X

UPSC CSE महत्त्वपूर्ण टॉपिक: मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम 2017

UPSC CSE महत्त्वपूर्ण टॉपिक: मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम 2017- जैसे ही आप UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू करते हैं, आपका तत्काल लक्ष्य प्रारंभिक परीक्षा होता है; लेकिन, गम्भीर उम्मीदवारों को इसके साथ ही सिविल सेवा (मुख्य) परीक्षा भी ध्यान में रहती है। आपको तैयारी के दौरान इसके प्रति सतर्कता के साथ-साथ जिस तरीके से इसे संभालना है, उसके बारे में सचेत रहना आवश्यक होगा। परीक्षा के किसी भी दौर में चूक होना आपको असफल बना सकती है। आपको परीक्षा विशेष गंभीर मुद्दों से अवगत कराने के लिए आज हम मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम 2017 से आपको परिचित कराते हैं और इसकी जानकारी प्रदान करते हैं।

विश्व विकलांग रिपोर्ट, 2010 सहित कई रिपोर्टों में मानसिक अस्वस्थता और गरीबी के बीच परस्‍पर संबंध स्पष्ट होता है, जिसके मुताबिक मानसिक रूप से अक्षम लोग सबसे निचले स्तर पर हैं। यह हमें चेतावनी देता है कि यह एक स्वास्थ्य संकट बन सकता है जिसका समाज पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। और अगर हम विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन ने पूर्वानुमान को देखें कि वर्ष 2020 तक भारत की लगभग 20 प्रतिशत जनसंख्‍या किसी न किसी प्रकार की मानसिक अस्‍वस्‍थता से पीड़ित होगी। इससे हमें मानसिक स्वास्थ्य नीति की आवश्यकता महसूस होती है जिससे सभी स्तरों पर मानसिक स्वास्थ्य के प्रति समझ बढ़ें और मानसिक स्वास्थ्य क्षेत्र में नेतृत्व को सुदृढ़ करके मानसिक स्वास्थ्य देखभाल तक व्यापक पहुँच प्रदान हो सके।

मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम 2017

मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम 2017  में ‘‘मानसिक बीमारी‘‘ को सोच, मनोदशा, धारणा, अभिविन्याश या स्मृति जो मोटे तौर पर जीवन की सामान्य जरूरत के लिये निर्णय, व्यवहार, वास्तविकता को पहचानने की क्षमता या योग्यता में अवरोध पैदा करती है, मदिरा और मादक पदार्थों की लत से जुड़ी मानसिक स्थिति के महत्वपूर्ण विकार के तौर पर परिभाषित किया गया है। मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम 2017 में उल्लेख किया गया है कि मानसिक बीमारी का निर्धारण विश्व स्वास्थ्य संगठन के रोग संबंधी अंतर्राष्ट्रीय वर्गीकरण के नवीनतम संस्करण सहित राष्ट्रीय अथवा अंतर्राष्ट्रीय तौर पर स्वीकार्य चिकित्सा मानदंडों के अनुरूप किया जायेगा। राजनीतिक, आर्थिक या सामाजिक स्थिति अथवा सांस्कृतिक, जातीय अथवा धार्मिक समूह की सदस्यता किसी व्यक्ति की मानसिक बीमारी के निर्धारण का आधार नहीं हो सकती। नैतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, कार्य या राजनीतिक मूल्य अथवा किसी व्यक्ति के समुदाय में मौजूद मान्यताएं भी मानसिक बीमारी के निर्धारण का कारण नहीं हो सकती हैं।

मानसिक रूप से बीमार व्यक्तियों के अधिकारों की सुरक्षा हेतु भारत द्वारा ‘मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम (The Mental Health Care Act) 2017′ को 7 अप्रैल 2017 को पारित किया गया और इसे 7 जुलाई, 2018 से लागू कर दिया गया। यह अधिनियम 22 मई 1987 को पारित मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम 1987 को प्रतिस्थापित करता है।

इस अधिनियम के प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं-

अगर हम मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम 2017 की आवश्यकता को देखें तो यह स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि मानसिक रूप से बीमार लोगों की देखभाल के लिए बनाए गए पूर्व कानून जैसे भारतीय पागलखाना अधिनियम, 1858 और भारतीय पागलपन अधिनियम, 1912 में मानवाधिकार के पहलू की उपेक्षा की गई थी और केवल पागलखाने में भर्ती म‍रीजों पर ही विचार किया गया था। आजादी के बाद भारत में इस संबंध में पहला कानून बनाने में 31 वर्ष का समय लगा और उसके 9 वर्ष के उपरांत मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य अधिनियम, 1987 अस्तित्‍व में आया। परंतु इस अधिनियम में कई खामियां होने के कारण इसे कभी भी किसी राज्‍य एवं केंद्र शासित प्रदेश में लागू नहीं किया गया। अतः मानसिक रूप से बीमार लोगों के कवरेज के लिए मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम 2017 की आवश्यकता थी। जिससे मानसिक स्वास्थ्य जो कि एक जटिल समस्या है, जो जीवन के विविध आयामों को प्रभावित करती है, के ठोस समाधान को प्रस्तुत किया जा सके।

TyariPlus जॉइन करें !
अपनी आगामी सभी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अब सिर्फ TyariPlus की सदस्यता लें और वर्ष भर अपनी तैयारी जारी रखें-
TyariPLUS सदस्यता के फायदे
  • विस्तृत परफॉरमेंस रिपोर्ट
  • विशेषज्ञों द्वारा नि: शुल्क परामर्श
  • मुफ्त मासिक करेंट अफेयर डाइजेस्ट
  • विज्ञापन-मुक्त अनुभव और भी बहुत कुछ

सरकारी परीक्षा के लिए आवेदन करने वाले सभी उम्मीदवार अपनी परीक्षा के लिए तैयारी जारी रखें और मॉक टेस्ट से अपनी तैयारी को जांचते रहें। अनलिमिटेड मॉक टेस्ट से अभ्यास करने के लिए अभी TyariPLUS जॉइन करें।

UPSC सिविल सेवा भर्ती परीक्षा 2019 से संबंधित अधिक जानकारी के लिए हमसे जुड़े रहें। सिविल सेवा परीक्षा में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए सर्वश्रेष्ठ IAS परीक्षा तैयारी एप नि:शुल्क डाउनलोड करें।

Ajay K. Tripathi :
© 2010-2018 Next Door Learning Solutions