत ऋण खाते महिलाओं के जबकि 50 प्रतिशत से ज्‍यादा अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्‍य पिछड़े वर्ग के हैं। 2018-19 के लिए मुद्रा के अंतर्गत तीन लाख करोड़ रुपए के ऋण का लक्ष्‍य रखा गया है।
रोजगार सृजन 
  • रोजगार सृजन की प्राथमिकता सरकार की नीतियों में प्रमुख रूप से शामिल हैं वित्‍त मंत्री ने एक स्‍वतंत्र अध्‍ययन का उल्‍लेख करते हुए कहा कि इस वर्ष 70 लाख औपचारिक रोजगारों का सृजन किया जाएगा। पिछले तीन वर्षों के दौरान रोजगार सृजन की दिशा में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का उल्‍लेख करते हुए वित्‍त मंत्री ने घोषणा की कि सरकार अगले तीन वर्षों में सभी क्षेत्रों के लिए ईपीएफ में नए कर्मचारियों के वेतन का 12 प्रतिशत का योगदान करेगी।
  • 2018-19 में टैक्‍सटाइल क्षेत्र में 7148 करोड़ रुपए परिव्‍यय का प्रस्ताव है।
बुनियादी ढांचा और वितीय क्षेत्र विकास
  • वित्‍त मंत्री ने बुनियादी ढांच के विकास को अर्थव्‍यवथा का प्रमुख आधार बताते हुए अनुमान लगाया कि सकल घरेलू उत्‍पाद में वद्धि और समूचे देश को एक नेटवर्क में जोड़़ने के लिए 50 लाख करोड़ रुपए की आवश्‍यकता है। उन्‍होंने 2018-19 में बुनियादी ढांचे पर 5.97 लाख करोड़ रुपए के आबंटन का प्रस्‍ताव दिया है।
  • वित्‍त मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने नियमित तौर पर प्रगति के माध्‍यम से बुनियादी क्षेत्र में उपलब्धियों की समीक्षा की है और इसके तहत 9.46 लाख करोड़ रुपए की परियोजनाएं शुरू की जा चुकी हैं।
  • भारतमाला परियोजना के अंतर्गत करीब 35 हजार किलोमीटर सड़क के निर्माण को चरण एक में अनुमति दी जा चुकी है और इसकी अनुमानित लागत 5,35,000  करोड़ रुपए है।

आयकर

इनकम टैक्स छूट सीमा में परिवर्तन नहीं हुआ
  • अपने बजट भाषण में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इनकम टैक्स छूट सीमा में कोई बदलाव नहीं किया है। हालांकि स्डैंडर्ड डिडक्शन की शुरुआत फिर से करके सैलरी वाले लोगों को थोड़ी राहत जरूर दी है। स्डैंडर्ड डिडक्शन के तहत 40 हजार रुपये की छूट मिलेगी। यानी जितनी सैलरी पर टैक्स बनेगा, उसमें से 40 हजार घटाकर टैक्स देना होगा। जेटली ने कहा कि 2.50 करोड़ वेतनभोगी व पेंशनभोगियों को स्डैंडर्ड डिडक्शन का लाभ मिलेगा। बता दें कि वित्तीय वर्ष 2006-07 में तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने स्टैंडर्ड डिडक्शन की व्यवस्था को वापस ले लिया था।
  • स्टैंडर्ड डिडक्शन से राहत देने के साथ सरकार ने दूसरी तरफ ट्रांसपोर्ट अलाउंस और मेडिकल रीइंबर्समेंट की सुविधा छीन ली है। इसके अलावा इनकम टैक्स पर सेस को 3 से बढ़कर 4 प्रतिशत किया गया है।
वरिष्ठ नागरिकों का रखा गया ख़ास ख़्याल
  • सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों को कई राहत देने की घोषणा करते हुए डिपोजिट पर मिलने वाले ब्याज को टैक्स फ्री कर दिया है। डिपोजिट से प्राप्त आय पर टैक्स छूट की सीमा 5 गुना बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दी गई है।
  • सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों को कई राहत देने की घोषणा करते हुए जमा योजनाओं से प्राप्त आय पर कर छूट की सीमा पांच गुना बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दी।
  • केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने संसद में आम बजट पेश करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री वय वंदन योजना मार्च 2020 तक जारी रहेगी। इस योजना के अंतर्गत निवेश की वर्तमान सीमा को 7.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 15 लाख रुपये कर दिया गया है।
  • उन्होंने कहा कि बैंकों तथा डाकघरों में जमा राशि पर ब्याज आय में छूट की सीमा 10 हजार रुपये से बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दी गयी है। यह लाभ सावधि जमा योजनाओं तथा आवर्ती जमा योजनाओं से मिलने वाले ब्याज पर भी उपलब्ध होगा।
  • वित्त मंत्री ने कहा कि धारा 80डी के अंतर्गत स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम या चिकित्सा व्यय हेतु कटौती सीमा को 30 हजार रुपये से बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दिया गया है।

