Bookmark Bookmark

पारे के बुरे प्रभाव से बचने के लिए मीनामता करार अस्तित्व में आया

पारे के बुरे प्रभाव से बचने के लिए मीनामता करार अस्तित्व में आया:

मीनामता करार, मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर पारे के प्रतिकूल प्रभाव से रक्षा के लिए एक वैश्विक संधि है जोकि 16 अगस्त 2017 को अस्तित्व में आ गयी है। यद्यपि भारत इस करार का हस्ताक्षरकर्ता है लेकिन अभी भी भारत ने इस करार की पुष्टि नहीं की है। इस कारण भारत को अब इस खतरे से निपटने के लिए मिलने वाले तकनीकी और वित्तीय सहायता के सभी दरवाजे अभी के लिए बंद हो गए हैं।

मीनामता करार के तहत कांफ्रेंस ऑफ़ पार्टीज (कोप) अगले महीने (24-29 सितंबर) में जिनेवा, स्विटजरलैंड में आयोजित होने वाली है। अक्टूबर 2013 में, कुमामोटो (जापान) में एक सम्मेलन में, इस करार को औपचारिक रूप से अपनाया गया था। यह एक वैश्विक, कानूनी तौर पर बाध्यकारी संधि थी।

विशेषज्ञों द्वारा पारे को सबसे जहरीली धातुओं में से एक माना गया है। एक बार पर्यावरण में पहुँचने के बाद, पारा खाद्य श्रृंखला में अपनी जगह बना लेता है, और आसानी से मानव शरीर में प्रवेश कर जाता है और इसके साथ यह तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है।

प्रमुख तथ्य:

इस संधि का उद्देश्य मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण को पारे के प्रतिकूल प्रभाव से बचाना है। इस कन्वेंशन का अन्य प्रमुख उद्देश्य पारे नई की खदानों पर रोक लगाना है। इसके साथ ही पहले से चालू खदानों को चरणबद्ध तरीके से बंद कराना है। विभिन्न पदार्थों और प्रक्रियाओं में पारे का इस्तेमाल बंद कराना है।

यह पारे के अंतरिम भंडारण पर भी ध्यान देता है और इसके खराब होने के बाद इसके निपटान के तरीकों पर भी गौर करता है।

अभी तक, इस सम्मेलन को 74 अनुसमर्थन प्राप्त हैं और इसके भारत सहित 128 हस्ताक्षरकर्ता हैं। भारत ने 30 सितंबर 2014 को इसे हस्ताक्षरित किया था। भारत ने बातचीत की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लिया, और संधि को अंतिम रूप देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

भारत के अधिकांश पड़ोसी- श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल और पाकिस्तान - भी कन्वेंशन के हस्ताक्षरकर्ता हैं। केवल श्रीलंका ने अभी तक इसकी पुष्टि की है। भारत का पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन (एमओईएफसीसी) मंत्रालय, इस सम्मेलन का नोडल विभाग है।

मीनामता कन्वेंशन ऑन मरकरी को यह नाम जापान के उस शहर से मिला है जहां दसियों हजार लोग इस जहरीली धातु की चपेट में आए। एक स्थानीय फैक्ट्री से निकलने वाले कचरे से प्रदूषित पानी की मछलियां और घोंघे खाने के कारण इनमें से अब तक 2000 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है।

मीनामता रोग:

मीनामता रोग पहली बार 1956 में जापान के कुमामोटो प्रान्त के मिनमाटा सिटी में खोजा गया था। यह चिसो कार्पोरेशन के रासायनिक कारखाने से औद्योगिक अपशिष्ट जल में मेथिलमर्करी के मिल जाने के कारण हुआ था। यह प्रक्रिया 1932 से 1968 तक जारी रही थी।

Take a quiz on what you read Start Now

You might be interested:

SSC CGL टियर 1 परीक्षा विश्लेषण 2017, संभावित कटऑफ़ : 17 अगस्त

SSC CGL टियर 1 परीक्षा विश्लेषण 2017, संभावित कटऑफ़: 17 अगस्त- कर्मचारी चयन आयोग ने SSC C ...

3 साल पहले

मॉर्निंग न्यूज़ डाइजेस्ट, 18 अगस्त 2017

सामरिक विनिवेश के लिए प्रक्रिया और तंत्र को मंजूरी प्राप्त हुयी: प्रधानमंत ...

3 साल पहले

माध्‍यमिक और उच्‍चतर शिक्षा कोष (मस्‍क) के लिए एकल गैर परिसमापनीय बनाने को केंद्र सरकार की मंजूरी

माध्‍यमिक और उच्‍चतर शिक्षा कोष (मस्‍क) के लिए एकल गैर परिसमापनीय बनाने को ...

3 साल पहले

IBPS PO गत वर्ष कटऑफ: प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा 2016 (विस्तृत परीक्षा विश्लेषण)

IBPS PO गत वर्ष कटऑफ: प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा 2016 (विस्तृत परीक्षा विश्लेषण)-बैं ...

3 साल पहले

इवनिंग न्यूज़ डाइजेस्ट: 17 अगस्त 2017

अमेरिका ने पाकिस्तान के आतंकी गुट हिज्बुल मुजाहिद्दीन को आतंकवादी संगठन घो ...

3 साल पहले

Vocab Express (शब्दावली एक्सप्रेस)- 272

Vocab Express (शब्दावली एक्सप्रेस)- 272 प्रिय उम्मीदवार, आपकी शब्दावली को बढ़ाने ...

3 साल पहले

Provide your feedback on this article: