Bookmark Bookmark

IAS मुख्य परीक्षा GS पेपर-4 के 10 महत्वपूर्ण टॉपिक्स | शासन प्रबंध में नैतिकता

IAS मुख्य परीक्षा GS पेपर-4 के 10 महत्वपूर्ण टॉपिक्स | शासन प्रबंध में नैतिकता- संघ लोक सेवा आयोग अक्टूबर के महीने में सिविल सेवा मुख्य परीक्षा का आयोजन करेगा। इस परीक्षा का उद्देश्य एक छात्र को परखने से है जो शासन, संविधान, राजनीति, सामाजिक न्याय और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों की समझ के आधार से संबंधित है। समस्या यह है कि चाहे कितनी ही अच्छी तैयारी कर ली जाए और भले ही कितना ज्ञान अर्जित कर लिया जाए फिर भी परीक्षा को लेकर हमेशा अनिश्चितता का भय रहता ही है। इस डर पर काबू पाने के लिए  IAS मुख्य परीक्षा के GS पेपर-4 के लिए 10 महत्वपूर्ण टॉपिक्स आपसे साझा कर रहे हैं, जिससे आप इन टॉपिक्स पर अपनी पकड़ मजबूत कर पाएं और आप परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।

इस प्रश्न-पत्र में ऐसे प्रश्न शामिल होंगे जो सार्वजनिक जीवन में उम्मीदवारों की सत्यनिष्ठा, ईमानदारी से संबंधित विषयों के प्रति उनकी अभिवृत्ति तथा उनके दृष्टिकोण तथा समाज से आचार-व्यवहार में विभिन्न मुद्दों तथा सामने आने वाली समस्याओं के समाधान को लेकर उनकी मनोवृत्ति का परीक्षण करेंगे। इन आयामों का निर्धारण करने के लिये प्रश्न-पत्र में किसी मामले के अध्ययन (केस स्टडी) का माध्यम भी चुना जा सकता है। आज का टॉपिक मानव जीवों में नैतिक मूल्य और उनका शासन प्रबंधन में उपयोगिता से संदर्भित है।

 

IAS मुख्य परीक्षा GS पेपर-4 के 10 महत्वपूर्ण टॉपिक्स | शासन प्रबंध में नैतिकता 

प्रश्न: मानव जीवन में नैतिकता क्या बढ़ावा देता है? सार्वजनिक रूप से शासन प्रबंध में यह क्यों अधिक महत्वपूर्ण है?
उत्तर: नैतिकता मनुष्य के सम्यक जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है. इसके अभाव में मानव का सामूहिक जीवन कठिन हो जाता है। नैतिकता से उत्पन्न नैतिक मूल्य मानव की ही विशेषता है। नैतिक मूल्य ही व्यक्ति को मानव होने की श्रेणी प्रदान करते हैं। इनके आधार पर ही मनुष्य सामाजिक जानवर से ऊपर उठ कर नैतिक अथवा मानवीय प्राणी कहलाता है। अच्छा-बुरा, सही गलत के मापदण्ड पर ही व्यक्ति, वस्तु, व्यवहार व घटना की परख की जाती है। ये मानदंड ही मूल्य कहलाते हैं। और भारतीय परम्परा में ये मूल्य ही धर्म कहलाता है अर्थात ‘धर्म’ उन शाश्वत मूल्यों का नाम है जिनकी मन, वचन, कर्म की सत्य अभिव्यक्ति से ही मनुष्य मनुष्य कहलाता है अन्यथा उसमें और पशु में भला क्या अंतर? धर्म का अभिप्राय है मानवोचित आचरण संहिता। यह आचरण संहिता ही नैतिकता है और इस नैतिकता के मापदंड ही नैतिक मूल्य हैं। नैतिक मूल्यों के अभाव में कोई भी व्यक्ति, समाज या देश निश्चित रूप से पतनोन्मुख हो जायेगा। नैतिक मूल्य मनुष्य के विवेक में स्थित, आंतरिक व अंतः र्स्फूत तत्त्व हैं जो व्यक्ति के व्यक्तित्व के विकास में आधार का कार्य करते हैं।

