Bookmark Bookmark

स्तन कैंसर के इलाज के लिए नई कारगर दवा की खोज की गयी

स्तन कैंसर के इलाज के लिए नई कारगर दवा की खोज की गयी:

स्तन कैंसर विश्व भर में महिलाओं को होने वाले प्रमुख कैंसरों में से एक है और प्रति वर्ष स्तन कैंसर से बड़ी संख्या में महिलाओं की मौत हो जाती है लेकिन अब वैज्ञानिकों ने एक ऐसे अणु की खोज की है जो इसके इलाज में सहायक साबित हो सकता है। यह खोज उन मरीजों के लिए आशा की किरण है जो कि पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के लिए प्रतिरोधी हो चुके हैं। इन वैज्ञानिकों में भारतीय मूल के अमेरिकी शोधकर्ता भी शामिल हैं।

वैज्ञानिकों का कहना है कि ‘फर्स्ट इन क्लास’ अणु ओस्ट्रोजन संवेदनशील स्तन कैंसर को नए तरीके से समाप्त करता है। ‘फर्स्ट इन क्लास’ दवाएं वे होती हैं जो किअद्वितीय तंत्र पर काम करती हैं। इसमें एक अणु ओस्ट्रोजन संवेदी ट्यूमर सेल के प्रोटीन को निशाना बनाती है। यह नयी कारगर दवा उन मरीजों में उम्मीद जगाती है जिनके रोग पर पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों का असर होना बंद हो गया है।

शोध में शामिल यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास दक्षिण पश्चिम के प्रोफेसर गणेश राज ने कहा, ‘‘यह मूलरूप से भिन्न है। ओस्ट्रोजन रेसिप्टर स्तन कैंसर के लिए नया उपचार है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह अद्वितीय तंत्र वर्तमान चिकित्सा पद्धतियों की कमियों को दूर करता है।’’ शोधकर्ताओं का कहना है कि स्तन कैंसर के प्रत्येक मामले में परीक्षण कर यह पता लगाया जाता है कि क्या इसे और बढ़ने के लिए ओस्ट्रोजन की जरूरत है और इनमें से करीब 80 प्रतिशत मामले ओजेस्ट्रोन संवेदनशील पाए जाते हैं।

उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कैंसर का इलाज हार्मोन थेरेपी से प्रभावी तरीके से किया जा सकता है जैसे कि ‘टमोक्सीफिन’ लेकिन इनमें से एक तिहाई कैंसर बाद में प्रतिरोधी हो जाते हैं। राज ने कहा कि यह नया यौगिक बेहद प्रभावी और इस तरह के मरीजों के लिए अगले चरण का उपचार है। अभी तक इसका प्रयोग चूहों और मरीजों से हटाई गई कैंसर कोशिकाओं पर किया गया है और दोनों ही मामलों में इसे बेहद असरदार पाया गया है।

कितनी घातक है यह बीमारी?

महिलाओं में यह जानलेवा बीमारी तेजी से पैर पसार रही है। एक शोध की रिपोर्ट में आशंका व्यक्त की गई है कि 2020 तक हर साल करीब 76,000 भारतीय महिलाओं की मौत हो सकती है। शोध में कहा गया है कि यह भारत में आमतौर पर महिलाओं में होने वाले कैंसर में से एक है। स्तन कैंसर से 2012 में 70,218 जानें गईं। इस शोध का प्रकाशन जर्नल ऑफ बिजनेस रिसर्च में किया गया है।

इसमें यह भी कहा गया है कि बीमारी से मरने वालों की औसत आयु 50 साल से बदलकर 30 साल हो गई है। दुबई के वोलोगोंग विश्वविद्यालय के सहायक डीन (शोध) विजय पेरेरा ने कहा कि इस समस्या का परिमाण भयावह है और इसका भारत सरकार की नीति पर बड़ा प्रभाव पड़ा है।

पेरेरा ने कहा कि यह राष्ट्रीय, राज्य व सामुदायिक स्तर पर जटिल चुनौती है। इससे स्पष्ट है कि राज्य स्तर पर स्वास्थ्य देखरेख में गुणात्मक देखभाल व जागरूकता में बदलाव लाया जाना चाहिए।

Take a quiz on what you read Start Now

Attempt Mock Test

View all

मॉक टेस्ट प्रयास करें

Attempt Free Mock Tests

Daily articles on app in Hindi

Daily articles on app in Hindi

You might be interested:

इवनिंग न्यूज़ डाइजेस्ट: 21 अगस्त 2017

एशियाई त्रिपक्षीय राजमार्ग पर निर्माण कार्य जल्दी शुरू होगा: केन्द्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत ...

2 महीने पहले

IBPS RRB अधिकारी स्केल-1 परीक्षा 2017 : रीजनिंग की तैयारी कैसे करें !

IBPS RRB अधिकारी स्केल-1 परीक्षा 2017 : रीजनिंग की तैयारी कैसे करें- IBPS RRB अधिकारी स्केल- 1 परीक्षा IBPS के आध ...

2 महीने पहले

UIIC सहायक पद के लिए जॉब प्रोफाइल, वेतनमान और करियर संभावनाएं

UIIC सहायक पद के लिए जॉब प्रोफाइल, वेतनमान और करियर संभावनाएं : यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपन ...

2 महीने पहले

IAS मुख्य परीक्षा GS पेपर-1 के 10 महत्वपूर्ण टॉपिक्स | वनाग्नि एवं आर्थिक क्षति

IAS मुख्य परीक्षा GS पेपर-1 के 10 महत्वपूर्ण टॉपिक्स | वनाग्नि एवं आर्थिक क्षति - IAS मुख्य परीक्षा 2017 ...

2 महीने पहले

Vocab Express (शब्दावली एक्सप्रेस)- 274

Vocab Express (शब्दावली एक्सप्रेस)- 274 प्रिय उम्मीदवार, आपकी शब्दावली को बढ़ाने के लिए यहां 5 नए शब्द ...

2 महीने पहले

आईआईएससी शोधकर्ताओं ने पीने के पानी को सुरक्षित बनाने के लिए कॉपर-लेपित झिल्ली का विकास किया

आईआईएससी शोधकर्ताओं ने पीने के पानी को सुरक्षित बनाने के लिए कॉपर-लेपित झिल्ली का विकास किया: ब ...

2 महीने पहले

Provide your feedback on this article: