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IAS मुख्य परीक्षा GS पेपर-1 के 10 महत्वपूर्ण टॉपिक्स | वनाग्नि एवं आर्थिक क्षति

IAS मुख्य परीक्षा GS पेपर-1 के 10 महत्वपूर्ण टॉपिक्स | वनाग्नि एवं आर्थिक क्षति - IAS मुख्य परीक्षा 2017  के लिए उत्तर लेखन के अभ्यास से बहुत मदद मिलती है। इससे पता चल जाता है कि कैसे अपने समय को विभिन्न प्रश्नों के लिए वितरित किया जाए और कैसे बिंदुओं पर प्रकाश डाला जाए, जिससे अधिक अंक प्राप्त किये जा सकें।

उत्तर-लेखन प्रक्रिया का सबसे पहला चरण यही है कि उम्मीदवार प्रश्न को कितने सटीक तरीके से समझता है तथा उसमें छिपे विभिन्न उप-प्रश्नों तथा उनके पारस्परिक संबंधों को कैसे परिभाषित करता है? सच तो यह है कि आधे से अधिक अभ्यर्थी इस पहले चरण में ही गंभीर गलतियाँ कर बैठते हैं। अतः इससे बचने की जरुरत है।

 

IAS मुख्य परीक्षा GS पेपर-1 के 10 महत्वपूर्ण टॉपिक्स | वनाग्नि एवं आर्थिक क्षति !

प्रश्न :  वनों में लगी आग उस क्षेत्र विशेष की परिस्थितिकी के साथ-साथ अर्थव्यवस्था को भी व्यापक स्तर पर क्षति पहुँचाती है। समालोचनात्मक मूल्यांकन करें।

उत्तर- भारत उन कुछ देशों में से एक है जो जैव विविधता की दृष्टि से धनी हैं। भारतीय वन सर्वे, 2015 के अनुसार भारत के कुल भाग का 7,01,673 वर्ग किलोमीटर वनों से आच्छादित है। देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 21.34 प्रतिशत भाग वन क्षेत्र है। यहाँ की विविधतापूर्ण जलवायु और भौगोलिक स्थितियों के कारण भारतीय वनों में जैव विविधता की समृद्धता है। भारत की वनस्पतियाँ अंडमान व निकोबार द्वीपसमूहों के उष्ण कटिबंधीय सदाबहार वनों एवं सूखे अल्पाइन हिमालयी वनों में भिन्न-भिन्न प्रकार की है। शीतोष्ण क्षेत्र की विशेषता के साथ पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र कश्मीर से कुमाऊं तक फैले वन क्षेत्र में सुंदर देवदार, चीड़, बांज, शंकूधारी चौड़ी पत्ती वाले वृक्षों की अधिकता है। इस क्षेत्र के अधिक ऊँचाई वाले स्थान को अल्पाइन क्षेत्र कहते हैं, जो शीतोष्ण क्षेत्र की ऊपरी सीमा 4,750 मीटर से अधिक ऊँचाई तक जाता है। इस क्षेत्र की विशेषता में पाये जाने वाले वृक्ष सिल्वर फरी, बिर्च, ज्यूपिनर और बौना विलो प्रमुख हैं।

जंगल की आग (वनाग्नि) वन और वनवासी समुदायों के लिये प्रमुख खतरा है। यह बहुत विनाशकारी हो सकता है, इससे, प्राकृतिक सम्पदा, सम्पत्ति और मानव जीवन का भी नाश हो रहा है।  कुछ वर्षों से वनों में वनाग्नि की घटनाओं में काफी वृद्धि हुई है। शीतोष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में इन घटनाओं की आवृत्ति एवं तीव्रता बढ़ी है। ऐसा नहीं है कि पहले वनों में आग नहीं लगती थी, ऐसी घटनाएँ सदियों पहले भी होती रही हैं परंतु तब उनका कारण अधिकांशतः प्राकृतिक कारक ही थे, यथा- बिजली गिरना, पेड़ की सूखी डालियों या पत्तियों के मध्य घर्षण, तापमान की अधिकता, पेड़-पौधों में शुष्कता आदि। परंतु, वर्तमान में वनों में अतिशय मानवीय अतिक्रमण/हस्तक्षेप ने वनों में लगने वाली आग की बारम्बारता को बढ़ाया है। विभिन्न प्रकार के मानवीय क्रियाकलापों-पशुचारण, झूम खेती, बिजली की तारों का वनों से होकर गुजरना तथा वनों में लोगों का धुम्रपान करना आदि से ऐसी घटनाओं में वृद्धि हुई है।

वनों में आग लगने से पारिस्थितिकी पर पड़ने वाले प्रभावः

  • वनों की जैव विविधता की हानि।
  • वनों के क्षेत्र विशेष एवं आस-पास के क्षेत्र में प्रदूषण की समस्या बढ़ जाना।
  • मृदा की उर्वरता खत्म हो जाना।
  • वैश्विक तापन में सहायक गैसों का अत्यधिक उत्सर्जन होना।
  • खाद्य श्रृंखला का असंतुलित हो जाना।

वनों में आग लगने से क्षेत्र विशेष की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभावः

  • वनों के आस-पास रहने वाले जिन आदिवासियों व लोगों की आजीविका वनोत्पादों पर निर्भर होती है, उनका आजीविकाविहीन हो जाना।
  • वनों पर आधारित उद्योगों एवं रोजगार की हानि।
  • वनों पर आधारित पर्यटन उद्योग को नुकसान।
  • वनों की कीमती लकड़ियों की हानि।
  • वनों में उपस्थित औषधी गुणों से युक्त वनस्पतियों की क्षति।

निश्चित तौर पर वनों में लगी आग से उन क्षेत्र विशेषों का भौगोलिक, आर्थिक एवं सामाजिक परिवेश व्यापक स्तर पर प्रभावित होता है। अतः इन घटनाओं को न्यूनतम किये जाने के गंभीर प्रयास किये जाने चाहियें। आपदा प्रबंधन के समुचित उपायों के साथ-साथ ‘आग के प्रति संवेदनशील वन क्षेत्र एवं मौसम’ में वनों में मानवीय क्रियाकलापों को बंद या न्यूनतम किया जाना चाहिये तथा संवेदनशील क्षेत्रों में आधुनिकतम तकनीकों से युक्त संसाधनों के साथ पर्याप्त आपदा प्रबंधन बल की तैनाती रहनी चाहिये।‘‘आग एक अच्छी सेवक है परन्तु बुरी मालिक साबित होती है’’ का कथन वनाग्नि के लिये सही है।

OnlineTyari टीम द्वारा दिए जा रहे उत्तर UPSC की सिविल सेवा परीक्षा (IAS परीक्षा) के मानक उत्तर न होकर सिर्फ एक प्रारूप हैं। जिससे अभ्यर्थी उत्तर लेखन की रणनीति से अवगत हो सकेगा। वह उत्तर में निर्धारित समयसीमा में कलेवर को समेटने और समय प्रबंधन की रणनीति से परिचय पा सकेगा। जिससे वह सम्पूर्ण परीक्षा को समयसीमा में हल करने में समर्थ होगा। 

IAS परीक्षा 2017 के बारे में और अधिक जानकारी के लिए हमसे जुड़े रहें। अगर अभी भी आपके मन में किसी प्रकार की कोई शंका या कोई प्रश्न है तो कृपया नीचे दिए गए कॉमेंट सेक्शन में उसका ज़िक्र करें और बेहतर प्रतिक्रिया के लिए OnlineTyari Community पर अपने प्रश्नों को हमसे साझा करें।

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