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चुनावी बांड (इलेक्टोरल बांड्स) की पहली खेप की बिकी 1 मार्च 2018 से शुरू होगी

चुनावी बांड (इलेक्टोरल बांड्स) की पहली खेप की बिकी 1 मार्च 2018 से शुरू होगी:

चुनावी बांड (इलेक्टोरल बांड्स) की पहली खेप की बिकी 1 से 10 मार्च तक की जाएगी। वित्त मंत्रालय ने यह जानकारी दी। मंत्रालय ने कहा कि इन बांडों को भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की प्राधिकृत शाखाओं से खरीदा जा सकेगा।

सरकार ने इस साल 02 जनवरी 2018 को चुनावी बांड योजना को अधिसूचित किया था। इस योजना के प्रावधानों के तहत कोई भी व्यक्ति जो भारत का नागरिक है या कोई भी ऐसी इकाई जिसकी स्थापना देश में हुई है, चुनावी बांड खरीद सकती है।

प्रमुख तथ्य:

एसबीआई को शुरूआत में अपनी चार प्राधिकृत शाखाओं पर चुनावी बांड जारी करने या उसे भुनाने की अनुमति दी गई है। चार महानगरों नयी दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई स्थित स्टेट बैंक की चार प्रमुख शाखाओं में इस बांडों की बिक्री की जाएगी।

एसबीआई की इन 4 ब्रांच से इंटरेस्‍ट फ्री बॉन्‍ड्स खरीदे जा सकेंगे। ये इलेक्टोरल बॉन्ड 1000, 10000, 1 लाख, 10 लाख और 1 करोड़ रुपये के होंगे। इलेक्‍टोरल बॉन्‍ड में डोनेशन देने वाले का नाम नहीं होगा।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2017-18 के बजट में योजना की घोषणा की थी। इसके तहत सिर्फ ऐसे पंजीकृत राजनीतिक दल जिन्हें पिछले लोकसभा चुनाव या राज्यों के विधानसभा चुनाव में कम से कम एक प्रतिशत मत मिला है, वही चुनावी बांड पाने के पात्र होंगे।

कोई भी पात्र राजनीतिक दल किसी अधिकृत बैंक की शाखा में बैंक खाते के जरिये इसे भुना सकेगा। कोई भी एक व्यक्ति अकेले या संयुक्त रूप से या अन्य लोगों के साथ मिलकर चुनावी बांड खरीद सकता है। चुनावी बांड को राजनीतिक दलों को मिलने वाले नकद चंदे के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।

इससे राजनीतिक चंदे में पारदर्शिता आने की उम्मीद है। जारी किए जाने की तारीख से 15 दिन तक चुनावी बांड वैध होगा। वैधता की अवधि समाप्त होने के बाद किसी राजनीतिक दल को इसके लिए भुगतान नहीं किया जाएगा। राजनीतिक दल जिस दिन अपने खाते में बांड जमा करायेगा उसी दिन ही राशि उनके खाते में डाल दी जाएगी।

पॉलिटिकल फंडिग और राजनीति में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के उद्देश्य के साथ भारत पहला देश होगा, जो इस तरह का बॉन्ड जारी करेगा। कुछ देशों में राजनीतिक पार्टियों का पूरा खर्च सरकार द्वारा वहन किया जाता है जिससे राजनीतिक दलों में भ्रष्टाचार न पनपने पाए।

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