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IAS मुख्य परीक्षा GS पेपर-4 के 10 महत्वपूर्ण टॉपिक्स | केस स्टडी (ससुराल पक्ष और लड़के की चाह)

IAS मुख्य परीक्षा GS पेपर-4 के 10 महत्वपूर्ण टॉपिक्स | केस स्टडी (ससुराल पक्ष और लड़के की चाह)- संघ लोक सेवा आयोग अक्टूबर के महीने में सिविल सेवा मुख्य परीक्षा का आयोजन करेगा। इस परीक्षा का उद्देश्य एक छात्र को परखने से है जो शासन, संविधान, राजनीति, सामाजिक न्याय और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों की समझ के आधार से संबंधित है। समस्या यह है कि चाहे कितनी ही अच्छी तैयारी कर ली जाए और भले ही कितना ज्ञान अर्जित कर लिया जाए फिर भी परीक्षा को लेकर हमेशा अनिश्चितता का भय रहता ही है। इस डर पर काबू पाने के लिए  IAS मुख्य परीक्षा के GS पेपर-4 के लिए 10 महत्वपूर्ण टॉपिक्स आपसे साझा कर रहे हैं, जिससे आप इन टॉपिक्स पर अपनी पकड़ मजबूत कर पाएं और आप परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।

इस प्रश्न-पत्र में ऐसे प्रश्न शामिल होंगे जो सार्वजनिक जीवन में उम्मीदवारों की सत्यनिष्ठा, ईमानदारी से संबंधित विषयों के प्रति उनकी अभिवृत्ति तथा उनके दृष्टिकोण तथा समाज से आचार-व्यवहार में विभिन्न मुद्दों तथा सामने आने वाली समस्याओं के समाधान को लेकर उनकी मनोवृत्ति का परीक्षण करेंगे। इन आयामों का निर्धारण करने के लिये प्रश्न-पत्र में किसी मामले के अध्ययन (केस स्टडी) का माध्यम भी चुना जा सकता है। आज का प्रश्न हमने केस स्टडी के तहत 'ससुराल पक्ष और लड़के की चाह' से संदर्भित रखा है।

 

IAS मुख्य परीक्षा GS पेपर-4 के 10 महत्वपूर्ण टॉपिक्स | केस स्टडी (ससुराल पक्ष और लड़के की चाह)

प्रश्न: आप एक निजी अस्पताल में बतौर चिकित्सक कार्यरत हैं। आपके चिकित्सालय की हालत ठीक नहीं चल रही है और अस्पताल प्रशासन लगातार चिकित्सकों पर चिकित्सालय को लाभ की स्थिति में लाने का दबाव बना रही है। ऐसे में एक दिन आपके पास एक गर्भवती महिला आती है अनुरोध करती है कि उसे ऐसी दवा दें जिससे उसका गर्भपात हो जाए। आप उससे सरकारी नियमों का हवाला देते हुए माना करते हैं तो वह महिला आपको अपनी स्थिति बताते हुए कहती है कि उसके पहले से ही तीन बेटियाँ हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति भी अच्छी नहीं है। लेकिन फिर भी पति और ससुराल के अन्य लोगों की ‘लड़के’ की चाह के कारण लगातर प्रताड़ित किए जाने के कारण वह पुनः गर्भवती हुई। तीन माह के गर्भ पर जब उसने व उसके पति ने एक अन्य निजी अस्पताल में पैसे देकर भ्रूण लिंग जाँच कराई तब पता चला कि उसके गर्भ में जुड़वाँ लड़कियाँ हैं। वह पहले से ही तीन लड़कियों का लालन-पालन भी अच्छे से नहीं कर पा रही है। अब यदि जुड़वाँ लड़कियाँ और हो गई तो ससुरालवाले तो जीना दूभर करेंगे ही, लड़कियों की जिन्दगी भी खराब होनी निश्चित है। इसीलिये महिला ने गर्भपात का फैसला लिया है।
(क) इस केस-स्टडी में कौन-कौन से नैतिक मुद्दे निहित हैं?
(ख) एक चिकित्सक के तौर पर आप नैतिकतः क्या फैसला लेंगे??

