SSC JHT परीक्षा 2017: पेपर 2 में सफलता पाने की रणनीति

SSC JHT परीक्षा 2017: पेपर 2 में सफलता पाने की रणनीति- कर्मचारी चयन आयोग ने जूनियर हिंदी अनुवादकों, कनिष्ठ अनुवादकों, वरिष्ठ हिंदी अनुवादकों और हिंदी प्राध्यापक की पदों पर भर्ती के लिए ऑल इंडिया ओपन प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से पेपर 2 परीक्षा को 6 अगस्त को आयोजित की जानी है।  SSC JHT के पेपर 1 में सफल रहने वाले लगभग 2 हजार उम्मीदवार अब 6 अगस्त, 2017 को परीक्षा में सम्मिलित होंगे।

SSC JHT की परीक्षा को पास करने के बाद आप हिन्दी अनुवादक और हिंदी प्राध्यापक के पद पर कार्य करने का मौका पा सकते हैं इसके लिए आपकी हिन्दी और अंग्रेजी दोनों पर मजबूत पकड़ होना अनिवार्य हैं। 

 

SSC JHT परीक्षा 2017: पेपर 2 में सफलता पाने की रणनीति 

SSC JHT पेपर-2 थोड़ा चुनौतीपूर्ण होगा। लिखित पैटर्न होने के कारण अनुवाद के लिए दो पैसेज होंगे- एक पैसेज हिंदी से अंग्रेजी में अनुवाद के लिए और दूसरा पैसेज अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद के लिए होगा। एक निबंध जो अंग्रेजी और हिंदी दोनों भाषाओं में लिखना होगा इसका उद्देश्य उम्मीदवारों के अनुवाद कौशल और उनके लिखने की क्षमता को प्रभावी ढंग से समझना है। पेपर का स्तर निर्धारित शैक्षिक योग्यता के अनुरूप होगा। पेपर 2 कुल 200 अंकभार के होंगे। जिसको आपको 2 घंटे में हल करना होगा।

SSC JHT 2017: दृतीय पेपर के निबंध लेखन की रणनीति 

निबंध को प्रारूप के तहत व्यवस्थित करें 

सभी उम्मीदवारों के लिए ये जानना ज़रूरी है कि निबंध लिखने का अर्थ ये नहीं कि मन में आने वाले हम विचार को आप वैसा ही पेपर पर उतार लें। निबंध में एक प्रवाह शामिल होता है जो कि परिचय से शुरू होता है अंत में तर्कों के साथ निष्कर्ष पर आकर समाप्त होता है।

यहां निबंध प्रारूप दिया जा रहा है, एक नज़र डालें

  1. परिचय
  2. पृष्ठभूमि / संबंधित इतिहास
  3. मुख्य कॉन्सेप्ट / सिद्धांत / विषयवस्तु
  4. वर्तमान परिदृश्य
  5. सकारात्मक पक्ष
  6. नकारात्मक पक्ष
  7. प्रस्तावित सुधार
  8. निष्कर्ष

लच्छेदार और भटकावपन से बचे 

परीक्षक आपके निबंधों में महत्वपूर्ण जानकारी खोजते हैं, तार्किक तथ्य और संवेदनशील निष्कर्ष खोजते हैं। बातों को गोल-गोल घुमाने से परीक्षक परेशान होते हैं और पूरे लिखे पर ध्यान भी नहीं देते। ये नियम बना लें कि प्रत्येक पंक्ति जो आप लिख रहे हों, वो अर्थपूर्ण हो और कुछ भी और कैसे भी विचारों को कागज़ पर नहीं उतार रहे हों।

विषयवस्तु से न भटके,प्रवाह बनाएं रखें  

लेखन टिप्स के लिए सबसे महत्वपूर्ण विषय है कि विषयवस्तु को प्रवाहयुक्त प्रारूप में लिखें। विचारों को आगे पीछे लिखने से निबंध की सुंदरता समाप्त होती है। शुरूआत से लेकर अंत तक तार्किक बहाव होना चाहिए। निबंध को सुनियोजित पैराग्राफ़ में लिखना अच्छा विचार है।

भाव दुहराव से बचे 

पेपर में कुछ भी दोहराएं नहीं, ये साधारण नियम है। प्रत्येक पैरा किसी एक बिंदु पर केंद्रित होना चाहिए। जब तक अति महत्वपूर्ण ना हो तब तक कोई भी तथ्य ना दोहराएं।

प्रश्न के केंद्र भाव को लिखते समय ध्यान में रखें 

आप विषय से भटके कि परीक्षक की रुचि समाप्त। इसके अलावा, ये निबंध लिखने का सही तरीका नहीं है इससे आपके अंक जा सकते हैं।

शब्दों का उचित चयन करें 

एक निष्पक्ष नज़रिया और थोड़ा सा मानवीय चिंतन आपके लेखन को पढ़ने योग्य बना सकता है। अभद्र भाषा, मक्खन लगाने वाली भाषाओं से वाक्यों के अर्थ में अनर्थ हो सकता है और वे भ्रम फैला सकती हैं।