नैतिक मूल्यों का विस्तार व्यक्ति से विश्व तक, जीवन के सभी क्षेत्रों में होता है. व्यक्ति-परिवार, समुदाय, समाज, राष्ट्र से मानवता तक नैतिक मूल्यों की यात्रा होती है। नैतिक मूल्यों के महत्त्व को व्यक्ति समाज राष्ट्र व विश्व की दृष्टियों से देखा समझा जा सकता है। समाजिक जीवन में तेज़ी से हो रहे परिवर्तन के कारण उत्पन्न समस्याओं की चुनौतियों से निपटने के लिए और नवीन व प्राचीन के मध्य स्वस्थ अंतः क्रिया को सम्भव बनाने में नैतिक मूल्य सेतु-हेतु का कार्य करते हैं। नैतिक मूल्यों के कारण ही समाज में संगठनकारी शक्तियां व प्रक्रिया गति पाती हैं और विघटनकारी शक्तियों का क्षय होता है।

नैतिकता समाज सामाजिक जीवन के सुगम बनाती है और समाज में अप्रत्यक्ष रूप से नियंत्रण रखती है। समाज राष्ट्र में एकीकरण और अस्मिता की रक्षा नैतिकता के अभाव में नहीं हो सकती है। विश्व बंधुत्व की भावना, मानवतावाद, समता भाव, प्रेम और त्याग जैसे नैतिक गुणों के अभाव में विश्व शांति, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, मैत्री आदि की कल्पना भी नहीं की जा सकती।
हमारे समाज में नीतिशास्त्र की भूमिका अत्यधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह मूल आस्था/धारणा एवं मानक है, जो सभी को बेहतर गतिशील बनाते हैं। नीतिशास्त्र का बोध ऐसे वातावरण के सृजन में सहायता करता है, जिसमें हम यह विश्वास रखते हैं कि नैतिकता का कम से कम कुछ बुनियादी स्तर तो सुनिश्चित है। उदाहरण के लिए चूंकि हम अपने डॉक्टरों पर विश्वास करते हैं इसलिए हम यह निसंदेह मानते हैं कि हम उनके उपचार पर विश्वास कर सकते हैं। नीतिशास्त्र के पतन के परिणामस्वरूप सार्वभौमिक अविश्वास/संदेह का जो वातावरण बनेगा वह संपूर्ण मानवता को ऐसे खतरनाक पड़ाव पर ला देगा जहां कभी भी कोई व्यवसाय संभव नहीं होगा।

प्रत्येक समाज में व्यवस्था बनाये रखने के लिये कोई न कोई निकाय या संस्था होती है, चाहे उसे नगर-राज्य कहें अथवा राष्ट्र-राज्य। राज्य, सरकार और प्रशासन के माध्यम से कार्य करता है। राज्य के उद्देश्य और नीतियाँ कितनी भी प्रभावशाली, आकर्षक और उपयोगी क्यों नहों, उनसे उस समय तक कोई लाभ नहीं हो सकता, जब तक कि उनको प्रशासन के द्वारा कार्य रूप में परिणत नहीं किया जाये। इसलिये प्रशासन के संगठन, व्यवहार और प्रक्रियाओं का अध्ययन करना आवश्यक हो जाता है।
चार्ल्सबियर्ड ने कहा है कि “कोई भी विषय इतना अधिक महत्त्वपूर्ण नहीं है जितना कि प्रशासन है। राज्य एवं सरकार का, यहाँ तक कि, स्वयं सभ्यता का भविष्य, सभ्य समाज के कार्यों का निष्पादन करने में सक्षम प्रशासन के विज्ञान, दर्शन और कला के विकास करने की हमारी योग्यता पर निर्भर है।”
डॉनहम ने विश्वासपूर्वक बताया कि “यदि हमारी सभ्यता असफल होगी तो यह मुख्यतः प्रशासन की असफलता के कारण होगा।”
ज्यों-ज्यों राज्य के स्वरूप और गतिविधियों का विस्तार होता गया है, त्यों-त्यों प्रशासन का महत्त्व बढ़ता गया है। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं है कि हम प्रशासन की गोद में पैदा होते हैं, पलते है, बड़े होते हैं, मित्रता करते, एवं टकराते हैं और मर जाते हैं। आज की बढ़ती हुई जटिलताओं का सामना करने में, व्यक्ति एवं समुदाय, अपनी सीमित क्षमताओं और साधनों के कारण, स्वयं को असमर्थ पाते हैं। चाहे अकाल, बाढ़, युद्ध या किसी रोग की रोकथाम करने की समस्या हो अथवा अज्ञान, शोषण, असमानता या भ्रष्टाचार को मिटानेका प्रश्न हो, प्रशासन की सहायता के बिना अधिक कुछ नहीं किया जा सकता। स्थिति यह है कि प्रशासन के अभाव में हमारा अपना जीवन, मृत्यु के समान भयावह और टूटे तारे के समान असहाय लगता है। हम उसे अपने वर्तमान का ही सहारा नहीं समझते, वरन् एक नयी सभ्यता, संस्कृति, व्यवस्था और विश्व के निर्माण का आधार मानते हैं। हमें अपना भविष्य प्रशासन के हाथों में सौंप देने में अधिक संकोच नहीं होता।
टीड के अनुसार - “प्रशासन वांछित परिणाम की प्राप्ति के लिये मानव प्रयासों के एकीकरण की समावेशी प्रक्रिया है।”
किन्तु जब प्रशासन के अंतर्गत केवल सार्वजनिक नीतियों अथवा लोकनीतियों के क्रियान्वयन से संबंधित प्रशासन की बात करते हैं तो इसे “सार्वजनिक प्रशासन” या ‘लोकप्रशासन’ कहा गया है। यहीं लोकप्रशासन सामान्य “प्रशासन” से पृथक् एवं विशिष्ट हो जाता है

