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डोनल्ड ट्रंप ने गोलन पहाड़ियों को इसराइली इलाक़े के रूप में मान्यता दी

डोनल्ड ट्रंप ने गोलन पहाड़ियों को इसराइली इलाक़े के रूप में मान्यता दी

आलोचकों ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के रणनीतिक ‘गोलन हाइट्स’ पर इज़राइल की संप्रभुता को मान्यता देने के समय पर सवाल उठाए हैं जबकि गौरतलब है कि वहां कुछ सप्ताह में ही चुनाव होने वाले हैं।

ट्रम्प ने 21 मार्च को एक ट्वीट में कहा था, ‘‘ 52 वर्ष बाद अमेरिका के ‘गोलन हाइट्स’ पर इज़राइल की संप्रभुता को मान्यता देने का समय आ गया है, जो कि इज़राइल और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण रणनीतिक एवं सुरक्षा के लिहाज से अहम है।’’

इसराइल ने 1981 में इस इलाक़े पर अपना दावा बताते हुए गोलन पहाड़ियों में अपना प्रशासन और क़ानून लागू किया था, लेकिन दुनियाभर के देशों ने इसे मान्यता नहीं दी थी।

ट्रम्प ने ऐसे समय में यह घोषणा की है जब नौ अप्रैल को होने वाले आम चुनाव में इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को बड़ी टक्कर का सामना करना पड़ेगा। नेतन्याहू पर भ्रष्टाचार के कई आरोप भी लगे हैं।

गोलन हाइट्स

गोलन हाइट्स मध्य पूर्व के लेवेंत में एक विवादित क्षेत्र है , यह लगभग 1,800 वर्ग किलोमीटर (690 वर्ग मील) फैला हुआ है।

1967 में सीरिया के साथ युद्ध के दौरान इसराइल ने गोलन पहाड़ियों को अपने क़ब्जे़ में ले लिया था. तभी से दोनों देशों के बीच इस इलाक़े को लेकर विवाद चला आ रहा है।

यह भी पढ़े : इसराइल और अरब में संघर्ष

अरब और इसराइल के संघर्ष की छाया मोरक्को से लेकर पूरे खाड़ी क्षेत्र पर है। इस संघर्ष का इतिहास काफ़ी पुराना है। 14 मई 1948 को पहला यहूदी देश इसराइल अस्तित्व में आया।

यहूदियों और अरबों ने एक-दूसरे पर हमले शुरू कर दिए, लेकिन यहूदियों के हमलों से फ़लस्तीनियों के पाँव उखड़ गए और हज़ारों लोग जान बचाने के लिए लेबनान और मिस्र भाग खड़े हुए।

1948 में इसराइल के गठन के बाद से ही अरब देश इसराइल को जवाब देना चाहते थे।

जनवरी 1964 में अरब देशों ने फ़लस्तीनी लिबरेशन ऑर्गनाइज़ेशन, पीएलओ नामक संगठन की स्थापना की। 1969 में यासिर अराफ़ात ने इस संगठन की बागडोर संभाल ली। इसके पहले अराफ़ात ने 'फ़तह' नामक संगठन बनाया था जो इसराइल के विरुद्ध हमले कर काफ़ी चर्चा में आ चुका था।

यह युद्ध 5 जून से 11 जून 1967 तक चला और इस दौरान मध्य-पूर्व संघर्ष का स्वरूप बदल गया। इसराइल ने मिस्र को ग़ज़ा से, सीरिया को गोलन पहाड़ियों से और जॉर्डन को पश्चिमी तट और पूर्वी येरुशलम से धकेल दिया। इसके कारण पाँच लाख और फ़लस्तीनी बेघर हो गए थे।

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