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टीकाकरण से अब अधिक बच्चों की रक्षा की जा रही है, लेकिन लाखों अब भी इससे दूर: यूएन

टीकाकरण से अब अधिक बच्चों की रक्षा की जा रही है, लेकिन लाखों अब भी इससे दूर: यूएन

यूनिसेफ के अनुसार, टीकाकरण की मदद से अब पहले की तुलना में अधिक बच्चों की रक्षा की जा रही है लेकिन अभी इस दिशा में अत्यधिक कार्य किया जाना बाकी है। समय की मांग के अनुसार, देशों को सक्रिय हो जाना चाहिए क्यूंकि हर साल टीकाकरण से रोकथाम योग्य बीमारी से 1 मिलियन से भी ज्यादा लोग मर जाते हैं।

विशेषताएँ:

  • वर्ष 2016 में, पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में से लगभग एक-चौथाई की मौत निमोनिया, दस्त और खसरा से हो गयी, जबकि इनमें से ज्यादातर को टीकों के माध्यम से रोका जा सकता था।
  • यहाँ यह तथ्य भी दुर्भाग्यपूर्ण है कि दुनिया भर में 19 मिलियन से अधिक बच्चे नियमित टीकाकरण को बीच में छोड़ देते हैं।
  • दो-तिहाई बिना टीकाकृत बच्चे नाजुक या संघर्ष-प्रभावित देशों में रहते हैं।
  • शीर्ष 10 देश जहां टीकाकरण कवरेज 2010 और 2016 के बीच बढ़ गया है पलाऊ, माल्टा, डीआरसी, कोमोरोस, अज़रबैजान, इथोपिया, तिमोर-लेस्ते, बारबाडोस, कोस्टा रिका और भारत हैं।
  • सूडान, फिलीपींस, मेक्सिको और वियतनाम इस दशक में अबसे अधिक टीकाकरण कवरेज लाभों को प्राप्त करने वाले देशों में से थे।
  • इसके अलावा, भारत में बिना टीकाकृत बच्चों की संख्या 2010 में 5.3 मिलियन से घटकर 2016 में 2.9 मिलियन हो गई।

विश्व टीकाकरण सप्ताह (24-30 अप्रैल 2018):

विश्व टीकाकरण सप्ताह अप्रैल माह के आखिरी सप्ताह में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य सामूहिक कार्रवाई की आवश्यकता को उजागर करना है ताकि हर व्यक्ति को टीका-निवारणीय रोगों से बचाया जाना सुनिश्चित किया जा सकें।

टीकाकरण लाखों लोगों के जीवन को सुरक्षित करता है तथा बड़े पैमाने पर विश्व के सबसे सफल और कम लागत वाले प्रभावी स्वास्थ्य हस्तक्षेपों में से एक के रूप जाना जाता है। सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए टीकाकरण तक पहुंच का विस्तार करना महत्वपूर्ण है।

वर्ष 2018 के लिए टीकाकरण सप्ताह की थीम "प्रोटेक्टेड टुगेदर, वैक्सीन्स वर्क" है।

मुख्य तथ्य:

टीकाकरण रोग, विकलांगता और टीका-निवारणीय रोगों जैसे कि ग्रीवा संबंधी कैंसर, डिप्थीरिया, हेपेटाइटिस बी, खसरा, मम्प्स, पर्टुसिस (खांसी खांसी), निमोनिया, पोलियो, रोटावायरस अतिसार (डायरिया), रूबेला और टेटनस इत्यादि से होने वाली मृत्यु से सुरक्षित करता है।

विश्व में 19 मिलियन से ज़्यादा बच्चे टीकाकरण के बिना या टीकाकरण के मध्य हैं, जो कि उन्हें संभावित घातक रोगों के गंभीर ज़ोखिम में डालता हैं।

ख़सरे के टीकाकरण के कारण विश्वभर में वर्ष 2000 से वर्ष 2016 के बीच खसरे से होने वाले मृत्यु में 84% की कमी आयी है। वर्ष 1988 से पोलियो मामलों में 99% से ज्यादा की कमी आयी है। वर्तमान में तीन देशों (अफगानिस्तान, नाइजीरिया और पाकिस्तान) में पोलियो-स्थानिक हैं। पोलियो वर्ष 1988 में 125 देशों में था।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वर्ष 2014 में भारत को पोलियो मुक्त घोषित किया था। भारत में 12-23 महीने की आयु वर्ग के 62% बच्चों में पूरी तरह से टीकाकरण ((एनएफएचएस-4 (राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2015-2016) के दौरान ((बीसीजी, ख़सरा, एवं पोलियो और डीपीटी की तीन खुराकें)) पाया गया था।

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