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SSC JHT 2017: दृतीय पेपर के अनुवाद सम्बंधित रणनीति 

लिखित पैटर्न होने के कारण अनुवाद के लिए 2 पैसेज होंगे। हिंदी से अंग्रेजी अनुवाद के लिए पहला और अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद के लिए दूसरा पैसेज होगा। असल में किसी भी भाषा का जिसका अनुवाद आप करना चाहते है या कर रहे है तो आपके पास दोनों भाषा की समझ के साथ साथ उस विषय पर भी गहरी जानकारी होना जरुरी है तभी आप सही से अनुवाद कर पाएंगे।

पठनीयता और धाराप्रवाह बना रहे 

हिंदी और अंग्रेजी में बहुत सारे अंतर है और साथ ही अगर आप अनुवाद कर रहे है तो एक बात आपको ध्यान में रखनी चाहिए कि जैसे अंग्रेजी/हिंदी का कोई शब्द है अगर आप उसे हुबहू या शाब्दिक अर्थ के साथ पेश करते है तो वह हो सकता है वाक्य के अनुरूप नहीं हो इसलिए आपकी कोशिश यह होनी चाहिए कि आपका अनुवाद पठनीय हो और वाक्य में धाराप्रवाह बना रहे।

हुबहू या शाब्दिक अनुवाद न कर भाविक अनुवाद करें

धाराप्रवाह अनुवाद के लिए यह आवश्यक है कि आप शाब्दिक अनुवाद करने से बचे और अर्थात्मक अनुवाद पर बल दें। यदि अनुवाद का वाक्य बड़ा हो तो उसे छोटा कर लें पर अनुवाद का भाव नहीं बदलना चाहिए। अनुवाद किसी एक भाषा में लिखी या बोली गई बातों को दूसरी भाषा में बदलने की प्रक्रिया है। अतः अर्थ का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।

सर्वप्रथम पूरे वाक्य को पढ़ें फिर अनुवाद करें 

संगत और सटीक अनुवाद करने का मार्ग है कि अनुवादक सर्वप्रथम पूरे वाक्य को ध्यान से पढ़ें और ध्यान रखें कि कौन किस तरह से अपनी बात खत्म कर रहा है। हिंदी/अंग्रेजी वाक्य में शब्द जिस तरतीब या क्रम से संयोजित होते है अंग्रेजी/हिंदी अनुवाद में वह शब्द क्रम बदल जाता है। विभिन्न भाषा में वाक्यों में शब्द विभिन्न क्रम से रक्खे जाते है। तो अनुवाद करते समय भाषागत वाक्य क्रम के अनुरूप संयोजन होना चाहिए। अतः यह आवश्यक है कि आप पूरे वाक्य को अच्छे से पढ़िए फिर उसे समझकर अनुवाद करिए तब आप पूरे वाक्य को दूसरी भाषा में उसी सवेंदना के साथ लिख पाएंगे।

तकनीकी शब्दावली, व्याकरण के नियम और सांस्कृतिक सन्दर्भों का ध्यान रखें 

अनुवाद में उपयुक्त शब्दों का चयन करना, तकनीकी शब्दों के लिए प्रचलित शब्दों का प्रयोग, व्याकरण के नियमों का पालन करना और सांस्कृतिक संदर्भों का ध्यान रखना भी आवश्यक होता है। अनुवाद अचूक और स्पष्ट होना चाहिए, ताकि परीक्षक को इसे समझने में कठिनाई न हो और वांछित संदेश स्पष्ट रूप से व्यक्त हो सके।

मुहावरों/लोकोक्ति के अनुवाद में बरते विशेष सावधानी

मुहावरों और कहावतों का अनुवाद करना संभवतः सबसे कठिन कार्य है। मुहावरों और कहावतों का अनुवादक करते समय दूसरी भाषा में उसी अर्थ वाला कोई मुहावरा या कहावत ढूंढने का प्रयास करना चाहिए। उदा. अंग्रेजी कहावत ‘A bad workman blames his tools’ का यदि शब्दशः अनुवाद करें- ‘एक बुरा कारीगर अपने औजारों को दोष देता है’ लिख दिया जाएगा, जिससे इसकी मूल भावना की आत्मा मर जायेगी और संदर्भित मूल भाव भी व्यक्त नहीं होगा तथा अनुवाद भी सार्थक नहीं होगा। हिन्दी में इसका अनुवाद करते समय ‘नाच न जाने आँगन टेढ़ा’ मुहावरे का उपयोग किया जाना चाहिए।

संक्षेप में हम कह सकते हैं कि अनुवाद में केवल शब्दार्थ पर नहीं, बल्कि भावार्थ पर भी ध्यान दिया जाना आवश्यक होता है।

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