UPSC सामान्य अध्ययन (GS) पेपर 3: उत्तर लेखन अभ्यास (9 अप्रैल)

IAS की मुख्य परीक्षा के GS पेपर-3 के पाठ्यक्रम से स्पष्ट है कि इस प्रश्न पत्र के अन्तर्गत आर्थिक विकास से संबंधित मुद्दे, प्रौद्योगिकी एवं जैवविविधता, आर्थिक विकास, वातावरण, पर्यावरण एवं आपदा प्रबंध से संबंधी मुद्दे, सुरक्षा से संबंधित मुद्दे आते हैं। यह प्रश्नपत्र काफी जटिल एवं सामायिक विषयों पर आधारित होता है। अभ्यर्थियों से अपेक्षा की जाती है कि वें दिन प्रतिदिन के सामयिक विषयों पर अपनी समझ बनाये।

इस पेपर के लिए उम्मीदवार के विश्लेषणात्मक और तथ्यात्मक ज्ञान की आवश्यकता होती है और इस प्रकार इस परीक्षा को पास करना एक चुनौती बन जाती है। अभ्यर्थियों को चाहिये कि वे समसामयिक मुद्दों पर विभिन्न सूचनाओं का संग्रह कर, मुख्य परीक्षा के प्रश्नों के प्रारूप व प्रकृति को समझते हुए स्वयं प्रश्न तैयार करके उत्तर लिखने का प्रयत्न करें।

UPSC सामान्य अध्ययन (GS) पेपर 3: उत्तर लेखन अभ्यास

परीक्षा के डर पर काबू पाने के लिए  IAS मुख्य परीक्षा के GS पेपर-3 के महत्वपूर्ण टॉपिक्स पर प्रश्न आपसे साझा कर रहे हैं, जिससे आप इन टॉपिक्स पर अपनी पकड़ मजबूत कर पाएं और आप परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर सकें। कल आपसे पूछा गया प्रश्न था-“भारत की ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नीति की व्याख्या कीजिए। भारत में अपशिष्ट उपचार के साथ क्या समस्याएं हैं?” इस प्रश्न पर हमें काफी प्रतिक्रिया प्राप्त हुई। जैसा कि हमने आपको पूर्व में बताया था कि पूछे गए प्रश्न पर सर्वोत्तम उत्तर को हमारे द्वारा ब्लॉग पर प्रकाशित किया जायेगा तो इसी शर्त के तहत हमारी टीम ने आदित्य जी (प्रयागराज) का लेख चयनित किया है। उनके द्वारा भेजे गए लेख को हम यहाँ प्रकाशित कर रहे हैं-

प्रश्न: भारत की ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नीति की व्याख्या कीजिए। भारत में अपशिष्ट उपचार के साथ क्या समस्याएं हैं?

उत्तर: ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से आशय अपशिष्ट पदार्थों के निकास से लेकर उसके उत्पादन व पुनःचक्रण द्वारा निपटान करने की देखरेख कि पूर्ण प्रक्रिया से है। अतएवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को “ठोस अपशिष्ट के उत्पादन का व्यवस्थित नियंत्रण, संग्रह, भंडारण, ढुलाई, निकास पृथ्थ्करण, प्रसंस्करण, उपचार, पुनः प्राप्ति और उसका निपटान” के रूप में परिभाषित किया जा सकता है।

ठोस कचरा प्रबंधन (SWM) नियम, 2016 की कुछ मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं-

  • कोई भी व्यक्ति अपने द्वारा उत्पन्न ठोस कचरे को अपने परिसर के बाहर सड़कों, खुले सार्वजनिक स्थलों पर, या नाली में, या जलीय क्षेत्रों में न तो फेंकेगा, न जलाएगा अथवा दफनाएगा।
  • ठोस कचरा उत्पन्न करने वालों को ‘उपयोग कर्ता शुल्क’ अदा करना होगा, जो कचरा एकत्र करने वालों को प्राप्त होगा।
  • निर्माण और तोड़-फोड़ से उत्पन्न होने वाले ठोस कचरे को ‘निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016’ के अनुसार संग्रहित करने के बाद निपटाया जाना चाहिए।
  • केंद्र सरकार ने इन नियमों के समग्र कार्यान्वयन की निगरानी करने के लिए पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता में एक केंद्रीय निगरानी समिति का भी गठन किया है।

वर्तमान में, निगम सीमाओं के भीतर जैव-अपघटन योग्य अपशिष्ट के संचयन के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016 एवं प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016 स्वागत योग्य पहल है। लेकिन इनके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए अधिक बल और स्पष्टता की आवश्यकता है। इन नियमों द्वारा ‘अपशिष्ट एकत्रण व निस्तारण’ का दायित्व उसे उत्पन्न करने वाले पर ही तय करना प्रायोगिक तौर पर अव्यावहारिक है, क्योंकि अधिकांश उत्पादक छोटे व अनौपचारिक क्षेत्रों से हैं।

इसी तरह ‘द्वार से द्वार’ अपशिष्ट एकत्रण व सूखे व गीले अपशिष्ट की छंटाई का पालन शायद ही किसी शहर में पूर्णत: किया गया हो। दायित्वों को पूरी तरह नगर-पालिकाओं पर थोपने की अपेक्षा सभी हितधारकों के समन्वित प्रयास से ही एक मितव्ययी अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था का विकास हो सकता है।

OnlineTyari टीम द्वारा पूछे जा रहे प्रश्न और प्रतियोगी छात्रों द्वारा दिए जा रहे उत्तर UPSC की सिविल सेवा परीक्षा (IAS परीक्षा) के मानक उत्तर न होकर सिर्फ एक प्रारूप हैं। जिससे अभ्यर्थी उत्तर लेखन की रणनीति से अवगत हो सकेगा। वह उत्तर में निर्धारित समयसीमा में कलेवर को समेटने और समय प्रबंधन की रणनीति से परिचय पा सकेगा। जिससे वह सम्पूर्ण परीक्षा को निर्धारित समयसीमा में हल करने में समर्थ होगा।

आज का प्रश्न : भारत का संविधान प्रकृति में संघीय है, लेकिन आत्मा में एकात्मक है। व्याख्या करें।

आप भी इस प्रतियोगिता में सम्मिलित होने के लिए नीचे इमेज में बताई गई शर्तों का पालन करते हुए अपने उत्तर हमें भेजें और उत्तर लेखन अभ्यास के साथ हमारे ब्लॉग पर प्रकाशित होने का मौका पाएं।


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UPSC IAS mock Tests

 

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