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भारत-बांग्लादेश संबंध: सीमाओं से परे एक रिश्ता

भारत-बांग्लादेश संबंध: सीमाओं से परे एक रिश्ता

25 मई 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने विश्र्व भारती विश्र्वविद्यालय, शांतिनिकेतन के परिसर में 'बांग्लादेश भवन' का उद्घाटन किया। 'बांग्लादेश भवन' भारत और बांग्लादेश के सांस्कृतिक बंधुत्व का प्रतीक है।

यह भवन दोनों देशों के करोड़ों लोगों के बीच कला, भाषा, संस्कृति, शिक्षा, पारिवारिक रिश्तों और अत्याचार के खिलाफ साझा संघर्षों से मजबूत हुए रिश्तों का भी प्रतीक है।

रिश्तों की शुरुआत:

26 मार्च, 1971 को पाकिस्तानी सेना भारतीय सेना से युद्ध में पराजित हुई थी जिसके बाद पूर्वी पाकिस्तान के अलग देश 'बांग्लादेश' बनने का मार्ग प्रशस्त हुआ था। वर्ष 1972 में, भारत और बांग्लादेश ने मैत्री संधि पर हस्ताक्षर किए थे।

हालाँकि इन सबके बावजूद भी माना जाता है कि भारत पाकिस्तान के खिलाफ अपना हित साध रहा है। नतीजतन दशकों पुराने भूमि, जल, अवैध प्रवास और सीमा सुरक्षा से संबंधित मुद्दे अब भी सुलझ नहीं पाए हैं, जबकि बांग्लादेश अपने परिधान उत्पादों के व्यापक निर्यात के लिए भारत के बाजारों में अनुकूल पहुंच चाहता है।

भारत और बांग्लादेश के बीच प्रमुख मुद्दे क्या हैं?

फराक्का बैराज: हुगली नदी में पानी की आपूर्ति में वृद्धि के लिए भारत द्वारा फराक्का बैराज का निर्माण और संचालन विवाद का एक बड़ा मुद्दा रहा है। बांग्लादेश जोर देकर कहता है कि सूखे के मौसम के दौरान उन्हें गंगा के जल का उचित हिस्सा नहीं मिलता है, जबकि मानसून के दौरान जब भारत अतिरिक्त पानी जारी करता है तो वहां बाढ़ आ जाती है।

आतंकवाद: बंग सेना और हरकत-उल-जिहाद-अल-इस्लामी जैसे दोनों देशों में स्थित संगठनों द्वारा की जाने वाली आतंकवादी गतिविधियां। हाल ही में भारत और बांग्लादेश आतंकवाद से लड़ने के लिए संयुक्त रूप से सहमत हुए थे।

पारगमन सुविधा: बांग्लादेश ने लगातार भारत के लैंडलॉक्ड उत्तर पूर्वी क्षेत्रों में पारगमन सुविधा को आसान बनाने की भारत सरकार की योजनाओं को ख़ारिज किया है। यद्यपि भारत के पास इस पूर्वी क्षेत्र के लिए एक संकीर्ण भूमि लिंक है, जिसे प्रसिद्ध रूप से सिलीगुड़ी कॉरिडोर या "भारत की चिकन नेक" के नाम से जाना जाता है।

अवैध प्रवासी: भारत में अवैध बांग्लादेशी प्रवासन एक गंभीर मुद्दा है। दोनों देशों के बीच की सीमा बहुत अधिक सुरक्षित नहीं है और अप्रवासी व्यक्ति अवैध रूप से इसे पार करने में सक्षम हैं। इसके साथ ही बांग्लादेशी अधिकारियों ने भारत में रहने वाले बांग्लादेशियों के बांग्लादेशी अस्तित्व से इंकार कर दिया है।

टिप्पणी:

भारत-बांग्लादेश के मध्य द्विपक्षीय व्यापार में हाल के वर्षों में बढ़ोतरी के प्रयास किए गए हैं। इसके साथ ही भारत ने बांग्लादेश के विकास में भी अपनी साझेदारी बढ़ाई है। गौरतलब है कि भारत पड़ोसी देशों के साथ सम्पर्क तथा अन्त-क्रिया बढ़ाने व इन देशों व भारत की जनता के बीच संवाद व सांस्कृतिक आदान-प्रदान बढ़ाने पर बल दे रहा है।

भारत द्वारा अपने सीमावर्ती क्षेत्रों व इन देशों के मध्य संचार व यातायात ढाँचे के विकास पर बल दिया गया है। हालाँकि इसमें कोई दो राय नहीं है कि भारत ने एलबीए का सामरिक लाभ समुचित ढ़ंग से नहीं उठाया है।

भारत-बांग्लादेश संबंधों को सही मायने में सफल करने के लिए भारत को बांग्लादेश के लोगों का दिल जीतना होगा और एक अमित्र पड़ोसी की धारणा को खत्म करने के उपाय तलाशने होंगे। भूमि सीमा समझौता इस दिशा में एक अच्छी पहल है।

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