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116 शहरों में ‘रहन-सहन सूचकांक’ कार्यक्रम का शुभारंभ करने की घोषणा की गयी

116 शहरों में ‘रहन-सहन सूचकांक’ कार्यक्रम का शुभारंभ करने की घोषणा की गयी:

आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री हरदीप एस. पुरी ने 116 शहरों में ‘रहन-सहन सूचकांक’ कार्यक्रम का शुभारंभ करने की घोषणा की। आवास एवं शहरी मामलों का मंत्रालय अनेक प्रमुख शहरी मिशन क्रियान्वित कर रहा है। इन मिशनों का एक अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण लक्ष्‍य भारत के शहरों को और ज्‍यादा ‘रहन-सहन योग्‍य’ बनाना है।

शहरों की मौजूदा स्थिति का आकलन करने और वहां के निवासियों का जीवन स्‍तर बेहतर करने का मार्ग प्रशस्‍त करने के लिए एक साझा न्‍यूनतम रूपरेखा विकसित करने हेतु आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने भारतीय शहरों की दृष्टि से प्रासंगिक माने जाने वाले ‘रहन-सहन मानकों’ का एक समूह विकसित किया है, ताकि ‘रहन-सहन सूचकांक’ तैयार किया जा सके और शहरों की रेटिंग की जा सके। ये मानक पिछले साल जून में तैयार किए गए थे और उनके आधार पर सूचकांक तैयार करने की घोषणा की गई है।

इनमें 24 मानक ऐसे हैं जिन्हें स्मार्ट सिटी प्रस्ताव में भी जगह दी गई थी। इन मानकों में शहरों के ऐसे संस्थागत, सामाजिक, आर्थिक और भौतिक पहलुओं को शामिल किया गया है जिनसे लोगों का जीवन स्तर प्रभावित होता है तथा शहर रहने योग्य बनते हैं।

मानकों का बेहतर तरीके से पालन सुनिश्चित करनेवाले शहरों को सूचकांक में श्रेष्ठता के क्रम में स्थान दिया जायेगा। इन शहरों का पहला सूचकांक इस साल जून में जारी किया जायेगा। पुरी ने बताया कि सूचकांक में शामिल 116 शहरों में वे 100 शहर भी प्रतिभागी हैं जो स्मार्ट सिटी परियोजना के भी हिस्सा हिस्सा हैं।

सूचकांक के हिस्सा बने शहरों में सर्वाधिक उत्तर प्रदेश के 14, तमिलनाडु और महाराष्ट्र के 12-12 शहर, कर्नाटक और मध्य प्रदेश के सात-सात, गुजरात के छह और बिहार के चार शहरों को शामिल किया गया है। साथ ही दिल्ली के तीनों नगर निगम और नयी दिल्ली नगर पालिका परिषद भी सूचकांक में प्रतिभागी हैं।

प्रमुख मानक:

  • सूचकांक में शहरों के चयन का प्राथमिक मानक 10 लाख से अधिक आबादी होना है।
  • सूचकांक में प्रतिभागी शहरों को बिजली, पानी, सड़क, शिक्षा और चिकित्सा सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं के अलावा ई-सुविधाओं, सार्वजनिक परिवहन एवं यातायात सहूलियतों की अबाध एवं सहज उपलब्धता को मानक बनाया गया है।
  • साथ ही पर्यावरण एवं ऊर्जा संरक्षण के उपायों को लागू करना भी अहम मानक है।
  • सूचकांक की प्रतिस्पर्धा में शामिल किये गये शहरों में राज्यों की राजधानी के अलावा दस लाख से अधिक आबादीवाले प्रमुख शहर हिस्सा ले रहे हैं।
  • इसके तहत 116 शहरों के 13.4 करोड़ लोगों को शामिल करते हुए बननेवाले सूचकांक में 79 मानकों को आधार बनाया गया है।

प्रतिस्पर्धा में शामिल किये गये शहरों में बिहार से भागलपुर, बिहारशरीफ और मुजफ्फरपुर, गुजरात के राजकोट और सूरत, कर्नाटक में हुबली और मंगलुरु, मध्य प्रदेश में सतना और सागर, महाराष्ट्र में नासिक और औरंगाबाद, राजस्थान में कोटा और जोधपुर, तथा उत्तर प्रदेश में रामपुर और झांसी सहित अन्य प्रमुख शहर शामिल हैं।

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