OnlineTyari टीम द्वारा दिए जा रहे उत्तर UPSC की सिविल सेवा परीक्षा (IAS परीक्षा) के मानक उत्तर न होकर सिर्फ एक प्रारूप हैं। जिससे अभ्यर्थी उत्तर लेखन की रणनीति से अवगत हो सकेगा। वह उत्तर में निर्धारित समयसीमा में कलेवर को समेटने और समय प्रबंधन की रणनीति से परिचय पा सकेगा। जिससे वह सम्पूर्ण परीक्षा को समयसीमा में हल करने में समर्थ होगा।

IAS परीक्षा 2017 के बारे में और अधिक जानकारी के लिए हमसे जुड़े रहें। अगर अभी भी आपके मन में किसी प्रकार की कोई शंका या कोई प्रश्न है तो कृपया नीचे दिए गए कॉमेंट सेक्शन में उसका ज़िक्र करें और बेहतर प्रतिक्रिया के लिए OnlineTyari Community पर अपने प्रश्नों को हमसे साझा करें।

You might be interested:

मॉर्निंग न्यूज़ डाइजेस्ट: 19 अगस्त 2017

चम्बा जिले में मणिमहेश यात्रा शुरू हुयी: हिमाचल प्रदेश में, चंम्बा जिले में ऐतिहासिक दिन मणिमह ...

एक साल पहले

विश्व मानवतावादी दिवस: 19 अगस्त

विश्व मानवतावादी दिवस: 19 अगस्त 19 अगस्त को संपूर्ण विश्व में ‘विश्व मानवतावादी दिवस’ (World Humanitarian Da ...

एक साल पहले

आधुनिक सेब का जन्म कजाखस्तान में हुआ: अध्ययन

आधुनिक सेब का जन्म कजाखस्तान में हुआ: अध्ययन आधुनिक रसदार, कुरकुरे सेब का जन्म कजाखस्तान के एक प ...

एक साल पहले

IB ACIO परीक्षा पाठ्यक्रम 2017: अनुभागवार विषय विवरण

IB ACIO परीक्षा पाठ्यक्रम 2017: अनुभागवार विषय विवरण- इंटेलिजेंस ब्यूरो ने IB (गृह मंत्रालय),  भारत सर ...

एक साल पहले

इवनिंग न्यूज़ डाइजेस्ट: 18 अगस्त 2017

विशाल सिक्का ने इन्फोसिस के सीईओ और एमडी पद से इस्तीफा दिया: विशाल सिक्का ने इन्फोसिस के एमडी औ ...

एक साल पहले

Vocab Express (शब्दावली एक्सप्रेस)- 273

Vocab Express (शब्दावली एक्सप्रेस)- 273 प्रिय उम्मीदवार, आपकी शब्दावली को बढ़ाने के लिए यहां 5 नए शब्द ...

एक साल पहले

Provide your feedback on this article: