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ई-कचरा प्रबंधन और इससे जुड़े कानून

ई-कचरा प्रबंधन और इससे जुड़े कानून:

हाल के वर्षों में भारत ने प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने के प्रयासों की ओर अत्यधिक ध्यान दिया है। इस वर्ष के विश्व पर्यावरण दिवस में प्लास्टिक प्रदूषण केंद्र में रहा था। हालाँकि, अगर देखा जाय तो ई-कचरा सबसे खतरनाक प्रकार के अपशिष्टों में से एक है, क्यूंकि इसमें भारी धातुएं और अन्य जहरीले प्रकार के रसायन होते हैं।

समस्या:

भारत वर्ष 2015 में जेनरेट हुए 1.5 मिलियन टन ई-कचरे के साथ दुनिया में मोबाइल फोन के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में से एक है। ज्यादातर उपभोक्ता अभी भी अपने ई-कचरे का निपटान करने के तरीकों के बारे में अनजान हैं।

अधिकांश भारतीय अनौपचारिक क्षेत्र में अपना ई-कचरा बेचते हैं, जो इसमें से लाभप्रद धातुएं एवं अन्य वस्तुएं निकालने के प्रयास में मानव (बच्चों के) जीवन के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है।

इलेक्ट्रॉनिक चीज़ों को बनाने में काम आने वाली सामग्रियों में ज़्यादातर कैडमियम, निकेल, क्रोमियम, एंटीमोनी, आर्सेनिक, बेरिलियम और पारे का इस्तेमाल किया जाता है। ये सभी पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिये घातक हैं।

ई-कचरा प्रबंधन कानून:

सरकार ने विस्तारित निर्माता उत्तरदायित्व (ईपीआर) के आधार पर वर्ष 2011 में ई-कचरा प्रबंधन पर पहला कानून पारित किया था। इस कानून में उत्पाद के जीवन के अंतिम चरणों के प्रबंधन के लिए निर्माता पर जोर दिया गया था।

अक्तूबर 2016 से ई-कचरा प्रबंधन नियम, 2016 प्रभाव में आए। ये नियम प्रत्येक निर्माता, उत्पादनकर्त्ता, उपभोक्ता, विक्रेता, अपशिष्ट संग्रहकर्त्ता, उपचारकर्त्ता व उपयोगकर्त्ताओं आदि सभी पर लागू होंगे। नियम के दायरे में 21 से अधिक उत्पाद (अनुसूची -1) शामिल किए गए।

अनौपचारिक क्षेत्र को औपचारिक रूप दिया जाएगा और श्रमिकों को ई-कचरे को संभालने के लिये प्रशिक्षित किया जाएगा, न कि उसमें से कीमती धातुओं को निकालने के बाद।

ई-कचरा संग्रहण के नए निधार्रित लक्ष्‍य 1 अक्‍तूबर, 2017 से प्रभावी माने जाएंगे। विभिन्‍न चरणों में ई-कचरे का संग्रहण लक्ष्‍य 2017-18 के दौरान उत्‍पन्‍न किये गए कचरे के वजन का 10 प्रतिशत होगा जो 2023 तक प्रतिवर्ष 10 प्रतिशत के हिसाब से बढ़ता जाएगा। वर्ष 2023 के बाद यह लक्ष्‍य कुल उत्‍पन्‍न कचरे का 70 प्रतिशत हो जाएगा।

यदि किसी उत्‍पादक के बिक्री परिचालन के वर्ष उसके उत्‍पादों के औसत आयु से कम होंगे तो ऐसे नए ई-उत्‍पादकों के लिये ई-कचरा संग्रहण हेतु अलग लक्ष्‍य निर्धारित किये जाएंगे। उत्‍पादों की औसत आयु समय-समय पर केन्‍द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा निर्धारित की जाएगी।

हानिकारक पदार्थों से संबधित व्‍यवस्‍थाओं में आरओएच के तहत ऐसे उत्‍पादों की जाँच का खर्च सरकार वहन करेगी यदि उत्‍पाद आरओएच की व्‍यवस्‍थाओं के अनुरूप नहीं हुए तो उस हालत में जाँच का खर्च उत्‍पादक को वहन करना होगा।

उत्‍पादक जवाबदेही संगठनों को नए नियमों के तहत कामकाज करने के लिये खुद को पंजीकृत कराने हेतु केन्‍द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के समक्ष आवेदन करना होगा। मार्च, 2018 को अधिसूचना जीएसआर 261 (ई) के तहत ई-वेस्ट प्रबंधन नियम 2016 को संशोधित किया गया है।

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