उत्तर: (क) उपरोक्त केस-स्टडी में निम्नलिखित नैतिक मुद्दे निहित हैं-
(i) लैंगिक विभेद : समाज में अब भी लड़कों को लड़कियों के मुकाबले अत्यधिक वरीयता दी जाती है। अतः ससुराल पक्ष द्वारा ‘लड़के’ की चाह में ही उक्त महिला तीन लड़कियों की माँ होते हुए भी पुनः गर्भवती हुई।
(ii) घरेलु हिंसा : लड़के की चाह के कारण महिला को लगातार प्रताड़ित किए जाने की बात भी सामने आई है। जो घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम, 2005 के तहत अपराध की श्रेणी में भी आता है।
(iii) महिला और उसके पति ने गैर-कानूनी तरीके से भ्रूण-लिंग जाँच कराई, जो PCPNDT Act के तहत एक गंभीर अपराध है।
(iv) MTP Act, 1971 (Medical Termination of Pregnancy Act, 1971) के तहत बिना मजबूत आधारों (भ्रूण में आनुवांशिक समस्या या गर्भवती के जीवन की सुरक्षा) के गर्भपात को स्वीकृति नहीं दी जा सकती। ऐसा करना अपराध है। इसीलिये महज गरीबी की पृष्ठभूमि और गर्भ में कन्या-भ्रूण की उपस्थिति के तर्क पर तो किसी भी कीमत पर गर्भपात की अनुमति नहीं दी जा सकती।
(v) निजी अस्पतालों के चिकित्सकों द्वारा धन के लालच में अवैध तरीके से भ्रूण-जाँच करना तथा गर्भपात करना।
(vi) सरकार द्वारा आज तक जनता में इतनी सामाजिक चेतना न जागृत कर पाना कि लड़का और लड़की में विभेद अनैतिक व अप्रगतिशील सोच है, सरकार की विफलता है। साथ ही लड़कियों की शिक्षा, स्वास्थ्य एवं भविष्य की सुनिश्चितता हेतु जो कार्यक्रम और नीतियाँ है, उनके बारे में जनता में जागरूकता न होना भी चिंतित करता है।

(ख) एक चिकित्सक के तौर पर ‘हिपोक्रेटिक ओथ’ का साक्षी मैं ऐसी स्थिति में महिला को समझाऊँगा (Persuasion) कि उसके द्वारा भ्रूण का लिंग जाँच कराना तो कानून अपराध था ही, अब कन्या-भ्रूण के आधार पर गर्भपात कराना भी एक जुर्म है। दूसरा, यदि वह मेरे अतिरिक्त भी किसी अन्य से गर्भपात की दवा लेती है तो मौजूदा गर्भावधि में उसके जीवन को भी खतरा है।
एक चिकित्सक का कर्त्तव्य लोगों के स्वास्थ्य एवं जीवन की सुरक्षा करना होता है। मैं उस महिला को पुनः समझाता कि यदि उसके गर्भ में तीन लड़कियों की बजाय तीन लड़के होते, तब उन लड़कों का भरण-पोषण वो जैसे करते, वैसे ही इन लड़कियों का भी पालन-पोषण हो जाएगा। साथ ही, मैं उस महिला के पति और परिवार की भी कांउसिलिंग करता तथा उसे सरकार द्वारा लड़कियों की शिक्षा, स्वास्थ्य व आर्थिक सुरक्षा हेतु चलाई गई विभिन्न योजनाओं यथा- ‘सुकन्या समृद्धि योजना’, ‘किशोरी शक्ति योजना’, ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ आदि के संदर्भ में विस्तार से बताता तथा उसे लड़कियों के भविष्य के प्रति निश्चिंत करने का प्रयास करता। उसे विभिन्न उदाहरणों से समझाता कि किस प्रकार विश्वभर में लड़कियाँ लड़कों से ज्यादा उपलब्धियाँ हासिल कर रही हैं।
क्योंकि इस मुद्दे में घरेलु हिंसा की तस्वीर भी उभर रही है अतः महिला से घर में होने वाली हिंसा के विषय में जानने का प्रयास करता यदि हिंसा सामान्य है तो राज्य सरकार द्वारा जिले में नियुक्त स्वयंसेवी संस्था को सूचित करता ताकि उसके परिवार को परामर्श दिया जा सके और सुरक्षा अधिकारी (संरक्षण अधिकारी) के पास रिपोर्ट दर्ज की जा सके। और यदि हिंसा का स्तर सामान्य से अधिक है तो पुलिस को भी इस सन्दर्भ का संज्ञान देता।
मैं उक्त महिला और उसके पति और उसके परिवार को प्रेरित करता ताकि वह महिला उन लड़कियों को जन्म भी दे और उनसे लगाव भी रखे।

OnlineTyari टीम द्वारा दिए जा रहे उत्तर UPSC की सिविल सेवा परीक्षा (IAS परीक्षा) के मानक उत्तर न होकर सिर्फ एक प्रारूप हैं। जिससे अभ्यर्थी उत्तर लेखन की रणनीति से अवगत हो सकेगा। वह उत्तर में निर्धारित समयसीमा में कलेवर को समेटने और समय प्रबंधन की रणनीति से परिचय पा सकेगा। जिससे वह सम्पूर्ण परीक्षा को समयसीमा में हल करने में समर्थ होगा।

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