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वैज्ञानिकों ने इमारतों की मरम्मत के लिए सेल्फ-हीलिंग कंक्रीट का निर्माण करने के लिए कवक का इस्तेमाल किया

वैज्ञानिकों ने इमारतों की मरम्मत के लिए सेल्फ-हीलिंग कंक्रीट का निर्माण करने के लिए कवक का इस्तेमाल किया:

वैज्ञानिकों ने स्वयं ठीक होने वाले (सेल्फ-हीलिंग) कंक्रीट को विकसित करने के लिए कवक का उपयोग किया है जोकि पुरानी इमारतों में दरारों की मरम्मत कर सकता है और साथ ही बुनियादी ढांचे को ढहने से बचा सकता है।

दरारों को यदि समय पर ठीक न किया जाए तो ये लगातार बढ़ती जाती हैं और फिर इनकी मरम्मत में अत्यधिक खर्च की आवश्यकता होती है। यदि सूक्ष्म-दरारें विस्तारित होती हैं और इस्पात सुदृढीकरण (reinforcement) तक पहुंच जाती हैं, तो ये न केवल कंक्रीट को ख़राब करेंगी अपितु इस्पात सुदृढीकरण को भी खत्म कर देंगीं, क्योंकि ये पानी, ऑक्सीजन, संभवत: CO2 और क्लोराइड से क्रिया करने के लिए उजागर हो जाती हैं, जिससे संरचनात्मक विफलता हो सकती है।

ये दरारें बुनियादी ढांचे (ईमारत) के लिए बड़ी और कभी-कभी अनदेखी समस्याएं पैदा कर सकती हैं। पुनर्रचना के दौरान, पुरानी होती कंक्रीट को बदला जाएगा लेकिन यह केवल एक अल्पकालिक इलाज होगा।

ट्रायकोडर्मा रीसी नामक एक कवक जोकि कंक्रीट के साथ मिलाये जाने के समय तब तक निष्क्रिय रहता है जब तक कि पहली दरार दिखाई नहीं पड़ जाती है। फंगल स्पोर्स (कवक बीजाणु) को, पोषक तत्वों के साथ, मिश्रण प्रक्रिया के दौरान कंक्रीट मैट्रिक्स में रखा जाएगा। इसके बाद यदि दरारें पड़ती हैं तो पानी और ऑक्सीजन को अपना रास्ता मिल जाएगा।

पर्याप्त पानी और ऑक्सीजन के साथ, दरारों को भरने के लिए निष्क्रिय फंगल स्पोर्स तेजी से उंगेंगे, बढ़ेंगे और कैल्शियम कार्बोनेट को प्रेसिपिटेट करेंगे। जब दरारें पूरी तरह से भर जाती हैं और अंत में पानी या ऑक्सीजन अंदर प्रवेश नहीं कर पाटा है, तो फंगस फिर से स्पोर्स बना देगा। चूंकि पर्यावरण की स्थिति बाद के चरणों में अनुकूल हो जाती है, तो स्पोर्स को फिर से प्रयोग में लाया जा सकता है।

यह अध्ययन हाल ही में जर्नल कंस्ट्रक्शन एंड बिल्डिंग मैटेरियल्स में प्रकाशित हुआ था।

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