भारतीय रेलवे

वित्त मंत्री द्वारा पेश किए गए रेल बजट रेलवे के आधुनिकीकरण और रेलवे के विस्तार पर केंद्रित था। रेलवे के लिए 1 लाख 48 हजार करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। इस वर्ष का रेल बजट कुछ हद तक मुंबईवासियों की जरूरतों को पूरा करने वाला है। रेल बजट में मुंबई के लिए 90 किलोमीटर पटरी का विस्तार होगा। इसके अलावा मुंबई में लोकल रेल का दायरा भी बढ़ाया जाएगा। रेल बजट की मुख्य बातें जानने के लिए नीचे दिए गए बिंदुओं को पढ़ें।

  • रेलवे स्टेशनों पर एस्केलेटर, सीसीटीवी वाईफाई लगेंगे।
  • मुंबई लोकल का दायरा बढ़ाया जाएगा।
  • मुंबई में 90 किलोमीटर पटरी का विस्तार होगा।
  • 600 रेलवे स्टेशनों के अाधुनिकीकरण पर होगा जोर।
  • सुरक्षा वॉर्निंग सिस्टम पर जोर दिया जाएगा।
  • पूरा रेल नेटवर्क ब्रॉड गेज बनाया जाएगा।
  • पटरी, गेज बदलने जैसे काम पर खर्च किए जाएंगे पैसे।
  • 300 किलोमीटर रेल पटरियों का नवीनीकरण होगा।
  • 4000 से ज्यादा मानव क्रॉसिंग बंद किए जाएंगे
  • माल ढुलाई के लिए 12 वैगन भी बनाए जाएंगे।
  • 3600 नई लाईनें बिछाई जाएंगी।
  • इस साल 700 नए रेल इंजन तैयार किए जाएंगे।
  • देश में अब सिर्फ बड़ी लाइनों पर रेल चलेगी।
  • 5160 नए कोच तैयार किए जाएंगे।
  • 40000 करोड़ रुपये एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण पर खर्च किए जाएंगे।

मुख्य भूमिका में होते हैं ये अधिकारी

देश का आम बजट तैयार करने में वित्त मंत्रालय के तमाम अधिकारियों की प्रमुख भूमिका होती है। वित्तमंत्री और वित्त सचिव समेत तमाम अधिकारी बजट का खाका तैयार करने में अपने अपने हिस्से की भूमिकाओं का निर्वहन करते हैं। हम अपनी बजट सीरीज की इस खबर में आपको बताने जा रहे हैं कि आम बजट 2018 का ड्रॉफ्ट तैयार करने में किस-किस अधिकारी की अहम भूमिका है। जानिए…

