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भारत में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया

भारत में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया:

प्रमुख विपक्षी दाल कांग्रेस के नेतृत्व में सात विपक्षी दलों की ओर से लाए गए महाभियोग प्रस्ताव को ख़ारिज करते हुए उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू ने कहा कि न्यायमूर्ति के ख़िलाफ़ लगाए गए आरोप न्यायपालिका की स्वतंत्रता को कमतर आंकने वाले हैं।

नायडू ने इस प्रस्ताव को नामंज़ूर करते हुए अपने आदेश में कहा कि उन्होंने न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा के ख़िलाफ़ लगाए गए प्रत्येक आरोप के प्रत्येक पहलू का विश्लेषण करने के बाद पाया कि आरोप स्वीकार करने योग्य नहीं हैं।

नायडू ने आरोपों की पुष्टि के लिए इसे अनुमानपरक आधार बताते हुए कहा कि देश के प्रधान न्यायाधीश को पद से हटाने की मांग करने वाला प्रस्ताव महज़ शक और अनुमान पर आधारित है।

जबकि संविधान के अनुच्छेद 124 (4) के तहत न्यायाधीश को पद से हटाने लिये कदाचार को साबित करने वाले आधार पेश करना अनिवार्य शर्त है। इसलिये पुख्ता आधारों के अभाव में यह स्वीकार किए जाने योग्य नहीं हैं।

आइये जाने कि भारत में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया क्या है?

  • संविधान के अनुच्छेद 124 (4) तथा न्यायाधीश जाँच अधिनियम 1968 के प्रावधान के अनुसार किसी न्यायाधीश को उसके पद से हटाने की प्रक्रिया लोकसभा या राज्यसभा- किसी भी सदन में शुरू की जा सकती है।
  • यदि प्रस्ताव लोकसभा में लाया जाता है तो लोकसभा के कम से कम 100 तथा यदि प्रस्ताव राज्यसभा में लाया जाता है तो राज्यसभा के कम से कम 50 सदस्यों द्वारा राष्ट्रपति को संबोधित प्रस्ताव लोकसभा के अध्यक्ष या राज्यसभा के सभापति को दिया जाता है।
  • इसके बाद तीन सदस्यों की एक समिति, जिसमें उच्चतम न्यायालय के दो न्यायाधीश और एक प्रख्यात विधिवेत्ता होते हैं, इस प्रस्ताव की जाँच करता है।
  • जब समिति अपनी जाँच में पाती है कि न्यायाधीश कदाचार का दोषी है या वह असमर्थ है तब वह प्रस्ताव समिति के प्रतिवेदन के साथ उस सदन में विचार के लिए स्वीकार किया जाता है जिसमें प्रस्ताव लंबित होता है।
  • यदि प्रस्ताव प्रत्येक सदन में उस सदन के कुल संख्या के बहुमत द्वारा तथा उस सदन के उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के दो तिहाई बहुमत द्वारा पारित कर दिया जाता है तो राष्ट्रपति को समावेदन प्रस्तुत किया जाता है और यदि राष्ट्रपति समावेदन पर आदेश कर देता है तो न्यायाधीश को पद से हटा दिया जाता है।
  • यह कार्यवाही पहली बार 1991-93 में न्यायाधीश आर. रामास्वामी के विरुद्ध शुरू की गयी थी और समिति ने न्यायाधीश को दोषी भी पाया लेकिन लोकसभा में आवश्यक बहुमत के अभाव के चलते प्रस्ताव पारित नहीं हो सका।

उच्चतम न्यायालय:

भारत का उच्चतम न्यायालय भारत का शीर्ष न्यायिक प्राधिकरण है जिसे भारतीय संविधान के भाग 5 अध्याय 4 के तहत स्थापित किया गया है। भारतीय संघ की अधिकतम और व्यापक न्यायिक अधिकारिता उच्चतम न्यायालय को प्राप्त हैं। भारतीय संविधान के अनुसार उच्चतम न्यायालय की भूमिका संघीय न्यायालय और भारतीय संविधान के संरक्षक की है।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 124 से 147 तक में वर्णित नियम उच्चतम न्यायालय की संरचना और अधिकार क्षेत्रों की नींव हैं। न्यायाधीशों को केवल (महाभियोग) दुर्व्यवहार या असमर्थता के सिद्ध होने पर संसद के दोनों सदनों द्वारा दो-तिहाई बहुमत से पारित प्रस्ताव के आधार पर ही राष्ट्रपति द्वारा हटाया जा सकता है।

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