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अंटार्कटिका में बर्फ की चादरें पिघल रही है: आइससैट-2

अंटार्कटिका में बर्फ की चादरें पिघल रही है: आइससैट-2

नासा के आइससैट-2 का उपयोग कर शोधकर्ताओं  के एक अध्ययन में यह पाया गया हैं कि पूर्वी अंटार्कटिका तट तक फैले ग्लेशियरों का एक समूह पिछले एक दशक से पिघलना शुरू हो गया है जो महासागरों में व्यापक परिवर्तन की ओर इशारा करता है।

अध्ययन के अनुसार, समुद्र तल परिवर्तन के माध्यम से पूर्वी अंटार्कटिका पूरे विश्व की तटरेखा को फिर से आकार देने की क्षमता रखता है लेकिन वैज्ञानिक लंबे समय तक इसे इसके पड़ोसी पश्चिमी अंटार्कटिका से ज्यादा स्थिर मानते रहे हैं।

पिछले कुछ सालों में शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि ‘‘टोटन ग्लेशियर’’ महासागरीय जल की गरमाहट के चलते पिघल रहा है। इस विशालकाय ग्लेशियर में इतनी बर्फ है जो समुद्र के जलस्तर को कम से कम तीन मीटर तक बढ़ा सकता है।

नासा ने कहा कि अब शोधकर्ताओं ने पाया है कि टोटन से पश्चिम में स्थित चार ग्लेशियरों के समूह के साथ ही सुदूर पूर्व में कुछ छोटे ग्लेशियर भी पिघलने लगे हैं।

पूर्वी अंटार्कटिका में टोटन सबसे बड़ा ग्लेशियर है, इसलिए ज्यादा शोध इस पर होता है।

आइससैट-2 के बारे में

नासा ने सितम्बर 2018 में पृथ्वी पर पिघलने वाली बर्फ को मापने का पता लगाने के लिए एक लेजर उपकरण लॉन्च किया था। यह पृथ्वी की ध्रुवीय बर्फ की ऊंचाई में हो रहे परिवर्तन को मापने में अधिक सहायक होगा।

आईस, क्लाउड एंड एलिवेशन सैटेलाइट-2 (आईसीईएसएटी -2) ग्रीनलैंड और अंटार्कटिका को लेंस बर्फ की औसत वार्षिक ऊंचाई परिवर्तन को मापेगा। इसका आकार एक पेंसिल की चौड़ाई की तरह होगा। यह प्रति सेकंड 60,000 माप कैप्चर करेगा।

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