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उपराष्ट्रपति ने कृषि को व्यावहारिक और लाभकारी बनाने के लिए 12 पहलों को रेखांकित किया

उपराष्ट्रपति ने कृषि को व्यावहारिक और लाभकारी बनाने के लिए 12 पहलों को रेखांकित किया:

उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने कहा है कि यद्यपि कृषि अधिकतर भारतीयों की मुख्य आजीविका है, परंतु किसानों को यह व्यवसाय आकर्षक नहीं लगता क्योंकि इसमें आय तथा उत्पादकता कम है। उन्होंने आज बेंग्लुरु में सामाजिक एवं आर्थिक परिवर्तन संस्थान में 14वां डॉ. वी. के. आर. वी. स्मृति व्याख्यान देते हुए यह कहा।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि तीव्र, समावेशी और सतत विकास की रणनीतियों को किसानों की समस्याओं को हल करना होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, ई-नाम और मृदा स्वास्थ्य कार्ड जैसी सरकारी पहलों से किसानों को उत्पादकता में सुधार करने और बेहतर लाभ प्राप्त करने की दिशा में मदद मिल रही हैं।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि सार्वजनिक और निजी दोनों तरह के निवेशों में बढ़ोतरी की आवश्यकता है। हमें इस बात की जरूरत है कि दीर्घकालीन और मध्यकालीन कार्य योजना बनाएं, जिनके तहत निजी और सार्वजनिक निवेशों को लामबंद किया जा सके। हमें रणनीतिक दिशाएं भी तय करनी होंगी, ताकि इस क्षेत्र को दोबारा ऊर्जावान बनाया जा सके।

किसानों की उत्पादकता और उनके लाभार्जन के लिए उपराष्ट्रपति ने 12 पहलों को रेखांकित किया है:

  • पहली, बेहतर बीजों का इस्तेमाल ताकि उत्पादकता में 15 से 20 प्रतिशत की वृद्धि हो।
  • दूसरी, कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए उर्वरकों का संतुलित इस्तेमाल जरूरी।
  • तीसरी, सीमान्त और छोटे किसानों द्वारा नवाचार अपनाने की दिशा में सामयिक संस्थागत ऋण मुख्य भूमिका निभाता है।
  • चौथी, दुग्ध पालन, मछली पालन और मुर्गी पालन जैसी संबंधित गतिविधियों के साथ खेती को जोड़ना और विस्तार करना। इस कदम से किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान होता है।
  • पांचवी, भारत में खेती के यंत्रीकरण को बढ़ाना होगा।
  • छठवीं, कृषि गतिविधियों को तेज करने और कृषि को बागवानी से जोड़ने तथा पहाड़ में कृषि के यंत्रीकरण से किसानों की आय बढ़ सकती है।
  • सातवीं, कृषि आधारित उद्योगों के प्रोत्साहन के मद्देनजर ईको-प्रणाली को मजबूत करना होगा।
  • आठवीं, पानी के इस्तेमाल के प्रति बेहतर समझ बनानी होगी।
  • नौवीं, किसानों को उपभोक्ता मूल्य के बड़े हिस्से को समझना होगा।
  • दसवीं, हमें भू-नीति में मूलभूत सुधारों पर गौर करना होगा।
  • ग्यारहवीं, हमें जलवायु परिवर्तन के मद्देनजर कृषि गतिविधियों को विकसित करने की जरूरत है।
  • बारहवीं, ज्ञान को साझा करने की प्रक्रियाओं को दुरुस्त करना होगा।
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