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मॉर्निंग न्यूज़ डाइजेस्ट, 18 अगस्त 2017

सामरिक विनिवेश के लिए प्रक्रिया और तंत्र को मंजूरी प्राप्त हुयी:

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति (सीसीईए) ने निम्नलिखित के रणनीतिक विनिवेश के लिए निवेश विभाग और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन (डीआईपीएएम) के प्रस्ताव को मंजूरी दी:
  • एक्सप्रेस ऑफ़ इंट्रेस्ट्स (ईओआई) के लिए बुलाये जाने से लेकर वित्तीय बोली के लिए बुलाये जाने तक, बिक्री के नियमों और शर्तों से संबंधित मामलों पर निर्णय लेने के लिए एक वैकल्पिक तंत्र (एएम) की स्थापना की जाए, जिसमें वित्त मंत्री, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री और प्रशासनिक विभाग मंत्री शामिल होंगे।
  • प्रक्रिया समूहों के संबंध में नीतिगत फैसले लेने के लिए मुख्य सचिव (सीजीडी) को सशक्त बनाने के लिए और सीसीईए के निर्णय के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए समय-समय पर आवश्यक विचलन पर विचार करना।

स्रोत-पीआईबी

भारत ने ‘पारिस्थितिक तंत्र सेवा सुधार परियोजना’ के लिए विश्‍बैंक के साथ अनुदान समझौते पर हस्‍ताक्षर किये:

  • भारत ने ‘पारिस्थितिक तंत्र सेवा सुधार परियोजना’ के लिए विश्‍व बैंक के साथ 24.64 मिलियन अमेरिकी डालर का वैश्विक पर्यावरण सुगमता (जीईएफ) अनुदान समझौते किया है।
  • भारतीय वन अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (आईसीएफआरई) की ओर से अनुसंधान उप महानिदेशक डॉ. नीलू गेरा, मध्‍यप्रदेश सरकार की ओर से अपर प्रधान प्रमुख वन संरक्षक अमिताभ अग्निहोत्री, छत्‍तीसगढ़ सरकार की ओर से अपर प्रधान प्रमुख वन संरक्षक आर. बी. पी. सिन्‍हा ने विश्‍व बैंक के भारत में कार्यकारी कंट्री डायरेक्‍टर के साथ परियोजना समझौतों पर हस्‍ताक्षर किये।
  • परियोजना 24.64 मिलियन अमेरिकी की डालर है। इसका वहन पूर्ण रूप से विश्‍व बैंक का वैश्विक पर्यावरण सुगमता (जीईएफ) ट्रस्‍ट फंड करेगा। परियोजना की अवधि 5 वर्ष है।
  • पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारतीय वन अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (आईसीएफआरई) के माध्‍यम से हरित भारत के राष्‍ट्रीय मिशन के अंतर्गत मध्‍यप्रदेश और छत्‍तीसगढ़ में इस परियोजना का कार्यान्‍वयन करेगा।
  • इस परियोजना का लक्ष्‍य वन विभागों और सामुदायिक संगठनों की संस्‍थागत क्षमता में मजबूती लाना, वन पारिस्थितिक तंत्र सेवाओं को समृद्ध करना और मध्‍य भारत के उच्‍च क्षेत्रों में वनों पर निर्भर समुदायों की आजीविका में सुधार करना है।

स्रोत-पीआईबी

ममता सूरी ने भारतीय दिवाला और दिवालियापन बोर्ड (आईबीबीआई) की कार्यकारी निदेशक के रूप में कार्यभार ग्रहण किया:

  • ममता सूरी ने 16 अगस्त 2017 को नई दिल्ली में भारतीय दिवाला और दिवालियापन बोर्ड (आईबीबीआई) की कार्यकारी निदेशक के रूप में कार्यभार ग्रहण किया। आईबीबीआई में कार्यभार संभालने से पहले डॉ. सूरी भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण की मुख्य महाप्रबंधक थीं।       
  • डॉ सूरी ने दिल्ली विश्वविद्यालय से वित्त में पीएचडी और लंदन के सिटी यूनिवर्सिटी से बीमा जोखिम और प्रबंधन विषय में एमएससी की डिग्रियां प्राप्त की हैं।

स्रोत-पीआईबी

आईवी सुब्बाराव उप-राष्ट्रपति वेंकैया नायडू के सचिव नियुक्त:

  • सेवानिवृत आईएएस अधिकारी आईवी सुब्बाराव को उप-राष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू का सचिव नियुक्त किया गया है। प्रधानमंत्री कार्यायल ने उनकी नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। नायडू ने देश के 13वें उप-राष्ट्रपति का पदभार ग्रहण किया था।
  • आंध्रप्रदेश संवर्ग से 1979 बैच के आईएएस अधिकारी राव पिछले साल विशेष मुख्य सचिव के पद से सेवानिवृत हुए थे। वह आंध्रप्रदेश में कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे और बाद में उन्होंने यूनेस्को में भी अपनी सेवाएं दीं।

स्रोत-एनडीटीवी

कैबिनेट ने वन एवं बागान विकास निगम लिमिटेड (एएनआईएफपीडीसीएल) को बंद करने को स्‍वीकृति दी:

  • आर्थिक मामलों पर कैबिनेट समिति (सीसीईए) ने केंद्र सरकार के एक उपक्रम पोर्ट ब्‍लेयर स्थित अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह वन एवं बागान विकास निगम लिमिटेड (एएनआईएफपीडीसीएल) को बंद करने और समस्‍त कर्मचारियों की देनदारियों की अदायगी को मंजूरी दे दी है।
  • उपर्युक्‍त उपक्रम को बंद कर देने से भारत सरकार की ओर से एएनआईएफपीडीसीएल को मिलने वाले अनुत्‍पादक ऋणों को बंद करने में मदद मिलेगी तथा इससे परिसं‍पत्तियों का और ज्‍यादा उत्‍पादक इस्‍तेमाल करना संभव हो पाएगा।
  • इच्‍छुक कर्मचारियों को स्‍वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (वीआरएस)/स्‍वैच्छिक पृथक्करण योजना (वीएसएस) पैकेज की पेशकश करके और वीआरएस/वीएसएस को न अपनाने वाले कर्मचारियों की छंटनी औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के तहत करके इस उद्देश्‍य की पूर्ति की जाएगी, जिसमें अन्‍य देनदारियों, यदि कोई हो, का निपटान करना भी शामिल है। वर्तमान में इस निगम में 836 कर्मचारी कार्यरत हैं।

पृष्ठभूमिः

  • भारत सरकार के एक सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम एएनआईएफपीडीसीएल की स्थापना इस द्वीप समूह में वानिकी संबंधी बागानों के विकास एवं प्रबंधन के उद्देश्य के साथ वर्ष 1977 में हुई थी। एएनआईएफपीडीसीएल तीन मुख्य परियोजनाओं यथा वानिकी परियोजना, रेड ऑयल पाम (आरओपी) और कटछल रबर परियोजना (केआरपी) का संचालन करता रहा है।
  • वानिकी परिचालन इस निगम की मुख्य गतिविधियों में शामिल थे और इसने कुल राजस्व में लगभग 75 प्रतिशत का योगदान दिया। उच्चतम न्यायालय द्वारा 10 अक्टूबर, 2001 और 7 मई, 2002 को सुनाए गए फैसले के मद्देनजर वानिकी गतिविधियों पर रोक लगाए जाने के कारण एएनआईएफपीडीसीएल वर्ष 2001 से ही घाटे वाले उद्यम में तब्दील हो गया है।

स्रोत-पीआईबी

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