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जलियांवाला बाग नरसंहार के 102 साल

जलियांवाला बाग नरसंहार के 102 साल

प्रसंग

जलियांवाला बाग हत्याकांड, जिसे अमृतसर नरसंहार के रूप में भी जाना जाता है, 13 अप्रैल 1919 को हुआ था।

विवरण

कार्यवाहक ब्रिगेडियर-जनरल रेजिनाल्ड डायर (Reginald Dyer) ने ब्रिटिश भारतीय सेना की टुकड़ियों को पंजाब के अमृतसर में जलियांवाला बाग में निहत्थे भारतीय नागरिकों की भीड़ पर अपनी राइफलें दागने का आदेश दिया था।

इससे व्यापक रक्तपात हुआ और परिणामस्वरूप 379 निर्दोष भारतीय मारे गए और 1,000 से अधिक घायल हुए।

जलियाँवाला बाग से पहले की घटनाएँ:-

प्रथम विश्व युद्ध (1914-18) के दौरान भारत की ब्रिटिश सरकार ने दमनकारी आपातकालीन शक्तियों की एक श्रृंखला को लागू किया जिसका उद्देश्य विध्वंसक गतिविधियों का मुकाबला करना था।

युद्ध के अंत तक, भारतीय आबादी में उम्मीदें अधिक थीं कि उन उपायों को आसान बनाया जाएगा और भारत को अधिक राजनीतिक स्वायत्तता दी जाएगी।

1918 में ब्रिटिश संसद को प्रस्तुत मोंटेंग्यु-चेम्सफोर्ड रिपोर्ट ने वास्तव में सीमित स्थानीय स्वशासन की सिफारिश की थी।

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