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भूमिगत जल निकालने के लिए संशोधित दिशा-निर्देश अधिसूचित

भूमिगत जल निकालने के लिए संशोधित दिशा-निर्देश अधिसूचित

केन्द्रीय भूमिगत जल प्राधिकरण, जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय ने भूमिगत जल निकालने के लिए 12 दिसंबर, 2018 को संशोधित दिशा-निर्देश अधिसूचित किए हैं। यह दिशा-निर्देश 01 जून, 2019 से प्रभावी होंगे।

यह दिशा-निर्देश नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल (राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण) के विभिन्न दिशा-निर्देशों का पालन करने और भूमिगत जल निकालने के संबंध में वर्तमान दिशा-निर्देशों में मौजूद विभिन्न कमियों को दूर करने के लिए हैं।

संशोधित दिशा-निर्देशों का उद्देश्य देश में एक अधिक मजबूत भूमिगत जल नियामक तंत्र सुनिश्चित करना है।

विशेषता जल संरक्षण शुल्क

संशोधित दिशा-निर्देशों की एक महत्वपूर्ण विशेषता जल संरक्षण शुल्क (डब्ल्यूसीएफ) की अवधारणा शुरू करना है। इस शुल्क का क्षेत्र की श्रेणी, उद्योग के प्रकार और भूमिगत जल निकालने की मात्रा के अनुसार अलग-अलग भुगतान करना होगा।

जल संरक्षण शुल्क की उच्च दरों से उन इलाकों में नए उद्योगों को स्थापित करने से रोकने की कोशिश हो सकेगी जहां जमीन से अत्याधिक मात्रा में पानी निकाला जा चुका है। साथ ही यह उद्योगों द्वारा बड़ी मात्रा में भूमिगत जल निकालने के एक निवारक के रूप में काम करेगा।

इस शुल्क से उद्योगों को पानी के इस्तेमाल के संबंध में उपाय करने और पैक किए हुए पीने के पानी की इकाईयों की वृद्धि को हतोत्साहित किया जा सकेगा।

भारत दुनिया में भूमिगत जल का सबसे बड़ा उपयोगकर्ता है जो हर वर्ष 253 बीसीएम भूमिगत जल निकालता है। यह दुनिया में जमीन से निकाले जाने वाले पानी का करीब 25 प्रतिशत है।

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