  • डॉ हसमुख अढिया (फाइनेंस एंड रेवेन्यू सेक्रेटरी):1981 बैच के अधिकारी हसमुख अढिया वित्त मंत्रालय में अहम भूमिका निभा रहे हैं। वो गुजरात कैडर से 1981 बैच के आइएएस अधिकारी रहे हैं। वो मंत्रालयों की अपेक्षाओं और विभागों की ओर से ज्यादा आवंटन की मांग को पूरा करने के बीच एक संतुलन बिठाने का काम करते हैं। साथ ही वो सरकार के वित्तीय घाटे लक्ष्यों पर भी ध्यान देते हैं। सरकार ने राजकोषीय घाटे को काबू में लाने और ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक खर्चों इजाफे की जो प्रतिबद्धता जताई है वह उनके लिए एक मुश्किल काम है। राजस्व सचिव के तौर पर अढिया बजट में टैक्स सुधारों के प्रस्तावों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। साथ ही पैसा कहां से जुटाया जाए यह भी अढिया की ही जिम्मेदारी है। वहीं, विभिन्न योजनाओं के लिए राशि आवंटित करने का काम भी उन्हीं के पास है।
  • सुभाष चंद्र गर्ग (डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स के सेक्रेटरी)गर्ग राजस्थान कैडर के 1983 बैच के आइएएस अधिकारी रह चुके हैं। वो वर्ल्ड बैंक में कार्यकारी निदेशक (एग्जीक्युटिव डायरेक्टर) के तौर पर काम कर चुके हैं। इनकी जिम्मेदारी यह भी है कि सरकार को बताए कि कहां से पैसा जुटाना है। इस काम के लिए वो लगातार भारतीय रिजर्व बैंक के संपर्क में रहते हैं। वो बजट के सभी तरह के कामकाज से वाकिफ रहते हैं। इकोनॉमिक अफेयर्स सेक्रेटरी के तौर पर उनका काम बजट में बिना किसी दिक्कत के इस तरह से सुधारों को रखना होता है जो कि उम्मीदों पर खरा उतरें। आम बजट 2018 में इनका मुख्य काम यह है कि देश में नोटबंदी के बाद अर्थव्यवस्था को वापस पटरी पर लाकर निजी सेक्टर में विकास को बढ़ावा दिया जाए।
  • नीरज कुमार गुप्ता (डिपार्टमेंट ऑफ इंवेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट के सचिव):इनकी जिम्मेदारी सरकार के विनिवेश कार्यक्रम की देखरेख करना है। जानकारी के लिए बता दें कि सरकार हर साल सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में अपना हिस्सा बेचकर पैसा जुटाती है। वर्ष 2016 में गुप्ता ने कैश रिच कंपनियों के बायबैक कर सरकार के लिए 15,982 करोड़ रुपये हासिल किये थे। आम बजट 2018 में इनके मुख्य काम राज्य की ओर से नियंत्रित उद्यम के एसेट को बढ़ावा देना, विनिवेश के जरिए संसाधनों का हस्तांतरण करना और नए निवेश अवसरों को आकर्षित करना है।
  • अरविंद सुब्रमण्यम (मुख्य आर्थिक सलाहकार):अरविंद सुब्रमण्यम देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार हैं। इन्होंने रघुराम राजन के साथ मिलकर इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड में काम किया है। मुख्य आर्थिक सलाहकार के तौर पर इनका प्रमुख काम मैक्रोइकोनॉमिक स्टेबिलिटी को बनाए रखना, निवेश के लिए अनुकूल माहौल बनाना और सालाना इकोनॉमिक सर्वे को ड्राफ्ट करना है।
  • राजीव कुमार (डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज के सचिव):कुमार झारखंड कैडर के 1984 बैच के आइएएस अधिकारी रह चुके हैं। इन्होंने ब्यूरोक्रेट के ऑनलाइन परफॉर्मेंस की अप्रेजल रिपोर्ट में अहम भूमिका निभाई है। इनकी जिम्मेदारी वित्तीय संस्थान, बैंक, बीमा कंपनी और नेशनल पेंशन सिस्टम की देखरेख करना है। आम बजट 2018 में इन क्षेत्रों में सुधारों की जिम्मेदारी कुमार की ही है।
  • प्रशांत गोयल (ज्वाइंट सेक्रेटरी- बजट):गोयल 1993 बैच (यूनियन टैरिटरी) के आईएएस अधिकारी रह चुके हैं। तथ्यों को कैसे जुटाया जाए और उसकी समीक्षा की जाए जिसके आधार पर बजट की रूपरेखा तैयार होती है यह सब कुछ उनकी देखरेख में होता है। गोयल डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स (डीईए) के साथ मिलकर काम करते हैं। वो एक कोर टीम का नेतृत्व भी करते हैं जो कुल राजस्व, राजस्व को बढ़ाने के लिए नए प्रस्तावों, ज्यादा फंड्स को जुटाने के तरीकों, घाटे के स्तर को कम करने और अन्य संबंधी आंकड़ों पर विस्तार से चर्चा करती है।
  • अजय नारायण झा (सेक्रेटरी, डिपार्टमेंट ऑफ एक्सपेंडीचर): अजय नारायण झा वर्ष 1982 बैंच के मणिपुर कैडर के IAS हैं। मौजूदा समय में वह वित्त आयोग में सचिव के तौर पर काम कर रहे हैं। जैसा कि इस बार सरकार सभी के लिए कुछ न कुछ करना चाहती है तो बजट में मुख्य केंद्र खर्च होगा। झा की नियुक्ति अशोक लावासा के सेवानिवृत्ति के बाद हुई थी।

अब हमसंसद में पेश हुए आम बजट 2018-19 पर आधारित इस लेख को यहीं विराम देते हैं। हमें उम्मीद है कि इस लेख के माध्यम से आप बजट से संबंधित गतिविधियों को समझ पाए होंगे। हम आगे भी परीक्षा उपयोगी ऐसे ही लेख आपके समक्ष प्रस्तुत करेंगे, तब तक OnlineTyari के साथ जुड़े रहें।

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