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भारत तापी गैस पाइपलाइन की अगली स्टीयरिंग कमेटी की बैठक की मेजबानी करेगा

भारत तापी गैस पाइपलाइन की अगली स्टीयरिंग कमेटी की बैठक की मेजबानी करेगा:

भारत प्रस्तावित 1, 814 किलोमीटर लंबी तुर्कमेनिस्तान-अफगानिस्तान-पाकिस्तान-भारत (तापी) गैस पाइपलाइन की अगली स्टीयरिंग कमेटी की बैठक की मेजबानी करेगा, दोनों पक्षों ने इसकी पुष्टि की। यह निर्णय व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग पर छठे संयुक्त अंतर-सरकारी समिति (आईजीसी) की बैठक के दौरान किया गया।

यह बैठक तुर्कमेनिस्तान के उपप्रधान मंत्री और विदेश मंत्री राशिद मेरेदोव और भारत के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के बीच हुई।

तापी गैस परियोजना:

यह गैस पाइपलाइन परियोजना तुर्कमेनिस्तान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और भारत (TAPI) के बीच प्रस्तावित है। यह परियोजना एशियाई विकास बैंक के द्वारा प्रदान किये जा रहे आर्थिक सहयोग से पूरी की जाएगी।

इस परियोजना पर 7.6 अरब डॉलर की लागत आने का अनुमान है, लेकिन परियोजना में देरी होने से इसकी लागत लगातार बढ़ रही है। इस परियोजना में पाइपलाइन की कुल लम्बाई लगभग 1, 814 किलोमीटर है। इसे इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि प्रतिवर्ष 3.2 अरब घन क्यूबिक फीट प्राकृतिक गैस की आपूर्ति इसमें शामिल चारों देशों को की जाएगी।

यह पाइपलाइन तुर्कमेनिस्तान के दौलताबाद गैस क्षेत्र से शुरू होकर अफगानिस्तान के हेरात व कंधार तथा पाकिस्तान के क्वेटा व मुल्तान से होकर भारत में फाजिल्का तक आएगी।

नवंबर, 2014 में भी तुर्कमेनिस्तान की राजधानी अश्काबाद में हुई वार्ता में परियोजना की राह की अधिकांश अड़चनों को दूर करने पर सहमति बन गई थी। चारों देशों के प्रमुख 2010 में ही इस परियोजना पर अंतरसरकारी समझौते पर हस्ताक्षर कर चुके हैं।

तुर्कमेनिस्तान से पाक होते हुए भारत तक बिछाई जाने वाली इस गैस पाइपलाइन परियोजना को अमेरिका का समर्थन प्राप्त है। अमेरिकी सरकार पिछले कई वर्षों से भारत से कहती रही है  कि वह ईरान-पाकिस्तान-भारत गैस पाइपलाइन के बजाय तापी परियोजना में रुचि दिखाए।

तापी पाइपलाइन कंपनी लिमिटेड (टीपीसीएल) में पाकिस्तान की कंपनी इंटरस्टेट गैस सिस्टम्स, तुर्कमेनिस्तान की तुर्कमेंगस, अफगानिस्तान की अफगान गैस एंटरप्राइज और भारतीय कंपनी गेल लिमिटेड की समान हिस्सेदारी है।

टिप्पणी:

यह कदम परियोजना में किसी भी चीनी हित को बंद करने के लिए सरकार द्वारा किया गया एक प्रयास है। यह जानते हुए कि तुर्कमेनिस्तान मध्य एशिया में चीन की बेल्ट और रोड पहल में करीबी साथी है और बीजिंग इस देश से उत्पादित गैस का सबसे बड़ा खरीदार है। यहां तक कि चीनी विकास बैंक (सीडीबी) के ऋण के द्वारा ही गलकिनिश गैस बेसिन विकसित किया जा रहा है। यह गैस फील्ड दुनिया में चौथा सबसे बड़ा गैस फील्ड है।

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