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दैनिक समाचार: जाने चर्चा में क्यों है IMD और अल नीनो

दैनिक समाचार: जाने चर्चा में क्यों है IMD और अल नीनो 

चर्चा में क्योंकि देश की अर्थव्यवस्था और खेती के लिए अच्छी खबर आई है।  भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने 15 अप्रैल को मानसून के बारे में अपना पहला अनुमान जारी किया।

उसने इस साल देश में मानसून सामान्य रहने की उम्मीद जताई है।  उसने कहा है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून लंबी अवधि के औसत का 96 फीसदी रहेगा।  अनाज और दालों का विवरण विस्तार से देखें इसका मतलब है कि इस साल मानसून करीब-करीब सामान्य रहेगा। 

मौसम विभाग ने कहा कि अल नीनो का असर नाममात्र का होगा।  इससे पहले इस साल मानसून सामान्य से कमजोर रहने का अनुमान जताया गया था।  मौसम के बारे में पूर्वानुमान व्यक्त करने वाली निजी एजेंसी स्काईमेट ने सामान्य से कम मानसून का अनुमान जताया था।  उसने लंबी अवधि के औसत (एलपीए) के मुकाबले मानसून 93 फीसदी रहने का अनुमान जताया था। 

एजेंसी ने कहा था कि अल नीनो की आशंका के चलते इस साल मानसून सामान्य से कम रह सकता है।  जून में और 'सटीक' आएगा अनुमान ध्यान रहे कि मौसम विभाग का यह पहला अनुमान है। 

मौसम विभाग का दूसरा अनुमान जून के पहले हफ्ते में आएगा।  माना जाता है कि यह अनुमान हकीकत के काफी नजदीक होता है।

जून में और 'सटीक' आएगा अनुमान

गौरतलब है कि मौसम विभाग का यह पहला अनुमान है। मौसम विभाग का दूसरा अनुमान जून के पहले हफ्ते में आएगा।  माना जाता है कि यह अनुमान हकीकत के काफी नजदीक होता है।

भारत का मौसम विभाग यानी आईएमडी 96 फीसदी से 104 फीसदी के बीच हुई बारिश को औसत या सामान्य मानसून के रूप में परिभाषित करता है।  2017 और 2018 में, क्रमशः 95 फीसदी और 91 फीसदी बारिश हुई थी।  इसका मतलब यह है कि इन दो साल में मानसून सामान्य था। 

आमतौर पर 1 जून के आसपास केरल के रास्ते दक्षिण पश्चिमी मानसून देश में प्रवेश करता है।

4 महीने की बरसात के बाद यानी सितंबर के अंत में राजस्थान के रास्ते मानसून की वापसी होती है। 

भारतीय मौसम विज्ञान

यह विभाग भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत मौसम विज्ञान प्रक्षेण, मौसम पूर्वानुमान और भूकम्प विज्ञान का कार्यभार संभालने वाली सर्वप्रमुख एजेंसी है। मौसम विज्ञान विभाग का मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।

अल नीनो

ऊष्ण कटिबंधीय प्रशांत के भूमध्यीय क्षेत्र के समुद्र के तापमान और वायुमंडलीय परिस्थितियों में आये बदलाव के लिए उत्तरदायी समुद्री घटना को एल नीनो (अल नीनो या अल निनो) कहा जाता है।

यह दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तट पर स्थित ईक्वाडोर और पेरु देशों के तटीय समुद्री जल में कुछ सालों के अंतराल पर घटित होती है।

इससे परिणाम स्वरूप समुद्र के सतही जल का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है।

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