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स्वदेश निर्मित पनडुब्बी रोधी प्रणाली (एएसडब्ल्यू) से लैस “आईएनएस कवरत्ती” को भारतीय नौसेना को सौंपा गया

स्वदेश निर्मित पनडुब्बी रोधी प्रणाली (एएसडब्ल्यूसे लैस “आईएनएस कवरत्ती” को भारतीय नौसेना को सौंपा गया

प्रसंग

पनडुब्बी रोधी प्रणाली कार्वेट “आईएनएस कवरत्ती” को भारतीय सेना द्वारा भारतीय नौसेना में कमीशन किया गया।

विवरण

  • आईएनएस कवरत्ती में अत्याधुनिक हथियार प्रणाली है और इसमें ऐसे सेंसर लगे हैं जो पनडुब्बियों का पता लगाने और उनका पीछा करने में सक्षम है।
  • इसके अलावा, पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता के साथ ही पोत विश्वसनीय आत्मरक्षा क्षमता और लंबी दूरी के संचालन में सक्षम है।
  • इस पोत के निर्माण में 90 फीसदी देसी उपकरण लगे हैं और इसके सुपरस्ट्रक्चर के लिए कार्बन कंपोजिट का उपयोग किया गया है। भारतीय जहाज निर्माण में यह सराहनीय उपलब्धि है।
  • पोत के हथियार और सेंसर अनुकूल मुख्य रूप से स्वदेशी है और इस आला क्षेत्र में देश की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है।
  • कवरत्ती का नाम पूर्व की आईएनएस कवरात्ती से मिला है जो अर्नला श्रेणी की मिसाइल कार्वेट थी।
  • पुरानी कवरत्ती का 1971 में बांग्लादेश मुक्ति में शामिल हुई थी।
  • आईएनएस कवरत्ती प्रोजेक्ट 28 के तहत निर्मित भारतीय नौसेना का एक पनडुब्बी रोधी युद्धपोत है।
  • यह भारतीय नौसेना के लिए निर्मित चार स्वदेशी युद्धपोत में से यह अंतिम है, इससे पहले नौसेना को ऐसे ही तीन युद्धपोत आईएनएस कमोर्ता, आईएनएस कदमत और आईएनएस किलतान सौंपे जा चुके हैं।
  • यह जहाज गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स, कोलकाता द्वारा बनाया गया था और 19 मई 2015 को लॉन्च किया गया था।
  • कवरत्ती स्वदेशीकरण में नौसेना के प्रयासों में एक छलांग का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें 90% सामग्री भारत से ही प्राप्त होती है।

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