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सिविल सेवा में लैटरल एंट्री

सिविल सेवा में लैटरल एंट्री:

केंद्र सरकार देश की सबसे प्रतिष्ठित मानी जाने वाली सिविल सेवाओं में सीधी भर्ती की जगह लैटरल एंट्री का भी प्रावधान करने जा रही है। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) को इसके लिए प्रस्ताव तैयार करने को कहा है।

सरकार की मंशा है कि निजी क्षेत्र के एक्जीक्यूटिव को विभिन्न विभागों में उप सचिव, निदेशक और संयुक्त सचिव रैंक के पदों पर नियुक्त किया जाए। यह प्रस्ताव केंद्र सरकार के स्टाफिंग नीति पत्र के जवाब में बनाया गया है जहां कार्मिक एव प्रशिक्षण विभाग (DOPT) ने मध्य प्रबंधन स्तर में अधिकारियों की भारी कमी का संकेत दिया था।

तकनीकी और शैक्षणिक मंत्रालयों, विशेष रूप से अर्थव्यवस्था और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में थिंक-टैंकों की आवश्यकता के प्रकाश में यह निर्देश दिया गया है। सचिवों की समिति ने अर्थव्यवस्था और वित्त जैसे मध्यम स्तर के मंत्रालयों में उपयोग किए जाने वाले विशेष और बौद्धिक वर्ग के पार्श्व प्रवेश का समर्थन किया है।

प्रमुख तथ्य:

इस निर्देश को भारत सरकार के एक बहुत प्रभाविक कदम के रूप में देखा जा रहा है क्योंकि सिविल सेवा परीक्षा देश की सबसे मुश्किल परीक्षा है और आईएएस परीक्षा के माध्यम से देश की कार्यप्रणाली में प्रवेश करने वाले सिविल सेवकों को देश के सबसे बुद्धिमान एवम प्रतिभाशाली लोगो के रूप में देखा जाता है।

भारत सरकार ने एक पायलट परियोजना के तहत ज्वाइंट सेक्रेटरी के दस पदों के लिए रिक्तियां निकाली हैं। ये भर्तियां तीन साल के कॉन्ट्रैक्ट पर होंगी, जिसे प्रदर्शन को देखते हुए बढ़ाकर 5 साल भी किया जा सकता है। इसके लिए उम्मीदवारों की उम्र 40 साल से ज्यादा होना चाहिए और उनके पास कम से कम पीएचडी की डिग्री होनी चाहिए। ये भर्तियां कैबिनेट सेक्रेटरी के नेतृत्व वाली एक कमेटी के द्वारा अगले दो महीनों में की जाएंगी।

लेटरल एंट्री का यह विचार नया नहीं है। इसकी सिफारिश द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग ने भी की थी। की गई थी। हालांकि, रिपोर्ट्स में कहा गया है कि कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली एक समिति चयन की प्रक्रिया को लागू कराने के लिए जिम्मेदार होगी।

बासवन समिति (2016) ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे बड़े राज्यों में 75 से अधिक आईएएस अधिकारियों की कमी है और राज्य प्रतिनियुक्ति के तौर पर अधिकारियों को केंद्र में भेजे जाने के इच्छुक नहीं हैं और ऐसे में लेटरल एंट्री पर गौर किए जाने की जरूरत है।

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