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बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा के लिए पॉक्सो ई-बॉक्स की शुरूआत

बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा के लिए पॉक्सो ई-बॉक्स की शुरूआत:

 26 अगस्त 2016 को केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने नई दिल्ली में बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा के लिए पॉक्सो ई-बॉक्स की शुरूआत की। पॉक्सो ई-बॉक्स एक ऐसा मंच है जहां यौन शोषण से पीड़ित कोई भी बच्चा अपनी शिकायत ऑनलाइन दर्ज करा सकता है।

यह पहल, बाल अधिकारों के संरक्षण की राष्ट्रीय संस्था द्वारा बाल यौन शोषण की सीधे ऑनलाइन शिकायत के लिए की गई है। महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री कृष्णा राज और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी इस अवसर पर मौजूद थे।

पॉक्सो ई-बॉक्स से संबंधित मुख्य तथ्य:

  • पॉक्सो ई-बॉक्स प्रणाली से संबंधित अपराधों की शिकायत आसानी से की जा सकेगी और इस पर तुरंत कार्रवाई करना सुनिश्चित किया जा सकेगा।
  • पॉक्सो ई-बॉक्स को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग से जोड़ा गया है और इसकी वेबसाइट पर यह विकल्प उपलब्ध होगा।
  • राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) की वेबसाइट http://ncpcr.gov.in/ के लिए राष्ट्रीय आयोग के मुख पृष्ठ में शामिल किया है।
  • पीडि़त या व्यस्क कोई भी वेबसाइट पर जाकर बच्चे के यौन उत्पीडऩ संबंधी शिकायत दर्ज करा सकता है।

 

क्या है पास्को एक्ट?

बच्चों के साथ आए दिन यौन अपराधों के मामलों की बढ़ती संख्या देखकर केंद्र सरकार ने वर्ष 2012 में पास्को एक्ट बनाया, जो बच्चों को छेड़खानी, बलात्कार और कुकर्म जैसे मामलों से सुरक्षा प्रदान करता है. पास्को का पूर्णकालिक मतलब होता है प्रोटेक्शन आफ चिल्ड्रेन फार्म सेक्सुअल अफेंसेस एक्ट 2012।

 

  • इस कानून के तहत अलग-अलग अपराध के लिए अलग-अलग सजा तय की गई है, जिसका कड़ाई से पालन किया जाना भी सुनिश्चित किया गया है।
  • इस अधिनियम की धारा 4 के तहत बच्चे के साथ दुष्कर्म या कुकर्म के सन्दर्भ में सात साल सजा से लेकर उम्रकैद और अर्थदंड का प्रावधान है।
  • धारा 6 के तहत बच्चों को दुष्कर्म या कुकर्म के बाद गम्भीर चोट पहुँचाने के सन्दर्भ में दस साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा हो सकती है और साथ ही जुर्माना का भी प्रावधान है।
  • धारा 7 और 8 के तहत वो मामले पंजीकृत किए जाते हैं जिनमें बच्चों के गुप्तांग से छेडछाड़ की जाती है और इस केस में पांच से सात साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है।
  • धारा 3 के तहत पेनेट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट को भी परिभाषित किया गया है, जिसमें बच्चे के शरीर के साथ किसी भी तरह की हरकत करने वाले शख्स को कड़ी सजा का प्रावधान है।
  • 18 साल से कम उम्र के बच्चों से किसी भी तरह का यौन व्यवहार इस कानून के दायरे में आ जाता है. यह कानून लड़के और लड़की को समान रूप से सुरक्षा प्रदान करता है। 

 

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